Satyam Shivam Sundaram : Mahashivratri :

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Satyam Shivam Sundaram :
Mahashivratri.Teej.
Lok Parv.   
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A Live / Archive  Blog Magazine Page.
लोक पर्व.   
Volume 1.Series 1.
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संस्कृति सभ्यता विशेषांक.३. 
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.आवरण पृष्ठ :०.

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ॐ नमो शिवाय : शक्ति प्रिया डॉ. सुनीता मधुप 
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.आवरण पृष्ठ :०.
शक्ति जो शिव है 
महाशक्ति मीडिया
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 शक्ति प्रिया डॉ.सुनीता मधुप  

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त्रि शक्ति प्रस्तुति.
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 लेखकीय त्रिशक्ति  : पृष्ठ : ०. 
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शक्ति.शालिनी मधुप रेनू. 
नैना देवी डेस्क नैनीताल 

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संशोधक त्रिशक्ति  : पृष्ठ : ०. 
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शक्ति.नीलम.डॉ.राजेंद्र.रीता. 
   वाराणसी डेस्क.
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प्रधान त्रिशक्ति सम्पादिका
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शक्ति.डॉ.रजनी तनु अनुपमा
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फोर स्क्वायर होटल : रांची : समर्थित : आवरण पृष्ठ : विषय सूची : मार्स मिडिया ऐड : नई दिल्ली.



पत्रिका / अनुभाग..
ब्लॉग मैगज़ीन पेज.
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विषय सूची : पृष्ठ :०.
शक्ति शिव
महाशिवरात्रि : तीज : विशेष

.आवरण पृष्ठ :०.
त्रि शक्ति : पृष्ठ :०.
शक्ति विचार धारा : पृष्ठ : १ 
सम्पादकीय : पृष्ठ : २.
आकाश दीप सम्पादकीय शक्ति आलेख पद्य संग्रह : पृष्ठ : २ /१
तारे जमीन पर : गद्य संग्रह : शक्ति : सम्पादकीय : प्रस्तुति. पृष्ठ : २ /२ .
 विशेषांक : आलेख : धारावाहिक आलेख : पृष्ठ : २ /३ 
सत्य ही शिव है शिव ही सुन्दर है : शक्ति : गाने : पृष्ठ : ३  
शिव : शक्ति : कोलाज दीर्घा : पृष्ठ : ४.
 शक्ति शिव : कला  दीर्घा : पृष्ठ : ५.    
दिन विशेष : आज का पंचांग : आभार  : पृष्ठ : ६.
शक्ति शिव : फोटो दीर्घा : पृष्ठ : ७. 
  शक्ति शिव : समाचार  शक्ति शिव : दृश्यम :  पृष्ठ 
मुझे भी कुछ कहना है : शुभ कामनाएं : दृश्यम : पृष्ठ :९.
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सज्जा : संपादन. 
शक्ति* प्रिया.डॉ.सुनीता मधुप.   
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महाशक्ति मीडिया. शक्ति.प्रस्तुति.

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शक्ति ज्योति आर्य नरेंद्र  वायर एक्सिस प्राइवेट लिमिटेड मुंबई समर्थित 
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आवरण पृष्ठ : दैनिक / पत्रिका अनुभाग : लिंक : विषय सूची : त्रिशक्ति  
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 शक्ति  शिव अनंत : विचार धारा : पृष्ठ : १ 
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नैना देवी डेस्क नैनीताल 
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संपादन
  शक्ति नैना प्रिया डॉ.सुनीता    
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शक्ति संरक्षण : दृश्यम : दर्शन पृष्ठ : १ 
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शक्ति रूपेण 'संस्थिता'
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या देवी सर्वभूतेषु शक्ति-रूपेण संस्थिता। 
नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नमः॥
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 त्रि शक्ति  शिव अनंत : विचार धारा : पृष्ठ : १ 
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नैना देवी डेस्क नैनीताल 
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संपादन
  शक्ति नैना प्रिया बीना जोशी   
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शक्ति जो शिव है 
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जब आपके साथ आपकी समर्थित 
संरक्षित  त्रि शक्तियां हैं तो आपके जीवन में 
सब कुछ संभव अनंत शिव होना सुनिश्चित है 
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क्रोध : पछतावा : संयम 
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क्रोध सदैव मूर्खता से शुरू होता है 
और पछतावे पर ख़त्म होता है 
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समय , साथ और शिव शक्ति 
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सब छुट जाए लेकिन 
समय के साथ ' संयम ' , ' साहस ' , ' संकल्प ' और समयक वाणी कभी न छुटने पाए  शक्ति !
देख लेना..... इस अनंत ' शक्ति ' के जीवन में ' शिव ' ही शिव होंगे 
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सम्पादकीय : शक्ति पृष्ठ : २.
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संपादकीय शक्ति समूह.
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 शक्ति.डॉ.ममता.आर्य. डॉ.सुनील कुमार :
ममता हॉस्पिटल बिहार शरीफ: समर्थित
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सम्पादकीय शक्ति पृष्ठ : २.
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शक्ति संरक्षण
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शक्ति. साक्षी. भा.पु.से.  
आर्य. चिरंजीव नाथ सिन्हा.भा. पु. से.  
शक्ति. रश्मि श्रीवास्तवा.भा.पु.से.  
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कार्यकारी त्रिशक्ति सम्पादिका
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शक्ति. डॉ. सुनीता शक्ति*प्रिया 

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त्रिशक्ति छाया :
लघु फ़िल्म सम्पादिका
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शक्ति. रितु दिप्ती स्वाति.
नैनीताल डेस्क.
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कला सम्पादिका
शक्ति शिवानी मंजिता अनुभूति
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महाशिव रात्रि : तीज का श्रृंगार
मुन्ना लाल महेश लाल आर्य एंड संस ज्वेलर्स समर्थित
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आकाश दीप : सम्पादकीय शक्ति आलेख : पद्य : पृष्ठ : २ / १ .
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संपादन शक्ति
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शक्ति : डॉ. रजनी रेनू प्रीति 
जयपुर डेस्क 
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महाशक्ति मीडिया प्रस्तुति
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शून्य से जो प्रकट हुआ, वो सार है शिव,

शून्य से जो प्रकट हुआ, वो सार है शिव.


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हर हर महादेव : गिफ़
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​शून्य से जो प्रकट हुआ, वो सार है शिव,
विष को जो कंठ में धरे, वो प्यार है शिव..!
न आदि है, न अंत है, न रूप है उसका,
अघोरियों के मौन की, पुकार है शिव..!
​जटा से बहती सुरसरी, माथे पे चंद्र साजे,
डमरू की उस थाप पर, ब्रह्मांड सारा नाचे..!
श्मशान की उस राख में, जो खोजता है जीवन,
विनाश में भी सृजन का, आधार है शिव..!
​तन पे लिपटे नाग हैं, मन में अचल शांति,
भक्तों के दुखों की जो, हर ले सारी भ्रांति..!
कहीं वो नीलकंठ है, कहीं वो महाकाल है,
मिटा दे जो अहंकार, वो प्रहार है शिव..!

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संपादन :डॉ.अनु  मधुप राखी
सज्जा : शक्ति.मंजिता शिवानी अनुभूति 
शिमला डेस्क 


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शक्ति.डॉ. ममता आर्य : डॉ.सुनील कुमार : ममता हॉस्पिटल : बिहार शरीफ : समर्थित 
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तारे जमीन पर : गद्य संग्रह : शक्ति : सम्पादकीय : प्रस्तुति. पृष्ठ : २ / २ .
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वाराणसी डेस्क.
संपादन
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शक्ति डॉ.अनु शालिनी नीलम .

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शक्ति आलेख : २ /२ /१
शक्ति नीलम
सह : शक्ति प्रिया डॉ. सुनीता सीमा
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सत्यम शिवम् सुंदरम
शिव ही सत्य है शिव ही सुन्दर है
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दृश्यम : समाचार : अनादि : योगी शिव : कोयंबटूर

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शक्ति. सीमा मधुप सुनीता ज्योति

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शिव का सही अर्थ जाने : अनादि है भोले : भोले , महादेव या शिव के मुख्य पहलू यदि हम जाने अर्थतः शिव का अर्थ है ' वह जो कल्याणकारी है ' या ' जो नहीं है ' ( शून्यता / आदियोगी )। उनके प्रमुख नाम : महाकाल, भोलेनाथ, नीलकंठ, विश्वनाथ, शंभू आदि हैं जिस नाम से उन्हें हम जानते हैं।
भोले के परिवार में शिव की पत्नी देवी पार्वती शक्ति और पुत्र गणेश व कार्तिकेय हैं। उनका स्वरूप स्वतः हमें स्मृत है वे गले में वासुकी सर्प, सिर पर गंगा, भस्म ( विभूति ) और त्रिशूल धारण करते हैं।
प्रतीकात्मक उनकी पूजा आमतौर पर शिवलिंग के निराकार रूप में की जाती है।
महत्व : शिवलिंग के रूप में वे ज्ञान और चेतना का प्रतीक हैं। शिवरात्रि उनका सबसे प्रमुख त्यौहार है, जो अंधकार और अज्ञानता को दूर करने का प्रतीक है। वे आदियोगी हैं, जिन्होंने योग के माध्यम से स्वयं को सृष्टि के साथ एक कर लिया। महामृत्युंजय मंत्र : वास्तविक अर्थ ॐ त्र्यम्‍बकं यजामहे सुगन्धिं पुष्टिवर्धनम् उर्वारुकमिव बन्‍धनान् मृत्‍योर्मुक्षीय मामृतात्।
महामृत्युंजय मंत्र का हिंदी में अर्थ : ॐ त्र्यम्‍बकं यजामहे: हम तीन नेत्रों वाले भगवान शिव की पूजा करते हैं।सुगन्धिं पुष्टिवर्धनम् : जो सुगंधित हैं और संसार का पोषण करने वाले हैं। उर्वारुकमिव बन्‍धनान्: जिस प्रकार ककड़ी (खरबूजा) अपनी लता के बंधन से पकने पर मुक्त हो जाती है। मृत्‍योर्मुक्षीय मामृतात्: उसी तरह, हम भी मृत्यु ( नश्वरता ) से मुक्त हो जाएं, ताकि मैं अमरता ( मोक्ष ) को प्राप्त कर सकूं।
प्रमुख ज्योतिर्लिंग : शिवजी के १२ प्रमुख ज्योतिर्लिंग हैं यथा सोमनाथ, मल्लिकार्जुन, महाकालेश्वर, ओम्कारेश्वर, वैद्यनाथ, भीमाशंकर, रामेश्वर, नागेश्वर, विश्वनाथ, त्र्यंबकेश्वर, केदारनाथ, और घृष्णेश्वर।
शिव का वैदिक अर्थ है - ' कल्याणकारी '। ईश्वर के अतिरिक्त संसार का कल्याण, रक्षा एवं पालन-पोषण करने वाला अन्य कोई नहीं हो सकता। इसलिए यजुर्वेद १६ / ४१ में कहा–" नमः शम्भवाय च शङ्कराय च" शांति उत्पन्न करने वाले परमेश्वर को नमन करते हैं। 'च' और 'नमः शिवाय' मंगलकारी 'च' और 'शिवतराय नमः'अत्यंत मंगल स्वरूप परमेश्वर को नमन करते हैं और कल्याण को प्राप्त करते हैं। ईश्वर से उत्पन्न अनादि एवं अविनाशी वैदिक संस्कृति के अनुसार इस संपूर्ण ब्रह्मांड में जो एक पूजनीय देव है- वह निराकार, सृष्टि रचयिता, सर्वव्यापक एवं सर्वशक्तिमान परमेश्वर ही है। इसके समान अन्य कोई देवता नहीं है। इस विषय में अनेक वैदिक एवं शास्त्रीय प्रमाण हैं जैसे कि ऋग्वेद मंत्र १ /८१ /५ में कहा- इंद्र कश्चन त्वावान् न जातः न जनिष्यते : अर्थात हे ईश्वर ! तेरे समान न कोई हुआ और न कोई होगा। मंत्र में आगे उपदेश है कि जिसने आकाश, सूर्य आदि सब जगत को रच के रक्षित किया है, जो कण-कण में व्यापक है और जो जन्म तथा मृत्यु से परे है, उस एक परमेश्वर से अधिक कोई अन्य या कुछ और कैसे हो सकता है। अतः इस परमेश्वर की उपासना को छोड़कर अन्य किसी की उपासना ग्रहण मत करो। हिरण्यगर्भः योगस्य वक्ता : अर्थात ज्योतिस्वरूप परमेश्वर ही योग विद्या का उपदेशक है, अन्य कोई नहीं। ऋषियों, मुनियों ने तो वेदों से ही इस विद्या को सीखकर किया आगे अपने शिष्यों को उपदेश किया, जो आज तक चला आ रहा है।
दुख की बात है कि आजकल के तथाकथित योग गुरु आदि इस वैदिक कटु सत्य का प्रचार नहीं करते और स्वयं को योग का गुरु घोषित कर देते हैं। उक्त मंत्र में और पतंजलि ऋषि कृत योग शास्त्र सूत्र २ /२९ में योग विद्या के इन आठ अंगों का उपदेश है- यम, नियम, आसन, प्राणायाम, प्रत्याहार, धारणा, ध्यान, समाधि। महाभारत काल तक तो सब कुछ ठीक था और प्रत्येक ऋषि- मुनि, योगी इस ईश्वर से उत्पन्न योग विद्या का परंपरागत अभ्यास करके ईश्वर की उपासना करते हुए शब्द ब्रह्म ( वेद ) और परब्रह्म ( ईश्वर ) को प्राप्त करते रहे, परंतु किसी कारणवश महाभारत युद्ध के पश्चात वेद विद्या का सूर्य अस्त हो गया और मनुष्यों ने वेद विरुद्ध अपनी सुविधानुसार पूजा पाठ के स्वयं अनेक-अनेक रास्ते बना लिए।

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स्तंभ संपादन : शक्ति. डॉ.अनु रीता क्षमा
सज्जा : शक्ति. शिवानी सीमा अनुभूति

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शक्ति आलेख : २ / २ / २.

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शक्ति नीलम
सह : शक्ति प्रिया डॉ.सुनीता सीमा
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सत्यम शिवम् सुंदरम
शिव ही सत्य है शिव ही सुन्दर है
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महाशिवरात्रि का महत्व.


शक्ति  पार्वती शिव विवाह : फोटो साभार 

महाशिवरात्रि शक्ति शिव के विवाह के उत्सव :
महाशिवरात्रि आध्यात्मिक पथ पर चलने वाले साधकों के लिए बहुत महत्व रखती है। यह उनके लिए भी बहुत महत्वपूर्ण है जो पारिवारिक परिस्थितियों में हैं और संसार की महत्वाकांक्षाओं में मग्न हैं। पारिवारिक परिस्थितियों में मग्न लोग महाशिवरात्रि को शिव के विवाह के उत्सव की तरह मनाते हैं। सांसारिक महत्वाकांक्षाओं में मग्न लोग महाशिवरात्रि को, शिव के द्वारा अपने शत्रुओं पर विजय पाने के दिवस के रूप में मनाते हैं। परंतु, साधकों के लिए, यह वह दिन है, जिस दिन वे कैलाश पर्वत के साथ एकात्म हो गए थे। वे एक पर्वत की भाँति स्थिर व निश्चल हो गए थे। यौगिक परंपरा में, शिव को किसी देवता की तरह नहीं पूजा जाता। उन्हें आदि गुरु माना जाता है, पहले गुरु, जिनसे ज्ञान उपजा। ध्यान की अनेक सहस्राब्दियों के पश्चात्, एक दिन वे पूर्ण रूप से स्थिर हो गए। वही दिन महाशिवरात्रि का था। उनके भीतर की सारी गतिविधियाँ शांत हुईं और वे पूरी तरह से स्थिर हुए, इसलिए साधक महाशिवरात्रि को स्थिरता की रात्रि के रूप में मनाते हैं। शून्यता के ही प्रतीक शक्ति के महादेव : अनादि : आधुनिक विज्ञान ने भी साबित कर दिया है कि सब कुछ शून्य से ही उपजा है और शून्य में ही विलीन हो जाता है। इसी संदर्भ में शिव यानी विशाल रिक्तता या शून्यता को ही महादेव के रूप में जाना जाता है। इस ग्रह के प्रत्येक धर्म व संस्कृति में, सदा दिव्यता की सर्वव्यापी प्रकृति की बात की जाती रही है। यदि हम इसे देखें, तो ऐसी एकमात्र चीज़ जो सही मायनों में सर्वव्यापी हो सकती है, ऐसी वस्तु जो हर स्थान पर उपस्थित हो सकती है, वह केवल अंधकार, शून्यता या रिक्तता ही है। प्रकाश आपके मन की एक छोटी सी घटना है। प्रकाश शाश्वत नहीं है, यह सदा से एक सीमित संभावना है क्योंकि यह घट कर समाप्त हो जाती है। हम जानते हैं कि इस ग्रह पर सूर्य प्रकाश का सबसे बड़ा स्त्रोत है। तमसो मा ज्योतिर्गमय : शक्ति : शिव
परंतु अंधकार सर्वव्यापी है, यह हर जगह उपस्थित है। संसार के अपरिपक्व मस्तिष्कों ने सदा अंधकार को एक शैतान के रूप में चित्रित किया है। पर जब आप दिव्य शक्ति को सर्वव्यापी कहते हैं, तो आप स्पष्ट रूप से इसे अंधकार कह रहे होते हैं, क्योंकि सिर्फ अंधकार सर्वव्यापी है। यह हर ओर है। इसे किसी के भी सहारे की आवश्यकता नहीं है। प्रकाश सदा किसी ऐसे स्त्रोत से आता है, जो स्वयं को जला रहा हो। इसका एक आरंभ व अंत होता है। यह सदा सीमित स्त्रोत से आता है। अंधकार का कोई स्त्रोत नहीं है। यह अपने-आप में एक स्त्रोत है। यह सर्वत्र उपस्थित है। तो जब हम शिव कहते हैं, तब हमारा संकेत अस्तित्व की उस असीम रिक्तता की ओर होता है। इसी रिक्तता की गोद में सारा सृजन घटता है। रिक्तता की इसी गोद को हम शिव कहते हैं। भारतीय संस्कृति में, सारी प्राचीन प्रार्थनाएँ केवल आपको बचाने या आपकी बेहतरी के संदर्भ में नहीं थीं। सारी प्राचीन प्रार्थनाएँ कहती हैं, “हे ईश्वर, मुझे नष्ट कर दो ताकि मैं आपके समान हो जाऊँ।“ तो जब हम शिवरात्रि कहते हैं जो कि माह का सबसे अंधकारपूर्ण दिन है, तो यह एक ऐसा अवसर होता है कि व्यक्ति अपनी सीमितता को विसर्जित कर के, सृजन के उस असीम स्त्रोत का अनुभव करे, जो प्रत्येक मनुष्य में बीज रूप में उपस्थित है। यह महा शिवरात्रि हमें मोह और अज्ञान की महारात्रि से दिव्य ज्ञानज्योति की ओर अग्रसर करने वाली हो तमसो मा ज्योतिर्गमय

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स्तंभ संपादन : शक्ति.रितु प्रीति क्षमा
सज्जा : शक्ति. शिवानी सीमा अनुभूति




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शक्ति आलेख : २ / २ / ३ .
शक्ति.आरती अरुण भारती.
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पंचभूत्वा शिव की अवधारणा और दक्षिण भारत
शिव का नटराज स्वरूप महज नृत्य नहीं बल्कि सृष्टि सृजन का सिद्धान्त : हिन्दू जीवन‌ दर्शन, चिन्तन, कर्मकाण्ड और आध्यात्मिक दर्शन में समस्त दैवीय सत्ता के मध्य शिव की सत्ता अद्भुत है,जो स्वयं में धर्म है, कर्मकाण्ड है, अध्यात्म है, ब्रह्माण्डीय संरचनाओं का विज्ञान है। शिव ऊर्जा का विज्ञान है जिसे आज का क्वान्टम भौतिकी भी स्वीकार कर रहा है। नासा और सर्न के भौतिक विज्ञानी शिव चेतना के आधार पर ही अणुओं के संलयन और विखंडन पर शोध कर रहे हैं। शिव का नटराज स्वरूप महज नृत्य नहीं बल्कि सृष्टि सृजन का सिद्धान्त है।
सर्न (CERN : European Organisation for Nuclear Research ) ने इसे Cosmic Dance of Subatomic Dance कहा है और यही कारण है कि सर्न के मुख्य प्रवेश द्वार पर नटराज की विशाल प्रतिमा स्थापित है जो प्राचीन भारतीय आध्यात्मिक और आधुनिक क्वान्टम भौतिकी के मध्य सम्यक् समन्वय, संयोजन और संतुलन का प्रतीक है। शिव का यह स्वरूप नृत्य की जिस विधा से जुड़ा है,वह आनन्द तांडव और रूद्र तांडव दोनों का सुन्दर समेकन और समायोजन है जिसमें ब्रह्माण्ड के पांच प्रमुख कार्यों यथा सृष्टि, स्थिति, संहार, तिरोभाव ( माया / भ्रम) और अनुग्रह ( मुक्ति / मोक्ष) को दर्शाता है। अब इस नृत्य में शिव की आकृति का अवलोकन करें जिसमें उनकी सारी मुद्राएं अलग-अलग अवस्थाओं का प्रतीक है। शिव के दोनों हाथ : ऊपर दाहिने हाथ में डमरू सृष्टि और ब्रह्माण्डीय ध्वनि का प्रतीक है। साथ ही साथ समय और काल की गतियों का भी प्रतीक है जिसका आधुनिक रूपांतरण रेत घड़ी है जो शिव के इस नृत्य की शाश्वतता का प्रतीक है जिससे समय ,काल और जीवन की उत्पत्ति हुई है। ऊपरी बायां हाथ संहार का प्रतीक है,जो सृजन के लिए अनिवार्य है। इस तरह दोनों बाहें सृजन और विनाश के प्रतीक हैं।
निचला दाहिना हाथ अभय मुद्रा में है जो शरणागत को संरक्षण और सुरक्षा देता है।निचला बायां हाथ गजहस्त मुद्रा में है जो ऊपर उठे हुए पैर की ओर है जो अनुग्रह या मोक्ष‌ का प्रतीक है। दाहीने पैर के नीचे दबा दानव अपस्मार है जो अज्ञान,तमस और अहंकार का प्रतीक है। इसके पीछे भी एक अद्भुत पौराणिक गाथा है कि अपस्मार को अमरत्व का वरदान है जिसे मारा नहीं जा सकता है पर उसका नियंत्रण किया जा सकता है। इसलिए शिव ने अपस्मार को दबाकर यह संदेश दिया कि अज्ञानता,तमस और अहंकार को मारा नहीं जा सकता,उस पर विजय पाया जा सकता है और जो इनपर विजय पा लेता है उसे अरिहंत या अर्हंत कहा जाता है और शिव को भी अर्हंत कहा जाता है। बायां पैर जो हवा में उठा थोड़ा सा तिरछा है, कुंचित पद कहा जाता है जो भौतिकता से ऊपर उठकर सर्वोच्च आध्यात्मिक चेतना की ओर उठने का प्रतीक है।
शिव के दोनों पैरों की अवस्था : दोनों पैरों की अवस्था : स्थितिज ऊर्जा और गतिमान ऊर्जा (Static Energy and Kinetic Energy) के मध्य सम्यक् समन्वय और संतुलन का प्रतीक है जो ऊर्जा के रूपांतरण के सिद्धान्त को भी सत्यापित करता है। यह नृत्य सहज नृत्य नहीं बल्कि समस्त नृत्य कला का भी प्रतीक है जो मनुष्य की आत्मचेतना से भी जुड़ा है और मनुष्य की आत्मचेतना में यह एक संघर्ष के रूप में चलता रहता है। समस्त सांसारिक कोलाहल और उपद्रवों के मध्य यह परम शान्ति और स्थिरता का भी प्रतीक है जो उनके चेहरे की आभा से प्रकट होता है। इस तरह शिव के नटराज की आकृति में ही समस्त शिवत्व की अवधारणा और मान्यता प्रस्फुटित होती दिखाई देती है जिसे सहजता से नहीं समझा जा सकता है पर इस व्याख्या से समझा जा सकता है कि हम सबमें शिव केन्द्रीय सत्ता के रूप में अवस्थित हैं जिसकी अनुभूति करते हुए हम सृजन,लय और विनाश का काम कर सकते हैं पर शिव के पास सृजन और विनाश दोनों का सामर्थ्य है पर बिगड़े का निर्माण नहीं कर सकते, सुधार कर सकते हैं, इसलिए हमें कल्याण ही करने को सोचते रहना है और यही शिवत्व है। बड़ी सुन्दर गाथा है,आज से लगभग १८ सौ साल पहले मणिकर्णिका के घाट पर एक युवा संन्यासी एक चांडाल के सामने नतमस्तक होकर विलाप किए जा रहा है और कह रहा है, हे शिव, हमें क्षमा कर दो कि हमनें तुम्हें देखने और समझने में भूल कर दी। जो मुझमें है वह सबमें है और जो सबमें है वही मुझमें है, शिवोहम् शिवोहम् शिवोहम्। वह युवा संन्यासी और कोई नहीं आदि गुरु शंकराचार्य थे और वह चांडाल स्वयं शिव थे। इसलिए शिव सबसे सहज और सरल हैं,देव,दानव,यक्ष, गन्धर्व,किन्नर,सुर, असुर, मनुष्य आदि सबके आराध्य हैं। पशुपति हैं शिव जो सभी पाश से बंधे ( अज्ञानियों) लोगों को मुक्त करने का काम करते हैं। पशुपति का अभिप्राय पशुओं या जानवरों का स्वामी नहीं बल्कि अज्ञानियों के अज्ञान का नाश करने वाले स्वामी हैं। पौराणिक गाथाओं से लेकर,वेद, उपनिषदों आदि में शिव ही परब्रह्म हैं,आदि अनादि देव और परम चेतना के केन्द्र हैं। इसलिए शिव की तरह रुद्र से शिव की यात्रा भी अद्भुत है। एक तरफ रुद्र जहां* प्रलयंकारी, तुफान झंझावात पैदा करने वाला विनाशक शक्ति है तो वहीं शिव कल्याणकारी परम चेतना हैं। शिं करोति शुभं भवति शुभं करोति शिवं भवति, जो सदैव शुभ और कल्याणकारी है,वही शिव है।वेदों में रुद्र को एक ऐसी ऊर्जा पूंज के रूप में स्थापित किया गया है जो हमारे मन के भीतर उठने वाले तमस और अज्ञान के झंझावात को नष्ट कर ज्ञान और मुक्ति की ओर ले जाते हैं। उनका दंड भी हमारे शारीरिक मानसिक विकारों के शुद्धिकरण की प्रक्रिया है और शिव कल्याण की ऊर्जा से समावेशित करने वाली ऊर्जा हैं।
वेदों में जिन तैंतीस कोटि देवों की चर्चा की गयी है, उनमें से एकादश रुद्र ही वह सत्ता हैं जो समस्त ब्रह्माण्डीय क्रियाशीलताओं में समन्वय और संतुलन बनाने का काम करती है। उनके द्वारा धारण किए गए समस्त विषय वस्तु भी उनके विराटता, नश्वरता, अनश्वरता और सनातन सत्य के प्रतीक हैं। अराजकता के मध्य स्थिरता और शान्ति के प्रतीक हैं शिव जो अपने अर्द्धनारीश्वर स्वरूप से सृष्टि के सृजन‌ और विकास की गाथा लिखते हैं,

गतांक से आगे १
शं कल्याणं करोति इति शिव।

माण्डुक्योपनिषद् में ब्रह्म की चौथी अवस्था ( तुरियावस्था) का वर्णन इस प्रकार किया गया है जो सिद्ध करता है कि शिव ही आदि परब्रह्म हैं, प्रपंचोशमं शांतं शिवम द्वैतम्च तुर्थं मन्यन्ते स आत्मा स विज्ञेय अर्थात् जो शान्त और‌ अद्वैत है,वही आत्मा और ब्रह्म है।
शिवपुराण में भी शिव को निर्गुण ब्रह्म है जो सृष्टि की इच्छा करने पर सगुण ( रूपवान / आकारवान ) हो जाता है। यजुर्वेद ( श्री रुद्रम: ) में रुद्र को विश्वस्य‌ अधिपति की संज्ञा दी गयी है जो वह सर्वव्यापक सत्ता है जिसे समस्त वांग्मयों में परम ब्रह्म कहा गया है। आदिशंकर ने निर्वाणष्टकम् में चिदानंद स्वरुपं शिवोहम् शिवोहम् कहा है कि हमारी आत्मा ही ब्रह्म है जिसे शिव कहते हैं। ब्रह्म अनन्त चेतना ( ऊर्जा और पदार्थ) है।आध्यात्मिक स्तर पर जब व्यक्ति के भीतर का तमस और अहंकार नष्ट हो जाता है और जो शेष बचता है,वह शिवत्व, शिवतत्व और और शुद्ध ब्रह्म सत्ता है और इसी सत्ता का प्रक्षेपण जीव,जगत,आत्मा और परमात्मा है। क्वांटम भौतिकी और कश्मीर शैव मत में शिव स्पंदन के विज्ञान हैं जिसे Determinate Vibration भी कहा जाता है। हमारी समस्त भौतिक, सूक्ष्म और कारणिक क्रियाशीलताएं आण्विक स्पंदन के रूप में संलयन और विखंडन की सतत् क्रियाशीलताएं ही है। सर्न ने इसे String theory and Shaivism से संज्ञायित किया है। बिना चेतना के पदार्थ जड़ है और बिना चेतना के पदार्थ अदृश्य है और यही शिव और शक्ति की अवधारणा है। पदार्थ और कुछ नहीं घनिभूत चेतना है अर्थात् चेतना (ऊर्जा) जब घनिभूत होती है तब पदार्थ का रूप ले लेती है जैसा कि महाविस्फोट या बिग बैंग का सिद्धान्त कहता है। सांख्य दर्शन भी इसी को पुरुष और प्रकृति के मिलन से सृष्टि का बनना कहता है। चेतना आदि तत्व है और ब्रह्म या शिव विशुद्ध चेतना। उपनिषदों में चिद्रेव‌ शक्ति ( चेतना ही शक्ति और पदार्थ है) की अवधारणा है।बिना द्रष्टा के दृश्य या वस्तु का कोई अस्तित्व नहीं रह‌ जाता है,जैसे पहले द्रष्टा होता है तब स्वप्न होता है,वैसे ही पहले चेतना ( शिव/ ब्रह्म) है तब पदार्थ या सृष्टि है। इसे समझना ही शिव, शिवत्व और शिवतत्व को समझना है। शिव की तरह शिवचर्चा भी अनन्त है। अब हम पंचभूत्वा शिव के स्थूल प्रतीकात्मक स्थलों की चर्चा करना चाहेंगे। यद्यपि कि उत्तरापथ अर्थात् उत्तर भारत को शैवमत और परम्पराओं का प्रदेश कहा जाता है परन्तु शिव के पंचभूत्वा गुणधर्म और सत्ता का परिचय जो दक्षिणापथ अर्थात् दक्षिण के दो राज्यों तमिलनाडु और आंध्रप्रदेश ने दिया है,वह अद्भुत और अप्रतीम है। हालांकि एतिहासिक विवेचना से यह पता चलता है कि शिव सत्ता को कर्मकाण्ड एवं आध्यात्मिक रूप से स्थापित करने का काम जो दक्षिण में किया गया उसे भारत के किसी अन्य प्रदेशों में नहीं किया गया। चोल वंश के सम्राटों ने न भारतीय सीमाओं के अन्दर बल्कि दो पू एशियाई देशों में भी शैवमत से सम्बन्धित विशाल और दर्शनीय मंदिरों की स्थापना की। भारतीय सीमाओं के भीतर तमिलनाडु और आंध्रप्रदेश तो अद्भुत शिल्प और स्थापत्य कला के नमूनों के रूप में जिन छ: विश्वविख्यात मंदिरों को बनाने का काम किया, संभवतः शिवभक्त और साधक भी इनसे अनभिज्ञ ही होंगे। क्षिति जल पावक गगन समीरा :
आज का आधुनिक भौतिक विज्ञान जिन पांच पदार्थों से जीवन सृजन की बातें स्वीकार कर रहा है उसे भारतीय तत्त्वज्ञानियों ने सदियों पूर्व कह दिया था कि, क्षिति जल पावक गगन समीरा पंचतत्व से बना सरीरा, अर्थात् मिट्टी,जल, अग्नि,वायु और आकाशीय पदार्थों से ही जीवन का सृजन होता है और उसके प्रतीक स्वयंभू शिव ही हैं और इसी सत्य को भौतिक रूप से दृश्यमान जगत में अधोलिखित छः मन्दिरों के द्वारा स्थापित किया गया है। इनमें पहला स्थान आन्ध्र प्रदेश के तंजावूर जिले का जगत प्रसिद्ध वृहदेश्वर शिव मंदिर है जो पृथ्वी( मिट्टी) तत्त्व का प्रतीक है जो शिल्प और स्थापत्य कला का अनुपम नमूना है। इसी के समतुल्य तमिलनाडु के कांचीपुरम का एकाम्बेश्वर शिव मंदिर है और यह भी पृथ्वी तत्त्व का ही प्रतीक है। तीसरा तमिलनाडु के ही तिरूवनाईकवलम् में जम्बुकेश्वर शिव मन्दिर है जो जल तत्त्व का प्रतीक है और इसकी विशेषता है कि जल का अन्तर प्रवाही स्रोत इसके नीचे है। तमिलनाडु के ही तिरूवन्नामलाई में अरूणाचलेश्वर शिव मंदिर है जो अग्नि तत्त्व का प्रतीक है। आन्ध्र प्रदेश के तिरूपति में श्री कालहस्तिश्वर शिव का मन्दिर है जो वायु तत्त्व का प्रतीक है और अन्तिम वायवीय या आकाशीय तत्त्व का प्रतीक थिल्लईनटराज शिव मन्दिर है जो तमिलनाडु के ही चिदम्बरम में अवस्थित है।
शिव की विराटता और व्यापकता का बोध : शिव की विराटता और व्यापकता का बोध इसी से होता है कि जब कुछ नहीं था,तब भी शिव सत्ता थी, जब कुछ है तब भी शिव है और जब कुछ नहीं रहेगा तब भी शिव सत्ता रहेगी कि कुछ‌ नहीं और कुछ से ही सबकुछ सृजित, विकसित और स्थापित हुआ है इसलिए शिव समस्त जगत में सिर्फ देवता नहीं,एक परम चेतना हैं और जो इस कल्याणकारी चेतना से युक्त है, शिव है चाहे उस सत्ता का नाम जो भी रख दिया गया हो, Nothingness is the ultimate force which creates Something and Something creates Everything and as Shiva stands for nothingness and the whole Universe emerged out from the Nothingness which is the ultimate truth even of the Modern Cosmos Theory. शून्य और एक का सिद्धान्त ही सृष्टि सृजन का, ब्रह्माण्डीय चेतना और व्यवहार का दर्शन और व्यवहार है।जय शिव जय शक्ति सबके भीतर शिव और शिवत्व का वास हो,की मंगलकामनाएं। सादर नमस्कार सादर मंगलकामनाऍं।

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स्तंभ संपादन : शक्ति. सीमा प्रीति रीता
सज्जा : शक्ति. शिवानी रितु अनुभूति

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शक्ति आलेख : २ / २ / ४ .
शक्ति.शालिनी संदीप आस्था
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शिव- आदि और अनंत हिंदू धर्म में शिव को ' लय ' का देवता माना गया है, लेकिन वे केवल संहारक नहीं बल्कि सृजन के आधार भी हैं। फाल्गुन मास की कृष्ण पक्ष की चतुर्दशी को आने वाली यह रात्रि ब्रह्मांडीय ऊर्जा के जागरण की रात है। पौराणिक मान्यताओं के अनुसार, इसी पावन तिथि पर भगवान शिव और माता शक्ति का विवाह हुआ था अर्थात पुरुष और प्रकृति का मिलन...वैज्ञानिक दृष्टिकोण से देखें तो इस रात पृथ्वी का उत्तरी गोलार्द्ध इस प्रकार स्थित होता है कि मनुष्य के भीतर की ऊर्जा प्राकृतिक रूप से ऊपर की ओर गमन करती है, इसलिए इस रात 'जागरण' का विशेष महत्व है।
संयम और वैराग्य विरोधाभासों का अद्भुत मेल है शिव शक्ति : शिवरात्रि हमें सिखाती है कि संयम और वैराग्य के बिना आनंद संभव नहीं है। शिव का स्वरूप विरोधाभासों का अद्भुत मेल है..वे एक तरफ परम तपस्वी हैं, तो दूसरी तरफ गृहस्थों के आदर्श..! उनके गले में सांप है, लेकिन उनके पुत्र का वाहन मोर है ; उनके पास नंदी है, तो माता पार्वती का वाहन सिंह है। यह इस बात का प्रतीक है कि परस्पर विरोधी विचारों के बीच भी शांतिपूर्वक सह-अस्तित्व संभव है..! महाशिवरात्रि हमें अपने भीतर के 'शिव' को जगाने का अवसर देती है। जब हम अपने भीतर के क्रोध, लोभ और मोह का त्याग कर शून्य की ओर बढ़ते हैं, तभी हम वास्तव में शिवमय होते हैं क्योंकि शिव सत्य हैं, शिव सुंदर हैं...सत्यम..शिवम..सुंदरम। शून्य से जो प्रकट हुआ, वो सार है शिव, विष को जो कंठ में धरे, वो प्यार है शिव..! न आदि है, न अंत है, न रूप है उसका, अघोरियों के मौन की, पुकार है शिव..! जटा से बहती सुरसरी, माथे पे चंद्र साजे,
डमरू की उस थाप पर, ब्रह्मांड सारा नाचे..! श्मशान की उस राख में, जो खोजता है जीवन,विनाश में भी सृजन का, आधार है शिव..! तन पे लिपटे नाग हैं, मन में अचल शांति,भक्तों के दुखों की जो, हर ले सारी भ्रांति..!कहीं वो नीलकंठ है, कहीं वो महाकाल है,मिटा दे जो अहंकार, वो प्रहार है शिव..!
लेखिका कवयित्री व सम्पादिका शक्ति शालिनी


शक्ति आलेख : २ / २ / ५
शिव शक्ति की  प्रेम कहानी : हरतालिका तीज: लोक पर्व 
भारतीय सभ्यता संस्कृति की अद्भुत कहानी : एक महिला केंद्रित उत्सव 
शक्ति आलेख 
डॉ. सुनीता सीमा शक्ति प्रिया 
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तीज : शिव शक्ति की  प्रेम कहानी : हरतालिका तीज : जब कभी भी तीज आता है तो अम्मा याद आ जाती है। बड़ी विधि विधान से तीज व्रत करवाती थी। आज भी हम सभी इस लोक पर्व   की संस्कृति को संरक्षित करने का प्रयास कर रही है। 
मेरी माने तो लोक पर्व  भारतीय सभ्यता संस्कृति की अद्भुत कहानी है तीज. भगवान शिव और पार्वती की कहानी सती के रूप में शिव की पत्नी के दोबारा जन्म से शुरू होती है, जो शिव को पति रूप में पाने के लिए कठोर तपस्या करती हैं, शिव उनकी परीक्षा लेते हैं,और अंत में वे उन्हें वर के रूप में प्राप्त कर शिव की अर्धांगिनी बनती हैं.शिव के प्रति शक्ति का प्रेम अतुलनीय है।

भारतीय लोक सभ्यता संस्कृति की अद्भुत कहानी :


समर्पण : तपस्या : 
प्रेम की अमरशिव शक्ति कहानी : हरतालिका तीज : शक्ति मीना. नैनीताल. 
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फसली पर्व : मानसून के मौसम में  है यह तीज। चंद्रमा का चक्र निर्धारित करता है कि प्रत्येक वर्ष तीज कब मनाई जाती है। यह त्यौहार भारत के मानसून के मौसम में सालाना जुलाई या अगस्त में मनाया जाता है। यह त्योहार कई राज्यों में मनाया जाता है, मुख्य रूप से देश के मध्य और उत्तरी क्षेत्रों में। हालांकि केवल हरियाणा में यह तीज आधिकारिक सार्वजनिक अवकाश के साथ मनाया जाता है।  
भारतीय सभ्यता संस्कृति : यह राजस्थान, बिहार, उत्तर प्रदेश, पंजाब और हरियाणा जैसे राज्यों में विशेषतः मनाया जाता है। राजस्थान की राजधानी जयपुर, तीज के कुछ सबसे प्रसिद्ध उत्सवों का घर है। बिहार, में नालन्दा , गया ,नवादा आदि समस्त मगध क्षेत्र में यह लोक पर्व खूब धूमधाम से मनाया जाता है। महिलाएं २४ घंटे का निर्जला उपवास करती है। 
संध्या के समय गौरी शिव की पूजा की जाती है और यह कामना की जाती हैं कि उनके पति परमेश्वर जैसी स्वस्थ दीर्घ आयु पाएं। और उनका प्रेम शिव शक्ति जैसा ही हो। और दूसरे दिन आसन का विसर्जन होता है। पास के नदी तालाब में मूर्तियां विसर्जित कर दी जाती है इस सन्देश के साथ की अगले वर्ष  गौरी शिव की पूजा  से जुड़ी तीज का वो व्रत पुनः करें। समस्त विधि विधान के बाद महिलाएं अपना उपवास जल या शर्वत ग्रहण कर तोड़ती हैं। 
तीज महोत्सव भारत में मानसून के आगमन के साथ मनाया जाने वाला एक महिला -केंद्रित उत्सव है, जिसे मुख्य रूप से श्रावण मास में मनाया जाता है. यह पर्व भगवान शिव और पार्वती के पुनर्मिलन का प्रतीक है, और विवाहित महिलाएं पति की लंबी आयु व वैवाहिक सुख के लिए व्रत रखती हैं. इस दौरान महिलाएं हरे रंग के वस्त्र पहनती हैं, मेहंदी लगाती हैं, झूला झूलती हैं और लोकगीत गाती हैं. यह त्योहार आस्था, उमंग, सौंदर्य और प्रेम का प्रतीक है. 
तीज के प्रकार :

तीज के प्रकार : हरियाली तीज: सावन के महीने में मनाई जाने वाली हरियाली तीज सबसे प्रसिद्ध है और इसमें प्रकृति की हरियाली का जश्न मनाया जाता है. 
कजली तीज: यह हरियाली तीज के बाद आने वाला एक और महत्वपूर्ण तीज है, जो पूर्वी उत्तर प्रदेश में मनाई जाती है. 
हरतालिका तीज : भाद्रपद माह के शुक्ल पक्ष की तृतीया को हरतालिका तीज का व्रत किया जाता है, जिसमें शिव-पार्वती की पूजा होती है. सब तीज हर्ष उल्लास के साथ ही मनाए जाते है। 
लोक पर्व उत्सव की.मुख्य गतिविधियाँ 

उपवास और पूजा : महिलाएं पति की लंबी उम्र के लिए व्रत रखती हैं और शिव -पार्वती की पूजा करती हैं. पति पत्नी के मध्य अमर प्रेम की चर्चा होती है तो हरतालिका तीज: भाद्रपद माह के शुक्ल पक्ष की तृतीया को मनाई जाने वाली हरतालिका तीज की चर्चा होती है। 
झूला झूलना: यह तीज का एक प्रमुख आकर्षण है, जिसमें महिलाएं पेड़ों से बंधी डालियों पर झूला झूलती हैं. सावन के झूले खूब चर्चें में होते हैं। गांवों में इसका प्रचलन अब भी है। 
सजावट : महिलाएं नए और रंगीन वस्त्र पहनती हैं, हाथों में मेहंदी लगाती हैं और अन्य पारंपरिक श्रृंगार करती हैं. अलता पैरों में लगाती हैं। खूब सजती सवरती है। तीज के दौरान महिलाएं अपनी बेहतरीन एक्सेसरीज और पोशाक पहनती हैं। वे अक्सर अपने हाथों पर मेहंदी या मेहंदी की सजावट भी करवाती हैं। वे कई गीत गाते हैं जो त्योहार से जुड़े होते हैं। वे झूलों पर झूलते हैं जो पेड़ की बड़ी शाखाओं से बंधे होते हैं। वे उपवास और भव्य, भव्य दावतों के संयोजन का भी अनुभव करते हैं। नृत्य एक और विशिष्ट तीज गतिविधि है। 
संगीत और नृत्य: इस अवसर पर लोकगीत गाए जाते हैं और नृत्य प्रस्तुतियां दी जाती हैं. पूजा संपन्न होने के बाद बिहार झारखण्ड में महिलाओं को लोक गीत गाते हुए देखा जा सकता हैं जिसमें शक्ति की शिव को पाने के लिए कठिन तपस्या की बात होती हैं। 
त्योहार के व्यंजन : पारंपरिक घेवर मिठाई तीज से जुड़ी हुई है. गुजिया ठेकुए आदि बनते हैं। 
जुलूस : राजस्थान जैसे राज्यों में, जयपुर में तीज का भव्य जुलूस निकाला जाता है. 
महत्व : जीवन में वैवाहिक सुख का : यह पर्व भगवान शिव और माता पार्वती के पुनर्मिलन की याद में मनाया जाता है, जो अटूट प्रेम और समर्पण का प्रतीक है. यह त्योहार सुहागन महिलाओं के लिए बहुत महत्व रखता है, जो पति की दीर्घायु और वैवाहिक सुख की कामना करती हैं. 
तीज पत्नी पार्वती और पति शिव के बीच संबंधों का प्रतिनिधित्व करती है। यह त्योहार पार्वती के अपने पति के प्रति अटूट समर्पण की याद दिलाता है। जब भारतीय महिलाएं तीज के दौरान अपने आशीर्वाद की तलाश करती हैं, तो वे एक मजबूत विवाह – और गुणवत्तापूर्ण पति प्राप्त करने के साधन के रूप में ऐसा करती हैं। तीज न केवल एक मजबूत शादी के इर्द-गिर्द केंद्रित है, बल्कि यह बच्चों की खुशी और स्वास्थ्य पर भी ध्यान केंद्रित करती है।
प्रकृति का उत्सव : यह मानसून के आगमन और चारों ओर फैली हरियाली का भी उत्सव है. हम हरीतिमा को बचा सकें,यह सन्देश भी हम देना चाहते हैं। 
तीज नाम को एक छोटे लाल कीट का संदर्भ माना जाता है जो मानसून के मौसम में जमीन से निकलता है। हिंदू मिथकों का मानना ​​​​है कि जब ऐसा हुआ, तो पार्वती ने शिव के निवास का दौरा किया। इसने पुरुषऔर महिला के रूप में उनके संबंध को सील कर दिया।
तीज न केवल शादी और पारिवारिक संबंधों पर ध्यान केंद्रित करती है, बल्कि यह मानसून पर भी ध्यान केंद्रित करती है। मानसून लोगों को गर्मी के महीनों की भीषण गर्मी से आराम देता है।
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पृष्ठ सज्जा : शक्ति  नैना मीना अनुभूति मंजिता. 
स्तंभ संपादन : शक्ति शालिनी रेनू नीलम श्रद्धा 
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शक्ति. डॉ.रश्मि. आर्य. डॉ.अमरदीप नारायण. नालन्दा हड्डी एवं रीढ़ सेंटर.बिहार शरीफ.समर्थित.  
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महाशक्ति मीडिया.प्रस्तुति. 
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सत्य ही शिव है शिव ही सुन्दर है : शक्ति : गाने : पृष्ठ : ३  
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संपादन 
शक्ति माधवी संगीता तनु
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फिल्म : सत्यम शिवम् सुंदरम.१९७८. 
सितारे : शशि कपूर. जीनत अमान. 
गाने : जागो उठ कर देखो जीवन जोत उजागर है 
ईश्वर  सत्य है सत्य ही शिव है शिव ही सुन्दर है 


गीत : पंडित नरेंद्र शर्मा. संगीत : लक्ष्मी कांत. प्यारेलाल. गायिका : लता. 
गाना सुनने व देखने के लिए नीचे दिए गए लिंक को दवाएं 

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शक्ति शिव : फोटो दीर्घा : पृष्ठ : ७ 
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संपादन.
शक्ति. नैना सीमा प्रिया.
नैनीताल डेस्क. 
शिव की जटा से गंगा अवतरण का दृश्य : गंगोत्री : कलाकृति : छाया डॉ.सुनीता वनिता शक्ति प्रिया  
ओम नमो शिवाय : सुबह सुबह ले शिव का नाम :ऋषिकेश : शक्ति नैना डॉ.सुनीता प्रिया.  
शक्ति यात्रा : गंगा : विंद्याचल शक्ति की आराधना : साभार :कोलाज फोटो : शक्ति रितु .
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शक्ति शिव : मन पावन हो : दृश्यम : पृष्ठ : ८  
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संपादन 
शक्ति. डॉ.अनु मीना रितु 
नैनीताल डेस्क.    
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दृश्यम : १ : मित्र माँगा तो नंदी भेज दिया 
प्रस्तुति : शक्ति डॉ.अनु. सह रितु  मीना 
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लोकेशंस ; काशी : शिव : गंगा 
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दृश्यम : २ : अभी भी एक उम्मीद बाक़ी है भोले 


प्रस्तुति शक्ति मीना : मुक्तेश्वर नैनीताल  महादेव मंदिर 

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दृश्यम : ३  : मन पावन हो गंगा में डूबे  नहाय 
मन रावण जो लहरों में क्यों न बहाय  


प्रस्तुति शक्ति : रितु : दृश्यम : गंगा : काशी में शिव 
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मुझे भी कुछ कहना है : शुभ कामनाएं : दृश्यम : पृष्ठ :९.
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संपादन
शक्ति प्रिया डॉ सुनीता सीमा
दार्जलिंग डेस्क


हर हर महादेव : ग़िफ
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नैना देवी डेस्क
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शिव ही सत्य हैं...शिव ही सुन्दर हैं...शिव ही दया के सागर हैं... महाशिवरात्रि की अनंत शिव शक्ति शुभकामनाएं
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हम सभी देव शक्ति परिवार *

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Shakti. Tanu. Arya Rajat.Swarnika Jewellers.Sohsarai.Biharsharif Supporting 
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Cover Page : 0
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Om Namah Shakti Shivay
Dr. Sunita Naina Seema 
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Shakti Editorial : English : Page : 1.
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Shakti Chief Editor.
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Shakti.Vani.Lucknow.
Shakti. Ankita Singh.Ayodhya.
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Executive Editor.
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Naina Devi Desk.

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Guest Editor.
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Shakti Editorial. English Page : 2
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Editor.
Shakti. Priya Seema Tanu Sarvadhikari.
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a Divine Shakti Article *by
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Ashok Karan



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Hindustan Times ( Patna. Ranchi ) Ex.Staff Photographer
Public Agenda Ex.Photo Editor :New Delhi
Present : Photo Editor M.S Media Blog Magazine Page
Free Lance.
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Teej :A Celebration of Devotion, Love & Monsoon.



The Cherished festivals of women : Teej is one of the most vibrant and cherished festivals of women, celebrated with grandeur across India and Nepal during the monsoon season. Dedicated to Goddess Parvati and her eternal union with Lord Shiva, the festival symbolizes love, fidelity, and the strength of womanhood.
Women observe fasts as an act of devotion, adorned in bright lehariya sarees, green and red attire, colorful bangles, and intricate henna designs. Temples and homes resonate with devotional songs, rhythmic dances, and joyous laughter.
Cultural Highlights of Teej
Traditional Attire: Women wear vibrant lehariya sarees, green bangles, and fresh flowers.
Henna Rituals: Applying intricate mehendi designs on hands and feet for beauty and blessings.
Swings & Celebrations: Decorated swings are hung from trees, symbolizing joy and festivity.
Music & Dance: Folk songs and traditional dances fill the air with devotion and happiness. Festive Feasts: Special delicacies like ghevar, gujiya, and laddoo are prepared and shared.
Worshipping the idol of Goddess Parvati and Lord Shiva, Teej is celebrated in Rajasthan, Uttar Pradesh, Maharashtra, and Nepal, with Jaipur hosting grand processions featuring the idol of Goddess Parvati and Lord Shiva, accompanied by music, dancers, and traditional rituals.
Spiritual Significance : The term Teej means "third," referring to the third day of the lunar fortnight after Amavasya (new moon) or Purnima (full moon). The festival is observed in three forms – Hariyali Teej, Kajari Teej, and Hartalika Teej – each carrying its own significance.
According to mythology, Teej commemorates the day Goddess Parvati was united with Lord Shiva after years of penance, symbolizing faith, patience, and divine love. Unmarried girls pray for a loving future spouse, while married women fast for the longevity and prosperity of their husbands.
In Ranchi
Women devotees can be seen worshipping in temples, beautifully dressed, immersed in rituals and prayers, celebrating the onset of the rainy season and the blessings it brings.
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Column Editing.Shakti Naina Dr. Sunita Priya.
Page Decorative : Shakti Anita Seema Swati.


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Vibes : Shakti : English Page : 3
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Editor
Shakti. Dr.Anu Seema Priya
Darjeeling Desk.
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Every small win is a step towards greatness.
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Photo Gallery : Shakti : English Page : 4
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Editor.


Shakti. Dr.Anu Seema Priya
Darjeeling Desk.
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Ganga : Shaiva Shakti at : Kashi Vishwanath Varanasi  : Collage Photo : Shakti Ritu  Nilam Meena.

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remembering the lord Ganesha for any nice Beginning. Shakti Desk : Shree Ganeshay Namah
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You Said It : Day Special : Wishes : English Page.
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Editor.
Shakti. Dr.Bhwana Seema Ankita Singh.
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Wishes for Mahashivratri.
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Shakti Sangeeta Ajeet Rajeev.
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You Said It : English Page.
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Editor.
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Shakti Farheen Madhvee Shahina
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It's full of divine and positive energy...Har Har Mahadev,....

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Shakti. Dr.Rakhee.
Dental Surgeon.Ranchi.

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It is a Shakti based page : everybody will like visiting this page stands for women's empowerment
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Shakti : Suman : Chandigarh.

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Comments

  1. It's full of divine and positive energy...Har Har Mahadev,....

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  2. It is a Shakti based page : everybody will like visiting this page stands for women's empowerment
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  3. It is a devotional and very influencing web magazine page for all the visitors, and devotees of Shakti Mahadev.

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