Radhika : Krishna : Rukmini Darshan. 7. Patrika

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कृण्वन्तो विश्वमार्यम. 
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Radhika Krishna Rukmini Darshan. 
Volume : 1. Series : 7.
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राधिका कृष्ण रुक्मिणी दर्शन आवरण पृष्ठ.
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फोर स्क्वायर होटल : रांची :समर्थित :आवरण पृष्ठ. पत्रिका / दैनिक अनुभाग  मार्स मिडिया ऐड:नई दिल्ली.
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   राधिका कृष्ण रुक्मिणी :  दर्शन : ७ : दैनिक आवरण पृष्ठ / लिंक : पृष्ठ : ०. 
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      राधिका कृष्ण रुक्मिणी 

     दर्शन 
: ७ : दैनिक लिंक : पृष्ठ : ० 



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आज दैनिक अनुभाग में जाने तथा पढ़ने के लिए नीचे दिए गए लिंक को दवाएं.
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https://drmadhuptravel.blogspot.com/2026/01/radhika-krishna-rukmini-darshan-7-dainik.html

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वायरलेस प्राइवेट लिमिटेड : मार्केट रिसर्च : मुंबई : शक्ति.ज्योति.आर्य.नरेंद्र.समर्थित.
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आवरण पृष्ठ : दैनिक / पत्रिका अनुभाग / दैनिक लिंक 
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हार्दिक आभार प्रदर्शन : पृष्ठ : ०. 
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राधिका कृष्ण रुक्मिणी दर्शन : धारावाहिक ७ : विषय सूची. 
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महाशक्ति मीडिया प्रस्तुति.
   विषय सूची : पृष्ठ : ०.
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राधिका कृष्ण रुक्मिणी दर्शन : धारावाहिक ७ : आवरण : पृष्ठ : ०.
 राधिका कृष्ण रुक्मिणी  दर्शन : ७ : दैनिक लिंक : पृष्ठ : ० 
हार्दिक आभार प्रदर्शन : पृष्ठ : ०.
राधिकाकृष्णरुक्मिणी.दर्शन : विषय सूची : पृष्ठ : 
त्रिशक्ति  लेखकीय समूह. : पृष्ठ : ०
त्रिशक्ति संशोधक  समूह : पृष्ठ : ०.

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प्रेम प्रकृति.
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राधिकाकृष्ण: प्रेम प्रकृति दर्शन : पृष्ठ : ० / १.
रुक्मिणीकृष्ण.प्रकृति प्रेम दर्शन : आज : पृष्ठ :० /२.
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जीवन : दर्शन.
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त्रि शक्ति : विचार धारा : पृष्ठ : १. 
 राधिकाकृष्ण जीवन दर्शन : दृश्यम : शब्द चित्र : पृष्ठ : १ / १.
रुक्मिणीकृष्ण :जीवनदर्शन : दृश्यम : शब्द चित्र : पृष्ठ : १ / २.
मीराकृष्ण : जीवन दर्शन : शब्द चित्र : पृष्ठ १ /३.
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राधिकाकृष्णरुक्मिणी : सम्पादकीय शक्ति : पृष्ठ :२. 
सम्पादकीय शक्ति. समूह. नवशक्ति. विचार धारा : अंततः : पृष्ठ :२/ १.
सम्पादकीय त्रिशक्ति : गोरी साँवरे सलोनी : गद्य संग्रह :आलेख : पृष्ठ : २ / २.  
सम्पादकीय :त्रिशक्ति : गोरी साँवरे सलोनी :पद्य संग्रह : आलेख : पृष्ठ :  / ३.
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राधिकाकृष्णरुक्मिणी : आज का गीत : जीवन संगीत :भजन : पृष्ठ : ३.
राधिकाकृष्णरुक्मिणी : शक्ति : कोलाज दीर्घा : पृष्ठ : ४. 
राधिकाकृष्णरुक्मिणी : शक्ति : कला दीर्घा : पृष्ठ : ५.
दिन विशेष : आज का पंचांग : राशि फल : पृष्ठ : ६.
राधिकाकृष्णरुक्मिणी : शक्ति : फोटो दीर्घा : पृष्ठ :७. 
राधिकाकृष्णरुक्मिणी :समसामयिकी. समाचार : दृश्यम पृष्ठ : ८.
मुझे भी कुछ कहना है : गीता ज्ञान :आपने कहा : आभार : पृष्ठ :९.
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महाशक्ति मीडिया प्रस्तुति.
विषय सूची.
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 मंगल अनंत शिव.शक्ति शुभकामनाओं के साथ.

महाशक्ति मीडिया 

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त्रिशक्ति लेखकीय समूह : पृष्ठ : ०. 
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शक्ति.शालिनी मधुप रेनू. 
नैनीताल डेस्क 
*
त्रिशक्ति 
संशोधक समूह : पृष्ठ : ०. 
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शक्ति.नीलम.डॉ.राजेंद्र.रीता. 
   वाराणसी डेस्क. 
*
त्रिशक्ति कार्यकारी सम्पादिका
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शक्ति. रानी 
चुन्नी तनु सोनी
 इंद्रप्रस्थ डेस्क.

*

 मंगल अनंत शिव.शक्ति शुभकामनाओं के साथ.


फोर स्क्वायर होटल बैंक्वेट : रांची : समर्थित : मार्स मिडिया ऐड : नई दिल्ली. 
*
दैनिक / पत्रिका.अनुभाग.
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सुबह सवेरे : शाम. पृष्ठ : ०. 
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राधिकाकृष्णरुक्मिणी 
सदा सहायते. 

*
प्यार व्यवहार संस्कार 
त्रि शक्ति : दर्शन : विचार धारा.  
सम्यक ' साथ ', सम्यक ' दृष्टि ', ' और सम्यक ' कर्म ' 
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आत्म दीपो भवः   
कृष्ण : कर्म : कृण्वन्तो विश्वमार्यम. 
*

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दिव्य अनंत लक्ष्मी नारायण शिव शक्ति नव.

*
महाशक्ति  दिवस : १३  .मूलांक : ४  .
मास : माघ : कृष्ण पक्ष : दशमी.
विक्रम संवत :२०८२.शक संवत : १९४७.

*
हरे राधे कृष्णा : गोविन्दाय नमः 
*

वृन्दावन पेइंग गेस्ट : मुंबई : शक्ति.अंजलि सुभाष समर्थित : राधिका कृष्ण रुक्मिणी दर्शन. 

*
प्रेम. प्रकृति : दर्शन.

 *

महाशक्ति मीडिया अधिकृत 

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राधिकाकृष्ण : प्रेम प्रकृति :दर्शन : पृष्ठ :० / १. 
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राधिका डेस्क. 
मुक्तेश्वर. नैनीताल. 
. प्रादुर्भाव वर्ष :१९७६. 
संस्थापना वर्ष : १९९८.महीना : जुलाई. दिवस :४.
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दर्शन डयोढ़ी : राधिकाकृष्ण : आज : पृष्ठ : ० / १.
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राधिका डेस्क.
राधा कृष्ण मंदिर. मुक्तेश्वर.नैनीताल.

*

मेरी भव बाधा हरौ राधा नागरि सोय 
*
सज्जा : संपादन. 
शक्ति* प्रिया.मधुप डॉ.अनु.

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राधिकाकृष्ण : प्रेम प्रकृति : दर्शन : आज : पृष्ठ : ० / १.
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राधिका डेस्क.
राधाकृष्ण मंदिर.मुक्तेश्वर.नैनीताल.
संपादन
शक्ति* प्रिया मधुप डॉ.अनु.

*
सखी रे मैं का से कहूं
*

आपने क्या कहा
*
ढ़ाई अक्षर प्रेम का
*
तुम्हारे लिए

तोरा मन दर्पण कहलाए
*

विचार शक्ति : माया : राधिका कृष्ण. छाया
*
रेत के नीचे जल की धारा
*
जीवन का यही ईश्वरीय अभिप्राय है
कि हम भी संभले और औरों को भी संभालें
*
हर एक अंत का एक नया प्रारब्ध

*
हर एक अंत एक प्रारब्ध की नई शुरुआत है, बस नजरियाँ बदलिए जहाँ से आपकी समाप्ति हुई
वही से सशक्त प्रारंभ भी होगा,स्मृत रहे प्रिय
*
@ शक्ति.शालिनी मधुप रितु

*
मन ही देवता मन ही ईश्वर
*


सन्दर्भ विचार माया : शक्ति रजनी छाया

*
जीवन, मन उपवन में फूल की सुन्दरतम परिणिति
नियति समयक विचार के फल के पल्लवन में ही ,प्रिय !

@ शक्ति.शालिनी मधुप रजनी
*


भोले भाव मिले रघुराई.
*
सन्दर्भ विचार : माया : शक्ति: रितु :छाया.
*
माधव : क्या ऐसा नहीं लगता प्रिय
मानव मन स्वयं ही इतनी जटिलताओं में फंसता चला जाता है ,
जिससे उसकी स्वयं की स्वभाविकता ही उसमें गूढ़ रहस्य बनती चली जाती है ?
विचार करें
*
@ शक्ति शालिनी मधुप रितु
*

सन्दर्भ विचार : माया : शक्ति:साध्वी :छाया.
*
कल आज और कल 
*
अतीत की मधुर यादों को अपने ह्रदय में बसा कर 
अपनी तल्ख़ यादों से सबक़ ले कर 
हम सभी मेरे अपनों  के सुनहरे भविष्य  की कामना
के लिए आए अपने वर्तमान को सुधारें और संवारें प्रिय 
*
श्रद्धा मन का विषय है
भक्ति ह्रदय का
ध्यान मनन और चिंतन दोनों व्यक्ति को जोड़ते हैं
*
तोरा मन दर्पण कहलाए
*

*
सन्दर्भ विचार : मधुप : माया : शक्ति:आस्था :छाया.

*
प्राणी अपने प्रभु से पूछे किस विधि पाऊं तोहे
प्रभु कहे तू मन को पा ले पा जायेगा मोहे
*
प्रस्तुति शक्ति * प्रिया शालिनी रेनू मीना अनुभूति

*



सन्दर्भ विचार : माया : शक्ति : किशन


: छाया.
*
छल और धर्म

कृष्णा : यदि छल का आशय धर्म है
तो धर्म ही छल है, मामाश्री ! गांधार नरेश

*
तू अंतर्यामी जग का स्वामी

जब किसी सगे अपने के बारे में नकारात्मक भाव आने लगे
तो सहिष्णु हो कर उसके द्वारा किए गए नेक प्रीत पूर्ण व्यवहार को अवश्य
याद कर लेना, प्रिय ! सकारात्मक हो जाओगे
*
©️®️ डॉ.अनु मधुप स्मिता रंजीत 

*

*
सन्दर्भ विचार : माया : शक्ति : रितु : छाया.

*

प्रेम ध्यान और अस्तित्व

प्रेम और ध्यान ईश्वर के अस्तित्व को समझने के दो मुख्य द्वार हैं। जब आप प्रेम में होते हैं, तब ध्यान वश आप ईश्वर के करीब होते हैं।

*
प्रेम स्वाभिमान एकाकीपन

*
स्वाभिमानी व्यक्ति चाहे स्त्री हो या पुरुष वह जीवन में अकेले रह जाते हैं
क्योंकि जी हुजूरी उनसे होती नहीं और उनसे प्रेम करना व पाना हर किसी
के बस की बात नहीं होती

*
शोध विचार 
©️®️ शक्ति शालिनी मधुप रेनू शब्दमुखर 
*


राम को समझो कृष्ण को जानो

*


सन्दर्भ विचार : माया : शक्ति : वर्षा : वृन्दावन : छाया.

*
संसार के संरक्षण ,संवहन व समयक विकास के लिए हरि गुण :
सभ्य समाज के पल्लवन,नेतृत्व के लिए
मर्यादा पुरुषोत्तम राम के त्याग
व योगीराज कृष्ण की
सहिष्णुता, प्रेम, व कर्म को
स्मृत ही नहीं अंशतः या पूर्णतः
अपने जीवन में उतारना ही होगा
*
 ©️®️ शक्ति राधा मधुप सुनीता  


*
शुद्ध : अशुद्ध


सन्दर्भ विचार : माया : शक्ति : रितु : छाया.

*
राधिका : ' शुद्ध ' वही है जो 'अंदर बाहर ' एक-सा है,मानव
भीतर कुछ और है, बाहर कुछ और है वह तो ' अशुद्ध ' है , न माधव ?
माधव : काल,परिस्थिति,समुदाय,व्यक्तित्व के अनुसार यह परिवर्तनशील है,राधिके !
व्यक्तित्व के अंदर की माया और बाहर की छाया
कभी एक हो ही नहीं सकती स्वयं भी मानव इस प्रश्न का उत्तर
अपने भीतर भी ख़ोज सकता है ?...

*

शोध विचार 
 ©️®️ शक्ति शालिनी मधुप रेनू शब्दमुखर 
*

*
नव शक्ति * समर्थित व अधिकृत

*
नए साल : आपकी खुशियों के साथ : फ़ोकस क्लब एंड रिसोर्ट : रांची : समर्थित. 

*


टाइम्स मीडिया अधिकृत 
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रुक्मिणीकृष्ण. प्रकृति प्रेम दर्शन :आज : पृष्ठ : ० /२.
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रुक्मिणी डेस्क
मुक्तेश्वर.नैनीताल.
प्रादुर्भाव वर्ष : १९७८..
संस्थापना वर्ष : १९८७.महीना : अगस्त : दिवस : ६.
*
संपादन 
शक्ति* प्रिया डॉ. सुनीता मधुप 
*

*
अंधेरों से मिल रही रोशनी है. 
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रूक्मिणीकृष्ण : दर्शन ड्योढ़ी : आज : पृष्ठ : ० / २
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*
तेरा साथ है तो मुझे क्या कमी है 
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रूक्मिणीकृष्ण : प्रकृति प्रेम दर्शन : पृष्ठ : ० / २.
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संस्कार : व्यवहार : प्यार
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रुक्मिणी डेस्क.
मुक्तेश्वर.नैनीताल.
*
©️®️शक्ति प्रिया डॉ.सुनीता सीमा
*

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साध्वी : संगति : शक्ति
*

सन्दर्भ विचार : माया : शक्ति : रितु : छाया.
*
अभि उत्थान 
*
यदि समयक कर्म धर्म के अनुसार हो जाए 
या समयक धरम ही करम हो जाए संसार का अभ्युत्थान 
अवश्यंवभावी ही होगा 
*
 
बिनु भय होइ न प्रीति
*
शब्द  के साथ सरलता पर भी कभी कभी 
संयम रखने में जीवन की, समझदारी है प्रिय 

*
किस्मत : कला और कर्म 
माधव : अच्छे लोगों का  जिंदगी में आना 
 हमारे लिए  एक मात्र संयोग और भाग्य है, प्रिय ! 
और उन्हें संभाल कर रखना हमारी कला 
*
शक्ति संगीता ए.के.बख्शी 
*
माधव : सदैव स्मृत रहे प्रिय ! संवाद सभी से
लेकिन संगति मात्र सोना सज्जन साधु जन साध्वी से
*
शक्ति शालिनी सीमा रेनू 
*

प्रेम : विश्वास : सम्बन्ध 


*
सन्दर्भ विचार : माया : शक्ति : रितु : छाया.

*
शक्ति : समझ : सहिष्णुता

*
माधव : जो जितना अपने द्वैत संबंघ में जितना ही समयक
समझ ,शब्द, समर्पण और सहिष्णुता रखेगा ,प्रिय !
वो ही उतना दिव्य ईश्वरीय शक्ति के समीप होगा

*
शक्ति शालिनी सीमा सुनीता. 

*
यदि आप उनके जीवन शक्ति की आधार है 
तो विशाल सागर में यत्र तत्र भटकने वाले पंक्षी मन को 
विराम और शांति के लिए उसी जहाज़ पर आना है 
ये सदैव स्मृत रहे, प्रिय !

*
 गोविन्द जी @ शक्ति सुनीता सीमा रितु 

*

ईश्वर : जीवन : सिद्धांत 

*

विचार शक्ति : माया : छाया : लिपिका : कोलकोता 
*
मध्यम मार्ग 
*
सत्यभामा : अतिवाद से बचने या खुद को कष्ट देने,आत्म-दंड से श्रेष्यकर है
मानव अपने जीवन में मध्यम मार्ग ही चुने, ....केशव ?
*
@ शक्ति. शालिनी सीमा सुनीता
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कर भला तो हो भला 
*
कर भला तो हो भला 
यही प्रकृति का ही नहीं अपने जीवन का सिद्ध नियम है ,प्रिय 
भला या बुरा जो हम दूसरों को देते हैं बदले में हमें भी वही प्राप्त होता है ।
जो हम सोचते हैं उससे कहीं ज्यादा सुंदर होती है ईश्वर की योजनाएं

*
विधि : विधान
*
हरेक शय का समय तय है 
स्थान भी सुनिश्चित है यह विधि का विधान है आप 
कही पर पहुँचते नहीं पहुंचाए जाते है। 

©️®️शक्ति.सुनीता सीमा. डॉ.आर.के. 

*

*

इंद्रजीत.


हरि : राम : कृष्ण : माया छाया.
*
तुम्हारे लिए
*
दूसरों को नियंत्रित करने वाला शक्तिशाली हो सकता है
लेकिन स्वयं को अपनी इन्द्रियों को नियंत्रित करने वाला समभावी
उससे भी अधिक शक्तिशाली होता है.


*
 शक्ति ',' साध्वी ' और ' संसार  '

*

*
विचार शक्ति माया :  शक्ति डॉ.अनु छाया 

*

बस इतना सम्यक प्रयास करो प्रिय ! कि इस संसार में 
समयक ' शक्ति ',' सज्जन ' ' साध्वी ' के साथ संगति प्रीति सदैव बनी रहें 
दृष्टि, वाणी और कर्म स्वतः सम्यक व परिष्कृत होते चले जायेंगे, देख लेना !

©️®️ शक्ति.डॉ.अनु मधुप सुनीता  

*

महाशक्ति मीडिया अधिकृत 
*
*
स्वर्णिका ज्वेलर्स.निदेशिका.शक्ति तनु.आर्य रजत.सोहसराय.बिहार शरीफ.समर्थित.

*
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 राधिकाकृष्ण :  दर्शन ड्योढ़ी आज : पृष्ठ : १ / १.
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प्रेम : प्रकृति : दर्शन
*
राधिकाकृष्ण.
वरसाने.वृन्दावन.डेस्क.
. प्रादुर्भाव वर्ष :१९७६. 
संस्थापना वर्ष : १९९८.महीना : जुलाई. दिवस :४.
*

संपादन
*
शक्ति * प्रिया मधुप.डॉ.सुनीता

*
हे री मैं तो प्रेम दिवानी, मेरा दरद न जाने कोय

*
श्याम तेरी बंशी पुकारे राधा नाम 

*
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 राधिकाकृष्ण : ड्योढ़ी : दर्शन आज : पृष्ठ : १ / १.
------------
प्यार : व्यवहार : संस्कार
*
राधिकाकृष्ण.
वरसाने.वृन्दावन.डेस्क.
. प्रादुर्भाव वर्ष :१९७६. 
संस्थापना वर्ष : १९९८.महीना : जुलाई. दिवस :४.
*

संपादन
*
शक्ति * प्रिया मधुप.डॉ.सुनीता

*
हे री मैं तो प्रेम दिवानी, मेरा दरद न जाने कोय

*
श्याम तेरी बंशी पुकारे राधा नाम 

*
तुम्हारे लिए.
*

*
राधा का भी श्याम वो तो मीरा का भी श्याम  
*

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 राधिकाकृष्ण : जीवन : दर्शन आज : पृष्ठ : १ / १.
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*
प्यार : व्यवहार : संस्कार
*
वरसाने.वृन्दावन.डेस्क.

*
धीरज : कर्म : परीक्षा : सफलता
*

*
सन्दर्भ विचार : माया : शक्ति : रितु : छाया.
*
लक्ष्मी : शक्ति : सरस्वती
संतुलन
*
ऐश्वर्य ,मान ,सम्मान शक्ति के संतुलन के लिए
बुद्धि, वाणी ,विवेक की सार्थकता अत्यंत आवश्यक है,प्रिय !
*
जीत जाएंगे अगर तुम संग हो
*
जीवन संघर्ष जितना कठिन होगा
विजय उतनी ही महान होगी
सबसे अहम बात यह है कि
सफलता सदैव मेहनत कश लोगों के ही गले लगती है
*
तुम्हारे प्रश्न में ही तुम्हारा उत्तर है

जिंदगी में परीक्षा की घड़ी सदैव आती है
यह हम पर निर्भर है कि हम कितना धैर्य और सतत प्रयत्न करते
रहते हैं

*
*
विचार शक्ति : माया : कृष्ण : छाया
*
ग्रह नक्षत्र : भाग्य और कर्म

*
ग्रह नक्षत्र न तो किसी का भाग्य बिगाड़ते हैं, न किसी के कर्म
जो लोग अपने ग्रहों को दोष देते हैं,वे अपने जीवन की जिम्मेदारी से भाग रहे हैं।

*
किशन : गुणवान गुरु के अनुगामी अनुशासित शिष्य
होने दुःख और सुख में सहभागी मित्र के रहने मात्र से
जीवन के कष्टों का निवारण हो जाता है, राधिके
*
का बरसा जब कृषि सुखाने

*
प्रकाश पाने के लिए जलते दीपक में घी
सम्यक इंसान से सम्बन्ध के लिए का समयवश सम्मान का होना आवश्यक है
अन्यथा सब व्यर्थ है..
*
प्रेम क्या है
मन भी सुन्दर तन भी सुन्दर
तुम सुंदरता की प्रतिमा हो
*

विचार शक्ति मधुप माया :  शक्ति राधा कृष्ण छाया 
*
कोई तो हो 
*
कोई तो हो जो गलत के लिए सही मार्ग बतला दें 
सही पर काल परिस्थिति आम जन की उपस्थिति देखकर 
*
अपने प्रिय सोना सज्जन शक्ति जनों के लिए
अपने सम्यक समय, शब्द,सामर्थ्य के साथ उनके लिए पूर्ण समर्पित रहना
*
@ शक्ति. प्रिया नीलम तनु स्मिता रंजीत


सम आलोचनाएं
*

*
राधिका : प्रशंसा  सुनने के इतने आदि हो जाओगे, माधव 
तो अपनी आलोचनाएं कैसे सह पाओगे  ? 
माधव : आलोचनाएं नहीं मात्र सम आलोचनाएं होनी चाहिए,राधिके ! 

*

*
विचार शक्ति : माया
हिमाचल : छाया : शक्ति स्मिता
रंजीत
*
रुक जाना नहीं 
*
हर दिन हर पल ख़ुश रहने की जायज़ बजहें जिंदगी में ढूंढते रहें 
इस सफ़र की आख़िर मंजिल तो तयशुदा ही है 
*
मन ही देवता मन ही ईश्वर 
*
तीर्थों में सर्वश्रेष्ठ तीर्थ है आपका हृदय.
यह जितना निर्मल और निष्पाप होगा,सारे तीर्थ उतने ही आपके पास होंगे.

*
@ शक्ति रेनु मधुप स्मिता रंजीत.

*

माया मरी न मन मरा
*

*
विचार शक्ति : माया
इस्कॉन : मुंबई : छाया : शक्ति सेजल
*
गरीबों और जरुरत मंदो में ज्ञान व दान बाँट कर 
सेठ स्वयं की सुख शांति,समृद्धि ,सवाब के लिए 
सावरियां के शरण में चले आए 

 ©️®️शक्ति सेजल डॉ.सुनीता मधुप.
*

नीति शतकम 
*
 दानं भोगो नाशस्तिस्रो गतयो भवन्ति वित्तस्य 
यो न ददाति न भुङ्क्ते तस्य तृतीया गतिर्भवति
भावार्थ 
धन के तीन मार्ग होते हैं - दान : देना , भोग : उपभोग करना,और नाश : नष्ट होना. 
जो व्यक्ति धन का न दान करता है और न ही उसका उपभोग करता है, 
उसके धन की तीसरी गति होती है, यानी उसका नाश हो जाता है। 

*
छोड़ो कल की बातें 
*
भविष्य की चिंता व्यर्थ है 
जिस ईश्वरीय शक्ति ने तुम्हें कल और आज तक़ संभाला हैं 
वह आगे भी संभाल लेगा 

*

*
टाइम्स मीडिया अधिकृत 

*
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रूक्मिणीकृष्ण : जीवन दर्शन : पृष्ठ : १ / २.
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*
रुक्मिणी डेस्क.
विदर्भ डेस्क.महाराष्ट्र.
प्रादुर्भाव वर्ष : १९७८.
संस्थापना वर्ष : १९८७.महीना : अगस्त : दिवस : ६.
*
संपादन
शक्ति प्रिया डॉ.सुनीता मधुप.
*
शक्ति : धैर्य : सहनशीलता 


विचार सन्दर्भ : माया : शक्ति रेनू : छाया 
*
विपत्ति में धैर्य, वैभव में दया , आर्य शक्ति की विनम्रता 
 और श्रेष्ठ व्यक्तियों के लक्षण हैं संकट में सहनशीलता  
*
परिश्रम : और परिणाम


विचार सन्दर्भ : माया : शक्ति रेनू   : छाया 
*
प्रिय सफलता मानव जीवन के अथक प्रयास का वो परिणाम है
जिसकी कहानी मानव अपने शांत मन से
अपने निरंतर के संघर्ष से ही लिखता है
*
आप मुझे अच्छे लगने लगे 
*
कृष्ण क्यों अच्छे लगते हैं : तीन बातें 
*
एक योगीराज कृष्ण मन वचन शब्द से 
सबके लिए आकर्षण के केंद्र थे 
*

विचार सन्दर्भ : माया : शक्ति माधव  : छाया 
*

दूसरा कर्म और कृष्ण पर्याय थे 
और तीसरा सबसे अहम उन्होंने अपने का साथ कभी भी नहीं छोड़ा 
*

विचार सन्दर्भ : माया : शक्ति मीना : छाया 
*
असहमति में सहमति 
*
विचारों से असहमत होते हुए भी सहमतियों 
के विन्दुओं को खोजना ही सुखी रहने का मूलमंत्र है 

*
@ शक्ति शालिनी मधुप मीना  
*
मेरे तो गिरधर गोपाल दूसरों न कोई 
*
त्रिदेवों में श्रेष्ठ कौन
*

विचार : छाया : महर्षि भृगु
:
श्री लक्ष्मी नारायण : 
सहिष्णुता 
*
माधव : आपसी मधुर दिव्य सम्बन्धों के लिए शंकर के भोले भाव 
और हरि श्री लक्ष्मी नारायण की समझ और सहिष्णुता 
नितांत आवश्यक है, प्रिय !
*
महर्षि भृगु ने भगवान विष्णु की छाती पर लात मारी थी, क्योंकि वे त्रिदेवों में श्रेष्ठ कौन हैं, यह जानने के लिए परीक्षा लेने गए थे और उन्हें विष्णुजी के अहंकार न करने का प्रमाण मिला, जिससे वे विष्णु को सर्वश्रेष्ठ मानकर लौट गए। यह भी स्मृत रहे, प्रिय !
*
शोध विचार
©️®️शक्ति प्रिया डॉ.सुनीता मधुप.
*
जिंदगी और कुछ भी नहीं 
तेरी मेरी कहानी है 

*
*
विचार सन्दर्भ  : माया : शक्ति श्रेया : हिमाचल : छाया 
*
तुमने सुबह भी देखी शाम भी देखी 
उजाला भी देखा अंधियारा भी 
जो धैर्य से बना रहा करम करता रहा 
समभावी होने के कारण वही सर्वकालिक रहा प्रिय 
 
*
शक्ति डॉ. सुनीता शालिनी रेनू सीमा 

*
विधि : विधान 


विचार सन्दर्भ  : माया  : शक्ति लिपिका 
: छाया 
*
हरेक शय का समय तय है 
स्थान भी सुनिश्चित है यह विधि का विधान है आप 
कही पर पहुँचते नहीं पहुंचाए जाते है। 

©️®️शक्ति.सुनीता.सीमा डॉ.आर के 

*

इंद्रजीत.


हरि : राम : कृष्ण : माया : छाया.
*
दूसरों को नियंत्रित करने वाला शक्तिशाली हो सकता है
लेकिन स्वयं को अपनी इन्द्रियों को नियंत्रित करने वाला समभावी
उससे भी अधिक शक्तिशाली होता है.

*


शब्द : अनुभूति : मर्यादा
*
तुम्हारे लिए
*
अपेक्षा : उपेक्षा


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सन्दर्भ विचार : माया : शक्ति : अनुभूति : हिमाचल : छाया :
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ये जीवन है इस जीवन का
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लोगों के लिए आप तब तक अच्छे हैं , जब तक आप उनकी अपेक्षाएं पूरी करते हैं, लोग आपके लिए तब तक अच्छे हैं, जब तक आप उनसे कोई अपेक्षा नहीं रखते हैं.
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शब्द अनुभूति मर्यादा 
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जो कह दिया वो शब्द थे 
जो नहीं कह पाए वो अनुभूति 
और जो कहना चाहते है मगर कह नहीं सकते , वो है मर्यादा 

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प्रथम मीडिया शक्ति प्रस्तुति.

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मीरा : दर्शन : ड्योढ़ी :  पृष्ठ १ / ३ .
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मीरा डेस्क.
मेवाड़ डेस्क.जयपुर.
प्रादुर्भाव वर्ष : १९८२.
संस्थापना वर्ष : १९८९. महीना : सितम्बर. दिवस : ९.
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मेरे तो गिरधर गोपाल दूसरों न कोय

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मेवाड़ डेस्क.जयपुर.
संपादन.
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शक्ति जया अनीता सेजल
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मीराकृष्ण : जीवन दर्शन : शब्द चित्र : पृष्ठ :१ / ३.
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संपादन.
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शक्ति जया अनीता सेजल
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बैठी संतों के संग रंगी मोहन के रंग
साध्वी : संत : शब्द.

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मुसीबत में डाल ही देती है 
चोर को खांसी और संतों को दासी 

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राणा ने विष दिया 
विष को अमृत किया 

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सन्दर्भ विचार : माया : शक्ति : मीरा : मेवाड़ : छाया
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मीरा हो या राधा
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प्रेम तो प्रेम है इसमें क्या पूरा क्या आधा
दोनों की अभिलाषा अप्रतिम है मीरा हो या राधा

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स्वयं का विचार ही स्वयं के व्यक्तित्व का शिल्पकार है, प्रिय जो वो चाहता है
जीवन उसी रूप में ढलता चला जाता है

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©️®️ शक्ति सीमा डॉ.आर.के.अनीता
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कृष्ण : कर्म : परिणाम

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सही कर्म वो नहीं है
जिसके परिणाम हमेशा सही हो,
बल्कि सही कर्म वो है जिसका उद्देश्य कभी भी गलत न हो

©️®️ शक्ति नीलम सीमा डॉ.आर.के.
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परख : मैत्री : समझ

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विचार : सन्दर्भ : माया : मधुप.
( अभिनेता ) नवीन निश्चल छाया.

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मित्र व मैत्री को परखने का नहीं
समझने का प्रयास करें,दोनों प्रगाढ़ होंगे

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ख़ुशी हो या गम
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विचार शक्ति : माया : छाया : रितु  

मेरे तो गिरधर गोपाल 
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चाहे ख़ुशी हो या गम
परन्तु तेरी शरण में ही रहेंगे हम

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शोध विचार 
 ©️®️ शक्ति शालिनी मधुप रेनू शब्दमुखर 
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सह : ममता हॉस्पिटल बिहार शरीफ:शक्ति.डॉ.ममता.आर्य. डॉ.सुनील कुमार : समर्थित
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राधिकाकृष्णरुक्मिणी : सम्पादकीय शक्ति : पृष्ठ : २.
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मातृ शक्ति नमन 
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निर्मला सिन्हा 
१९४० - १९२३
प्रधान आचार्या.
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कर्म : जीवन : सिद्धांत
के लिए मेरी स्मृति विशेष 

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राधिकाकृष्णरुक्मिणी 
त्रिशक्ति.प्रधान सम्पादिका.
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शक्ति.क्षमा कौल.जम्मू.कवयित्री.लेखिका.
शक्ति.डॉ.अनुपमा.उत्तर प्रदेश.
शक्ति. प्रीति सहाय.पुणे.कवयित्री.लेखिका.

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त्रिशक्ति
सहायक कार्यकारी सम्पादिका
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शक्ति बीना मीना श्रद्धा प्रिया 
गंगोत्री डेस्क. उत्तरकाशी 

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त्रिशक्ति छाया :
लघु फ़िल्म सम्पादिका
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शक्ति रितु दिप्ती स्वाति
नैनीताल डेस्क

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त्रिशक्ति संयोजिका
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शक्ति स्मिता भारती रजनी
नैनीताल डेस्क
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डॉ. दीनानाथ वर्मा. फिजिशियन : दृष्टि क्लिनिक. किसान बाग : बिहार शरीफ. समर्थित 

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सम्पादकीय त्रिशक्ति : गोरी साँवरे सलोनी : गद्य संग्रह आलेख : पृष्ठ : २ / २. 
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 गोरी साँवरे सलोनी : शक्ति आलेख : २ / २ / ०

 
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शक्ति आलेख : २ / २ / ०
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आज का सत्य और प्रयोग
मेरे बताए गए मार्ग का अपने बुद्धि विवेक का प्रयोग करते हुए जो इच्छा व अच्छा है वो करो।
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शक्ति आरती अरुण
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गीता : १८ वें अध्याय के ६३ वें श्लोक

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अर्जुन : श्री कृष्ण : गीता ज्ञान
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"इति ते ज्ञानमाख्यातं गुह्याद्‍गुह्यतरं मया।
विमृश्यैतदशेषेण यथेच्छसि तथा कुरु॥"

गीता के १८ वें अध्याय के ६३ वें श्लोक में भगवान श्री कृष्ण कहते हैं
इति में ज्ञानमाख्ययातं गुह्याग्दुतरं मया विमृश्यैतद शेषेण यथेच्छसि तथा कुरु।।
श्री कृष्ण स्व -जवाबदेही कौशल विकास की भी बातें : यह प्रसंग गीतोपदेश के मोक्ष संन्यास योग का है जिसमें भगवान श्री कृष्ण कहते हैं,हे अर्जुन,मैंने तुम्हें गुढ़ से गुढ़तम ज्ञान के समस्त सार को बता दिया है, अब तुम मेरे बताए गए मार्ग का अपने बुद्धि विवेक का प्रयोग करते हुए जो इच्छा है करो। यह छोटा सा कथन जितना कुरूक्षेत्र में कल प्रासंगिक और सार्थक था,आज भी उतना ही महत्वपूर्ण और प्रासंगिक है। भगवान श्री कृष्ण अर्जुन पर अपने विचारों को थोपना नहीं चाहते हैं बल्कि उसे अपनी बुद्धि और विवेक का इस्तेमाल करते हुए स्वयं निर्णय लेने को कहते हैं।
श्री कृष्ण उस कालखंड में भी एक श्रेष्ठ प्रबंधन गुरु, सूक्ष्म नीति निर्माता और किसी व्यक्ति के भीतर स्वयं निर्णय लेने की क्षमता विकसित करने की कला में निष्णात हैं जिसे आज के मनोवैज्ञानिक विश्लेषण में स्व-प्रबंधन और निर्णय लेने का दृष्टिकोण और क्षमता विकास कौशल कहा जाता है।
अपने बुद्धि विवेक का प्रयोग करें : श्री कृष्ण ने महाभारत के इस कुरूक्षेत्र में स्वयं अर्जुन के साथ खड़े हैं,दिशा निर्देश भी दे रहे हैं पर निर्णय लेने की स्वतंत्रता उसे ही सौंप रहे हैं। परमात्मा ने इसीलिए हमें इच्छा स्वातंत्र्य और कर्म स्वातंत्र्य का विवेक और अधिकार दे रखा है जो आज ही नहीं कल भी प्रासंगिक और व्यवहारिक रहेगा। युग बदलते हैं,युगधर्म बदलते हैं पर सफल जीवन के जो मोल‌ एवं मूल्य हैं,वे कभी नहीं बदलते हैं। यह सिद्धांत स्व-प्रबंधन और निर्णय लेने का दृष्टिकोण और क्षमता विकास कौशल के व्यवहारिक तथ्यों को पुष्ट करता है।
कहा भी जाता है,सुनो सबकी पर करो मन की और मन की भी करने के पूर्व बुद्धि विवेक से तोल-मोल कर लो ताकि अपेक्षित परिणाम न मिलने पर दूसरे को आरोपित न किया जा सके। आज की जटिलता भरे संसार में हम अनेक उलझनों में उलझे रहते हैं और उन उलझनों से अन्त में हमें स्वयं ही निकलने का मार्ग ढुंढना पड़ता है।
सुनो सबकी पर करो मन की : और मन की भी करने
यहां एक सवाल उठता है कि क्या हमें अपने से श्रेष्ठ का, अभिभावकों का, शुभचिंतकों का और अभिभावकों के परामर्श को नहीं मानना चाहिए, नहीं, मानना चाहिए पर जब कोई परिपक्व हो जाए तो उसे अपनी बुद्धि,विवेक और पूर्वानुभवों के आधार पर सम्यक् निर्णय लेना चाहिए जिससे उसे आत्मसुधार के अवसर मिल सकें और वह स्वयं को इसके लिए जिम्मेदार ठहरा सके।
इस तरह श्री कृष्ण स्व -जवाबदेही कौशल विकास की भी बातें करते हैं कि हमें हमारे समस्त सामर्थ्य और क्षमताओं का आकलन करके ही निर्णय लेना चाहिए।
किसी भी छोटे बड़े विषय पर गंभीरता के साथ विचार करके,उसके आगे पीछे सोंचकर ही जो इच्छा हो करना चाहिए। यही युगधर्म सार्वकालिक और सार्वभौमिक सत्य है।

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संपादन सज्जा : शक्ति डॉ.रजनी सीमा*अनुभूति






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गोरी साँवरे सलोनी : शक्ति आलेख : २ / २ / १
युधिष्ठिर : धर्म : यक्ष प्रश्न : आम जीवन के

शक्ति शालिनी रेनू मधुप.

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भोले की प्राण रक्षा का यक्ष प्रश्न और श्री हरि : कभी देवों के देव महादेव,शिव शम्भु कैलाश पति ने अपने भोले पन में भस्मासुर को ऐसा वरदान दे दिया,जिसके प्रयोग से स्वयं भी भागते फिरे। अंत में भस्मासुर से बचा कैसे जाए यह यक्ष प्रश्न लेकर श्री लक्ष्मी नारायण के शरण में आए। श्री हरि ने तब इसका हल भी ढूंढा।
मोहिनी रूप का उपयोग भस्मासुर के अंत के लिए भी किया गया, जहाँ उसने शिव से वरदान पाने के बाद विष्णु (मोहिनी रूप में) का पीछा किया और अंततः अपने ही हाथों भस्म हो गया.
सावित्री : सत्यवान : यम और यक्ष प्रश्न : यक्ष प्रश्न कभी भी किसी के सामने आ सकते है। यक्ष प्रश्न जिसके जबाव कठिन हो। सावित्री ने सत्यवान के लिए यमराज के सामने यक्ष प्रश्न कर यम से मृत सत्यवान के प्राण वापस लिए थे। यमराज भी किंकर्व्यविमूढ हो गए थे। वरदान दे दिया ,उसे पूरा कैसे करें।
लोभी और डाही और आम जीवन का यक्ष प्रश्न : लोभी और डाही की कहानी का सार भी दोनों के लिए यक्ष प्रश्न ही छोड़ता है। मांगे तो दोनों क्या मांगे। अपनी इच्छा से अविवेकी हो कर अपना हित कर लें या दूसरे का अहित। विचारणीय है।
हमारे आपके सामने भी एक दो यक्ष प्रश्न जीवन में आ ही जाते है। परिजनों के मांगे गए परस्पर विरोधी ध्रुवीय इच्छाओं की पूर्ति क्यों कर हो। इधर गड्ढ़ा उधर खाई का भय है। ज्ञानी जन ने कहा है खाई में गिरने से बेहतर है गड्ढ़ा में ही गिरा जाए। कभी कभी बिना सोचे समझे किए गए शीघ्रता व क्रोधवश किए गए कार्य कितनी दुविधा को जन्म दे देते हैं। कभी स्वजन जरूर विचार करें।
यक्ष प्रश्न आखिर है क्या ? प्रश्न जिनके हल ढूंढने मुश्किल हो। महाभारत के वनवास काल की एक प्रसिद्ध कथा है, जिसमें एक यक्ष : वन-देवता : ने युधिष्ठिर से कई गूढ़ प्रश्न पूछे थे और युधिष्ठिर ने अपनी बुद्धि और धर्मनिष्ठा से उनका सही उत्तर देकर अपने मृत भाइयों को पुनर्जीवित करवाया था, जिसमें पृथ्वी से भारी माता, आकाश से ऊँचा पिता, मन से तीव्र गति, और सबसे बड़ा आश्चर्य मृत्यु के सामने अमरता की चाहत जैसे प्रश्नों के उत्तर शागए मिल हैं।
यह प्रश्न और ऐसे उठने वाले प्रश्न आज भी किसी कठिन समस्या को " यक्ष-प्रश्न " कहते हैं, जिसका समाधान कठिन हो।
युधिष्ठिर कथा का सार : वनवास के दौरान, पांडवों को प्यास लगी और वे एक सरोवर पर पहुँचे। यक्ष ने सरोवर की रक्षा करते हुए किसी को भी बिना उत्तर दिए पानी न पीने का आदेश दिया। एक-एक करके पांडवों ने यक्ष की बात अनसुनी कर पानी पिया और मर गए। अंत में युधिष्ठिर आए, यक्ष के सभी प्रश्नों के सही-सही उत्तर दिए, जिसके बाद प्रसन्न होकर यक्ष ने सभी भाइयों को पुनर्जीवित कर दिया और बताया कि वह स्वयं उनके पिता धर्म थे, जो उनकी परीक्षा ले रहे थे।
अक्सर मुझे ये आध्यात्मिक धार्मिक अनुभूति होती रही है कि बम भोले के गंवई, अक्खड़,अंदाज और उनके दानी स्वभाव की बजह से देवताओं के समक्ष यक्ष प्रश्न खड़े होते ही रहें जिसका निराकरण व समाधान भी श्री हरि लक्ष्मी नारायण ही करते रहें। यदि असत्य है तो कहें। लेकिन तो ये सच है ना। इति शुभ।
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सज्जा संपादन : शक्ति रीता प्रीति अनुभूति

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महाभारत एकांकी नाटक  : शापित कृष्ण : आलेख : २ / २ / २  
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युद्धोपरांत कौरवों की मृत्यु.शोक में गांधारी का करुण विलाप 
और श्रापित  हुए कृष्ण 
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एकांकी नाटक : आलेख 
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शक्ति.सीमा.डॉ.आर के दुबे. 
सह डॉ.सुनीता मधुप 

रंगमंच का पर्दा उठता है। हस्तिनापुर, राजमहल का दृश्य। शोक का वातावरण। तभी राजमहल में माधव का प्रवेश। युद्धोपरांत गांधारी व श्रीकृष्ण एक दूसरे के सम्मुख होते है । पुत्र वियोग में तड़पती गांधारी जब श्रीकृष्ण को शाप देने अग्रसर होती हैं। तब सहिष्णु श्रीकृष्ण शांत स्वर में कहते हैं। 

श्रीकृष्ण : ' माते, मैं शोक, मोह और पीड़ा....इन सबसे परे हूँ। न मुझे विजय का गर्व है, न पराजय का विषाद। न मान मुझे बाँधता है, न अपमान।न जीवन, न मृत्यु....किसी में मैं आबद्ध नहीं हूँ।
मैं न सत्य में बँधा हूँ, न असत्य में। काल और महाकाल....दोनों मेरे अधीन हैं; मैं उन्हीं के माध्यम से अपने कार्य सिद्ध कराता हूँ। 
हे माता, यह युद्ध अवश्यम्भावी था। जो चले गए हैं, उनके लिए विलाप मत करो।जो शेष हैं....उन्हें स्वीकारो। वर्तमान को अपनाओ, क्योंकि अतीत का शोक ही दुख का मूल है। '

गांधारी विलाप करती हुई कह उठती हैं, 

गांधारी : ' कृष्ण…!!! तुम यह सब कह सकते हो, क्योंकि तुम माँ नहीं हो। तुम क्या जानो एक माँ की ममता क्या होती है  ? तुम क्या समझो पुत्र-शोक की असहनीय पीड़ा .......? 
तुम मोह-त्याग और ज्ञान की बातें करते हो, तो जाओ.....अपनी माता देवकी से पूछो कि पुत्र-वियोग क्या होता है ! .....
पूछना उनसे— कैसा लगता था जब कंस एक-एक कर उसके कलेजे के टुकड़े छीन लेता था .....?
जब उसका दूध उतरता था और गोद सूनी रह जाती थी, तब उसकी आत्मा पर क्या बीतती थी 
वासुदेव से भी पूछना…!! ' 

इतना कहकर गांधारी धरती पर गिर पड़ती हैं। कृष्ण उन्हें संभालते हैं, उनके अश्रु पोंछते हैं।
रुँधे कंठ से गांधारी फिर कहती हैं। 

गांधारी : ' कृष्ण… तुम्हारी माता ने छह पुत्र खोए, पर मैंने अपने सौ पुत्र खो दिए हैं…! कृष्ण…!! '

कृष्ण : ' माते, कौरवों ने स्वयं वह मार्ग चुना जिसका अंत विनाश ही था।मैं किसी के कर्म-क्षेत्र में हस्तक्षेप नहीं कर सकता। कर्म का फल तो प्रत्येक को भोगना ही पड़ता है। '

गांधारी :  ' हूँह…यह कहना सरल है, केशव। पर एक माँ के लिए उसका पुत्र ही सर्वस्व होता है। वह योग्य हो या अयोग्य....माँ की ममता पर उसका कोई प्रभाव नहीं पड़ता। लोग कहते हैं तुम आदि ब्रह्म हो, पर हो तो पुरुष ही....जिसका हृदय वज्र का होता है। '
......माता पार्वती भी अपने पुत्र गणेश का शोक सहन नहीं कर पाईं। हे कृष्ण, कभी ' माँ ' बनकर देखना,तब जानोगे कि तुम्हारा गीता-ज्ञान ममता के सामने कितना ठहर पाता है। 
यदि मोह-ममता अज्ञान है,तो फिर तुमने इस संसार की रचना ही क्यों की?बना लेते केवल ज्ञानियों का लोक—मोह और ममता की क्या आवश्यकता थी? तुम भी जानते हो....तुम्हारा ज्ञान नीरस, निर्जीव और इतना कठोर यथार्थवादी है कि उससे संसार नहीं चल सकता। इसीलिए तुम स्वयं मोह और ममता का सहारा लेते हो। '

तभी वहाँ पांडव आ जाते हैं। कृष्ण संकेत से उन्हें हटाना चाहते हैं, पर युधिष्ठिर समीप आकर कहते हैं, 

युधिष्ठिर : ' बड़ी माँ, हम आपके अपराधी हैं। यदि संभव हो, तो हमें क्षमा कर दीजिए।'

युधिष्ठिर की वाणी सुनते ही गांधारी का क्रोध प्रज्वलित हो उठता है। उन्हें स्मरण आता है दुर्योधन की टूटी जंघा, दुःशासन की फटी छाती और रक्त पीता भीम.....। कृष्ण समझ जाते हैं कि गांधारी शाप देने वाली हैं,

कृष्ण : व्यंग्यपूर्वक कहते हैं....' हे माता,उस जंघा का टूटना आवश्यक था जिसने आपकी पुत्रवधू का अपमान किया। उस छाती का चीरना अनिवार्य था जिसने द्रौपदी के केशों को छूने का दुस्साहस किया। इनका विनाश आवश्यक था, अन्यथा मनुष्य इन कृत्यों को आदर्श बना लेता.....और फिर शिष्ट समाज की कल्पना भी असंभव हो जाती। हे माता, जिनके लिए आप शोक कर रही हैं, वे शोक के अधिकारी नहीं हैं। '


क्रोध से कांपती गांधारी कठोर स्वर में कहती हैं

गांधारी : '—हे यादव, हे माधव ! मैं शिवभक्तिनी गांधारी अपने पतिव्रत धर्म से संचित पुण्य-बल से तुम्हें शाप देती हूँ— जिस प्रकार कुरुवंश का विनाश हुआ, उसी प्रकार सम्पूर्ण यदुवंश का भी विनाश हो ! '

शांत मुस्कान के साथ कृष्ण कहते हैं, 

कृष्ण : ' माते, यह शाप आपने मुझे नहीं—स्वयं को दिया है।
आप अपने सौ पुत्रों का शोक पूर्ण भी नहीं कर पाईं और आपने एक और पुत्र को स्वयं से छीन लिया।
माते, क्या आप मेरा शव देख पाएँगी…? 
मुझे आपका शाप स्वीकार है, क्योंकि न मेरा जन्म होता है
न मृत्यु। मेरा इस शरीर से कोई प्रेम नहीं। पर माते...आपका इस शरीर से प्रेम है,और आपने स्वयं को
पुनः दुःख-सागर में डुबो दिया है। '
कृष्ण की वाणी सुनकर गांधारी पश्चाताप से भर जाती हैं। 
गांधारी : हे गोविंद, कुरुवंश को तो नहीं बचा पाई, कम से कम यदुवंश को बचा लो। मैं भिक्षा माँगती हूँ, माधव ! अब और पुत्रों के शव मैं नहीं देखना चाहती।
कृष्ण करुण किंतु दृढ़ स्वर में कहते हैं,कृष्ण : ' माते,न मैंने कुरुवंश के कर्मों में हस्तक्षेप किया,न ही यदुवंश के कर्म-क्षेत्र में करूँगा। यदुवंशी भीअपने कर्मों का फल भोगेंगे, जैसे कुरुवंशियों ने भोगा। मैं किसी भी स्थिति में धर्म का त्याग नहीं कर सकता। '
गांधारी : हे प्रभु ! .....मेरे कृष्ण...., अब ईश्वर ही जाने , '  

गहरी साँस लेते हुए। रंगमंच पर पर्दा गिरता है .....सर्वत्र नीरवता छा जाती है। मौन ही मौन। 
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पृष्ठ संपादन : शक्ति क्षमा रीता * नीलम 
सज्जा : शक्ति मंजिता स्वाति सीमा.  





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         गोरी साँवरे सलोनी : शक्ति आलेख : २ / २ / ३
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शक्ति रेनू आलेख 

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नया साल : बीते बोझ से मुक्ति ,
रिश्तों की प्यार भरी मर्यादा और उम्मीदों की नई रोशनी 
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शक्ति.रेनू मधुप शालिनी 

आज जब ऐसे ही बैठे-बैठे सोचने लगी तो इतनी सारी बातें मन में कोंध गई कि सोचा की लिखकर ही इन बातों से मुक्त हुआ जा शब्दमुखर की लेखनी अबाध चल पड़ी। 
नया साल केवल तारीखों का परिवर्तन नहीं है, यह मनुष्य को स्वयं से साक्षात्कार का अवसर देता है।
बीता हुआ वर्ष अपने साथ अनुभवों का बोझ छोड़ जाता है- कुछ ऐसे, जिन्हें याद कर मुस्कान आती
और कुछ ऐसे, जिन्हें याद कर मन भारी हो उठता है। पर नया साल उन सब पर एक विराम लगाकर थीरे से कहता है अब आगे बढ़ो. हल्के मन से।
जो बीत गया, उसे बोझ न बनाओ मन में, नया सूरज पूछता है - अब तुम क्या बनोगे ?'आज का समय तेज है, प्रतिस्पर्धी है, पर भीतर से कहीं ने कहीं थका हुआ भी है। हमने साधन हो बढ़ा लिए पर संवेदनाएँ सिकुड़ती जा रही है। ऐसे में नया साल हमे यह याद दिलाने आना है कि सच्ची प्रगति केवल आगे बढ़ने से नहीं भीतर बेहतर बनाने से होती है।
पुराने दुखों को अनदेखा कर दो, वह कहता है, उन्हें स्वीकारों ,समझो और उनसे सीखो। क्योंकि जो पीड़ा हमें परिपक़्व बनाती है वही भविष्य में हमारी सबसे बड़ी ताक़त बनती है।
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गतांक से आगे : १
मित्र वही जो गिरने पर थामे हाथ, भीड़ में नहीं, एकांत में समझाए।



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सन्दर्भ : आलेख : माया : शक्ति : लिपिका
: छाया

दर्द अगर समझ बन जाए वही जीवन की सबसे बड़ी पूंजी है : इस नए साल की सबसे बड़ी आवश्यकता है नई ऊर्जा। ऐसी ऊर्जा जो क्रोध से नहीं, संवेदनशीलता से जन्म ले। जो आरोपों से नहीं, आत्ममंथन से विकसित हो। जब मन शांत होता है, तभी समाज में सौहार्द संभव होता है।
रिश्तों की बात हो और मित्रता का उल्लेख न हो, तो संवाद अधूरा रह जाता है। लंबे समय की मित्रता विश्वास की नींव पर टिकी होती है। यदि ऐसे रिश्ते में कभी कोई भूल हो जाए, तो उसे सार्वजनिक करना, उसे चटक देना - मित्रता नहीं, उसके अपमान के समान है।
मित्र वही जो गिरने पर थामे हाथ, भीड़ में नहीं, एकांत में समझाए।
सच्चा मित्र वही होता है जो गलती गिनाने के बजाय उसे दोहराने से रोके। जो साथ छोड़ने में नहीं, सुधार करने में विश्वास रखे। जो व्यक्ति छोटी-सी बात पर किसी और को नये मित्र मिलने पर पुरानी मित्रता तोड़ देता है वह न मित्रता की मर्यादा समझता है और न स्वयं मित्र चनन योग्य होता है।
जो निभा न सके मौन में भी रिश्ता, वह शोर में साथ होने का दावा कैसे करे ? नया साल हमें यह सिखाने आता है कि रिश्ते अधिकार से नहीं, सम्मान और संवाद से निभते हैं। चाहे परिवार हो, मित्रता हो या कार्यक्षेत्र संयम, संवेदनशीलता और समझ हर संबंध की प्राणवायु हैं। आज आवश्यकता है. कि हम तुलना छोड़ें और संतोष अपनाएँ। ईर्ष्या नहीं, प्रेरणा लें। हर व्यक्ति की यात्रा अलग है और हर संघर्ष का समय भी। ....
हर किसी का आकाश अलग-अलग है, फिर क्यों किसी और के सूरज से जलन ? नया साल हमें यह अवसर देता है कि हम नकारात्मकता को विदा करें -न शिकायत के साथ, बल्कि समाधान की सोच के साथ। क्योंकि आशा कोई भ्रम नहीं, यह मनुष्य की सबसे बड़ी शक्ति है।
जहाँ उम्मीद साँस लेती है, वहाँ अंधकार ठहर नहीं पाता।' आइए इस नए साल में हम यह संकल्प लें कि हम रिश्तों को निभाएँगे तोड़ेंगे नहीं। हम गलतियों को सुधारेंगे- उछालेंगे नहीं। हम आगे बढ़ेंगे-पर अपनों को साथ लेकर । क्योंकि नया साल तभी सार्थक होगा जब हम बेहतर इंसान बनेंगे-अपने लिए भी और समाज के लिए भी।

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माया : छाया : शक्ति रितु माया लिपिका
रेनू शब्द मुखर.


स्तंभ संपादन : शक्ति. रीता क्षमा प्रीति
स्तंभ सज्जा : शक्ति मंजिता स्वाति अनुभूति
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शक्ति आलेख : २ / २ / ४
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या देवी सर्वभूतेषु बुद्धि रूपेण संस्थिता

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विद्या और बुद्धि और ज्ञान का वह प्रकाश : सही दिशा की ओर चलने की प्रेरणा दे
शक्ति आलेख आरती अरुण हिमाद्रि

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ज्ञान का वह प्रकाश : सत्य, ज्ञान रूपी विद्या और बुद्धि की ओर चलने की प्रेरणा दे : हम सभी शक्ति समूह की तरफ़ से आप सभी को बसंतपंचमी की हार्दिक शुभकामनाएं
बृहदारण्यक उपनिषद् का यह श्लोक एक प्रार्थना है जिसे हम परमात्मा की सत्ता को सम्बोधित करते हुए करते हैं और अपने भावों को व्यक्त करते हुए हमें ज्ञान का वह प्रकाश चाहिए, चेतना की वह शक्ति चाहिए जो हमें हमारी बुद्धि और विवेक को उस दिशा की ओर उन्मुख करने का काम करे जो हमें सत्य, ज्ञान रूपी विद्या और बुद्धि की ओर चलने की प्रेरणा दे कि हमारे मन हृदय और मस्तिष्क के साथ साथ आत्मा की गहराईयों से मृत्यु का भय दूर हो जाए और हम मुक्तावस्था में जीवन जीते हुए मोक्ष‌ प्राप्त कर सकें और यह बौद्धिक चेतना सिर्फ शारदे भवानी सरस्वती ही दे सकती हैं। आज बसंत पंचमी है, ऋतु परिवर्तन का शुभारंभ है, प्रकृति की प्रकृति आज से बदलनी शुरू हो जाती है और सबकुछ बदलने लगता है। हमें भी इस बदलाव को समझने की कोशिश करनी चाहिए,ऋत और ऋतु तथा परिवर्तन को समझकर चलना चाहिए। यही ज्ञान मार्ग है और ज्ञान,बुद्धि, विवेक,कला, साहित्य, और संस्कृति की आराध्य देवी भगवती सरस्वती हैं जिनकी सच्ची आराधना से हमें उनका यह आशीर्वाद मिल सकता है। जीवन में संतुलन बसंत : बसंत ऋतु जीवन में संतुलन स्थापित करने का संदेश देती है। न ज्यादा गर्मी न ज्यादा सर्दी, खुशनुमा मौसम और प्रकृति पर छाई हरियाली इस ऋतु की सबसे खास बातें हैं। बसंत पंचमी के इस अवसर पर आज सुबह से ही बारिश हो रही है।
बसंत पंचमी पर बारिश होने के कई धार्मिक और प्राकृतिक मायने हैं। हिंदू परंपरा के अनुसार शुभ कार्यों या त्योहारों पर वर्षा को ईश्वर का आशीर्वाद माना जाता है। बसंत पंचमी विद्या की देवी माँ सरस्वती का दिन है, इसलिए इस दिन बारिश को ज्ञान और समृद्धि की वर्षा के रूप में देखा जाता है।
बसंत ऋतु के आगमन पर वर्षा धूल को साफ कर प्रकृति को और भी हरा-भरा और ताज़ा बना देती है, जो बसंत के "ऋतुराज" होने के भाव को चरितार्थ करती है।इस समय खेतों में सरसों और गेहूं की फसलें होती हैं। हल्की वर्षा इन फसलों के लिए 'अमृत' के समान मानी जाती है, जिससे पैदावार अच्छी होती है। इस बसंत पंचमी पर दिल से यही दुआ है कि चाहे कितनी भी ऋतुएं आए जाएं, जीवन से बसंत का मौसम कभी न जाए उस कस्तूरी की तरह जो जीवन को सदा महकाती है। बसंत पंचमी के इस सुअवसर पर मेरी कविता जीवन बसंत को समर्पित।

सज्जा संपादन : शक्ति रीता प्रीति अनुभूति

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शक्ति आलेख : २ / २ / ५
जब उद्धव ब्रज गए,भक्ति धारा में बह गए...
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शक्ति.सीमा.डॉ.आर.के.दुबे
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गोपियाँ : उद्धव मन भए न दस बीस.
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* गोपियाँ : उद्धव मन भए न दस बीस : माधव फोटो : फोटो : साभार : नेट से
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उद्धव की मान्यता थी कि ईश्वर की प्राप्ति बुद्धि और योग से ही संभव है हार्दिक प्रेम से नहीं अथवा रुहानी प्रेम से नहीं। और इस प्रकार उद्धव अपने ज्ञान और निराकार ब्रह्म के अहंकार में डूबे हुए थे। उनके इसी अहंकार को दूर करने के लिए श्री कृष्ण ने उन्हें संदेश वाहक के रूप में ब्रज भेजा।
उद्धव ब्रज पहुँचे और उन्होंने वह पत्र राधा जी को थमाया। उद्धव को लगा था कि पत्र पढ़कर गोपियाँ फूट फूटकर रोएंगी या योग सीखने को उत्सुक होंगी। लेकिन राधा जी ने उस पत्र को मस्तक से लगाया और बिना पढ़े ही गोपियों को दे दिया। गोपियों ने उस पत्र के टुकड़े-टुकड़े कर दिए।
उद्धव क्रोध और आश्चर्य से भर गए। उन्होंने कहा, " क्या तुम्हें कृष्ण से प्रेम नहीं ? यह स्वयं परमेश्वर का संदेश है, इसमें मुक्ति का मार्ग है! "
राधा जी मंद मंद मुस्कुराईं और उद्धव से कहा, "उद्धव, पत्र उसे लिखा जाता है जो दूर हो। संदेश उसका पढ़ा जाता है जो मौन हो। " राधा जी ने समझाया कि-उद्धव जिसे ' योग ' कह रहे थे, वह मन को एकाग्र करने की विधि है। लेकिन गोपियों का मन तो कृष्ण से कभी हटा ही नहीं। यदि कृष्ण चले जाते, तो उन्हें याद करने की जरूरत पड़ती। वे तो सांसों की तरह भीतर बसे हैं। राधा जी ने आगे कहा कि कृष्ण और ब्रज अलग हैं ही नहीं। जैसे समुद्र से लहर अलग नहीं हो सकती, वैसे ही कृष्ण हमसे अलग नहीं। पत्र के टुकड़े करना यह दर्शाता है कि कृष्ण का संदेश (शब्द) तुच्छ है, उनकी उपस्थिति (अनुभव) शाश्वत है। इस कथा का सार इससे यह स्पष्ट है कि सूचना और अनुभूति में बड़ा अंतर है। उद्धव के पास सूचना थी, पर राधा के पास अनुभूति। जब उद्धव वापस लौटे, तो वे वह 'ज्ञानी' नहीं रह गए। वे भी ब्रज की धूल में लोटने के प्रबल इच्छाधारक बन गए। और, कृष्ण से अभ्यर्थना करने लगे — " प्रभु, मुझे अगले जन्म में ब्रज की कोई लता या घास बना देना, ताकि आपके प्रेम - दीवानी गोपियों की चरण रज मुझ पर पड़ती रहे।
*
संपादन व सज्जा : शक्ति.रजनी सीमा प्रीति
*
रिश्तों की जमापूंजी : बैंक ऑफ़ इंडिया : आर्य लक्की : प्रंबधक : समर्थित.
*
*
यादें न जाए बीते दिनों की : बसंत पंचमी की मंगल शुभ कामनाओं के साथ 
*
---------------
सम्पादकीय जागरण : गोरी साँवरे सलोनी : पद्य संग्रह आलेख : पृष्ठ : २ / ३.
---------------
संपादन 
 शक्ति.क्षमा सीमा तनु सर्वाधिकारी.
रघुनाथ मंदिर. जम्मू डेस्क 

*

शक्ति अनुभाग 
*
शक्ति हिमाद्रि समर्थ 
 जयपुर. राजस्थान
------
भाविकाएँ 
*
नज़्म : डॉ आर के दुबे
*
गुम थे किसी के प्यार में 
*

*
संपादन : सज्जा : शक्ति सीमा
रजनी
*
मृग मरीचिका सा जीवन. 


*
कभी धूप की तलाश 
कभी छांव की तलाश 
मृग मरीचिका सा जीवन 
भटकता है दिल 
खोजने पलाश 
पलाश...!
 जिसकी सबको आस
मिल जाए ये ढूंढे काश 
काश....! 
काश ! हमें ये मिल जाता 
जीवन कुछ आसान हो जाता 
जमीं का हो तारों की चाह में 
जीवन धरातल संवर जाता 
संवरना ही क्या पा लेना है ?
पा लेने पर क्या कुछ नहीं पाना है ?
जीवन चलने का है नाम 
फिर किस लिए रुक जाना है !
माना खिलकर मुरझाना है 
नियती का यही कहना है 


भाविकाएँ : सन्दर्भ : फोटो : शक्ति : रितु 

*
मगर चलते रहना, चलते रहना 
मिल जाए ये वो गहना है 
तलाश जारी रखना है 
मिलेगी मंजिल, प्रयास करना 
धूप छांव का यही है कहना
हताशा को पार कर 
विफलता को लांघ कर 
उम्मीद के आंचल में 
बसंत की तलाश में 
जीवन पलाश लिए 
चलना है बस चलना है 
जीवन का यही कहना है

*
-----------
शक्ति नीलम.

लघु कविता.
 
आया बसंत
*

आया बसंत
आया बसंत, मन भाया बसंत,
मस्ती के रंग ले आया बसंत।
रंग-बिरंगे फूलों से सज गई धरा,
खुशबू से देखो महक उठा है गगन।
मतवाली कोयल भी गा उठी है, 
भौरों- सा गुंजार कर रहा है मन।
मां शारदे के पड़ते पावन चरण,
ज्ञान ज्योति से पुलकित मन।
बज उठे ढोल, उड़े गुलाल,
पिया की याद से हुए गुलाबी गाल।
मंजरी से भर गई आम की डाल,
फैलाया है मदन ने ऐसा जाल।
पसरा है प्रेम ,पड़ती नज़र जिधर ,
जब से किया है बसंत ने असर।
रितुराज ने कर दिया कमाल,
मचा दिया चहुंओर धमाल।
काश! हो सकता नफ़रत का अंत,
आया बसंत, मन भाया बसंत।

*
शक्ति नीलम.
कवयित्री लेखिका सम्पादिका 
वाराणसी 

*
पृष्ठ सज्जा : संपादन 
शक्ति शालिनी सीमा अनुभूति. 
 -------


शक्ति. रेनू शब्दमुखर
 लेखिका. कवयित्री. सम्पादिका. 
*
भाविकाएँ. 

*
मेरे घर में जैसे सूरज 
निकला है शाम से 
*

भाविकाएँ : सन्दर्भ : छाया : शक्ति.रेनू 

आज मेरे मन के आँगन में  
प्रेम का सूरज उत्तरायण हुआ है, 
और तुम - मेरे जीवन की दिशा. 
तिल-गुड़ सी मीठी हँसी तुम्हारी, 
पुराने सारे शिकवे पिघला देती है, 
जैसे ठिठुरन में अचानक धूप उतर आए आँगन में.
पतंगों-सा प्रेम हमारा डोर थामे विश्वास, 
हवा के भरोसे सपने, 
और ऊँचाइयों पर एक-दूसरे का नाम. 
आज मकर संक्रांति है, तो चलो मन की अलाव जलाएँ, 
अहंकार, दूरी, चुप्पियाँ सब राख कर दें- 
और कहें बिना संकोच, तुम हो.
तो हर मौसम शुभ है.

 *
शक्ति. रेनू शब्दमुखर
 लेखिका.कवयित्री. सम्पादिका. 


*
नई सुबह की नई दुआएँ  

*
शक्ति. रेनू शब्दमुखर
लेखिका.कवयित्री.सम्पादिका.  

*

भाविकाएँ : सन्दर्भ : छाया : शक्ति.लवली. 
*
नववर्ष पर  आत्मीय इच्छाएँ,  
नई सुबह की दुआएँ आप सभी के नाम,  
नए दौर में विजय का विशाल विस्तार, 
मानसिक शांति का मधुर मार्ग हो।  
इच्छाओं का रूपांतरण चमत्कार बने,  
घर-परिवार में कल्याण की कुसुमावली खिले।  
भोला विश्वास नहीं,समझती हूँ गहराई से,  
 उदास रात्रियाँ तुम्हारी खुशियों से नहाएँ।  
फूलों सी मुस्कान लौटे तुम्हारी चहक से,   
इसलिए प्रथम प्रार्थना में लालसा- 
सप्त सागर लाँघन, इंद्रधनुषी विविधता, 
सूर्यरथ की वेगवान गति।  
नववर्ष पर ऐसी ही आत्मीय इच्छाएँ,  
अनंत शुभेच्छाएँ और अंतस की गर्मजोशी। 
नूतन वर्ष मंगलमय हो
 *
शक्ति. रेनू शब्दमुखर
 लेखिका. कवयित्री. सम्पादिका. 
*
पृष्ठ सज्जा : संपादन 
शक्ति शालिनी मंजिता सीमा अनुभूति. 
*

*
भाविकाएँ. 
*

शक्ति अनुभाग 
शक्ति शालिनी 
*
तू मेरे माथे की बिंदी 
हिंदी 

*

*
भाविकाएँ : सन्दर्भ : माया : छाया : शालिनी 

*

अलंकार अधीर है,हिंदी को उठी पीर है,
साहित्य क्यों उदास हैऔर छंद बदहवास है,
लेखनी चलती रही,हर रोज़ मचलती रही,
प्रीत है यह देश की,जो गीत से सजा रहे।
हम गीत आज गा रहे,हिंदी दिवस मना रहे।

दिवस आज ख़ास है,चहुंओर ही उजास है,
सृजनधर्मिता में सब,भाषा के आसपास हैं,
सजती-सँवरती रही,चहुंओर विचरती रही,
गद्य में हम लिख रहे,व पद्य गुनगुना रहे।
हम गीत आज गा रहे,हिंदी दिवस मना रहे।

देश का सम्मान है,माँ भारती का मान है,
हिंदी का ही बखान है,हिंदी ही स्वाभिमान है,
दिवस यह विशेष है,किंचित न कोई लेश है,
हम दूसरों को सुन रहे,अपनी भी कुछ सुना रहे।
हम गीत आज गा रहे,हिंदी दिवस मना रहे।

प्रश्न अनगिनत लिए,हिन्दी यहाँ खड़ी रही,
एक दिवस के लिए,क्यों यहाँ पड़ी रही,
मन में है उथल-पुथल,अंतर्द्वंद्व व कोलाहल,
मची हुई है हलचल,ख़ुद को आज़मा रहे,
हम गीत आज गा रहे,हिंदी दिवस मना रहे।

साहित्य की प्रस्तावना,मन में रखो सद्भावना,
हो आपसी सौहार्द भी,और प्रेम की हो भावना,
हिन्दी हमें बता रही,हिन्दी हमें सिखा रही,
साहित्यधर्मिता में हम,सब भेद अब भुला रहे।
हम गीत आज गा रहे,हिंदी दिवस मना रहे।

*
पृष्ठ सज्जा : संपादन 
शक्ति डॉ सुनीता  सीमा अनुभूति 
*

*

भाविकाएँ : २ 
*
इतिहास साक्षी है 
*
शक्ति आरती अरुण 
*

द्रौपदी :  चीर हरण : लघु फिल्म : कृष्ण रक्षण 

*
और इतिहास साक्षी है
जब जब ऐसा हुआ है
महाभारत हुआ है
महासमर का तांडव हुआ है,
और फिर ,
बलि दे दी जाती है 
किसी एकलव्य की,
किसी कर्ण की,
और पांचाली का चिर हरण होता
रहता है,
मौन रह जाती है सारी कुरू सभा।
सनद रहे,
मौन ने सदैव अन्याय और अत्याचार,
शोषण और दोहन को जन्म दिया है।
मौन,
न्याय और सत्य का
हक और अधिकार का
मूक हत्यारा है।
न्याय,
नैसर्गिक है, धर्म है , प्रकृति है 
सत्य है और अंत में ईश्वर है।
इसे अबाध निःशंक निर्भय स्वतंत्र 
और निष्पक्ष रहने दो,
इतिहास साक्षी है ,
जब जब इसने अपने धर्म के मर्म 
को खोया है, विस्मृत किया है
विध्वंस हुए हैं, 
मानवता रोयी है।
इसलिए बस इसलिए 
न्याय को जीवित रखना है
कि
फिर इतिहास की दुःखद परिणति न हो,
महासमर न हो।
*
पृष्ठ सज्जा : संपादन 
शक्ति शालिनी मंजिता सीमा  

*
---------
भाविकाएँ : अनुभाग 
२ / ३  : न्याय 
-----
शक्ति आरती अरुण 
*
न्याय,
मुक्त है
स्वतन्त्र है
स्वच्छन्द है
अबंध है।
कोई बन्धन नहीं होता
कोई नियंत्रण नहीं होता इस पर,
मानवीय रिश्तों का
सम्बन्धों का
आशाओं का, अपेक्षाओं का।
न्याय,
कभी बंधता नहीं 
स्थान, काल , पात्र के बंधनों से,
यह खेल नहीं होता सत्ता और शक्ति का,
छद्म व्यापार करते,
व्यवस्था का चीर हरण  करते
सामर्थ्यवानों का
तंत्र के संचालकों का।
पर विडम्बना है
न्याय की नियति का,
न्याय के प्रारब्ध का,
बंध जाता है कभी किसी कालखंड में 
कभी पुत्र प्रेम में,
कभी शिष्य मोह मे,
तो कभी राज मोह में 
तो कभी मित्र धर्म के मोह में ।
*

*
----------
राधिकाकृष्णरुक्मिणी : आज का गीत : जीवन संगीत : दृश्यम भजन : पृष्ठ : ३.
----------
संपादन
शक्ति मीना रितु अनुभूति
*

*
गोविन्द बोलो हरि गोपाल बोलो. 

*
*
राधा रमण हरि गोपाल बोलो :भजन 
लोकेशन : मुक्तेश्वर : नैनीताल 
महा शक्ति मीडिया सहयोगी 
*
तुम्हारे लिए : यूट्यूब चैनल 
भजन सुनने के लिए नीचे दिए गए लिंक को दवाएं. 

*
महाशक्ति मीडिया. शक्ति.प्रस्तुति.
शक्ति प्रिया श्रद्धा मधुप
*
राधा : रुक्मिणी : संवाद : पहली मुलाक़ात
*

*
महाशक्ति मीडिया. शक्ति.प्रस्तुति.
शक्ति प्रिया श्रद्धा सुनीता मधुप
*
गंगा आरती : गंगोत्री
*

शक्ति. श्रद्धा प्रिया.
*
गंगा आरती : लोकेशंस : गंगोत्री : उत्तरकाशी
प्रदर्शन तिथि : १४ ०१ २६
भजन : विष्णु चरण से निकली
ज्योति जगत छाई शिव ने शीश चढ़ाई.


गंगा आरती : लोकेशंस : गंगोत्री : उत्तरकाशी
भजन सुनने के लिए नीचे दिए गए लिंक को दवाएं. 

*
*
*
स्वर्णिका ज्वेलर्स.निदेशिका.शक्ति तनु.आर्य रजत.सोहसराय.बिहार शरीफ.समर्थित.
----------
राधिकाकृष्णरुक्मिणी : शक्ति : कोलाज दीर्घा : पृष्ठ : ४.
--------
संपादन
शक्ति रेनू शालिनी सीमा
दार्जलिंग डेस्क
*
तोरा मन दर्पण कहलाए


जग से कोई भाग ले प्राणी मन से भाग न पाए : शक्ति प्रिया डॉ.अनु रितु स्मिता रंजीत 
*
--------
राधिकाकृष्णरुक्मिणी : शक्ति : फोटो दीर्घा : पृष्ठ :७. 
--------
मुक्तेश्वर डेस्क.नैनीताल 
त्रि शक्ति संपादिका 
*

शक्ति रितु मीना चुन्नी 
*
यशोदा : कृष्ण : ओखली : सजा : इस्कॉन : उज्जैन : छाया : माया : शक्ति डॉ.सुनीता चुन्नी रंजीत. 


जगन्नाथ ( श्री कृष्ण ) पुरी के दर्शन : पुरी : ओडिसा : फोटो शक्ति शालिनी रितु अनुभुति 

मुक्ति नाथ : श्री विष्णु : बुद्ध : पहाड़ प्रकृति प्रेम : शक्ति रितु शालिनी मधुप 

यशोदा : कृष्ण : ओखली : सजा : इस्कॉन : उज्जैन माया 
छाया : शक्ति डॉ.सुनीता रानी चुन्नी रंजीत
 *
----------
राधिकाकृष्णरुक्मिणी :समसामयिकी. समाचार : दृश्यम पृष्ठ : ८.
------------
सम्पादिका
शक्ति रजनी मीना शबनम
*
सम्पादिका.


शक्ति. रजनी मीना शबनम
*
---------
समसामयिकी. समाचार : पृष्ठ : ८ / १
--------
राष्ट्रीय बालिका दिवस
GIF

*
२४ जनबरी
*
नित्य नई उड़ान भर सकती हूँ
हर बाधा को जीत सकती हूँ
जो सोचती हूँ वो सबकुछ
हौसलों से पा सकती हूँ
*
शक्ति शालिनी मधुप रेनू
*
*
बर्फ़बारी : हर्षिल : गंगोत्री : दृश्यम
*
शक्ति. प्यार देवी. डॉ. उनियाल : गंगोत्री
---------
---------
दृश्यम : राधिकाकृष्णरुक्मिणी : :
--------
कृष्ण : दृश्यम : महाभारत : धारावाहिक :१३ .


* आर्य : सुनील व्यास. फिल्म निर्माता : अभिनेता लेखक : विचारक मसूरी. मुंबई.
*
बसंत पंचमी : शक्ति महासरस्वती पूजा दिवस
*

या देवी सर्वभूतेषु बुद्धि रूपेण संस्थिता


*
ऐं ह्रीं श्रीं अंतरिक्ष सरस्वती परम रक्षिणी।
मम सर्व विघ्न बाधा निवारय निवारय स्वः
*
डॉ.अनीता प्रशांत मधुप *
मुक्ति नाथ : नेपाल : श्री हरि : लक्ष्मी नारायण के दर्शन
*

*
शक्ति रितु : नेपाल यात्रा : लघु फिल्म

*
प्रशांतस्य शुभेच्छासंदेशः।
*
*
शब्दान् ददासि त्वमेव मातृवत्, वाक्यपुष्पाणि अहं विनिर्मिमि।
हर्षबीजानि त्वया समर्पितानि, स्मितदीपं अहमेव प्रज्वालयामि।
मार्गान् दर्शयसि करुणासहितान्, लक्ष्यशिखरं अहं नयामि दृढम्।
रज्जुं बध्नासि स्नेहबन्धनेन,पतङ्गं स्वप्नमयं अहम् उत्क्षिपामि।
उत्तरोत्तरं वर्धतां जीवनम्, मकरसंक्रान्त्या समं शुभफलम्।

*
मकरसंक्रान्तेः
हार्दिकाः शुभाशयाः। इति

*

भावार्थ

*

आप शब्द देते हो, माँ के समान स्नेह से, उन शब्दों से मैं वाक्यों के फूल सजाता हूँ। आपने जो आनंद के बीज सौंपे हैं मुझे, उनसे मुस्कान का दीपक मैं स्वयं जलाता हूँ। आप करुणा के साथ रास्ते दिखाते हो, मैं दृढ़ निश्चय से लक्ष्य के शिखर तक बढ़ता हूँ। आप स्नेह के बंधन से डोर बाँधते हो, और मैं सपनों की पतंग को आकाश में उड़ाता हूँ। जीवन निरंतर आगे बढ़ता रहे, मकर संक्रांति के साथ शुभ फल लाता रहे। मकर संक्रांति की हार्दिक शुभकामनाएँ। — प्रशांत की ओर से शुभेच्छा संदेश

*
शक्ति डॉ.अनीता प्रशांत सीमा.
बड़ोदा. गुजरात.
*

*
तराने दिल के साभार : चली चली रे पतंग मेरी चली रे
प्रस्तुति. शक्ति रितु मधुप रेनू

*

राधिका कृष्ण इस्कॉन मंदिर : मुंबई
लघु फिल्म : न्यूज़ : शक्ति सेजल मधुप
*

शक्ति.आर. के. अधिकृत व समर्थित
-----------
मुझे भी कुछ कहना है : गीता ज्ञान :आपने कहा : आभार : पृष्ठ :९.
-------------
संपादन
शक्ति डॉ.अनु मीना तनु सर्वाधिकारी
*
प्यार ; व्यवहार : संस्कार
*
मुझे भी कुछ कहना है : पृष्ठ :९ / १
*
दृश्यम : जो तुमसे है मेरे हमदम 
भगवान से भी वो आस नहीं 


*
शक्ति : लिपिका : धुन : ओ मेरे दिल के चैन 
*

*
छोटू कृष्णा की मकर संक्रांति की 
आप सभी को हार्दिक शुभकामनाएं : दृश्यम 

*

प्रस्तुति : शक्ति सीमा अनीता चुन्नी रंजीत 

*
लिखा है तेरी आँखों में किसका अफ़साना


प्रस्तुति : शक्ति प्रिया. रेखा सीमा रितु


*
गीत : सन्दर्भ : माया : छाया : अमरप्रेम :
*
कुछ रीत जगत की ऐसी है हर एक सुबह की शाम हुई
*
कुछ रीत जगत की ऐसी है हर एक सुबह की शाम हुई
तू कौन है, तेरा नाम है क्या सीता भी यहाँ बदनाम हुई
फिर क्यों संसार की बातों से भीग गए तेरे नैना
*
*
*
समर्थित दृश्यम : कुछ तो लोग कहेंगे

*
साभार : आंनद बख्शी : गीतकार
फिल्म : अमरप्रेम :
*
----------
ये है गीता का ज्ञान : पृष्ठ :९ / २ .
---------
संपादन.
*
शक्ति*सीमा.डॉ.आर के.
शक्ति* डॉ.अनीता.प्रशांत. 
शक्ति*बीना.डॉ.नवीन 


गीता : द्वितीय अध्याय : श्लोक ६२ :
*
ध्यायतो विषयान्पुंसः सङ्गस्तेषूपजायते।
सङ्गात्संजायते कामः कामात्क्रोधोऽभिजायते ॥
*

*
भावार्थ
*
इस श्लोक का अर्थ है : विषयों वस्तुओं के बारे में सोचते रहने से मनुष्य को उनसे आसक्ति हो जाती है। इससे उनमें कामना यानी इच्छा पैदा होती है और कामनाओं में विघ्न आने से क्रोध की उत्पत्ति होती है।
यहां भगवान श्रीकृष्ण ने विषयासक्ति के दुष्परिणाम के बारे में बताया है।.
*
--------
आपने कहा : आभार : हिंदी पृष्ठ :९./ ३
---------
संपादन
शक्ति प्रिया मानसी श्रद्धा कंचन
*


पाठकों को सोचने, समझने और सकारात्मक दिशा में आगे बढ़ने की प्रेरणा
*
मित्र मधुप की यह पत्रिका विचारों की सुगंध फैलाने वाला सशक्त माध्यम बने यही कामना है।
 इसमें साहित्य, संवेदना और सामाजिक चेतना का सुंदर संगम दिखाई दे। 
यह रचनात्मक प्रयास पाठकों को सोचने, समझने और सकारात्मक दिशा में आगे बढ़ने की प्रेरणा देता रहे। उज्ज्वल भविष्य की हार्दिक शुभकामनाओं के साथ.
*
शक्ति.डॉ.अनीता प्रशांत सिंह
गुजरात

*
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English Section

*

*
Contents.
*
English Editorial Section : Cover Contents Page 1
Shakti Editorial. English Page : 2
Shakti Editorial. Prose : English Page : 3
Shakti Editorial. P0em : English Page : 4
Shakti Vibes : .Page : 5
Radhika : Krishna : Rukmini  : Photo Gallery.Page : 6
Visuals News : News : Editorial Page : 7
Shakti Art  Gallery  : Radhika : Krishna : Rukmini : English : Page 8.
Gratitude : Day Special : You Said it : Page : 9.

*

*
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Contents.
*
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 Editorial Section : English Page 1
Radhika : Krishna : Rukmini : Darshan :
*
Shakti Chief Editor.
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Kolkata  Desk.

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Shakti Seema* Sr.Advocate Deputy Legal Aid
Shakti Jasika Singh Advocate.Prayagraj High Court.

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--------
Shakti *Radhika Madhav Anubhuti Vibes : .Page : 5
----------
Radhika Krishna Rukmini 
*
 Editor
Shakti Shalini Seema Madhvi.
 
*
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Related : Photo Shakti Maya Chhaya
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Selfless love, Divine presence in all beings,
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a Silver line behind the Dark  Clouds 
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Learning from the days 
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Making sure the future the best 
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@ Shakti Dr.Sunita Madhup Seema.
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Words making a difference ? 
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Sometimes when the people you love hurt you the most 
It is better to remain silent because,if your love wasn't enough 
Do you think your words will make a difference  
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It is you what you want & lost 
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Don't cry for what you lost 
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performing one's duty without attachment to results, finding strength in surrender, controlling the mind, selfless love, and realizing divine presence in all beings, teaching that focusing on action : Karma with faith leads to peace and purpose

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the gentry observing Republic Day Shakti's Parade in DSA.Ground.Nainital.
photo Shakti Bharti Bina Dipti Bora.
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Cartoon : Seensomwhere : Madhup
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*

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Don't you feel ...Sir !
is it  too awesome ...


*
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Mumbai : Jagannath Shiva Temple : Shakti Shana Dr.Madhup Vikash 
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Day Special : You Said it : Gratitude.English :  Page : 9.
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*
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Day Special : Gratitude : You Said it : Page : 9.
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Shakti.Dr.Bhwana Rashmi Farheen.
Nagpur Desk.
*
Day Special.

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a very happy healthy and hearty Makar Sankranti
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Healthy , Hearty and Happy Lohari.2026.
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Times Media
We wish you a  Very 
Healthy , Hearty and Happy New Year.2026.
*
*
Birthday Wishes 
*

a blooming Pink Rose : GIF
*
on 29th of January 
Shakti Bani 
Assistant Shakti Editor.
Photo Editor : MS* Media. 
a Staunch Devotee Lover of 
Radhika.Krishna.Rukmini 

*
*
Many Many Happy Returns of the Day
wish you a Hearty Happy and Healthy Birthday
*

on 5th of January 
Exclusively Shakti Dr. Sunita Madhup Smita Ranjeet 
with all of Us ( Ham Log ) 
*
for the Staunch Devotee Lover of 
Radhika.Krishna.Rukmini 
*

*
Shakti Vanita Sunil 
Neeti Sampadika.

*
Many Many Happy Returns of the Day
wish you a Hearty Happy and Healthy Birthday
*

on 3rd of January.
*
*
Ashok Karan. 
*
Staff Press Photographer : Hindustan Times Patna.Ranchi. 
Photo Editor : Public Agenda.New Delhi.
Free Lance Photo Journalist 
*
Presently.
Self : Blogger Photo Journalist  
Mentor : MS* Media Blog Magazine Page 
*
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Hearty and Happy Birthday Year.2026.
*

Dr.Indradeo. BHMS  : Khushbu Clinic : Biharsharif Supporting 
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Gratitude. English :  Page : 9 / 2.
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Doctor's Suggestion
Sanjivni Buti  
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Cough Cold  Sneezing.
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Suggested Medicine Homeopath. 
Aconitum Napellus ( Aconite ) 30.
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take 3 to 4 drops in the lukewarm water.
Duration : 3 to 4 times in a day
Continuation : 3 to  4 days.  
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You Said It . Sandese Aate Hai. English :  Page : 9 /2.
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Editor.
Shakti.Dr.Bhwana Shalini Farheen.
Nagpur Desk.
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Sandese Aate Hai. English :
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Editor
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Shakti Kajal Seema Jasika Singh.
Indraprastha Desk. 

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This blog is incredibly insightful

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Shakti : Kajal.
Indraprastha.
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Shakti * Shreya Verma.Himachal.
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photo 
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charity begins at home : Shakti Ritu 
distributing blankets to the needy ones. 13.1.26. 
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Dudu Bubu Love Story.
Cartoon Visual.Courtesy.

Drama Queen.Bubu.
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Comments

  1. Shakti:Rani Chunni Ranjeet
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  3. मित्र मधुप की यह पत्रिका विचारों की सुगंध फैलाने वाला सशक्त माध्यम बने—यही कामना है। इसमें साहित्य, संवेदना और सामाजिक चेतना का सुंदर संगम दिखाई दे। यह रचनात्मक प्रयास पाठकों को सोचने, समझने और सकारात्मक दिशा में आगे बढ़ने की प्रेरणा देता रहे। उज्ज्वल भविष्य की हार्दिक शुभकामनाओं के साथ।
    - शक्ति डॉ अनीता प्रशांत सिंह

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  5. This blog is published in a great insightful web page and keeping everyone aware and showers the blessings of knowledge to each one of us who is away from the native place. It is too great to see all updates from all the corners of the world . Our best wishes from our side to the Editorial Shakti Team . We hope and pray that this should grow exponentially.
    With best regards.
    Shakti.Rinki Nagmani Anika.

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