Radhika : Krishna : Rukmini : Darshan : Dainik.11.V2.S5.
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कृण्वन्तो विश्वमार्यम.
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Radhika Krishna Rukmini.
Darshan.Dainik.
Number.12.Volume : 2. Series : 5.
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https://drmadhuptravel.blogspot.com/2026/04/radhika-krishna-rukmini-darshan_30.html
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राधिका कृष्ण रुक्मिणी दर्शन : ११.
प्यार. व्यवहार. संस्कार.
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* वृन्दावन पी जी मुंबई : समर्थित : शक्ति कृति : दैनिक आवरण पृष्ठ : लिंक राधिका कृष्ण रुक्मिणी दर्शन : ११. |
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* वृन्दावन पी जी मुंबई : समर्थित : शक्ति कृति :पत्रिका आवरण पृष्ठ : राधिका कृष्ण रुक्मिणी दर्शन : ११. * राधिका कृष्ण रुक्मिणी दर्शन : ११.पत्रिका में जाने के लिए नीचे दिए गए लिंक को दवाएं https://drmadhuptravel.blogspot.com/2026/04/radhika-krishna-rukmini-darshan_30.html * प्रेम प्रकृति. * --------- राधिकाकृष्ण: प्रेम प्रकृति दर्शन : नैनीताल डेस्क : पृष्ठ : ० / १. ------------- संपादन शक्ति.डॉ.अनु मधुप प्रिया. * * सन्दर्भ : विचार : माया. शक्ति : राधिकाकृष्ण : छाया. * राधिका कृष्णे हृदयम, शांतिः भवेत * आस्था ईश्वर कर्म . * * सन्दर्भ : विचार : माया. माधव : : छाया. * मुझको कहाँ ढूँढे रे बन्दें मैं तो तेरे पास में * जीवन का नहीं स्वयं के जीने का अर्थ खोजिए अपने अन्तर्मन के सच में ही पाप पुण्य : सुख दुःख , भला बुरा सब कुछ मिल जाएगा * शक्ति. डॉ.सुनीता सीमा रंजिता * आस्था ईश्वर परिस्थितियां. * * सन्दर्भ : विचार : शक्ति सुनीता : माया. कृति : साल २००१ : स्केच : मधुप : छाया. * सिर्फ़ इंसान को छोड़ कर हर वो चीज़ प्रकृति में वैसी ही है जैसी दिखती है * ये जो जिंदगी है कभी ख़ुशी है कभी गम * जो भाव कारण तुम्हें आनंदित करे, प्रसन्न करें.... वह एक सत्य हैं लेकिन जिस ना से तुम्हें जिंदगी का समृद्ध पृथक अनुभव हो वह भी जीवन का सतत सम्भावी यथार्थ है, माधव * तेरा मेरा साथ रहे धूप हो छाया हो * जिसने अपने जीवन में अपनों के लिए सहन , समझ और शब्द की शक्ति को भली भांति समझा, परखा ,और उतारा साथ सफलता और ख़ुशी सदैव उसके संग होगी * विचार शक्ति @ प्रिया मधुप अनुभूति * हम तुमसे न कुछ कह पाए तुम हमसे न कुछ कह पाए * * सन्दर्भ : विचार : माया. शक्ति : रितु :छाया. * * बहारें फ़िर भी आयेंगी * कभी कभी किसी की हल्की परवाह बहुत कुछ बिखरने से बचा देती है * जिंदगी के सफ़र में गुजर जाते है जो मकां फ़िर नहीं आते * देखते देखते जिंदगी में सबकुछ गुजर तो जाता है लेकिन सब भुलाया नहीं जा सकता. * विचार @ शक्ति. अनुभूति मधुप रितु. ⭐ *
* शक्ति रूक्मिणी दृश्यम : विशेष : विचार * रुक्मिणी कृष्णे हृदयम, शांतिः भवेत * सन्दर्भ : विचार : माया. शक्ति : रुक्मिणी कृष्ण : छाया. * ईश्वर : निमित : सम्बन्ध मानव : शब्द : नजदीकियां * संबंधों में दूरियाँ या नजदीकियां तो मानव प्रथमतः अपने शब्दों से तत्पश्चात अपने कर्मों से ही सुनिश्चित करता है. * विचार @ शक्ति.सीमा मधुप अनुभूति * जिंदगी कैसी ये पहेली है * संघर्ष , विवाद, मतों का अंतर ही अधिकांश के जीवन का सिद्ध यथार्थ है इस ना हाँ , समझौते, सहन और समझ के सहारे ही जन समूह की जिंदगी चल रही है * जिंदगी एक प्रश्नपत्र जैसी हो गयी जस की तस स्वीकार्य कुछ भी वैकल्पिक नहीं सभी प्र्श्न अनिवार्य * प्रकृति : प्रवृति : विरासत * कभी कभी सम्यक विरोध को भी अपनी विरासत बनाइए ताकि अधर्म और अनर्थ सहने की प्रवृति प्रकृति न बन जाए , प्रिय ! * विचार @ शक्ति. शालिनी मधुप रेनू तोरा मन दर्पण कहलाए * * सन्दर्भ : विचार : माया. शक्ति : मानसी : नैनीताल : छाया. * धैर्य व विश्वास अपने साथ रखें प्रार्थना व कर्म करते रहें सफलता एक न एक दिन आपको वरण करेगी ही * स्वयं को पहचानिए यदि आप ईश्वर की सुन्दर रचना है उनका अंश है आप में प्रयास करें ईश्वरीय गुणों को अपने भीतर समाहित करने का बुराई तो स्वतः समाप्त हो जाएगी * विचार @ शक्ति.शालिनी मानसी मधुप * * सोना सज्जन शक्ति *यदि आप प्रसन्न हैं तो, जिंदगी निःसंदेह उत्तम है, प्रिय और यदि आपकी वजह से ,लोग प्रसन्न है तो जिंदगी सार्थक सर्वोत्तम हैं . * संत, बसंत और प्रकृति * सन्दर्भ : विचार : माया. कृति : मधुप : छाया. स्केच : निर्मित : सुनीता * संत और बसंत दोनों में एक ही समानता होती है जब बसंत आता है तो प्रकृति सुधर जाती है और जब संत आते हैं तो संस्कृति सुधर जाती है * विचार @ शक्ति रेनू मधुप शालिनी * प्रथम मीडिया शक्ति प्रस्तुति. * * * मीरा डेस्क. * नैनीताल.डेस्क संपादन. शक्ति.डॉ.राखी मानसी मीना * मेरे तो गिरधर गोपाल दूसरों न कोय * क़द : क़िरदार : साया * क़िरदार : गुणों से होती है, बरना कद में तो कभी इंसान से बड़ा उसका साया होता है * विचार @ शक्ति अनीता मीना गरिमा * भोले भाव मिले रघुराई * * सन्दर्भ : विचार : माया. शक्ति : रितु सिंह : छाया. * सखी वो मुझसे कह कर जाते * राज था, वैभव था, लक्ष्मी थी ,यशोधरा थी. राहुल था बंधन था फिर भी सिद्धार्थ निकल गए.. आख़िर क्यों ? विचार कीजिए * शोध विचार @ शक्ति प्रिया मधुप रितु * ये दुनियाँ ये महफ़िल * * सन्दर्भ : विचार : माया. शक्ति : रितु सिंह : स्केच छाया. * जो बिना यथोचित कारण के समय,वचन और शब्द से परे हो जाए उसके साथ की स्थिति पर सदैव प्रश्नचिन्ह बना ही रहेगा इसे भूले नहीं * जो बिना यथोचित कारण के समय,वचन और शब्द से परे हो जाए उसके साथ की स्थिति पर सदैव प्रश्नचिन्ह बना ही रहेगा इसे भूले नहीं * तन्हाई , ख़ामोशी बन चुकी है जिस इंसान की फ़ितरत उसे महफ़िल, शोर शराबे दिखाबे से बड़ा ख़ौफ़ लगता है,जनाब विचार @ शक्ति.डॉ.राखी मधुप रितु * आपात काल परखिये चारी सन्दर्भ विचार : शक्ति सुनीता : कृति माया. मधुप : साल : १९९३ : स्केच : छाया. * स्मृत रहे जब सब कुछ अच्छा है तो सब अच्छे है समय प्रतिकूल हो गया तो कितने लोग तुम्हारे लिए व्यवहार और वाणी से अनुकूल रह गए देखना यहीं है * विचार @ शक्ति.डॉ.राखी जया अनीता * ---------- राधिकाकृष्ण : जीवन दर्शन : दृश्यम : शब्द चित्र : वृन्दावन.डेस्क : पृष्ठ : १ / १. ---------- * आज का दर्शन. * ![]() राधिकाकृष्णरुक्मिणी सदा सहायते * कृष्ण : बांसुरी : सुर्दशन चक्र. * जिंदगी एक नाटक है हम नाटक में काम करते है * बिडम्बना देखिए हम कभी नाटक देखकर रोते है और कभी किसी हक़ीक़त को देखकर कहते है अरे ! ये सब नाटक है * * सन्दर्भ : विचार : माया. शक्ति : रितु : मधुप : छाया. * अपने जीवन की उलझन को कैसे मैं सुलझाऊँ * जिंदगी कोई समस्या नहीं है, तेरी मेरी सूझ बूझ की एक सुन्दर कहानी पहेली है. इसे धैर्यपूर्वक,पूर्वानुमान,व्यवहार,कर्म के साथ सार्थक जीने का आनंद लें * विचार ©️®️ शक्ति रितु मधुप आस्था * मन से बड़ा न कोय * किसे ढूंढ़ रहे हो सत्य - असत्य, धर्म - अधर्म घृणा - प्रेम, शब्द - अपशब्द सब तुम्हारे भीतर ही वर्तमान है चुनाव तुम्हारी अभिलाषा के निमित ही है * विचार ©️®️ शक्ति प्रिया मधुप अनुभूति * समय, सोच,और शब्द ये है गीता का ज्ञान एक सु करम करे एक धरम करे कौन श्रेष्ठ इंसान जो न धर्म करे सिर्फ सु करम करें पूजे उसे भगवान विचार ©️®️ शक्ति प्रिया मधुप अनुभूति * साची कहूं तुमसे * * सन्दर्भ : विचार : माया. शक्ति : रितु सिंह : छाया. * संसार की सबसे शक्तिशाली गर्जना मौन है जिसके सत्य को सिद्ध करने के लिए प्रमाण की आवश्यकता नहीं पड़ती * @ शक्ति.शालिनी मधुप रितु ---------- रुक्मिणीकृष्ण : जीवन दर्शन : शब्द चित्र :दृश्यम : विदर्भ डेस्क : पृष्ठ : १ / २ . ---------- प्यार : व्यवहार : संस्कार * रुक्मिणी डेस्क. * * व्यक्ति अहंकार विनाश * व्यक्ति का अहंकार जब सीमा लाँघ जाता है तो विनाश स्वयं सारथी बन कर उसके जीवन में आ जाता है * ---------- मीराकृष्ण : जीवन दर्शन : शब्द चित्र : दृश्यम : मेवाड़ : डेस्क : पृष्ठ : १ / ३ . ---------- जिंदगी एक नयी जंग है * जिम्मेदारी और काबिलियत का अन्योन्याश्रय सम्बन्ध है काबिलियत जिम्मेदारी और जिम्मेदारी काबिलियत को सुनिश्चित करती है विचार शक्ति @ जया मधुप गरिमा * हम तोड़ के निकलेंगे जंजीर समाजों की * लोग मांगते होंगे ख़ुदा से जहाँ भर की खुशियाँ मैंने तो सिर्फ़ तुम्हें मांग कर,अपनी हद ही बता दी. * विचार शक्ति @ शालिनी जया गरिमा
---------- सम्पादकीय : त्रिशक्ति : गोरी साँवरे सलोनी : गद्य संग्रह :आलेख : पृष्ठ : २ / २. ------------ नैनीताल डेस्क संपादन सत्य और उसकी प्रासंगिकता और व्यवहारिकता ------ शक्ति आलेख : २ / २ / १ * * शक्ति मूल आलेख : रिश्ते नाते * सावित्री वट सत्यवान : मूल शक्ति आलेख : पृष्ठ : २ / २ / ० . * अशोक कर्ण भूतपूर्व छायाकार : हिदुस्तान टाइम्स पटना रांची भूतपूर्व : फोटो संपादक : एजेंडा नई दिल्ली. * सह शक्ति. डॉ.रेनू गोपाल. रांची पुनः संपादित शक्ति.डॉ.सुनीता मधुप प्रिया. मति : शक्ति : भक्ति : सावित्री ने यम से मांगे : तीन विवेकशील वरदान : मति : शक्ति : भक्ति : आज सुबह की सैर के दौरान मैंने एक बेहद सुंदर और आध्यात्मिक दृश्य देखा, जिसने मेरा ध्यान पूरी तरह अपनी ओर आकर्षित कर लिया। हमारी कॉलोनी के मंदिर परिसर में स्थित बरगद के पेड़ की ओर पीले, लाल और पारंपरिक परिधानों में सजी महिलाएँ लंबी कतार में बड़े ही सौम्य अंदाज़ में जा रही थीं। उनके हाथों में सुंदर रूप से सजी हुई बांस की टोकरी थी, जिनमें पूजा सामग्री, फूल और प्रसाद रखे हुए थे। सुबह की सुनहरी किरणें उनके रंग-बिरंगे वस्त्रों पर पड़कर एक मनमोहक दृश्य प्रस्तुत कर रही थीं, जो मेरे जैसे फोटोग्राफर के लिए किसी परफेक्ट फ्रेम से कम नहीं था। इस अवसर को लेकर जिज्ञासा होने पर मेरे चचेरे भाई गोपाल ने बताया कि आज वट सावित्री व्रत है, जो विवाहित महिलाएँ अपने पति की लंबी उम्र, उत्तम स्वास्थ्य, सुख-समृद्धि और वैवाहिक जीवन की खुशहाली के लिए रखती हैं। पूजा वट वृक्ष की : अक्षय है अमरत्व, का प्रतीक : इस पूजा में बरगद का पेड़ ( वट वृक्ष ) अत्यंत महत्वपूर्ण माना जाता है क्योंकि यह अमरत्व, शक्ति और अनंत जीवन का प्रतीक है। सदियों तक जीवित रहने वाला यह वृक्ष अटूट रिश्तों का प्रतीक माना जाता है और इसे हिंदू त्रिदेव : ब्रह्मा, विष्णु और महेश का निवास स्थान भी माना जाता है। पूजा का शुभ मुहूर्त : यह पवित्र व्रत ज्येष्ठ माह की अमावस्या के दिन रखा जाता है। इस वर्ष यह शुभ अवसर शनि जयंती के साथ भी पड़ रहा है, जिससे इसका आध्यात्मिक महत्व और बढ़ गया है। पुजारियों के अनुसार आज पूजा का शुभ मुहूर्त दोपहर अपराह्न १.३७ बजे से अपराह्न ३.३७ बजे तक है। व्रत रखने वाली महिलाएँ पूरे दिन कठोर उपवास रखती हैं, कई महिलाएँ निर्जला व्रत भी करती हैं। वे पारंपरिक वस्त्र पहनती हैं, आभूषण और मेहंदी से स्वयं को सजाती हैं तथा बरगद के पेड़ के पास एकत्र होकर फल, फूल और पूजा सामग्री अर्पित करती हैं। वे श्रद्धा और समर्पण के प्रतीक स्वरूप पेड़ के चारों ओर परिक्रमा करते हुए लाल या पीले धागे भी बांधती हैं।
सत्यवान की मृत्यु के निर्धारित दिन सावित्री ने बरगद के पेड़ के नीचे पूजा की, जबकि सत्यवान जंगल में लकड़ी काटने गए। भविष्यवाणी के अनुसार वे बेहोश होकर सावित्री की गोद में प्राण त्याग देते हैं। जब यमराज उनकी आत्मा लेने आए, तो सावित्री निडर होकर उनके पीछे चल पड़ीं। सावित्री की बुद्धिमत्ता,समर्पण और धर्मपूर्ण उत्तरों से प्रभावित होकर यमराज ने उन्हें कई वरदान दिए : सावित्री मद्र देश के राजा अश्वपति की अत्यंत रूपवती और गुणवान पुत्री थीं। मति : शक्ति पति भक्ति : सावित्री के तीन विवेकशील वरदान : सत्यवान के प्राण वापस पाने के लिए सावित्री ने यमराज से कौन-से तीन वरदान मांगे थे ? उत्तर है अपने अंधे सास-ससुर के लिए पुनः दृष्टि और उनका खोया हुआ राज्य। अपने पिता के लिए सौ पुत्रों का वरदान। सत्यवान के माध्यम से खुद के लिए सौ पुत्रों का वरदान, जिसे पूरा करने के लिए यमराज को सत्यवान के प्राण छोड़ने पड़े। सावित्री की कहानी से हमें क्या शिक्षा मिलती है? उत्तर: यह कथा पति-पत्नी के अटूट प्रेम और मृत्यु पर प्रेम की विजय को दर्शाती है। इससे हमें संकट के समय धैर्य, चतुराई और धर्म के मार्ग पर चलने की शिक्षा मिलती है। अपने साहस, बुद्धिमत्ता और अटूट समर्पण के कारण सावित्री आज भी वैवाहिक निष्ठा और शक्ति का प्रतीक मानी जाती हैं। पूजा विधि : लोकप्रियता : महिलाएँ पूरे दिन कठोर व्रत रखती हैं पारंपरिक वस्त्र, आभूषण और श्रृंगार करती हैं बरगद के पेड़ के पास फल, फूल और पूजा सामग्री अर्पित करती हैं पेड़ की परिक्रमा करते हुए पवित्र धागा बांधती हैं अंत में सावित्री-सत्यवान की कथा सुनकर पूजा संपन्न करती हैं। वट सावित्री पूजा आज भी भारत के कई राज्यों, विशेषकर बिहार, ओडिशा और उत्तर प्रदेश में अत्यंत श्रद्धा और उत्साह के साथ मनाई जाती है। यह परंपरा प्रेम, विश्वास और समर्पण की सुंदर मिसाल प्रस्तुत करती है। * स्तंभ संपादन : शक्ति. शालिनी डॉ.अनु रंजिता स्तंभ सज्जा : शक्ति. रितु सीमा अनुभूति सत्यं ब्रूयात् प्रियं ब्रूयात् : मध्यम मार्ग ही जीवन का सर्वश्रेष्ठ मार्ग है : * शक्ति. आलेख : डॉ.सुनीता रंजिता सीमा * सह शक्ति. आरती अरुण भावना * सत्यं ब्रूयात् प्रियं ब्रूयात् : सजन रे झूठ मत बोलो : साल १९६६ की राज कपूर अभिनीत फिल्म तीसरी कसम का एक प्रसिद्ध हिंदी गीत है, जिसे मुकेश ने गाया है और शंकर-जयकिशन ने संगीतबद्ध किया है। शैलेन्द्र द्वारा रचित इस गीत के बोल जीवन की नश्वरता और सच्चाई को दर्शाते हैं: ' सजन रे झूठ मत बोलो, खुदा के पास जाना है, न हाथी है, न घोड़ा है, वहाँ पैदल ही जाना है। ' इस गाने में भी सत्य और उसकी प्रासंगिकता को बतलाया गया है। लेकिन सत्य प्रदर्शित करने का भी व्यवहार वाद है। सत्यं ब्रूयात् प्रियं ब्रूयात् का अर्थ है- सत्य बोलो और प्रिय मधुर बोलो। यह श्लोक हमें सिखाता है कि सत्य हमेशा बोलना चाहिए, लेकिन वह कड़वा या अप्रिय नहीं होना चाहिए। इसका मुख्य उद्देश्य वाणी में मधुरता और सत्यता के बीच संतुलन बनाए रखना है। मध्यम मार्ग ही जीवन का सर्वश्रेष्ठ मार्ग है : सिद्धार्थ : महात्मा बुद्ध द्वारा प्रतिपादित मध्यम मार्ग अत्यधिक भोग-विलास और कठोर तपस्या की दो चरम सीमाओं के बीच का संतुलित रास्ता है। यह मार्ग अष्टांगिक मार्ग पर चलकर जीवन में संतुलन, संयम और करुणा के माध्यम से दुःख मुक्ति और ज्ञानोदय प्राप्त करने पर जोर देता है। यह सच है कि वीणा के तार को इतना न कसो कि यह टूट जाए न इतना ढ़ीला छोड़ो कि इससे सुर ही न निकले। कुछ विषयवस्तु, सिद्धान्त, दर्शन चिन्तन और विचार तथा व्यक्ति मात्र भौतिक अस्तित्व नहीं होते हैं जो काल प्रवाह में बहकर विस्मृत हो जाएं या उनके मोल और मूल्य बदल जाएं। जो मौलिक होते हैं, जिनमें संवृति सत्य और पारमार्थिक सत्य दोनों पाए जाएं,वे नश्वरता से परे होते हैं। उनमें चिरन्तनता होती है,शाश्वत मोल और मूल्य होते हैं जो आत्मतत्व की तरह नित्य होते हैं। ऐसे सत्य,शाश्वत और चिरन्तनता के प्रतीक युगपुरुषों में एक नाम तथागत सिद्धार्थ या गौतम बुद्ध या अर्हत बुद्ध का भी है।आज समस्त संसार उनका २५७० वां जन्मोत्सव मना रहा है।प्रेम,अहिंसा,करुणा, की नितान्त आवश्यकता : एक अद्भुत आगमन,अवतरण या जन्म या प्राकट्य दिवस के रूप में उन महामानव को कोटि-कोटि नमन जिनकी प्रासंगिकता आज विश्व जनमानस को सबसे ज्यादा महसूस हो रही है कि आज के संकटग्रस्त मानव जाति और जीव मात्र को उनकी प्रेम,अहिंसा,करुणा, क्षमा, त्याग,सहनशीलता, संवेदनशीलता आदि की नितान्त आवश्यकता है। शान्ति पूर्ण सह अस्तित्व : शान्ति पूर्ण सह अस्तित्व के साथ साथ पारस्परिक सहयोग एवं सद्भावना आज के युगधर्म हैं जिनकी पूर्ति की जानी जीवन की आवश्यक शर्तें हैं कि तथागत सिद्धार्थ की महाकरुणा के बगैर मानव जीवन अपने अस्तित्व में संकटापन्न हो जाएगा। तो आइए,भारतभूमि से निकले एशिया के प्रकाश स्तम्भ का स्तवन करें कि सबमें सद्बुद्धि का जन्म हो, वृद्धि हो और व्यवहार में हो। नमो तस्स भगवतो अरहतो सम्मा सम्बुद्धस्स।। * स्तंभ संपादन : शक्ति शालिनी डॉ रजनी मानसी सज्जा : शक्ति मंजिता स्वाति शिवानी ------- सम्पादकीय शक्ति पृष्ठ : २. --------- * त्रि शक्ति जीवन दर्शन सम्पादकीय पृष्ठ : २ * मौन एक प्रश्न चिन्ह हो जाए * यदि आप मौन है सफलता नहीं विफलता का प्रतीक है ----------- सम्पादकीय :त्रिशक्ति : गोरी साँवरे सलोनी :पद्य संग्रह : आलेख : पृष्ठ : २ / ३. ----------- ढाई आखर प्रेम का : प्रेम के सात रंग संपादन शक्ति.रेनू डॉ.आर के. सीमा गोरी साँवरे सलोनी : पद्य संग्रह :अनुभाग * शक्तिअनुभाग. * * शक्ति अनुभाग. * शालिनी * रूह का बंधन. जन्म का बंधन * * भाविका : सन्दर्भ : माया स्वयं : शक्ति : शालिनी : छाया * मोहब्बत ज़िस्म की होती, तो कब की मिट गई होती, ज़माने की निगाहों में, ये हसरत ढल गई होती. मगर ये इश्क़ गहरा है, ये धड़कन रूह की सुनता, तभी तो हर जनम में ये, तुम्हीं को आके है चुनता. बदल जाएं भले चेहरे, बदल जाए ये जग सारा, मगर ओझल नहीं होगा, मेरे दिल का ये ध्रुवतारा. तुम्हारी सादगी से ही, हमारी रूह का नाता, बिना देखे तुम्हें ये दिल, तनिक भी चैन न पाता. * आगे जारी * संपादन / सज्जा शक्ति रेनू सीमा अनुभूति * शक्ति रेनू शब्द मुखर कवयित्री लेखिका सम्पादिका जयपुर * अनुभाग कितना आसान है कहना भूल जाना मन की काली छाँव चेहरों की उजली धूप, कितना आसान है कहना ' हम तो बहुत सरल हृदय हैं…' और उतना ही कठिन है, उस सरलता को निभा पाना. आजकल लोग मुस्कान को मुखौटा बना लेते हैं, और मन के अंधेरे को शब्दों की रोशनी से ढक देते हैं. सामने से मीठी बातें, पीठ पीछे छोटी-छोटी चालें यही तो नया शिष्टाचार बन गया है. किसी की उपलब्धियाँ जहाँ प्रेरणा बननी चाहिए,
भाविका * माँ तुमने मुझे ' मैं ' बनाया * जब-जब दुनिया ने कहा - ' लड़की है… इतना क्या उड़ना ?' तब-तब मेरी माँ ने मेरे कंधों पर अपने विश्वास के पंख रख दिए… उस दौर में, जब बेटियों के सपनों पर घर की चौखटें रख दी जाती थीं, मेरी माँ ने मेरे हाथ में किताब दी, आँखों में हौसला दिया, और कहा - ' जा… शक्ति : अनु : छाया. * तेरी मंज़िल तेरा इंतज़ार कर रही है.' मैं जब पहली बार अकेले घर से निकली थी, तो माँ की आँखों में डर भी था, पर उस डर से बड़ा उनका विश्वास था मुझ पर… उन्होंने अपने आँसू छुपाकर मेरे सपनों को मुस्कुराना सिखाया. लोग कहते थे - ' इतनी खुली छूट मत दो बेटी को…' पर मेरी माँ ने समाज की आवाज़ से ज़्यादा मेरे सपनों की धड़कन सुनी. * अनुभाग मेरी हर जीत में मेरी माँ आज जो मंचों पर मेरे शब्द गूंजते हैं, जो लोग मेरे नाम को पहचानते हैं, जो मेरी कलम सम्मान पाती है…....... उस हर उपलब्धि के पीछे मेरी माँ की अनगिनत दुआएँ खड़ी हैं। मेरी हर जीत में उनकी अधूरी नींदें शामिल हैं, मेरी हर मुस्कान में उनकी चुपचाप की गई प्रार्थनाएँ… माँ… तुमने सिर्फ जन्म नहीं दिया मुझे, तुमने मुझे हर डर से लड़ना, हर आँधी में खड़ा रहना, और गिरकर फिर उठना सिखाया. आज मदर्स डे पर मैं बस इतना कहना चाहती हूँ अगर मैं ' रेनू शब्दमुखर ' बनी हूँ, तो उसकी जड़ में मेरी माँ का विश्वास, मेरे पिता का संस्कार और उनके संघर्षों का आशीर्वाद है… माँ… तुम मेरी पहली गुरु हो, पहली ताकत हो, और मेरी हर सफलता की सबसे खूबसूरत वजह हो… * शक्ति. रेनू ‘शब्दमुखर’ जयपुर *संपादन / सज्जा शक्ति शालिनी सीमा अनुभूति * ग़ज़ल * डॉ.आर के दुबे चलो अच्छा हुआ ख्वाबों में आते हो. ग़जल : सन्दर्भ : माया शक्ति : रितु : छाया. * चलो अच्छा हुआ ख्वाबों में आते हो
कभी अपना तू सपना तो दिखाते हो.
तेरे नजरों ने कुछ आलम हसीं देखें
शहर में मेरे भी दिल तू बसाते हो.
मिटाते हो कभी रातों की तन्हाई
कभी बाहों में मेरे जब समाते हो.
अगर दिल की तूं गलियों में जो खोते हो
तो मुझको हमसफ़र कहके बुलाते हो.
सफर में सपनों के साथी बने रहना
हकीकत में कभी भी तो आ जाते हो. * डॉ.आर के दुबे संपादक लेखक गीतकार ग़जल कार
* संपादन / सज्जा शक्ति. डॉ रजनी सीमा अनुभूति * ------------- राधिकाकृष्णरुक्मिणी : आज का गीत : जीवन संगीत :भजन : पृष्ठ : ३. ----------- संपादन शक्ति. डॉ अनु मीना रितु नैनीताल डेस्क. * फिल्म : सत्यम शिवम सुंदरम .१९७८ सितारे : जीनत.शशि कपूर. गाना : रंग महल के दस दरवाजें न जाने कौन सी खिड़की खुली थी सैया निकस गए मैं न लड़ी थी गीत : पंडित नरेंद्र शर्मा. संगीत : लक्ष्मी कांत प्यारेलाल. गायिका : मन्ना दे लता. भजन सुनने के लिए नीचे दिए गए लिंक को दवाएं मदर्स डे स्पेशल. १०.५.२६. फिल्म : सत्यम शिवम सुंदरम .१९७८ सितारे : पद्मिनी. जीनत. शशि कपूर. गाने : यशोमती मैया से पूछे नंदलाला राधा क्यों गोरी मैं क्यों काला गीत : पंडित नरेंद्र शर्मा. संगीत : लक्ष्मी कांत प्यारेलाल. गायिका : मन्ना दे लता. भजन सुनने के लिए नीचे दिए गए लिंक को दवाएं * फिल्म : सिलसिला. १९८१ सितारे : रेखा. अमिताभ बच्चन. जया. भजन : जो तुम तोडूं पिया मैं ना हीं तोडूं रे तोसे प्रीत तोड़ कृष्णा कौन संग ...जोड़ू रे * गीत : मीरा बाई संगीत : शिव हरि गायिका :लता मंगेशकर भजन सुनने के लिए नीचे दिए गए लिंक को दवाएं
------------- राधिकाकृष्णरुक्मिणी : शक्ति : कोलाज दीर्घा : पृष्ठ : ४. -------------- संपादन शक्ति.प्रिया मीना रितु ---------- राधिकाकृष्णरुक्मिणी : शक्ति :फोटो दीर्घा : पृष्ठ :७. --------- संपादन शक्ति. रितु दीप्ती इशा नैनीताल डेस्क. *
------------- राधिकाकृष्णरुक्मिणी : शक्ति : कला दीर्घा : पृष्ठ : ५ . ----------- संपादन शक्ति.मंजिता सीमा रंजिता चंडीगढ़ डेस्क. *
* --------- गीता ज्ञान : महाभारत : मुझे भी कुछ कहना है : आभार : पृष्ठ :९. ---------- * संपादन शक्ति. रेनू डॉ.आर के.सीमा * गीता : अध्याय २ : सांख्य योग का श्लोक ५६ * दुःखेष्वनुद्विग्नमनाः सुखेषु विगतस्पृहः। वीतरागभयक्रोधः स्थितधीर्मुनिरुच्यते ॥ ५६ ॥ * भावार्थ श्रीमद्भगवद् गीता के दूसरे अध्याय सांख्य योग के श्लोक ५६ में भगवान श्रीकृष्ण ने स्थिर बुद्धि स्थितप्रज्ञ वाले व्यक्ति के गुणों का वर्णन किया है। इसके अनुसार, जो मनुष्य दुखों से विचलित नहीं होता, सुख की इच्छा नहीं रखता और जो आसक्ति, भय व क्रोध से मुक्त होता है, वह बुद्धिमान साधक कहलाता है। * हरि खिलावे हरि को * बाल कृष्ण : छाया * सज्जन : साथ : शक्ति * * सन्दर्भ विचार : प्रयुक्त : माया भुवन जोशी : ( सोना सज्जन साधु जन ) : नैनीताल : छाया. * जो शपथ, संवाद, समय, से दूर हो गए वो क्यों कर मेरे अपने निस्सार हो गए माधव ?.... बोलो न ? * विचार शक्ति प्रिया मधुप अनुभूति * कृष्ण कहें मत सोच तू क्या है विधि का विधान नीयत कर लें अपने करम की फल देंगे कभी भगवान * श्री कृष्ण : चेदी नरेश : शिशुपाल : प्रसंग : साभार दृश्यम : सार्वजनिक अपमान : रणछोड़ है तू ,छलिया * ©️®️M.S.Media. ----------- मुझे भी कुछ कहना है : ढ़ाई अक्षर प्रेम का : पृष्ठ :९ / २. ----------- संपादन शक्ति. शालिनी प्रिया मधुप * * विचार : शब्द चित्र : सुनीता : कृति : माया : मधुप : साल : १९९२. स्केच : छाया. * मुण्डे मुण्डे मतिर्भिन्ना * जिंदगी में की गई आपकी आलोचनाएं, ' ना ', दुःख झूठ फ़रेब , कहीं न कहीं आपको मजबूत ही बनाती है मानो या ना मानो यह सच है * विचार शक्ति @ प्रिया मधुप अनुभूति * ---------- ढ़ाई अक्षर प्रेम का : पृष्ठ :९ / २. ------------- * शक्ति प्रिया मधुप अनुभूति प्रस्तुति देर के बाद ये समझे है मुहब्बत क्या है अब हमें चाँद के झूमर की जरुरत क्या है ? * सायरा : सुनील दत्त : पड़ोसन : तराने * तेरी नीली नीली आँखों के दिल पर तीर चल गए * * फिल्म : अनुराग : प्रकृति : प्रेम : तराने : सुन री पवन बहे पुरवैया : मौसमी चटर्जी *शॉर्ट रील : प्रेम कहानी : पर्वत : रिमझिम : सावन झूम के पर्वत पे रिमझिम जब आता है सावन मेरी पसंद : अनुभूति मीना भारती * शॉर्ट रील : ये क्या हुआ कैसे हुआ कब हुआ ? फिल्म : अमरप्रेम : साभार : अभिनीत : राजेश खन्ना * चिट्ठियाँ हो तो हर कोई बांटे भाग न बांटे कोई सजनवा बैरी हो गए हमार : शॉर्ट रील साभार : राज कपूर : तीसरी कसम. गीत कार : शैलेन्द्र. संगीत कार : शंकर जयकिशन. गायक : मुकेश. * दृश्यम : लाख मना ले दुनियाँ साथ न ये छूटेगा आके मेरे हाथों में हाथ न ये छूटेगा : फ़िल्म : गाइड * * ------- आभार : पृष्ठ :९ / ३. ------- संपादन शक्ति.माधवी सीमा प्रिया. * राधिकाकृष्णरुक्मिणी पत्रिका : के पृष्ठ निर्माण में सहयोग अर्थ के लिए हम समस्त देवशक्ति मीडिया परिवार आर्य डॉ.संतोष कुमार को साधुवाद देते हैं. Times Media Powered * --------- Shakti Editorial. English Page : 2 ------------- Chief Editor. Chandigarh Desk. * Shakti. Dr.Anuradha. Chandigarh. Arya.Er. Manish. IITian.USA. Shakti.Nikita. Australia. * * ---------- Tri Shakti : Vibes : English : Page : 5 ------------ Editor. Shakti. Priya Ranjita Seema. Darjleeng Desk. * * Thought Related : Maya : Shakti : Ritu Madhup Chhaya. * Anger and Ego are the biggest enemies of ourselves that prevent us from making and drawing the correct decisions. * The right words at the right time can heal more than medicines. * the world within you. * Shakti vibes @ Shakti. Shalini Dr. Sunita Renu ----------- Radhika : Krishna : Rukmini : Photo Gallery. Page : 6 --------------- Editor. Shakti. Bharti Latika Lakshika Joshi Nainital Desk. ---------- Visuals News : News : Editorial Page : 7 ---------- Shakti. Dr. Anuradha Priya Seema. Darjleeng Desk. * ---------- Visual Photos : News : Editorial Page : 7 ---------- Shakti. Dr. Anuradha Priya Seema. Darjleeng Desk. *
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