Radhika : Krishna : Rukmini : Darshan : Patrika.11.V2.S5.
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Shakti Project.
कृण्वन्तो विश्वमार्यम.
In association with.
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Pratham Media.
Times Media.
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Radhika Krishna Rukmini.
Darshan.Patrika.
Number.12.Volume : 2. Series : 5.
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https://drmadhuptravel.blogspot.com/2026/04/radhika-krishna-rukmini-darshan_30.html
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राधिका कृष्ण रुक्मिणी दर्शन : ११.
प्यार.व्यवहार.संस्कार.
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| * वृन्दावन पी जी मुंबई : समर्थित : शक्ति कृति :पत्रिका आवरण पृष्ठ : राधिका कृष्ण रुक्मिणी दर्शन : ११. *
वृन्दावन पी जी मुंबई : समर्थित : शक्ति कृति : दैनिक आवरण पृष्ठ राधिका कृष्ण रुक्मिणी दर्शन : ११.दैनिक में जाने के लिए नीचे दिए गए लिंक को दवाएं https://drmadhuptravel.blogspot.com/2026/05/radhika-krishna-rukmini-darshan.html * वृन्दावन पी जी : शक्ति अंजलि आर्य सुभाष : नवी मुंबई समर्थित. ![]() |
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सह वायरलेस प्राइवेट लिमिटेड : मार्केट रिसर्च : मुंबई : शक्ति.ज्योति.आर्य.नरेंद्र.समर्थित.
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राधिकाकृष्णरुक्मिणी दर्शन : ११.
पत्रिका / दैनिक अनुभाग..
तिथि : १६ .०५.२०२६.
विक्रम संवत : २०८३.शक संवत : १९४८ .
विक्रम संवत : २०८३.शक संवत : १९४८ .
दिन : शनि वार.
शक्ति.दिवस.मूलांक : ७.
ज्येष्ठ : कृष्ण पक्ष :अमावस्या.
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राधिकाकृष्णरुक्मिणी.दर्शन : विषय सूची : पृष्ठ : ०
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शक्ति. विचार धारा.
अनुभाग : १
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*
त्रिशक्ति.
प्रेम : प्रकृति.पृष्ठ : ०.
*
राधिकाकृष्ण: प्रेम प्रकृति. दर्शन : नैनीताल डेस्क : पृष्ठ : ० / १.
रुक्मिणीकृष्ण. प्रेम प्रकृति. दर्शन : आज : नैनीताल डेस्क : पृष्ठ :० /२.
मीराकृष्ण : प्रेम प्रकृति. दर्शन : मेवाड़ डेस्क : पृष्ठ ० / ३ .
*
त्रिशक्ति.
जीवन : दर्शन.
*
त्रि शक्ति : विचार धारा : पृष्ठ : १.
राधिकाकृष्ण : जीवन दर्शन : दृश्यम : शब्द चित्र : वृन्दावन.डेस्क : पृष्ठ : १ / १.
रुक्मिणीकृष्ण :जीवनदर्शन : दृश्यम : शब्द चित्र : विदर्भ डेस्क: पृष्ठ : १ / २.
मीराकृष्ण : जीवन दर्शन : शब्द चित्र : मेवाड़ डेस्क.पृष्ठ १ /३.
*
सम्पादकीय शक्ति.
अनुभाग : २
*
राधिकाकृष्णरुक्मिणी : सम्पादकीय शक्ति : पृष्ठ :२.
सम्पादकीय शक्ति. समूह. नवशक्ति.विचार धारा : अंततः : पृष्ठ :२/ १.
सम्पादकीय : त्रिशक्ति : गोरी साँवरे सलोनी : गद्य संग्रह : आलेख : पृष्ठ : २ / २.
सम्पादकीय :त्रिशक्ति : गोरी साँवरे सलोनी :पद्य संग्रह : आलेख : पृष्ठ : २ / ३.
शक्ति दर्शन
आलेख विषय वस्तु : अनुभाग : ३.
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राधिकाकृष्णरुक्मिणी : आज का गीत : जीवन संगीत :भजन : पृष्ठ : ३.
राधिकाकृष्णरुक्मिणी : शक्ति : कोलाज दीर्घा : पृष्ठ : ४.
राधिकाकृष्णरुक्मिणी : शक्ति : कला दीर्घा : पृष्ठ : ५ .
दिन विशेष : आज का पंचांग : राशि फल : पृष्ठ : ६.
राधिकाकृष्णरुक्मिणी : शक्ति : फोटो दीर्घा : पृष्ठ :७.
राधिकाकृष्णरुक्मिणी : समसामयिकी.समाचार : दृश्यम दिन विशेष : पृष्ठ : ८.
गीता ज्ञान : मुझे भी कुछ कहना है : आभार : पृष्ठ :९.
*
प्रेम प्रकृति.
*
महाशक्ति मीडिया
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राधिकाकृष्ण: प्रेम प्रकृति दर्शन : नैनीताल डेस्क : पृष्ठ : ० / १.
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राधिका डेस्क.
राधाकृष्ण मंदिर.मुक्तेश्वर.नैनीताल.
संपादन
शक्ति.डॉ.अनु मधुप प्रिया.
*
*राधिका कृष्णे हृदयम, शांतिः भवेत.
*
सन्दर्भ : विचार : माया.
शक्ति : राधिका कृष्ण : छाया.
*
आस्था ईश्वर कर्म .
*
सन्दर्भ : विचार : माया.
माधव : छाया.
*
मुझको कहाँ ढूँढे रे बन्दें
मैं तो तेरे पास में
*
जीवन का नहीं स्वयं के जीने का अर्थ खोजिए
अपने अन्तर्मन के सच में ही पाप पुण्य : सुख दुःख , भला बुरा सब
कुछ मिल जाएगा
*
शक्ति. डॉ. सुनीता सीमा रंजिता
*
आस्था ईश्वर परिस्थितियां.
*
*
सन्दर्भ विचार: शक्ति सुनीता : कृति माया.
मधुप : साल २००१ : स्केच : छाया.
*
ये जो जिंदगी है कभी ख़ुशी है कभी गम
*
जो भाव कारण तुम्हें आनंदित करे, प्रसन्न
करें.... वह एक सत्य हैं लेकिन जिस ना से तुम्हें जिंदगी का
समृद्ध पृथक अनुभव हो वह भी जीवन का सतत सम्भावी यथार्थ है, माधव
*
तेरा मेरा साथ रहे धूप हो छाया हो
जिसने अपने जीवन में अपनों के लिए सहन , समझ और शब्द
की शक्ति को भली भांति समझा, परखा ,और उतारा
साथ सफलता और ख़ुशी सदैव उसके संग होगी
*
विचार शक्ति @ प्रिया मधुप अनुभूति
*
बीते कल की गरिमा सुनहरे कल के नव निर्माण की दृष्टि
वर्तमान का लक्ष्य भेदी निरंतर कर्म ही सार्थक जीवन का सत्य है...प्रिय
*
हम तुमसे न कुछ कह पाए
तुम हमसे न कुछ कह पाए
*
*
सन्दर्भ : विचार : माया.
शक्ति : रितु :छाया.
*
जिंदगी के सफ़र में गुजर जाते है जो मकां
फ़िर नहीं आते
*
देखते देखते जिंदगी में सबकुछ गुजर तो जाता है
लेकिन सब भुलाया नहीं जा सकता.
*
लगता है ऐसे
*
मृत्यु पीड़ा दायी है ' लेकिन प्रेम में वियोग की पीड़ा उससे भी अधिक,है न ? माधव !
क्योंकि मृत्यु में तो अंत निश्चित है लेकिन विरह में अंतहीन पीड़ा अनिश्चित
*
विचार @ शक्ति.अनुभूति मधुप रितु
बहारें फ़िर भी आयेंगी
*
*
सन्दर्भ : विचार : माया.
शक्ति : रितु :छाया.
*
बहारें फ़िर भी आयेंगी.
*
कभी कभी किसी की हल्की परवाह बहुत कुछ
बिखरने से बचा देती है
*
वक्त तू कितना भी परेशान कर ले हमें
लेकिन याद रख किसी मोड़ पर
तुझे भी बदल देंगे हम..अपने रहमो करम से एक दिन
*
विचार @ शक्ति. सीमा रंजीता अनुभूति
*
सही इंसान, सही समय, सही सम्मान
अन्यथा न समय, न परिस्थितियां, न उपलब्ध रहें इंसान
*
हम तुमको न समझा पाए
कभी ..नहीं अक्सर हम समझ नही पाते हैं,
और कभी अधिकतर हम समझा नहीं पाते हैं …
बेहतर है समझाने से ज्यादा हम स्वयं ही समझ जाए
*
विचार @ शक्ति. सीमा रंजीता अनुभूति
*
कहीं दूर जब दिन ढल जाए
*
*
सन्दर्भ : विचार : माया.
शक्ति : प्रिया : छाया.
*
संघर्ष , विवाद निरंतर की पीड़ा उपहास
फीकी हँसी फिर भी बची जीने की आस
वो ठीक था जो होगा वह ठीक ही होगा...
विचार @ शक्ति प्रिया मधुप अनुभूति
दार्जलिंग
*
कर्म ही धर्म और ईश्वर में आस्था
विषम से विषम समय और परिस्थितियों में भी मार्ग
निकल ही आएगा
विचार शक्ति @ रितु मधुप प्रिया
*
कैसे जीत लेते है लोग दिल किसी का
*
लोग कहते हैं कुछ समय स्वयं के लिए भी दें
क्या सोना सज्जन, साध्वी, दिव्य शक्तियों के लिए जीते हुए
अपने स्वयं का स्वार्थ सिद्ध नहीं होता है प्रिय ?
*
विचार शक्ति @ शालिनी मधुप रितु
*
*
सन्दर्भ : विचार : माया.
शक्ति : रितु :छाया.
*
धरम करम और ईमान
*
कुछ पाने के लिए जरूरी नही कि जीवन में आपाधापी व भागम भागी हो ,
बहुत सी चीजें ठहरने, धैर्य पूर्वक ठहरने,सोचने व कर्म करने मात्र से भी प्राप्त हो जाती हैं
जैसे - सुकून,सफलता और परम आनन्द....
*
तुम्हारी नीति से ही तुम्हारी नियति सुनिश्चित है, प्रिय
किसी के लिए यदि नेक न कर सकें तो बुरा तो किसी के
लिए कभी भी मत करें
*
शोध विचार @ शक्ति.डॉ.राखी मधुप रेनू
*
अपने जीवन की उलझन को कैसे मैं सुलझाऊँ
*
जो झूठे रस्मों , रिवाजों, सामाजिक बंधनों में उलझ कर रह गए
जो दुनियाँ के लिए जीते है वो तुम्हारे लिए कहाँ रह गए ?
*
शोध विचार शक्ति @ प्रिया मधुप रितु
*
--------- रुक्मिणीकृष्ण : प्रकृति प्रेम : दृश्यम : आज : पृष्ठ : ० / १. ---------- राधाकृष्ण मंदिर.मुक्तेश्वर. नैनीताल डेस्क संपादन शक्ति.रेनू मधुप प्रिया. |
*
शक्ति. रूक्मिणी दृश्यम : विशेष : विचार
*
प्यार : व्यवहार : संस्कार.
*
*
रुक्मिणी कृष्णे हृदयम, शांतिः भवेत
*
सन्दर्भ : विचार : माया.
शक्ति : रुक्मिणी कृष्ण : छाया.
*
ईश्वर : निमित : सम्बन्ध.
मानव : शब्द : नजदीकियां.
*
संबंधों में दूरियाँ या नजदीकियां तो मानव प्रथमतःअपने शब्दों
तत्पश्चात अपने कर्मों से ही सुनिश्चित करता है...
*
विचार @ शक्ति.सीमा मधुप अनुभूति
*
प्रकृति : प्रवृति : विरासत.
*
जिंदगी कैसी ये पहेली है
*
संघर्ष , विवाद, मतों का अंतर ही अधिकांश के जीवन का सिद्ध यथार्थ है
इस ना हाँ , समझौते, सहन और समझ के सहारे ही जन समूह की जिंदगी
चल रही है
जिंदगी एक प्रश्नपत्र जैसी हो गयी जस की तस स्वीकार्य
कुछ भी वैकल्पिक नहीं सभी प्र्श्न अनिवार्य
*
कभी कभी सम्यक विरोध को भी अपनी विरासत बनाइए ताकि अधर्म और अनर्थ सहने की
प्रवृति प्रकृति न बन जाए , प्रिय !
*
विचार @ शक्ति.शालिनी मधुप रेनू
*
तोरा मन दर्पण कहलाए
*
*
सन्दर्भ : विचार : माया.
शक्ति : मानसी : नैनीताल : छाया.
*
धैर्य व विश्वास अपने साथ रखें
प्रार्थना व कर्म करते रहें सफलता एक न एक दिन आपको वरण करेगी ही
*
स्वयं को पहचानिए यदि आप ईश्वर की सुन्दर रचना है उनका अंश है आप में
प्रयास करें ईश्वरीय गुणों को अपने भीतर समाहित करने का
बुराई तो स्वतः समाप्त हो जाएगी
*
विचार @ शक्ति. शालिनी मानसी मधुप
*
दिखना एक दिन ये कहानी बनेगी
*
*
सन्दर्भ : विचार : माया.
शक्ति : रितु सिंह: छाया.
जिंदगी कुछ भी नहीं तेरी मेरी कहानी है
कोशिश बस इतनी हो कि कहानी, रुचिकर ,मनभावन और सच्ची हो और हमारे
क़िरदार कभी न भुलाने वाले हो
विचार शक्ति.शालिनी रितु मधुप
*
मन के हारे हार है मन के जीते जीत
*
प्रश्न यह नहीं कि लोग परवाह क्यों नहीं करते
विषय इस बात का होना चाहिए कि हम उम्मीद ही क्यों रखते है
*
कौन नहीं परेशां है माधव अपनी जिंदगी में ?
सही जीने का अर्थ तो अपने आत्म संघर्ष के आत्म प्रबंधन से है
विचार @ शक्ति.शबनम मधुप अनुभूति
*
सोना सज्जन शक्ति
*यदि आप प्रसन्न हैं तो, जिंदगी निःसंदेह उत्तम है, प्रिय
और यदि आपकी वजह से ,लोग प्रसन्न है तो जिंदगी सार्थक सर्वोत्तम हैं..
*
अपने जीवन की उलझन को कैसे मैं सुलझाऊँ
*
सन्दर्भ : विचार : माया.
शक्ति : रितु सिंह : छाया.
*
प्रथमतः किसी पसंदीदा व्यक्ति के मुख से निकाले गए शब्द ,
प्रयुक्त भाषा ही तथाकथित व्यक्तित्व का आधा परिचय हैं
शेष के लिए बड़ी सूक्ष्मता से मौन रहकर उसके आम जीवन में आचार व्यवहार ,हाव भाव ,चाल चलन,
क्रिया कलाप का स्वयं दीर्घ गहन अध्ययन करें सौ फीसदी आप निष्कर्ष में होंगे
साथ निभाना है या नहीं
शोध विचार @ शक्ति शालिनी मधुप अनुभूति
*
सरल ,भोले और नादान इंसान तो जीवन के
हरेक लम्हें का आनंद उठा लेते हैं
अपने को ज़्यादा अक्लमंद समझने वाले ही हमेशा की दांव पेंच की
उलझनों में फँसे होते हैं
*
विचार शक्ति @ शालिनी मधुप रितु
प्रथम मीडिया शक्ति प्रस्तुति.
*
*
*
मीरा डेस्क.
मुक्तेश्वर डेस्क.नैनीताल .
प्रादुर्भाव वर्ष : १९७८.
संस्थापना वर्ष : २०२४. महीना :जून. दिवस : ६.
*
*
संपादन.
शक्ति.डॉ.राखी मानसी मीना.
*
मेरे तो गिरधर गोपाल दूसरों न कोय
*
क़द : क़िरदार : साया
*
क़िरदार : गुणों से होती है, बरना कद में तो
कभी इंसान से बड़ा उसका साया होता है
विचार @ शक्ति अनीता मीना गरिमा
*
भोले भाव मिले रघुराई
*
*
सन्दर्भ : विचार : माया.
शक्ति : रितु सिंह : छाया.
*
सखी वो मुझसे कह कर जाते
*
राज था, वैभव था, लक्ष्मी थी ,यशोधरा थी
राहुल था, बंधन था, फिर भी सिद्धार्थ निकल गए
आख़िर क्यों ? विचार कीजिए
*
शोध विचार @ शक्ति प्रिया मधुप रितु
*
जो तुम तोडूं पिया मैं ना हीं तोडूं रे
*
शक्ल से सोच शब्द से अनुभूति
साथ से संकल्प, सम्बन्ध व्यवहार से तब बनती है जीवन शक्ति
विचार @ शक्ति.डॉ. राखी मधुप भारती
*
सहनशीलता, सरलता और सहजता किसी भी मानवीय जीवन की अन्तर्निहित
अनमोल सम्पदा है स्वयं में इसका क्षय न हो
विश्वास रखें इसका प्रतिफल भी आपको ही मिलेगा
*
ये दुनियाँ ये महफ़िल
*
*
सन्दर्भ : विचार : माया.
शक्ति : रितु सिंह : स्केच छाया.
*
जो बिना यथोचित कारण के समय,वचन और शब्द से परे हो जाए
उसके साथ की स्थिति पर सदैव प्रश्नचिन्ह बना ही रहेगा
इसे भूले नहीं
*
तन्हाई ,ख़ामोशी बन चुकी है जिस इंसान की फ़ितरत
उसे महफ़िल, शोर शराबे दिखाबे से बड़ा ख़ौफ़ लगता है,जनाब
विचार @ शक्ति.डॉ.राखी मधुप रितु
*
जिंदगी एक नयी जंग है
*
समस्या का सामना करना ही समाधान का आरंभ है,
कदाचित समस्या देखकर पलायन करना सार्थक जीवन विकल्प तो नहीं हो सकता है
*
----------
राधिकाकृष्ण : जीवन दर्शन : शब्द चित्र : दृश्यम : वृन्दावन.डेस्क : पृष्ठ : १ / १.
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वरसाने.वृन्दावन.डेस्क.
*
संपादन
शक्ति.रितु मधुप प्रिया
*
आज का दर्शन
*
राधा का भी श्याम वो
तो मीरा का भी श्याम
*
कृष्ण : बांसुरी : सुर्दशन चक्र
*
जिंदगी एक नाटक है
हम नाटक में काम करते है
*
बिडम्बना देखिए हम कभी नाटक देखकर रोते है
और कभी किसी हक़ीक़त को देखकर कहते है
अरे ! ये सब नाटक है
*
*
सन्दर्भ : विचार : माया.
शक्ति : रितु : मधुप : छाया.
*
अपने जीवन की उलझन को
कैसे मैं सुलझाऊँ
*
जिंदगी कोई समस्या नहीं है, तेरी मेरी सूझ बूझ की एक सुन्दर कहानी पहेली है.
इसे धैर्यपूर्वक,पूर्वानुमान,व्यवहार,कर्म के साथ सार्थक जीने का आनंद लें
*
विचार ©️®️ शक्ति रितु मधुप आस्था
*
समय, सोच, और शब्द
*
*
सन्दर्भ : विचार : माया.
शक्ति : प्रिया मधुप : छाया.
*
ये है गीता का ज्ञान
एक सु करम करे एक धरम करे कौन श्रेष्ठ इंसान
जो न धर्म करे सिर्फ सु करम करें पूजे उसे भगवान
विचार ©️®️ शक्ति प्रिया मधुप अनुभूति
*
समय, सोच, और शब्द में अपभ्रंश अमूमन
मानवीय रिश्तों में दूरियां होने के कारण सिद्ध है
प्रयास कीजिए इन्हें जानने और समझने का
*
सच : समय : शक्ति.
दर्द एक संकेत है,कि आप जिंदा हैं
समस्या एक संकेत है, कि आप मजबूत हैं
प्रार्थना एक संकेत है,कि आप अकेले नहीं हैं !
विचार @ शक्ति.शालिनी प्रिया मधुप
*
साची कहूं तुमसे
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रुक्मिणीकृष्ण : जीवन दर्शन : शब्द चित्र :दृश्यम : विदर्भ डेस्क : पृष्ठ : १ / २ .
----------
प्यार : व्यवहार : संस्कार
*
रुक्मिणी डेस्क.
विदर्भ डेस्क.महाराष्ट्र.
प्रादुर्भाव वर्ष : १९७८.
संस्थापना वर्ष : १९८७.महीना : अगस्त : दिवस : ६.
*
संपादन
शक्ति.शालिनी डॉ सुनीता मधुप.
रुक्मिणी डेस्क.
विदर्भ डेस्क.महाराष्ट्र.
प्रादुर्भाव वर्ष : १९७८.
संस्थापना वर्ष : १९८७.महीना : अगस्त : दिवस : ६.
*
संपादन
शक्ति.शालिनी डॉ सुनीता मधुप.
*
जीवन दर्शन
*
अपने जीवन के कालक्रम में सुख दुःख में समभाव,
सचेत होकर अच्छे कर्म करना हमारी ज़िम्मेदारी है
समय परिस्थिति फल प्रतिफ़ल सब तुम्हारी हिस्सेदारी है
*
*
व्यक्ति अहंकार विनाश
*
व्यक्ति का अहंकार जब सीमा लाँघ जाता है तो
विनाश स्वयं सारथी बन कर उसके जीवन में आ जाता है
*
----------
मीराकृष्ण : जीवन दर्शन : शब्द चित्र : दृश्यम : मेवाड़ : डेस्क : पृष्ठ : १ / ३ .
----------
*
मीरा डेस्क.
मेवाड़ डेस्क.जयपुर.
प्रादुर्भाव वर्ष : १९८२.
संस्थापना वर्ष : १९८९. महीना : सितम्बर.दिवस : ९.
*
मेवाड़ डेस्क.जयपुर.
संपादन.
शक्ति.जया अनीता गरिमा
*
साची कहूं तुमसे
*
*
सन्दर्भ : विचार : माया.
शक्ति : रितु सिंह : छाया.
*
जब जब तू मेरे सामने आए.
*
किसी अन्य को दिया गया सम्मान एक दर्पण की भांति है,
मत भूले जितना अधिक आप दूसरे व्यक्ति को देंगे
उतना ही अधिक आपके लिए प्रत्यावर्तित मिलेगा
*
शोध विचार @ शक्ति.मंजु प्रिया भारती
*
कई सदियों से कई जन्मों से
*
प्रेम उम्र,जन्म,समय की सीमा से परे
कई सदियों से भटकने वाली स्वतंत्र मन की चाही उदात्त भावनाएं है
जिसकी फ़िर वही तलाश जारी ही रहती है
शोध विचार @ शक्ति रितु मधुप अनुभूति
*
जिंदगी एक नयी जंग है
*
जिम्मेदारी और काबिलियत का अन्योन्याश्रय सम्बन्ध है
काबिलियत जिम्मेदारी और जिम्मेदारी काबिलियत को सुनिश्चित करती है
विचार शक्ति @ जया मधुप गरिमा
*
हम तोड़ के निकलेंगे जंजीर समाजों की
लोग मांगते होंगे ख़ुदा से जहाँ भर की खुशियाँ
मैंने तो सिर्फ़ तुम्हें मांग कर,अपनी हद ही बता दी.
*
समस्या का सामना करना ही समाधान का आरंभ है,
कदाचित समस्या देखकर पलायन करना सार्थक जीवन विकल्प तो नहीं हो सकता है
*
विचार शक्ति @ जया मधुप गरिमा
*
जिंदगी का सफ़र ये है कैसा सफ़र
*
थके थके से कदम रुक के बार बार चले
दो विकल्प मंजिल की ओर बढ़ते चले या थक हार के बैठ जाए
*
विचार शक्ति @ शालिनी जया गरिमा
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सम्पादकीय शक्ति पृष्ठ : २.
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*
त्रि शक्ति संरक्षण
*
*
त्रिशक्ति
त्रिशक्ति
कार्यकारी सम्पादिका
*
मुक्तेश्वर.नैनीताल डेस्क
शक्ति.डॉ.सुनीता रंजिता मीना
*
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सम्पादकीय : त्रिशक्ति : गोरी साँवरे सलोनी : गद्य संग्रह :आलेख : पृष्ठ : २ / २.
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नैनीताल डेस्क
संपादन
सच, साथ ,प्रासंगिकता ,जीवन और उसकी व्यवहारिकता.
-----------
शक्ति आलेख : २ / २ / ० .
*
*
शक्ति मूल आलेख : रिश्ते नाते
*
सावित्री वट सत्यवान : मूल शक्ति आलेख : पृष्ठ : २ / २ / ० .
*
अशोक कर्ण
भूतपूर्व छायाकार : हिदुस्तान टाइम्स पटना रांची
भूतपूर्व : फोटो संपादक : एजेंडा नई दिल्ली.
*
सह शक्ति. डॉ.रेनू गोपाल. रांची
पुनः संपादित
शक्ति.डॉ.सुनीता मधुप प्रिया.
मति : शक्ति : भक्ति :
सावित्री ने यम से मांगे : तीन विवेकशील वरदान :
मति : शक्ति : भक्ति : आज सुबह की सैर के दौरान मैंने एक बेहद सुंदर और आध्यात्मिक दृश्य देखा, जिसने मेरा ध्यान पूरी तरह अपनी ओर आकर्षित कर लिया। हमारी कॉलोनी के मंदिर परिसर में स्थित बरगद के पेड़ की ओर पीले, लाल और पारंपरिक परिधानों में सजी महिलाएँ लंबी कतार में बड़े ही सौम्य अंदाज़ में जा रही थीं। उनके हाथों में सुंदर रूप से सजी हुई बांस की टोकरी थी, जिनमें पूजा सामग्री, फूल और प्रसाद रखे हुए थे। सुबह की सुनहरी किरणें उनके रंग-बिरंगे वस्त्रों पर पड़कर एक मनमोहक दृश्य प्रस्तुत कर रही थीं, जो मेरे जैसे फोटोग्राफर के लिए किसी परफेक्ट फ्रेम से कम नहीं था।
इस अवसर को लेकर जिज्ञासा होने पर मेरे चचेरे भाई गोपाल ने बताया कि आज वट सावित्री व्रत है, जो विवाहित महिलाएँ अपने पति की लंबी उम्र, उत्तम स्वास्थ्य, सुख-समृद्धि और वैवाहिक जीवन की खुशहाली के लिए रखती हैं।
पूजा वट वृक्ष की : अक्षय है अमरत्व, का प्रतीक : इस पूजा में बरगद का पेड़ ( वट वृक्ष ) अत्यंत महत्वपूर्ण माना जाता है क्योंकि यह अमरत्व, शक्ति और अनंत जीवन का प्रतीक है। सदियों तक जीवित रहने वाला यह वृक्ष अटूट रिश्तों का प्रतीक माना जाता है और इसे हिंदू त्रिदेव : ब्रह्मा, विष्णु और महेश का निवास स्थान भी माना जाता है।
पूजा का शुभ मुहूर्त : यह पवित्र व्रत ज्येष्ठ माह की अमावस्या के दिन रखा जाता है। इस वर्ष यह शुभ अवसर शनि जयंती के साथ भी पड़ रहा है, जिससे इसका आध्यात्मिक महत्व और बढ़ गया है। पुजारियों के अनुसार आज पूजा का शुभ मुहूर्त दोपहर अपराह्न १.३७ बजे से अपराह्न ३.३७ बजे तक है।
व्रत रखने वाली महिलाएँ पूरे दिन कठोर उपवास रखती हैं, कई महिलाएँ निर्जला व्रत भी करती हैं। वे पारंपरिक वस्त्र पहनती हैं, आभूषण और मेहंदी से स्वयं को सजाती हैं तथा बरगद के पेड़ के पास एकत्र होकर फल, फूल और पूजा सामग्री अर्पित करती हैं। वे श्रद्धा और समर्पण के प्रतीक स्वरूप पेड़ के चारों ओर परिक्रमा करते हुए लाल या पीले धागे भी बांधती हैं।
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| शक्ति : रितु : मेहंदी : वट सावित्री पूजा की तैयारी |
सत्यवान की मृत्यु के निर्धारित दिन सावित्री ने बरगद के पेड़ के नीचे पूजा की, जबकि सत्यवान जंगल में लकड़ी काटने गए। भविष्यवाणी के अनुसार वे बेहोश होकर सावित्री की गोद में प्राण त्याग देते हैं। जब यमराज उनकी आत्मा लेने आए, तो सावित्री निडर होकर उनके पीछे चल पड़ीं।
सावित्री की बुद्धिमत्ता,समर्पण और धर्मपूर्ण उत्तरों से प्रभावित होकर यमराज ने उन्हें कई वरदान दिए :
सावित्री मद्र देश के राजा अश्वपति की अत्यंत रूपवती और गुणवान पुत्री थीं।
मति : शक्ति पति भक्ति : सावित्री के तीन विवेकशील वरदान : सत्यवान के प्राण वापस पाने के लिए सावित्री ने यमराज से कौन-से तीन वरदान मांगे थे ? उत्तर है अपने अंधे सास-ससुर के लिए पुनः दृष्टि और उनका खोया हुआ राज्य। अपने पिता के लिए सौ पुत्रों का वरदान। सत्यवान के माध्यम से खुद के लिए सौ पुत्रों का वरदान, जिसे पूरा करने के लिए यमराज को सत्यवान के प्राण छोड़ने पड़े। सावित्री की कहानी से हमें क्या शिक्षा मिलती है? उत्तर: यह कथा पति-पत्नी के अटूट प्रेम और मृत्यु पर प्रेम की विजय को दर्शाती है। इससे हमें संकट के समय धैर्य, चतुराई और धर्म के मार्ग पर चलने की शिक्षा मिलती है।
अपने साहस, बुद्धिमत्ता और अटूट समर्पण के कारण सावित्री आज भी वैवाहिक निष्ठा और शक्ति का प्रतीक मानी जाती हैं।
पूजा विधि : लोकप्रियता : महिलाएँ पूरे दिन कठोर व्रत रखती हैं पारंपरिक वस्त्र, आभूषण और श्रृंगार करती हैं बरगद के पेड़ के पास फल, फूल और पूजा सामग्री अर्पित करती हैं पेड़ की परिक्रमा करते हुए पवित्र धागा बांधती हैं अंत में सावित्री-सत्यवान की कथा सुनकर पूजा संपन्न करती हैं।
वट सावित्री पूजा आज भी भारत के कई राज्यों, विशेषकर बिहार, ओडिशा और उत्तर प्रदेश में अत्यंत श्रद्धा और उत्साह के साथ मनाई जाती है। यह परंपरा प्रेम, विश्वास और समर्पण की सुंदर मिसाल प्रस्तुत करती है।
*
स्तंभ संपादन : शक्ति. शालिनी डॉ.अनु रंजिता
स्तंभ सज्जा : शक्ति. रितु सीमा अनुभूति
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शक्ति आलेख : २ / २ / ० .
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सत्यं ब्रूयात् प्रियं ब्रूयात् :
मध्यम मार्ग ही जीवन का सर्वश्रेष्ठ मार्ग है :
*
शक्ति. आलेख : डॉ.सुनीता रंजिता सीमा
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सह शक्ति. आरती अरुण भावना
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सजन रे झूठ मत बोलो :
सत्यं ब्रूयात् प्रियं ब्रूयात् : सजन रे झूठ मत बोलो : साल १९६६ की राज कपूर अभिनीत फिल्म तीसरी कसम का एक प्रसिद्ध हिंदी गीत है, जिसे मुकेश ने गाया है और शंकर-जयकिशन ने संगीतबद्ध किया है। शैलेन्द्र द्वारा रचित इस गीत के बोल जीवन की नश्वरता और सच्चाई को दर्शाते हैं। यथार्थ भी है। हम सबों को सच सुनना और कहना पसंद है। ' सजन रे झूठ मत बोलो, खुदा के पास जाना है, न हाथी है, न घोड़ा है, वहाँ पैदल ही जाना है। ' इस गाने में भी सत्य और उसकी प्रासंगिकता को बतलाया गया है। परम पिता इसका अर्थ भी समझते थे गाते भी थे।
लेकिन सत्य प्रदर्शित करने का भी व्यवहारवाद है। एक तरीका है। शब्दों का चयन सूझ बूझ से हो। समय, काल, परिस्थिति के अनुसार बोला जाए। सत्य को यथासंभव मधुर तरीक़े से बोले। आपने एक प्रसिद्द कहावत सुनी ही होगी। सत्यं ब्रूयात् प्रियं ब्रूयात् का अर्थ है - सत्य बोलो और प्रिय मधुर बोलो। यह श्लोक हमें सिखाता है कि सत्य हमेशा बोलना चाहिए, लेकिन वह कड़वा या अप्रिय नहीं होना चाहिए। इसका मुख्य उद्देश्य वाणी में मधुरता और सत्यता के बीच संतुलन बनाए रखना है।
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| द्रौपदी : चीर हरण |
अंधे का बेटा अंधा, महाभारत के कई निमित्त कारणों में द्रौपदी के दुर्योधन को कहे तथाकथित सच के विनाशकारी परिणाम को भी न भुलाए।
मध्यम मार्ग ही जीवन का सर्वश्रेष्ठ मार्ग है : सिद्धार्थ : महात्मा बुद्ध द्वारा प्रतिपादित मध्यम मार्ग अत्यधिक भोग-विलास और कठोर तपस्या की दो चरम सीमाओं के बीच का संतुलित रास्ता है।
यह मार्ग अष्टांगिक मार्ग पर चलकर जीवन में संतुलन, संयम और करुणा के माध्यम से दुःख मुक्ति और ज्ञानोदय प्राप्त करने पर जोर देता है। यह सच है कि वीणा के तार को इतना न कसो कि यह टूट जाए न इतना ढ़ीला छोड़ो कि इससे सुर ही न निकले।
कुछ विषयवस्तु, सिद्धान्त, दर्शन चिन्तन और विचार तथा व्यक्ति मात्र भौतिक अस्तित्व नहीं होते हैं जो काल प्रवाह में बहकर विस्मृत हो जाएं या उनके मोल और मूल्य बदल जाएं। जो मौलिक होते हैं, जिनमें संवृति सत्य और पारमार्थिक सत्य दोनों पाए जाएं,वे नश्वरता से परे होते हैं। उनमें चिरन्तनता होती है,शाश्वत मोल और मूल्य होते हैं जो आत्मतत्व की तरह नित्य होते हैं। ऐसे सत्य,शाश्वत और चिरन्तनता के प्रतीक युगपुरुषों में एक नाम तथागत सिद्धार्थ या गौतम बुद्ध या अर्हत बुद्ध का भी है।आज समस्त संसार उनका २५७० वां जन्मोत्सव मना रहा है।
प्रेम,अहिंसा,करुणा, की नितान्त आवश्यकता : एक अद्भुत आगमन,अवतरण या जन्म या प्राकट्य दिवस के रूप में उन महामानव को कोटि-कोटि नमन जिनकी प्रासंगिकता आज विश्व जनमानस को सबसे ज्यादा महसूस हो रही है कि आज के संकटग्रस्त मानव जाति और जीव मात्र को उनकी प्रेम,अहिंसा,करुणा, क्षमा, त्याग,सहनशीलता, संवेदनशीलता आदि की नितान्त आवश्यकता है।
शान्ति पूर्ण सह अस्तित्व : शान्ति पूर्ण सह अस्तित्व के साथ साथ पारस्परिक सहयोग एवं सद्भावना आज के युगधर्म हैं जिनकी पूर्ति की जानी जीवन की आवश्यक शर्तें हैं कि तथागत सिद्धार्थ की महाकरुणा के बगैर मानव जीवन अपने अस्तित्व में संकटापन्न हो जाएगा।
तो आइए,भारतभूमि से निकले एशिया के प्रकाश स्तम्भ का स्तवन करें कि सबमें सद्बुद्धि का जन्म हो, वृद्धि हो और व्यवहार में हो। नमो तस्स भगवतो अरहतो सम्मा सम्बुद्धस्स।।
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स्तंभ संपादन : शक्ति शालिनी डॉ रजनी मानसी
सज्जा : शक्ति मंजिता स्वाति शिवानी
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सम्पादकीय :त्रिशक्ति : गोरी साँवरे सलोनी :पद्य संग्रह : आलेख : पृष्ठ : २ / ३.
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ढाई आखर प्रेम का : प्रेम के सात रंग
संपादन
शक्ति.रेनू डॉ.आर के. सीमा
गोरी साँवरे सलोनी : पद्य संग्रह :अनुभाग
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शक्ति अनुभाग.
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शालिनी
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रूह का बंधन.
जन्म का बंधन
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भाविका : सन्दर्भ : माया स्वयं : शक्ति : शालिनी : छाया.
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मोहब्बत ज़िस्म की होती,
तो कब की मिट गई होती,
ज़माने की निगाहों में,
ये हसरत ढल गई होती.
मगर ये इश्क़ गहरा है,
ये धड़कन रूह की सुनता,
तभी तो हर जनम में ये,
तुम्हीं को आके है चुनता.
बदल जाएं भले चेहरे,
बदल जाए ये जग सारा,
मगर ओझल नहीं होगा,
मेरे दिल का ये ध्रुवतारा.
तुम्हारी सादगी से ही,
हमारी रूह का नाता,
बिना देखे तुम्हें ये दिल,
तनिक भी चैन न पाता.
*
भाविका अनुभाग
*
हमारी दास्तां फिर भी
हवाएं गुनगुनाएंगी.
*
*
भाविका : सन्दर्भ : माया स्वयं : शक्ति : शालिनी : छाया.
*
लकीरें दूर कर देंगी,
तो क्या ये साथ छूटेगा ?
जो धागा रूह से बाँधा,
भला कैसे वो टूटेगा ?
समय की धूप में अक्सर,
ये काया टूट जाती है,
मगर जो रूह की खुशबू,
वो कब दामन छुड़ाती है ?
तू मेरे पास हो या दूर,
मगर मेरे ही अंदर है,
तेरी यादों का मेरे दिल में,
लहराता समंदर है.
फ़ना हो जाएगी दुनिया,
मिटेंगे ज़िस्म के साए,
मगर ये इश्क़ सदियों तक
नई तारीख लिख जाए.
मिटेगा नाम सदियों का,
बहारें रूठ जाएंगी,
हमारी दास्तां फिर भी,
हवाएं गुनगुनाएंगी.
*
संपादन / सज्जा
शक्ति. रेनू सीमा अनुभूति
*
*
शक्ति रेनू शब्द मुखर
कवयित्री लेखिका सम्पादिका
जयपुर
*
अनुभाग
कितना आसान है कहना
भूल जाना
मन की काली छाँव
चेहरों की उजली धूप,
कितना आसान है कहना
' हम तो बहुत सरल हृदय हैं…'
और उतना ही कठिन है,
उस सरलता को निभा पाना.
आजकल लोग मुस्कान को मुखौटा बना लेते हैं,
और मन के अंधेरे को
शब्दों की रोशनी से ढक देते हैं.
सामने से मीठी बातें,
पीठ पीछे छोटी-छोटी चालें यही तो नया शिष्टाचार
बन गया है.
किसी की उपलब्धियाँ जहाँ प्रेरणा बननी चाहिए,
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भाविका
*
माँ तुमने मुझे ' मैं ' बनाया
*
जब-जब दुनिया ने कहा -
' लड़की है…
इतना क्या उड़ना ?'
तब-तब मेरी माँ ने
मेरे कंधों पर
अपने विश्वास के पंख रख दिए…
उस दौर में,
जब बेटियों के सपनों पर
घर की चौखटें रख दी जाती थीं,
मेरी माँ ने
मेरे हाथ में किताब दी,
आँखों में हौसला दिया,
और कहा -
' जा…
शक्ति : अनु : छाया
*
*
तेरी मंज़िल तेरा इंतज़ार कर रही है.'
मैं जब पहली बार
अकेले घर से निकली थी,
तो माँ की आँखों में डर भी था,
पर उस डर से बड़ा
उनका विश्वास था मुझ पर…
उन्होंने अपने आँसू छुपाकर
मेरे सपनों को मुस्कुराना सिखाया.
लोग कहते थे -
' इतनी खुली छूट मत दो बेटी को…'
पर मेरी माँ ने
समाज की आवाज़ से ज़्यादा
मेरे सपनों की धड़कन सुनी.
*
अनुभाग
मेरी हर जीत में
मेरी माँ
आज जो मंचों पर
मेरे शब्द गूंजते हैं,
जो लोग मेरे नाम को पहचानते हैं,
जो मेरी कलम सम्मान पाती है….......
उस हर उपलब्धि के पीछे
मेरी माँ की अनगिनत दुआएँ खड़ी हैं।
मेरी हर जीत में
उनकी अधूरी नींदें शामिल हैं,
मेरी हर मुस्कान में
उनकी चुपचाप की गई प्रार्थनाएँ…
माँ…
तुमने सिर्फ जन्म नहीं दिया मुझे,
तुमने मुझे हर डर से लड़ना,
हर आँधी में खड़ा रहना,
और गिरकर फिर उठना सिखाया.
आज मदर्स डे पर
मैं बस इतना कहना चाहती हूँ
अगर मैं “रेनू शब्दमुखर” बनी हूँ,
तो उसकी जड़ में
मेरी माँ का विश्वास,
मेरे पिता का संस्कार
और उनके संघर्षों का आशीर्वाद है…
माँ…
तुम मेरी पहली गुरु हो,
पहली ताकत हो,
और मेरी हर सफलता की सबसे खूबसूरत वजह हो…
*
शक्ति. रेनू ‘शब्दमुखर’
जयपुर
*संपादन / सज्जा
शक्ति. शालिनी सीमा अनुभूति
*
ग़ज़ल
*
डॉ.आर के दुबे
चलो अच्छा हुआ ख्वाबों में आते हो.
ग़जल : सन्दर्भ : माया
शक्ति : रितु : छाया.
*
चलो अच्छा हुआ ख्वाबों में आते हो
कभी अपना तू सपना तो दिखाते हो.
तेरे नजरों ने कुछ आलम हसीं देखें
शहर में मेरे भी दिल तू बसाते हो.
मिटाते हो कभी रातों की तन्हाई
कभी बाहों में मेरे जब समाते हो.
अगर दिल की तूं गलियों में जो खोते हो
तो मुझको हमसफ़र कहके बुलाते हो.
सफर में सपनों के साथी बने रहना
हकीकत में कभी भी तो आ जाते हो.
*
डॉ.आर के दुबे.
संपादक. लेखक. गीतकार. ग़जलकार.
*
संपादन / सज्जा
शक्ति.डॉ रजनी सीमा अनुभूति
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राधिकाकृष्णरुक्मिणी : आज का गीत : जीवन संगीत :भजन : पृष्ठ : ३.
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संपादन
शक्ति. डॉ. अनु मीना रितु
नैनीताल डेस्क.
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फिल्म : सत्यम शिवम सुंदरम .१९७८
सितारे : जीनत. शशि कपूर.
गाना : रंग महल के दस दरवाजें न जाने
कौन सी खिड़की खुली थी सैया निकस गए मैं न लड़ी थी
गीत : पंडित नरेंद्र शर्मा. संगीत : लक्ष्मी कांत प्यारेलाल.गायिका : मन्ना दे.लता.
भजन सुनने के लिए नीचे दिए गए लिंक को दवाएं
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मदर्स डे स्पेशल
१०.५.२६.
फिल्म : सत्यम शिवम सुंदरम.१९७८
सितारे : पद्मिनी. जीनत. शशि कपूर.
गाने : यशोमती मैया से पूछे नंदलाला
राधा क्यों गोरी मैं क्यों काला
गीत : पंडित नरेंद्र शर्मा.संगीत :लक्ष्मी कांत प्यारेलाल. गायिका : मन्ना दे लता.
भजन सुनने के लिए नीचे दिए गए लिंक को दवाएं
*
फिल्म : सिलसिला. १९८१
सितारे : रेखा. अमिताभ बच्चन. जया
भजन : जो तुम तोडूं पिया मैं ना हीं तोडूं रे
तोसे प्रीत तोड़ कृष्णा कौन संग...जोड़ू रे
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गीत : मीरा बाई संगीत : शिव हरि गायिका :लता मंगेशकर
भजन सुनने के लिए नीचे दिए गए लिंक को दवाएं
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राधिकाकृष्णरुक्मिणी : शक्ति : कोलाज दीर्घा : पृष्ठ : ४.
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संपादन
शक्ति.प्रिया मीना रितु.
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राधिकाकृष्णरुक्मिणी : शक्ति : फोटो दीर्घा : पृष्ठ :७.
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संपादन
शक्ति.रितु दीप्ती इशा
नैनीताल डेस्क.
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| बुद्ध जयंती : बुद्धम शरणम गच्छामि : कोलाज : किन्नौर : हिमाचल : शक्ति. मंजु श्रीराम आस्था |
![]() |
| * जीवन यात्रा का सुरक्षित व विश्वसनीय हमसफ़र:बिहार राज्य पथ परिवहन निगम:बिहार दर्शन :समर्थित |
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राधिकाकृष्णरुक्मिणी : शक्ति : कला दीर्घा : पृष्ठ : ५ .
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संपादन
शक्ति.मंजिता सीमा रंजिता.
चंडीगढ़ डेस्क.
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![]() |
| पर्वत के उस पार :हिमालय की गोद में एक गांव : कृति : शक्ति. विदिशा सीमा रंजिता |
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राधिकाकृष्णरुक्मिणी : समसामयिकी समाचार : दृश्यम : दिन विशेष : पृष्ठ : ८.
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संपादन
शक्ति. डॉ.रजनी मधुप प्रिया
दार्जलिंग डेस्क.
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प्रकृति के सुकुमार कवि.
सुमित्रा नंदन पंत. जयंती
२०.५.१९००
२८.१२.१९७७.
जन्म स्थान : कौसानी.
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लघु वृत चित्र : निर्माण : संपादन : आवाज़ :
लघु वृत चित्र : निर्माण : संपादन : आवाज़ :
प्रस्तुति : डॉ. मधुप
फोटोग्राफी : शक्ति प्रिया सुनीता.
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सनग्लास पॉवर के चश्में :कंप्यूटरकृत जाँच के लिए संपर्क करें:न्यू भारत ऑप्टिकल्स :९७७११ ७५ १८५.
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टाइम्स मीडिया समर्थित.
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बिहार संस्कृति : समाचार : ००.
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विश्व प्रसिद्ध ऐतिहासिक और धार्मिक : राजगीर मलमास मेला.का आयोजन.
अवधि : १७ मई से शुरू होकर १५ जून.
अयोध्या राम मंदिर : अनुकृति : विशेष चर्चा में
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शक्ति.सीमा डॉ.सुनीता रंजिता.
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नालंदा / संवाद सूत्र : आम का शाही स्नान : गुरुवार का दिन। दिनांक २८ मई मास जेष्ठ। सुबह सबेरे हम सभी आज प्राचीन मगध की प्राचीन राजधानी राजगृह में थे । जो देखा उसे लिखना भी था। शक्ति सीमा व सुनीता भी हमारे साथ थी।
इस राजगीर के मलमास मेले में आम अवाम की अनुभूति संग्रहित करने व सात धाराओं, तथा ब्रह्म कुंड में ध्यान, स्नान, पुण्य का लाभ लेने के लिए आए थे। सुबह के आठ बज रहे थे । भीड़ थी। ट्रैफिक व्यवस्था चाक चौबंद थी। जवान तैनात थे।
पता था आठ नौ बजे तक़ स्न्नान आसानी से हो जाता है। दोपहर की भीषण गर्मी में भीड़ और भी न्यून हो जाती है। शाम होते ही भीड़ अत्यधिक बढ़ जाती है।
ध्यान रहे मेला तीर्थ कुंड क्षेत्र में आपको नंगे पाँव ही जाना होगा,क्योंकि चप्पल जूता वर्जित है । सात धारा क्षेत्र में स्नान करने के पश्चात् ब्रह्म कुंड में डुबकी लगाने के पश्चात् आप बाहरी ऊपरी स्थल में बने चेंजिंग रूम में कपड़े बदल सकते हैं। और वही से निकल सकते हैं। प्रवेश और निकास के अलग अलग रास्ते हैं।
पहला शाही स्नान बुधवार को : कुंभ मेले की तरह ही ऐतिहासिक मलमास मेला का पहला शाही स्नान बुधवार को श्रद्धा, भक्ति और सनातन परंपरा के भव्य संगम के बीच संपन्न हुआ।
कुंभ और उज्जैन की तर्ज पर राजगीर में सदियों से चली आ रही शाही स्नान की परंपरा के तहत देशभर से पहुंचे साधु-संतों, महंतों, मठाधीशों और श्रद्धालुओं की टोली यहाँ पहुंची थी। सभी ने पवित्र गर्म कुंडों में आस्था की दो चार डुबकी लगाई।
पूरा कुंड तीर्थ क्षेत्र ' जय श्रीराम ' , ' हर-हर महादेव ' और संतों के जयघोष से गूंजता रहा। सुबह से ही विभिन्न अखाड़ों और धार्मिक संस्थानों के साधु-संत गाजे-बाजे, ध्वज, निशान और वाहनों के काफिले के साथ कुंड क्षेत्र पहुंचने लगे थे । सबसे पहले पास में ही गुरु नानक कुंड में शाही स्नान किया गया, जिसके बाद संतों और श्रद्धालुओं ने ब्रह्मकुंड में डुबकी लगाकर पूजा - अर्चना की।
बताते चले परंपरा के अनुसार सूबे बिहार के माननीय मुख्य मंत्री श्री सम्राट चौधरी के कर कमलों से उद्घटित राजगीर मलमास मेला बिहार के नालंदा जिले में लगने वाला एक विश्व प्रसिद्ध और ऐतिहासिक धार्मिक मेला है।
इस विशाल मेले से जुड़ी मुख्य जानकारी आयोजन की तारीखें आपको बता दें। यह मेला १७ मई से शुरू होकर १५ जून तक चलेगा। नौटंकी, थिऐटर, झूला ,दूकान आदि से सजा यह मेला पुरे एक महीने तक आकर्षण का केंद्र होगा। इस बार भी मेले में निर्मित अयोध्या के राम मंदिर की आकृति को सजीव करने वाला अनुकृति पंडाल विशेष चर्चा में है।
मलमास ' : पुरुषोत्तम मास : प्रचलित धार्मिक मान्यता यह है कि : तीन साल में एक बार आने वाले ' मलमास ' : पुरुषोत्तम मास के दौरान ऐसा माना जाता है कि ३३ करोड़ देवी - देवता राजगीर में निवास करते हैं।हिन्दू पंचांग में प्रत्येक ३ वर्षों में सूर्य वर्ष एवं चंद्र वर्ष में १ माह का अंतर हो जाता है, जिसे समायोजित करने के लिए पुरुषोत्तम मास होता है। इसे अधिकमास या मलमास भी कहा जाता है।
पौराणिक मान्यता : ऐसी मान्यता है कि मलमास के दौरान ३३ कोटि देवी - देवता राजगीर में वास करते हैं, जिस कारण मलमास या अधिमास में राजगीर नगरी को बहुत की पवित्र माना जाता है।
वायु पुराण के अनुसार सरस्वती नदी में मलमास के दौरान एक दिन का स्नान गंगा नदी में वर्ष भर के स्नान के पूण्य के बराबर होता है।
ऐसी स्थिति में देश एवं राज्य के कोने-कोने से श्रद्धालु मलमास में राजगीर आते हैं एवं पूजा-पाठ तथा यहाँ के कुंडों एवं जलधराओं में स्नान करते हैं। मलमास मेला के दौरान साधु-संतो द्वारा शाही स्नान भी किया जाता है।
पवित्र स्न्नान : ब्रह्मकुंड स्नान : यहाँ के पवित्र ब्रह्मकुंड और वैतरणी नदी में स्नान करने तथा पूजा-पाठ करने का विशेष महत्व है l मुख्य आकर्षण : ब्रह्मकुंड में सप्तधारा स्नान, भव्य महाआरती, और एक महीने तक चलने वाली सांस्कृतिक गतिविधियाँ शामिल हैं जिसमें देश विदेश से आने वाले श्रद्धालू पर्यटक पहुंचते हैं ।
राजगीर में भी ' वैतरणी ' इस जीवन के भव बाधा से पार करने की रस्म : एक पौराणिक स्थल है, जिसका संबंध हिंदू धर्म में मृत्यु के बाद पार की जाने वाली वैतरणी नदी से है। राजगीर के पवित्र मलमास मेले के दौरान यहाँ लाखों श्रद्धालु आते हैं। राजगीर की वैतरणी से जुड़ी मुख्य बातें:स्थान: यह पवित्र स्थल राजगीर के मुख्य तीर्थ क्षेत्रों में स्थित है।पौराणिक महत्व: हिंदू मान्यता के अनुसार, वैतरणी भवसागर पार करने की नदी है। यहाँ लोग वैतरणी कुंड या घाट में स्नान करते हैं और मोक्ष प्राप्ति के लिए गाय की पूंछ प्रतीकात्मक रूप से पकड़कर इस जीवन के भव बाधा से पार करने की रस्म निभाते है
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आम का शाही स्नान : राजगीर मलमास मेले में
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संपादन : शक्ति. शालिनी रेनू डॉ.रजनी अनीता
दुनिया के सबसे ऊंचे कृष्ण मंदिर किन्नौर स्थित युल्ला कांडा का ट्रैक पर्यटकों के लिए खुला
शक्ति. शालिनी प्रिया मधुप
सह शक्ति. मंजु श्री राम अनुभूति
शिमला. संवाद सूत्र : बताते चले मई के महीने में हिमाचल प्रदेश के किन्नौर जिला स्थित दुनिया के सबसे ऊंचे कृष्ण मंदिर युल्ला कांडा का ट्रैक बर्फ पिघलते ही श्रद्धालुओं,पर्यटकों के लिए खोल दिया गया है।
रोरा घाटी में ३८९५ मीटर या १२७७८ फीट की ऊंचाई पर स्थित यह दुर्गम मार्ग भारी बर्फबारी के कारण सर्दियों में बंद रहता है। झील के मध्य में मंदिर निर्मित है।
श्रद्धालु पर्यटक युल्ला खास गांव से १२ किलोमीटर की कठिन चढ़ाई पूरी कर यहां पहुंचते हैं। यह स्थान हिंदू और बौद्ध दोनों धर्मों की आस्था का संगम भी है, जहां लामा भी विशेष पूजा-अर्चना करते हैं। मंदिर परिसर से पवित्र किन्नर कैलाश की पहाड़ियों और उनकी चोटियों के स्पष्ट दर्शन होते हैं।
झील : मन्नतें और किन्नौरी टोपी :पौराणिक मान्यताओं की यदि माने , इस प्राचीन मंदिर और झील का निर्माण पांडवों ने वनवास के दौरान किया था।
इस मंदिर से जुड़ी मानवीय आस्था बड़ी ही विचित्र है। यहां की सबसे बड़ी खासियत ' किन्नौरी टोपी ' से जुड़ी परंपरा है। माना जाता है कि यदि श्रद्धालु झील में अपनी टोपी उल्टी कर तैराता है और वह बिना डूबे दूसरे किनारे पहुंच जाती है, तो उसकी मन्नत पूरी होती है।
जन्माष्टमी पर यहां ऐतिहासिक मेला : हर साल जन्माष्टमी पर यहां ऐतिहासिक मेला भी लगता है। प्रशासन ने आगाह किया है कि ऊंचाई पर ऑक्सीजन की कमी और संकरे रास्तों के कारण यह ट्रैक जोखिम भरा है, इसलिए यात्री पूरी सावधानी के साथ ही यात्रा शुरू करें।
युल्ला कांडा कैसे पहुंचे : युल्ला कांडा मंदिर पहुंचने का तरीका:सड़क मार्ग द्वारा: दिल्ली या चंडीगढ़ से शिमला पहुँचें। शिमला से, आप बस या टैक्सी द्वारा किन्नौर का जिला मुख्यालय रिकॉन्ग पिओ पहुंचना होगा। इसके बाद सीधे उर्नी गाँव तक जा सकते हैं, जो बेस कैंप है।
युल्ला कांडा ट्रेकिंग मार्ग : उर्नी या युल्ला खास गाँव से ट्रेक शुरू होता है, जो १२ किमी की चढ़ाई है। यह एक आसान से मध्यम स्तर का ट्रेक है, जिसमें लगभग ५ - ६ घंटे लग सकते हैं।
सबसे अच्छा समय : मई के मध्य से अक्टूबर के मध्य तक ट्रेकिंग के लिए सबसे अच्छा समय है।
यात्रा अवधि : आपको इस यात्रा के लिए ३ से ४ दिन का समय लेकर चलना चाहिए।
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सम्पादन सज्जा : शक्ति. शालिनी रंजीता सीमा
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समसामयिकी दृश्यम : दिन विशेष : पृष्ठ : ८.
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संपादन
शक्ति.शालिनी डॉ.अनु रंजीता.
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दृश्यम : काशी : शिव : मणिकर्णिका.
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दर्शन
कि जन्म लेना आपके भाग्य की बात है
मृत्यु आना समय की बात है
और मृत्यु के बाद दिलों में रहना यह आपके कर्मों की बात है
*
*
*
दिनांक. १६.५.२६.
विक्रम संवत : २०८३.शक संवत :१९४८.
हिंदी तिथि : ज्येष्ठ कृष्ण पक्ष अमावस्या २०८३
वट सावित्री व्रत पूजन के पावन अवसर पर
हम मीडिया शक्ति देव परिवार की तरफ़ से आप जड़ चेतन समस्त प्राणियों को हार्दिक बधाई और अनंत शिव शक्ति शुभकामनाएं
*
मुझे भी कुछ कहना है
शक्ति डॉ सुनीता नैना सीमा
*
३ मई : विश्व पत्रकारिता दिवस : विश्व हंसी दिवस २०२६.
*
आजकल : मधुप : कार्टून कोना
*
गुरु शिष्य परंपरा की सुनहरी कड़ी
विश्व हंसी दिवस २०२६ : संवाद सूत्र : कल महत्वपूर्ण दिवस था। हंसने हँसाने और ग़म भुलाने का । विश्व हंसी दिवस २०२६ एक वैश्विक उत्सव है जो हंसी के माध्यम से खुशी, सकारात्मकता और खुशहाली फैलाने के लिए समर्पित है।
मई के पहले रविवार को मनाया जाने वाला इस विशेष दिवस ३ मई, २०२६ को कई एक के जीवन में प्रसन्नता अचानक आई। चेहरे पर हँसी आ गई। मन मयूर खिल उठा। हम थिरकने लगे। विशेषतः हम सभी टीटू एंड छोटू समूह की कृष्ण भक्ति में लीन रहें। मन ही मन गोविन्द जी से बातें होती रहीं। छोटू कृष्णा से जीवन के सकारात्मक, निष्पाप, और निःस्वार्थ कर्म करना सीखते रहें। मन से मेरे अपनों को गोविन्दाय भवः का आशीर्वाद देते रहें।
*
*
गोविन्द जय जय : गोपाल जय जय : टून : कार्टून : दृश्यम
टीटू : छोटू कृष्णा : समूह : की भक्ति : बच्चे मन के सच्चे
*
विश्व पत्रकारिता दिवस : जिसे विश्व प्रेस स्वतंत्रता दिवस के रूप में जाना जाता है, हर साल मई को मनाया जाता है। यह दिन प्रेस की स्वतंत्रता के सिद्धांतों का जश्न मनाने, मीडिया की स्वतंत्रता का मूल्यांकन करने और अपने कर्तव्यों का पालन करते हुए जान गंवाने वाले पत्रकारों को श्रद्धांजलि देने के लिए मनाया जाता है.हम देव शक्ति परिवार ने भी सोना सज्जन, साधु जन, शिव साध्वी,अनंत शक्तियों की अभिव्यक्ति का सम्मान किया। करते हैं, और करते रहेंगे।
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गीता ज्ञान : महाभारत : मुझे भी कुछ कहना है : आभार : पृष्ठ :९.
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संपादन
शक्ति. रेनू डॉ.आर के.सीमा
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गीता : अध्याय २ : सांख्य योग का श्लोक ५६
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दुःखेष्वनुद्विग्नमनाः सुखेषु विगतस्पृहः।
वीतरागभयक्रोधः स्थितधीर्मुनिरुच्यते ॥ ५६ ॥
*
भावार्थ
श्रीमद्भगवद् गीता के दूसरे अध्याय सांख्य योग के श्लोक ५६ में
भगवान श्रीकृष्ण ने स्थिर बुद्धि स्थितप्रज्ञ वाले व्यक्ति के गुणों का वर्णन किया है। इसके अनुसार, जो मनुष्य दुखों से विचलित नहीं होता, सुख की इच्छा नहीं रखता और जो आसक्ति, भय व क्रोध से मुक्त होता है, वह बुद्धिमान साधक कहलाता है।
*
शब्द दिग्घोषित हुआ जब शब्द
सार्थक शब्द था
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*
सन्दर्भ : विचार : माया.
माधव : शक्ति : छाया.
*
इस जीवन के आत्म संघर्ष में
जिसने इस ' ना 'की ' नकारात्मकता ' से निकल कर जो
' हा ' की ' सकारात्मकता ' में जीना सीख लिया
वही योगीराज, सही कर्मयोगी है.
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विचार @ शक्ति प्रिया मधुप अनुभूति
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क्या आप अपने लिए कड़वे ' बोल ',असत्य ' वचन ' सहन कर पाएंगे ...नहीं
तो वो दूसरों के लिए ग्रहणीय व सही कैसे हो जाएगा ?
विचार करें...?
विचार @ शक्ति शालिनी रंजिता अनीता
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हरि खिलावे हरि को
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बाल कृष्ण : छाया.
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कृष्ण कहें मत सोच तू क्या है विधि का विधान
नीयत कर लें अपने करम की फल देंगे कभी भगवान
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श्री कृष्ण : चेदी नरेश : शिशुपाल : प्रसंग : साभार
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दृश्यम : सार्वजनिक अपमान : रणछोड़ है तू ,छलिया
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*
©️®️M.S.Media.
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मुझे भी कुछ कहना है : ढ़ाई अक्षर प्रेम का : पृष्ठ :९ / २.
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संपादन
शक्ति. शालिनी प्रिया मधुप
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विचार : शब्द चित्र : सुनीता : कृति : माया :
मधुप : साल : १९९२. स्केच : छाया.
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मुण्डे मुण्डे मतिर्भिन्ना
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जिंदगी में की गई आपकी आलोचनाएं, ' ना ', दुःख झूठ फ़रेब, कहीं न कहीं आपको मजबूत ही बनाती है
मानो या ना मानो यह सच है
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विचार शक्ति @ प्रिया मधुप अनुभूति
दृश्यम : काशी : शिव : मणिकर्णिका.
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जीवन : दर्शन
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कि जन्म लेना आपके भाग्य की बात है
मृत्यु आना समय की बात है
और मृत्यु के बाद दिलों में रहना यह आपके कर्मों की बात है
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सज्जन : साथ : शक्ति
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भुवन जोशी : ( सोना सज्जन साधु जन ) : नैनीताल : छाया.
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जो शपथ, संवाद, समय , से दूर हो गए
वो क्यों कर मेरे अपने निस्सार हो गए
माधव ?.... बोलो न ?
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विचार शक्ति प्रिया मधुप अनुभूति *
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मुझे भी कुछ कहना है : ढ़ाई अक्षर प्रेम का : पृष्ठ :९ / २.
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देर के बाद ये समझे है मुहब्बत क्या है
अब हमें चाँद के झूमर की जरुरत क्या है ?
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सायरा : सुनील दत्त : पड़ोसन : तराने
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तेरी नीली नीली आँखों के दिल पर तीर चल गए
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फिल्म : अनुराग : प्रकृति : प्रेम :
तराने : सुन री पवन बहे पुरवैया : मौसमी चटर्जी
शॉर्ट रील : प्रेम कहानी : पर्वत : रिमझिम : सावन
झूम के पर्वत पे रिमझिम जब आता है सावन
मेरी पसंद : अनुभूति मधुप मीना
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शॉर्ट रील : ये क्या हुआ कैसे हुआ कब हुआ
फिल्म : अमरप्रेम : साभार : अभिनीत : राजेश खन्ना
* चिट्ठियाँ हो तो हर कोई बांटे भाग न बांटें कोई
सजनवा बैरी हो गए हमार : शॉर्ट रील
साभार : राज कपूर : तीसरी कसम
गीत कार : शैलेन्द्र. संगीत कार : शंकर जयकिशन. गायक : मुकेश.
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दृश्यम : लाख मना ले दुनियाँ साथ न ये छूटेगा
आके मेरे हाथों में हाथ न ये छूटेगा : फ़िल्म : गाइड
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साभार : राज कपूर :
१९८५ : फ़िल्म राम तेरी गंगा मैली : दृश्यम
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सुनो तो गंगा ये क्या सुनाए कि मेरे तट पर वो लोग आए जिन्होंने ऐसे नियम बनाए कि प्राण जाए पर वचन न जाए
वादें पर तेरे भरोसा है
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१९७४.
प्रेम पर्वत : पुनर्जन्म : मेरी हंसनी कहाँ उड़ चली
मेरे अरमानों के पंख लगा के कहाँ उड़ चली :
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आभार : पृष्ठ :९ / ३ .
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संपादन
शक्ति.माधवी सीमा प्रिया.
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राधिकाकृष्णरुक्मिणी पत्रिका : के पृष्ठ निर्माण में
अर्थ सहयोग के लिए हम देवशक्ति समस्त मीडिया परिवार आर्य डॉ.संतोष कुमार को
साधुवाद देते हैं.
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English Section
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Contents.
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English Editorial Section : Cover Contents Page 1
Shakti Editorial. English Page : 2
Shakti Editorial. Prose : English Page : 3
Shakti Editorial. Poem : English Page : 4
Shakti Vibes : .Page : 5
Radhika : Krishna : Rukmini : Photo Gallery.Page : 6
Visuals News : News : Editorial Page : 7
Shakti Art Gallery : Radhika : Krishna : Rukmini : English : Page 8.
Gratitude : Day Special : You Said it : Page : 9.
Shakti Editorial. English Page : 2
Shakti Editorial. Prose : English Page : 3
Shakti Editorial. Poem : English Page : 4
Shakti Vibes : .Page : 5
Radhika : Krishna : Rukmini : Photo Gallery.Page : 6
Visuals News : News : Editorial Page : 7
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Gratitude : Day Special : You Said it : Page : 9.
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Times Media Advertising Shakti Powered.
Contents.
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Times Media Powered
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Shakti. Editorial. English Page : 2
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Chief Editor.
Chandigarh Desk.
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Shakti. Dr.Anuradha. Chandigarh.
Arya.Er. Manish. IITian.USA.
Shakti.Nikita. Australia.
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Tri Shakti : Vibes : English : Page : 5
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Editor.
Shakti. Priya Ranjita Seema.
Darjleeng Desk.
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The right words at the right time
can heal more than medicies
the world within you.
*
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Shakti vibes @ Shakti. Shalini Dr.Sunita Renu
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Radhika : Krishna : Rukmini : Photo Gallery. Page : 6
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Editor.
Shakti. Latika Bharti Lakshika Joshi
Nainital Desk.
*
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Visual Photos : News : Editorial Page : 7
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Shakti. Dr. Anuradha Priya Seema.
Darjleeng Desk.
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Gratitude : Day Special : You Said it : Page : 9.
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Shakti Dr. Anuradha Priya. Madhup.
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Day Special : Page : 9 /1.
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Editor.
Shakti. Lakshika Seema Bharti.
Nainital Desk.
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Shakti. Vidisha Latika Lakshika.
*
Day Special.07.05.26
Operation Sindoor
*
Salute the brave spirit of Shakti Sophia & Vyomika Singh.
that protects our nation and emptions of millions.
*
Dr. Anu Madhup Priya.
*
Day Special. 01.05.26.
Baishakh Shukl Paksh Purnima.
Buddha Purnima.
May Buddha inspire you to find Peace,
Non Violence, Happiness,and Enlightenment inside your life.
*
Shakti. Priya Madhup Anubhuti.
Darjeeling Desk.
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You Said it : Engish : Page : 9 /2.
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Editor.
Darjleeng Desk
Shakti Priya.Ranjita Seema.
*
Sandeshe Aaate Hai.
@ Hum Char
whose Satyavans are army personals
are stationed at Borders.
*
Retd.Col. Satish Kumar Sinha. Shakti
behind every child's success is a passionate story of mother's endless love.
Our Strength our inspiration our forever hero in our successful life, thank you for every sacrifice, every prayer and every smile.
She is our first teacher and first guide.
*

























































































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A very good cultural and spiritual page .
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