Guru Govind Dono Khade : 2 Shikshan Divas.

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©️®️Shakti's Project.
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Times Media.
Cover Page.
Guru Govind Dono Khade.
Guru : Govind : Cover Page.
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आवरण पृष्ठ : 
प्रस्तुति : त्रिशक्ति. 
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त्रिशक्ति.प्रस्तुति.
सांस्कृतिक पत्रिका.
     गुरु गोविन्द दोनों खड़े काके लागू पाय :अंक : २.     
संस्कृति दिवस विशेषांक.    
महा.शक्ति.मीडिया.प्रेजेंटेशन@जीमेल.कॉम   
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फोर स्क्वायर होटल : रांची : समर्थित :आवरण पृष्ठ : विषय सूची : मार्स मिडिया ऐड : नई दिल्ली.

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पत्रिका / अनुभाग.
ब्लॉग मैगज़ीन पेज.
हिंदी.
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विषय सूची.
आवरण पृष्ठ : ०.
विषय सूची : पृष्ठ :०.
आभार प्रदर्शन : पृष्ठ : ० 
शक्ति विचार धारा : पृष्ठ : १.
सम्पादकीय : पृष्ठ :२.
सम्पादकीय : शक्ति गद्य संग्रहआलेख : तारे जमीन पर : पृष्ठ :३.
सम्पादकीय : शक्ति पद्य संग्रह आलेख : आकाश दीप :पृष्ठ :४.
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एम. एस. मीडिया.महाशक्ति.प्रस्तुति. 
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 पत्रिका / अनुभाग. ब्लॉग मैगज़ीन पेज 
के निर्माण सहयोग के लिए. 
 'तुम्हारे लिए. '
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हार्दिक आभार प्रदर्शन : पृष्ठ : ० 
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शक्ति.डॉ भावना स्मिता.वनिता.
 संयोजिका / मीडिया हाउस,हम मीडिया परिवार 
 की तरफ़ से 
 आपके लिए धन्यवाद ज्ञापन. 
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 पत्रिका के निर्माण / संरक्षण के लिए. 
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हार्दिक आभार. 
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शक्ति.शाहिना नाज.
  प्राचार्या.सोगरा स्कूल.  
  बिहार शरीफ.समर्थित. 
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टाइम्स मीडिया शक्ति प्रस्तुति.


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त्रिशक्ति विचार धारा : पृष्ठ : ०
संपादन
शक्ति. माधवी सीमा अनीता
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गुरु ' गोविन्द ' दोनों खड़े. 
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कृष्ण : कर्म : अर्जुन. 
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मनुष्य के ' भाग्य ' या ' संयोग ' से कुछ नहीं होता, है पार्थ !
आप अपने ' कर्मों ' से ही अपना ' भाग्य ' स्वयं बनाते हैं
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प्रथम मिडिया शक्ति प्रस्तुति.

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कर्म प्रधान विश्व रचि राखा। जो जस करहि सो तस फल चाखा।।
सकल पदारथ हैं जग मांही। कर्महीन नर पावत नाहीं।।
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तुलसी.रामचरित मानस


गुरु गोविन्द दोनों खड़े
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सम्पादकीय : पृष्ठ : २.
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संरक्षण शक्ति. *

शक्ति. रश्मि श्रीवास्तवा.भा.पु.से. शक्ति. अपूर्वा.भा.प्र.से.
शक्ति.साक्षी कुमारी.भा.पु.से.
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संपादकीय शक्ति समूह.
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प्रधान त्रिशक्ति संपादिका.
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शक्ति..शालिनी रेनू नीलम.
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कार्यकारी सम्पादिका
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डॉ.सुनीता शक्ति * प्रिया
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सहायक कार्यकारी सम्पादिका
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शक्ति.सीमा वाणी अनीता.
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सम्पादकीय शक्ति आलेख : पृष्ठ : ३
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शक्ति : पूजा आर्य डॉ राजीव रंजन : शिशु रोग विशेषज्ञ .भैंसासुर रांची रोड. बिहार शरीफ.समर्थित

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सम्पादकीय : शक्ति गद्य संग्रह आलेख : तारे जमीन पर : पृष्ठ :३.
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संपादन
शक्ति. डॉ. भावना शाहिना माधवी.
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गुरु ' गोविन्द ' दोनों खड़े : सम्पादकीय : शक्ति आलेख :३ / ०
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शक्ति.शालिनी रेनू नीलम .
वाराणसी.
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शक्ति. आलेख : ३ / ०.
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शिक्षक दिवस पर विशेष.

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शक्ति.रेनू शब्दमुखर.
लेखिका.कवयित्री.प्रधान सम्पादिका.जयपुर.
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सह : शक्ति. शालिनी मधुप. 
जिस समाज ने गुरु खोया, उसने अपना भविष्य खो दिया
सभ्यताएँ युद्धों से कम, अपने गुरुओं के अवमूल्यन से अधिक हारती हैं.
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दीप बुझे तो अँधेरा केवल घर में उतरता है, 
गुरु बुझ जाए तो अंधेरा पीढ़ियों में उतरता है।
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गुरु का सम्मान वास्तव में या सिर्फ़ अभिनय : शिक्षक दिवस आते ही समाज गुरु को स्मरण करता है। मंच सजते हैं, मालाएँ पहनाई जाती हैं, प्रशस्तियाँ पढ़ी जाती हैं और सोशल मीडिया पर सम्मान के शब्दों की बाढ़ आ जाती है। किंतु एक प्रश्न है जो इन औपचारिकताओं के बीच अनुत्तरित रह जाता है- क्या हम सचमुच गुरु का सम्मान करते हैं, या केवल उसके सम्मान का अभिनय करते हैं ?
फोटो कोलाज : राम : कृष्ण : अर्जुन 
किसी भी राष्ट्र का भविष्य संसदों में नहीं, सबसे पहले कक्षाओं में लिखा जाता है। संविधान नागरिकों को अधिकार देता है, पर गुरु उन्हें उन अधिकारों का विवेकपूर्ण उपयोग करना सिखाता है। यदि शिक्षक केवल पाठ्यक्रम पढ़ाने तक सीमित हो जाए और समाज उसे केवल परिणाम देने वाली मशीन समझने लगे, तो यह शिक्षा का नहीं, सभ्यता का संकट है।
अक्षर तो पुस्तकें भी सिखा देती हैं, मनुष्य होना कंवल गुरु सिखाता है।
मोबाइल गुरु बनता जा रहा है और गुरु विकल्प : आज शिक्षा व्यवस्था अनेक दबावों से घिरी है। शिक्षक से अपेक्षा है कि वह उत्कृष्ट परिणाम भी दे, बचों के संस्कार भी सँवारे, तकनीक भी सीखे, प्रशासनिक दायित्व भी निभाए, अभिभावकों की अपेक्षाओं पर भी खरा उत्तरे और हर परिस्थिति में मुस्कुराता भी रहे। किंतु क्या हमने कभी यह सोचा कि जो व्यक्ति पूरी पीढ़ी का मन गढ़ रहा है. उसके अपने मन का सहारा कौन है ? 
हमारे समय की सबसे बड़ी विडंबना यह नहीं कि बचों के हाथ में मोबाइल आ गया है, विडंबना यह है कि धीरे धीरे मोबाइल गुरु बनता जा रहा है और गुरु विकल्प। जानकारी का विस्फोट हुआ है, लेकिन विवेक का विस्तार नहीं। 
इंटरनेट उत्तर दे सकता है, पर उत्तरदायित्व नहीं सिखा सकता। कृत्रिम बुद्धिमत्ता तथ्य  दे सकती है पर चरित्र नहीं गढ़ सकती। 

ज्ञान की नदियाँ बहती रहें तो भी प्यास बाकी रहती है.
जब तक गुरु का स्पर्श न मिले, शिक्षा अधूरी रहती है।

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गतांक से आगे. १  
आदर्श, सम्यक गुरुओं की गरिमा ही समाज असली , समृद्धि :

शिक्षक समाज में भी कमियाँ : यह भी स्वीकार करना होगा कि शिक्षक समाज से अलग कोई नहीं है। उसमें भी कमियाँ हो सकती हैं। किंतु किसी व्यवस्था की त्रुटियों को आधार बनाकर पूरी गुरु-परंपरा को कटघरे में खड़ा कर आत्मघाती दृष्टि है। 
यदि खेत में कुछ पौधे सूख जाएँ, तो किसान खेतीछोड़  नहीं देता।  वह मिट्टी को बेहतर बनाता है। आज आवश्यकता भी यही गुरु को कठघरे में खड़ा करने से पहले शिक्षा की मिट्टी को समझने  की है।
हम अपने बच्चों  से कहते हैं अपने शिक्षकों का सम्मान करो। लेकिन वही बच्चा जब घर में शिक्षक के बारे में उपहास, अविश्वास अपमान सुनता है, तो उसके भीतर सम्मान का बीज अंकुरित कैसे होगा ? मूल्य केवल पढ़ाए नहीं जाते, जीए भी जाते हैं।
सफलता के पीछे किसी न किसी  गुरु का हाथ : आज समाज सफलता का उत्सव मनाता है, पर सफलता के पीछे किसी  गुरु को भूल जाता है। डॉक्टर की सफलता पर तालियाँ बजती है, वैज्ञानिकों  के आविष्कार पर गर्व होता है। न्यायाधीश के निर्णय की चर्चा होती लेकिन उन सबके जीवन में कभी कभी एक ऐसा शिक्षक अवश्य होता है जिसने उनकी दृष्टि को आकार दिया। विडंबना यह है कि हम फलों  को पहचानते हैं, जड़ों को नहीं।
गुरु का सम्मान किसी एक दिन का आयोजन मात्र नहीं :  गुरु का सम्मान किसी एक दिन का आयोजन नहीं, बल्कि समाज की सामूहिक चेतना का स्थायी संस्कार होना चाहिए। शिक्षक दिवस पर पुष्प अर्पित करने से अधिक महत्त्वपूर्ण है कि वर्ष के शेष ३६४ दिनों में भी शिक्षक को गरिमा, विश्वास और सहयोग मिले। 
क्योंकि सम्मान का सबसे प्रामाणिक रूप शब्द नहीं. व्यवहार होता है। फूल एक दिन महकते हैं, सम्मान जीवन भर, गुरु को उपहार नहीं, विश्वास चाहिए निरंतर। यह समय शिक्षा पर पुनर्विचार का ही  नहीं, गुरु के स्थान पर पुनर्विचार का भी है। यदि शिक्षक का आत्मविश्वास टूटेगा, तो विद्यार्थियों का भविष्य भी बिखरेगा।आदर्श , सम्यक गुरुओं की गरिमा ही समाज असली , समृद्धि : यदि गुरु का सामाजिक सम्मान क्षीण होगा, तो अगली पीढ़ी के आदर्श भी धुँधले पड़ेंगे। 
और जब आदर्श धुँधले पड़ जाते हैं, तब राष्ट्र केवल विकसित दिखता है. वास्तव में विकसित नहीं होता। 
इसलिए यह केवल एक भावनात्मक कथन नहीं, एक राष्ट्रीय चेतावनी जिस समाज ने गुरु खोया उसने अपना भविष्य खो दिया। राष्ट्र की सबसे बड़ी पूँजी सोना चाँदी नहीं होती उसके गुरुओं की गरिमा ही उसकी असली , समृद्धि होती है।
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आगे जारी 
संपादन : शक्ति.डॉ.रजनी प्रीति रीता.
सज्जा : शक्ति.मंजिता सीमा अनुभूति. 

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आज कल : पृष्ठ : ०
गुरु ही हमें 
संस्कार,संवेदनशीलता,ईमानदारी और मानवीय मूल्य 
सिखा सकते
शिक्षक दिवस : गुरु शिष्य परंपरा.


कृष्ण : अर्जुन : संशय : क़ुरूक्षेत्र : गीता ज्ञान : GIF  
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हम पार्थ हैं श्री कृष्ण ही हमारे गुरु पथ प्रर्दशक हैं 
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शक्ति. आलेख
शक्ति.डॉ.सुनीता रंजिता सीमा.
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अन्य संस्थानों की तरह डी ए वी विद्यालयों में भी शिक्षक दिवस की धूम रही। परिसर, व कक्षाएं सजाई गई। सजे सजाए गए डॉ.राधाकृष्णन की फोटो के आगे पुष्पांजलि की गयी। उनकी जीवनी, उनका जीवन संघर्ष, उनके त्याग उनके आदर्श  किसने कितना याद किया यह प्रश्न भी अनुत्तरित ही है सब के अपने मन के भीतर है ।
हम पार्थ हैं श्री कृष्ण ही हमारे गुरु पथ प्रर्दशक हैं  :  हमने अपने लिए गोविन्द  को ही सर्वस्व चुना है। हमारे लिए शिक्षक, भगवान सब वही हैं। तथापि उन समस्त गुरुओं के लिए चाहे उनकी उम्र सीमा कुछ भी हो, बड़े, छोटे या बूढ़े हो उनका हम सदैव सम्मान करते हैं।  
शिक्षकों को शिक्षक दिवस की भेंट दी गयी। उनका सम्मान हुआ।  क्या यह सम्मान सिर्फ एक दिन के लिए हो ? या फिर पूर्ण साल के लिए। विचार करें। गुरु शिष्य परंपरा में किस गुरु किस शिष्य की बात करें। सिर्फ सम्यक के लिए।  
आज की डिजिटल दुनिया आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस,गूगल और इंटरनेट के युग में गुरु का महत्व कम होने के बजाय और भी अधिक बढ़ गया है। जहाँ इंटरनेट और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस हमें कुछ ही सेकंड में किसी भी विषय की असीमित जानकारी दे सकते हैं, वहीं उस जानकारी को सही दिशा में उपयोग करने का विवेक सिर्फ एक गुरु ही सिखा सकता है। 
डिजिटल युग में गुरु की भूमिका अब केवल ' सूचना देने वाले ' की नहीं, बल्कि एक गाइड, मेंटॉर और फिल्टर की हो गई है.


शिक्षक दिवस : मात्र निभती परम्परायें: उद्देश्य की तलाश अभी जारी : शक्ति.रंजिता सुनीता सीमा 


जानकारी  और ज्ञान में अंतर : इंटरनेट के पास डेटा का भंडार है, लेकिन गुरु के पास अनुभव और विवेक होता है। डेटा को सार्थक ज्ञान में बदलना केवल गुरु ही सिखा सकते हैं। 
सही और गलत की पहचान : डिजिटल दुनिया में ' फेक न्यूज़ ' और भ्रामक जानकारियों की भरमार है। गुरु छात्रों को विशाल सामग्री में से प्रासंगिक और विश्वसनीय सामग्री चुनना सिखाते हैं। 
नैतिक मार्गदर्शन : मशीनें या  हमें कोडिंग या गणित तो सिखा सकते हैं, लेकिन वे हमें संस्कार, संवेदनशीलता, ईमानदारी और मानवीय मूल्य नहीं सिखा सकते
मानसिक और भावनात्मक सहारा : इंटरनेट स्क्रीन की दुनिया में अक्सर बच्चे अकेलेपन या मानसिक तनाव का शिकार हो जाते हैं। एक गुरु ही शिष्य की मनःस्थिति को समझकर उसे सही और सकारात्मक रास्ता दिखाता है। 
डिजिटल माध्यमों का सही उपयोग : तकनीक का आँख बंद करके भरोसा करने के बजाय, उसका रचनात्मक और सही इस्तेमाल कैसे किया जाए, यह समझ हमें गुरु से ही मिलती है。
आज डिजिटल गुरु - शिष्य परंपरा के माध्यम से संवाद और भी आसान हो गया है। देश के किसी भी कोने में बैठा छात्र ऑनलाइन कक्षाओं और ई - लर्निंग के जरिए बेहतरीन गुरुओं से जुड़ पा रहा है। 
निष्कर्षतः तकनीक चाहे जितनी भी उन्नत हो जाए, वह केवल एक साधन है। मशीन हमें 'आजीविका'  के साधन दे सकती है, लेकिन जीवन जीने की ' विद्या ' और सही दिशा आज भी सिर्फ एक गुरु ही दे सकता है। अच्छे संस्कार अपनी संस्कृति का ज्ञान गुरु ही दे सकता है , यह सदैव याद रखें। 
गुरु शिष्य परंपरा : शिष्य बनकर कुछ सीखते हैं तो उसे गुरु का सम्मान करें यदि गुरु है तो उसकी मर्यादा को निभाएं। 
चलते -चलते गुरु शिष्य परंपरा का निर्वहन करते रहिए यदि गुरु है तो उसकी मर्यादा को निभाएं। 
यदि शिष्य बनकर कुछ सीखते हैं तो उसे गुरु का सम्मान करें। यही शिक्षक दिवस का निहित संदेश है आप समस्त शिक्षकों को जिनका स्वयं, परिवार, समाज तथा देश के उन्नयन में कुछ न कुछ,कहीं ना कहीं योगदान है उन समस्त शिक्षकों को हम याद करते हैं। और उनके लिए हमारी तरफ से अनंत शिव शक्ति शुभकामनाएं। बने रहिए हमारे साथ  सम्यक साथ  के लिए हम आपका आभार प्रकट करते हैं.
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संपादन : शक्ति : रेनू माधवी रीता नीलम 
सज्जा : शक्ति. मंजिता स्वाति अनुभूति 

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शक्ति आलेख : ३  / ० 
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श्रीकृष्ण : विराट रूप : GIF 
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द्वापर में ही नहीं, सार्वभौमिक और‌ सार्वकालिक हैं 
श्री कृष्ण,उनकी ५२५३ वीं जयन्ती है।
 राम की मर्यादा :  कृष्ण के कर्म और उनकी सहन शक्ति 
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शक्ति.आरती अरुण आस्था.
रांची डेस्क.  

औपनिषदिक दर्शन और चिन्तन : कृष्ण वाणी श्रीमद्भागवत गीता : जिन्होंने सम्पूर्ण औपनिषदिक दर्शन और चिन्तन को एक काव्य  श्रीमद्भागवत गीता  में ढाल दिया, जिन्होंने उद्दात्त और उन्मुक्त प्रेम को प्रदर्शित किया।  जिन्होने सम्पूर्ण संसार को निष्काम कर्म योग का दर्शन दिया, जो परम आनन्द के कारण है। जो सबको आकर्षित करने की क्षमता रखते हैं , जो सभी प्रेमियों के लिए आराध्य हैं।  जिनके स्मरण मात्र से लौकिक व्याधियाँ नष्ट हो जाती है, जो युग पुरूष और योगेश्वर हैं, उन वसुदेव कृष्ण को मैं बारम्बार नमन करता हूँ।
भारत की भारतीयता और आत्मा शिव, राम और कृष्ण में बसती है। बुद्ध, महावीर, नानक, कबीर, रविदास, तुलसी, रहीम, मीरा, सूरदास और रसखान भारतीय चेतना रूपी उद्यान के सुगंधित पुष्प है जिनसे भारत भूमि सुवासित होती रहती है।
पर जब बात श्री कृष्ण की आती है तो एक अद्भुत अनुभूति हृदय में होती है। अपने काल के ही नहीं जो आज भी प्रासंगिक हैं और यथार्थ चेतना से युक्त है। मैं अकिंचन उन पर क्या लिखूँगा पर हृदय के भावना पुष्प तो इन शब्दों के माध्यम से समर्पित कर ही सकता हूँ पर विराट को तो शब्दों में नहीं बांधा जा सकता है।
राधिका कृष्ण : मुरली : GIF 
उद्धव, मोहे ब्रज बिसरत नाहीं : एक भावुक प्रेमी जो अपने बालसखा और सखियों से बिछुड़ कर एक आम आदमी की तरह अपने परम सखा निर्गुण ब्रह्म उपासक उद्धव जी के सामने विलाप करने लगते हैं, " उद्धव, मोहे ब्रज बिसरत नाहीं। " 
यह पीड़ा जो प्रेम में अन्तस को आहत कर देता है, सम्पूर्ण वैश्विक साहित्य में अन्यत्र दुर्लभ है। एक महान कूटनीतिक रणनीतिकार जो साध्य की प्राप्ति करने में साधन की परवाह नहीं करते है कि यदि साध्य पवित्र, धर्म और न्याय आधारित हो तो उसकी विजय सुनिश्चित करने के लिए किसी भी मार्ग का अनुसरण किया जा सकता है। 
पार्थ के सारथी और द्रौपदी के सखि व  रक्षक : रणछोड़ कृष्ण : पार्थ के सखा सारथी और रक्षक, मैत्री धर्म पालन करने वाले,नारी जाति के समुद्धारक, आश्रितों  के रक्षार्थ रणछोड़ बनने वाले और प्रेम की वंशी बजाने के साथ-साथ आपात्काल में सुदर्शन चक्र उठाने वाले, महान योद्धा ,पार्थसारथी का  हम जन्मदिन मना रहे है। 
परन्तु जरूरत है , उनकी तरह समय पर वंशी वादन की और धर्मार्थ - न्यायार्थ शस्त्र  उठाने की ताकि न्यायार्थ अपने बन्धुओं को भी दण्डित किया जा सके।
भारतीय जन चेतना के केंद्र शिव, श्री विष्णु : श्री राम कृष्ण : पुनश्च परम चैतन्य आत्मा ब्रह्माण्डीय ऊर्जा शिव श्री राम और श्री कृष्ण को बार-बार नमन करते हुए भारत के महान समाजवादी चिन्तक और राजनीतिक दार्शनिक डा. राम मनोहर लोहिया जी को उद्धृत करना चाहुँगा, उन्होने १९९५  में मैनकाइंड पत्रिका में लिखा था, " हे भारत माता, हमें शिव का मस्तिष्क दो, कृष्ण का विराट हृदय दो, राम का कर्म वचन और मर्यादा दो। हमे असीम मस्तिष्क और उन्मुक्त हृदय के साथ-साथ जीवन की मर्यादा से रचो।"
एक अद्भुत, अनुपम, अद्वितीय, अप्रतिम और महामानव जो नाचता भी है और नचाता भी है, वंशी बजाता और गोपियों को रिझाता भी है। दही माखन चुराकर खाता और बांटता भी है, रासलीला करता है तो अद्वैत का दर्शन देते हुए योग की विशद् और अनुपम व्याख्या करते हुए योगेश्वर भी कहलाता है। 
कहीं मर्यादाहीन तो कहीं मर्यादा के रक्षार्थ : सबके अहंकार और मिथ्याभिमान का मानमर्दन भी करता है। सामाजिक नैतिक नीतियों में बंधा हुआ भी है तो उन्मुक्त और स्वच्छन्द भी है। प्रेम के द्वारा ही मुक्ति मिल सकती है का दर्शन भी देता है, कहीं मर्यादाहीन नजर आता है तो कहीं मर्यादा के रक्षार्थ चरम पर खड़ा भी दिखाई देता है। और अन्त में कर्म की, कर्त्तव्य पालन की श्रेष्ठता का संदेश भी देता है, ऐसे हैं योगेश्वर कृष्ण जिनकी महिमा आज भारत की सीमाओं के पार जा चुकी है। और एशियाई देशों के साथ साथ यू एस, यूरोप, आस्ट्रेलिया और अफ्रीका की धरती हरे रामा हरे कृष्णा हरे कृष्णा हरे रामा की गायन से गूंजती दिखाई पड़ती है और आज भी इनकी प्रासंगिकता उतनी ही है जितनी द्वापर में थी।
सभी श्री कृष्ण प्रेमियों और साधकों को श्री कृष्णाष्टमी ५२५३ वीं जयन्ती की अनन्त शुभकामनाएँ और बधाईयाँ । सम्पूर्ण वैश्विक क्रियाशीलताओं मे प्रेम शान्ति और सद्भावना का संचार हो। श्री राधा मोहन शरणम् । जय जय श्री राधेकृष्ण
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संपादन : शक्ति. शालिनी रंजिता रेनू 
सज्जा : शक्ति. मंजिता सीमा अनुभूति
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शक्ति आलेख : ४ / ०.
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शक्ति.नीलम. पांडेय.
लेखिका कवयित्री सम्पादिका.
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प्रथम ‘क्या’ सिखाया जाए तथा द्वितीय ‘कैसे’ सिखाया जाए ?
सह शक्ति. डॉ.सुनीता रंजिता
' गुरू कुम्हार सीस कुंभ है '
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सिद्धार्थ : अँगुलीमाल ! मैं तो ठहर  गया तुम कब रुकोगे ?
प्रेरक : शिक्षण : वाक्य : दृश्यम 
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भारतरत्न ,भारत के द्वितीय राष्ट्रपति, उपराष्ट्रपति और कई महत्वपूर्ण पदों पर आसीन रह चुके महान दार्शनिक डा.कृष्णन के जन्मदिन शिक्षक दिवस पर डा राधाकृष्णन को शत शत नमन करते हुए अब बात करते हैं, गुरू शिष्य परम्परा की।
वैदिक काल से ही गुरु-शिष्य की परंपरा : वैदिक काल से ही गुरु-शिष्य की परंपरा चली आ रही है. गुरु-शिष्य की परंपरा नई पीढ़ी तक पहुंचाने का सोपान है. गुरु द्वारा जो शिक्षा या विद्या शिष्य को सिखाई जाती है,उस ज्ञान को अर्जित कर बाद में शिष्य गुरु के रूप में अपने शिष्यों को उसकी शिक्षा देता है. यही क्रम चलता रहता है और शिक्षा व विद्या का विस्तार गुरु-शिष्य की परंपरा से होता रहता है।भारतीय परंपरा में शिक्षा दान का कार्य त्यागी लोगों ने ही किया। जब तक ऐसा रहा तब तक भारत का कल्याण हुआ। 
स्वामी विवेकानंद के अनुसार इस देश में शिक्षा दान का भार पुन त्यागी लोगों को नहीं दिया जाता तब तक भारत को दूसरे देशों के तलवे चाटने होंगे।केवल पांडित्य प्रदर्शनकारी गुरु नहीं हो सकते। सच्चे गुरु यश, धन आदि जैसी स्वार्थ-सिद्धि लिए शिक्षा नहीं देते। वे प्रेम और कर्तव्यवश अपना कार्य करते हैं।
प्रथम ‘क्या’ सिखाया जाए तथा द्वितीय ‘कैसे’ सिखाया जाए ? भारतीय वांग्मय में हमें गुरुकुल व्यवस्था के विहंगम दिग्दर्शन होते हैं। वैदिक काल में शिक्षा को व्यवस्थित रूप देने के क्रम में सर्वप्रथम दो प्रश्न उभरे। प्रथम ‘क्या’ सिखाया जाए तथा द्वितीय ‘कैसे’ सिखाया जाए? इन प्रश्नों के अन्तर्गत उन विषयों का समावेश हुआ जिनके ज्ञान से मानव समाज में उपयोगी भूमिका निभाने में सक्षम हो सका। प्राचीन काल में शिक्षारूप यह उच्च कोटि का कार्य नगरों और गाँवों से दूर रहकर शान्त, स्वच्छ और सुरम्य प्रकृति की गोद में किया जाता था। इनका संचालन राजाश्रय व जनसहयोग से होता था। इन गुरुकुलों में हर वर्ण के छात्र साथ पढ़ते थे। गरीब-अमीर में किसी प्रकार का भेदभाव नहीं था। सबको समान सुविधाएं दी जाती थी। गुरुकुल में प्रवेश की उम्र आठ साल की होती थी।नई शिक्षा नीति कई मायने में विद्यार्थी के सर्वांगीण विकास को गति प्रदान करने वाली सिद्ध होगी। अब बात करते हैं। 

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गतांक से आगे : १.
जब राष्ट्रपति पद पर आसीन 
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डॉ. राधाकृष्णन *
 मिले १०,००० मासिक वेतन की जगह  मात्र ढाई हजार रुपे मासिक वेतन लेते थे 

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प्रिय शिक्षक डॉ. राधाकृष्णन की स्मृति में शुरु हो गयी : शिक्षक दिवस की परंपरा : एक ऐसे शिक्षक की जिसके लिए सर्वविदित है कि वर्ष १९२१ मैसूर के महाराजा कॉलेज के भव्य सभागार के बाहर फूलों से सजी-धजी एक बग्घी खड़ी थी। इस बग्घी के चारों ओर छात्रों का विशाल हुजूम उमड़ा हुआ था। इस बग्घी को खींचने के लिए घोड़े नहीं जुड़े हुए थे बल्कि इसे छात्रों को ही खींचना था।अब उस शख्स की बात करते हैं जिसे इस बग्घी की सवारी करनी थी... ये शख्स कोई और नहीं बल्कि थे डॉ. सर्वपल्ली राधाकृष्णन। छात्रों के प्रिय शिक्षक राधाकृष्णन का कोलकाता यूनिवर्सिटी में तबादला हो गया था इसलिए छात्र उन्हें इतनी भावपूर्ण -स्नेहिल बधाई दे रहे थे।
उनका जन्मदिवस यानी ५ सितंबर ही राष्ट्रीय शिक्षक दिवस : भारत के प्रथम उपराष्ट्रपति और दूसरे राष्ट्रपति डॉक्टर सर्वपल्ली राधाकृष्णन अपनी राजनीतिक शख्सियत से इतर एक महान शिक्षक भी थे इसीलिए इनके जन्मदिवस यानी ५ सितंबर को प्रतिवर्ष राष्ट्रीय शिक्षक दिवस के रूप में मनाया जाता है। 
५ सितंबर को ही शिक्षक दिवस क्यों मनाया जाता है ?... इसके पीछे भी एक दिलचस्प किस्सा है -" यह बात वर्ष १९६२  की है जब डॉ सर्वपल्ली राधाकृष्णन भारत के दूसरे राष्ट्रपति के रूप में निर्वाचित हो गए थे और उनका निवास दिल्ली स्थित राष्ट्रपति भवन बन चुका था। इसी दरम्यान उनके जन्मतिथि की तारीख यानी ५  सितंबर आने को थी। 
जब उनके कुछ दोस्त और छात्र ने उनसे उनका जन्मदिन मनाने का निवेदन किया तब उन्होंने कहा कि यदि उनके जन्मदिन को वार्षिक शिक्षक दिवस के रूप में मनाया जाए तो ये उनके लिए बेहद सौभाग्य की बात होगी। 
उनके चाहने वालों ने ठीक ऐसा ही किया... तबसे वार्षिक तौर पर ५  सितंबर को शिक्षक दिवस मनाने की शुरूआत हुई। बाद में इस दिन को राष्ट्रीय शिक्षक दिवस के रूप में मनाया जाने लगा।"
पूरी दुनिया 5 अक्टूबर को शिक्षक दिवस मनाती है पर भारत में ५ सितंबर को ही शिक्षक दिवस डॉ.  सर्वपल्ली राधाकृष्णन जी  की इच्छा का सम्मान करते हुए मनाया जाता है।  
सादा जीवन उच्च विचार  : सादा जीवन उच्च विचार यह मुहावरा सुनने में मनमोहक है किंतु इसके अनुरूप जीवन को ढालना अत्यंत कठिन है इस मुहावरे को साकार कर जीवन में उतारने वाले डॉक्टर सर्वपल्ली राधाकृष्णन और महापुरुषों की श्रेणी में आते हैं जिनकी कथनी और करनी में कोई अंतर न था वह जो कहते थे उसे करके ही दम लेते थे डॉ राधाकृष्णन ने जीवन को कठिन तपस्या के रूप में लिया पर स्वयं को किस की आग में तपा कर कुंदन बना दिया तदनंतर उन की चमक से संपूर्ण विश्व में प्रकाशित हो उठा ले किसी राजनीतिक दल अथवा जोशीले भाषणों के बल पर दुनिया में पूजनीय नहीं हुए बल्कि उन्होंने उस सम्मान और ऊंचाइयों को अपनी योग्यता के बल पर प्राप्त किया उनका जीवन एक शिक्षक के रूप में आरंभ हुआ था लेकिन अपने बौद्धिकता और योग्यता के बल पर उन्होंने एक महान दार्शनिक और लेखक के रूप में ख्याति अर्जित की साथ ही एक ओजस्वी वक्ता के रूप में पहचाने गए।
१०,००० मासिक वेतन की जगह  मात्र ढाई हजार रुपे मासिक वेतन लेते थे  : जब डॉ. राधाकृष्णन राष्ट्रपति पद पर आसीन हुए तो उन्हें ₹ १०,००० मासिक वेतन मिलता था लेकिन यह मात्र ढाई हजार रुपे मासिक वेतन लेते थे उनके वेतन की शेष राशि देश की उन्नति और विकास के कार्यों में खर्च होती थी डॉक्टर राधाकृष्णन देश के प्रति समर्पित व्यक्ति थे ।
माता-पिता, गुरू और वैसे हर व्यक्ति जिससे हमने कुछ सीख ली को नमन-वंदन करते हुए सभी को शिक्षक दिवस की हार्दिक शुभकामनाएं... 
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संपादन व सज्जा
शक्ति. डॉ.भावना प्रिया सीमा.


शक्ति. आलेख : ३ / ० 
 ' गुरू कुम्हार सीस कुंभ है. '


फोटो कोलाज : शक्ति साभार : 
गुरु : ब्रह्मा, विष्णु, महेश, विश्वामित्र, संदीपन स्वयं माधव. शिष्य : राम लक्ष्मण, कृष्ण सुदामा, अर्जुन  


गुरु कुम्हार शिष कुंभ है, गढ़ि-गढ़ि काढ़ै खोट।
अन्तर हाथ सहार दै, बाहर बाहै चोट॥
भावार्थ :- गुरु कुम्हार है और शिष्य घड़ा है। गुरु ही हैं जो भीतर से हाथ का सहारा देकर, बाहर से चोट मार-मारकर और गढ़-गढ़ कर शिष्य की बुराई को निकालते हैं। दोहा कबीर का है।

भारतरत्न ,भारत के द्वितीय राष्ट्रपति, उपराष्ट्रपति और कई महत्वपूर्ण पदों पर आसीन रह चुके महान दार्शनिक डा.कृष्णन के जन्मदिन शिक्षक दिवस पर डा राधाकृष्णन को शत शत नमन करते हुए अब बात करते हैं, गुरू शिष्य परम्परा की।
वैदिक काल : वैदिक काल  से ही गुरु-शिष्य की परंपरा चली आ रही है. गुरु-शिष्य की परंपरा नई पीढ़ी तक पहुंचाने का सोपान है. गुरु द्वारा जो शिक्षा या विद्या शिष्य को सिखाई जाती है,उस ज्ञान को अर्जित कर बाद में शिष्य गुरु के रूप में अपने शिष्यों को उसकी शिक्षा देता है. यही क्रम चलता रहता है और शिक्षा व विद्या का विस्तार गुरु-शिष्य की परंपरा से होता रहता है।
भारतीय परंपरा में शिक्षा दान का कार्य त्यागी लोगों ने ही किया। जब तक ऐसा रहा तब तक भारत का कल्याण हुआ। स्वामी विवेकानंद के अनुसार इस देश में शिक्षा दान का भार पुन त्यागी लोगों को नहीं दिया जाता तब तक भारत को दूसरे देशों के तलवे चाटने होंगे।केवल पांडित्य प्रदर्शनकारी गुरु नहीं हो सकते। सच्चे गुरु यश, धन आदि जैसी स्वार्थ-सिद्धि लिए शिक्षा नहीं देते। वे प्रेम और कर्तव्यवश अपना कार्य करते हैं।
भारतीय वांग्मय में हमें गुरुकुल व्यवस्था के विहंगम दिग्दर्शन होते हैं। वैदिक काल में शिक्षा को व्यवस्थित रूप देने के क्रम में सर्वप्रथम दो प्रश्न उभरे। प्रथम ‘ क्या ’ सिखाया जाए तथा द्वितीय ‘ कैसे ’ सिखाया जाए? इन प्रश्नों के अन्तर्गत उन विषयों का समावेश हुआ जिनके ज्ञान से मानव समाज में उपयोगी भूमिका निभाने में सक्षम हो सका। 
प्राचीन काल में शिक्षारूप यह उच्च कोटि का कार्य नगरों और गाँवों से दूर रहकर शान्त, स्वच्छ और सुरम्य प्रकृति की गोद में किया जाता था। इनका संचालन राजाश्रय व जनसहयोग से होता था। इन गुरुकुलों में हर वर्ण के छात्र साथ पढ़ते थे। गरीब-अमीर में किसी प्रकार का भेदभाव नहीं था। सबको समान सुविधाएं दी जाती थी। गुरुकुल में प्रवेश की उम्र आठ साल की होती थी।नई शिक्षा नीति कई मायने में विद्यार्थी के सर्वांगीण विकास को गति प्रदान करने वाली सिद्ध होगी। अब बात करते हैं 
प्रिय शिक्षक राधाकृष्णन : एक ऐसे शिक्षक की जिसके लिए सर्वविदित है कि वर्ष १९२१   मैसूर के महाराजा कॉलेज के भव्य सभागार के बाहर फूलों से सजी-धजी एक बग्घी खड़ी थी। इस बग्घी के चारों ओर छात्रों का विशाल हुजूम उमड़ा हुआ था। इस बग्घी को खींचने के लिए घोड़े नहीं जुड़े हुए थे बल्कि इसे छात्रों को ही खींचना था।
अब उस शख्स की बात करते हैं जिसे इस बग्घी की सवारी करनी थी... ये शख्स कोई और नहीं बल्कि थे डॉ. सर्वपल्ली राधाकृष्णन। छात्रों के प्रिय शिक्षक राधाकृष्णन का कोलकाता यूनिवर्सिटी में तबादला हो गया था इसलिए छात्र उन्हें इतनी भावपूर्ण-स्नेहिल बधाई दे रहे थे।
भारत के प्रथम उपराष्ट्रपति और दूसरे राष्ट्रपति डॉक्टर सर्वपल्ली राधाकृष्णन अपनी राजनीतिक शख्सियत से इतर एक महान शिक्षक भी थे इसीलिए इनके जन्मदिवस यानी ५  सितंबर को प्रतिवर्ष राष्ट्रीय शिक्षक दिवस के रूप में मनाया जाता है। 
५  सितंबर को ही शिक्षक दिवस क्यों मनाया जाता है  ?... इसके पीछे भी एक दिलचस्प किस्सा है- ' यह बात वर्ष १९६२  की है जब डॉ सर्वपल्ली राधाकृष्णन भारत के दूसरे राष्ट्रपति के रूप में निर्वाचित हो गए थे और उनका निवास दिल्ली स्थित राष्ट्रपति भवन बन चुका था। इसी दरम्यान उनके जन्मतिथि की तारीख यानी ५  सितंबर आने को थी। 
जब उनके कुछ दोस्त और छात्र ने उनसे उनका जन्मदिन मनाने का निवेदन किया तब उन्होंने कहा कि यदि उनके जन्मदिन को वार्षिक शिक्षक दिवस के रूप में मनाया जाए तो ये उनके लिए बेहद सौभाग्य की बात होगी। उनके चाहने वालों ने ठीक ऐसा ही किया... तबसे वार्षिक तौर पर ५  सितंबर को शिक्षक दिवस मनाने की शुरूआत हुई। 
बाद में इस दिन को राष्ट्रीय शिक्षक दिवस के रूप में मनाया जाने लगा। 
पूरी दुनिया ५ अक्टूबर को शिक्षक दिवस मनाती है पर भारत में ५  सितंबर को ही शिक्षक दिवस ' डॉक्टर सर्वपल्ली राधाकृष्णन ' जी  की इच्छा का सम्मान करते हुए मनाया जाता है।  
सादा जीवन उच्च विचार यह मुहावरा सुनने में मनमोहक है किंतु इसके अनुरूप जीवन को ढालना अत्यंत कठिन है इस मुहावरे को साकार कर जीवन में उतारने वाले डॉक्टर सर्वपल्ली राधाकृष्णन और महापुरुषों की श्रेणी में आते हैं जिनकी कथनी और करनी में कोई अंतर न था वह जो कहते थे उसे करके ही दम लेते थे डॉ राधाकृष्णन ने जीवन को कठिन तपस्या के रूप में लिया पर स्वयं को किस की आग में तपा कर कुंदन बना दिया तदनंतर उन की चमक से संपूर्ण विश्व में प्रकाशित हो उठा ले किसी राजनीतिक दल अथवा जोशीले भाषणों के बल पर दुनिया में पूजनीय नहीं हुए बल्कि उन्होंने उस सम्मान और ऊंचाइयों को अपनी योग्यता के बल पर प्राप्त किया उनका जीवन एक शिक्षक के रूप में आरंभ हुआ था लेकिन अपने बौद्धिकता और योग्यता के बल पर उन्होंने एक महान दार्शनिक और लेखक के रूप में ख्याति अर्जित की साथ ही एक ओजस्वी वक्ता के रूप में पहचाने गए जब डॉक्टर राधाकृष्णन राष्ट्रपति पद पर आसीन हुए तो उन्हें ₹ १०,०००  मासिक वेतन मिलता था लेकिन यह मात्र ढाई हजार रुपे मासिक वेतन लेते थे उनके वेतन की शेष राशि देश की उन्नति और विकास के कार्यों में खर्च होती थी डॉक्टर राधाकृष्णन देश के प्रति समर्पित व्यक्ति थे ।
माता-पिता, गुरू और वैसे हर व्यक्ति जिससे हमने कुछ सीख ली को नमन-वंदन करते हुए सभी को शिक्षक दिवस की हार्दिक शुभकामनाएं... 

स्तंभ संपादन :शक्ति.बीना तनु भारती.
पृष्ठ सज्जा : शक्ति.सीमा अनीता कंचन.
*
नैनीताल डेस्क.


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सम्पादकीय : शक्ति पद्य संग्रह आलेख : आकाश दीप :पृष्ठ :४.
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संपादन
शक्ति. रेनु शालिनी मानसी

*
शक्ति अनुभाग
शक्ति नीलम
*
भाविकाएँ
*
'शिक्षक' 
'शिक्षक दिवस' पर सोचती हूं मैं,
हर बार।
शिक्षक दिवस होता है,या
शिक्षक की वजह से,
'दिवस' होता है।
अज्ञान का अंधकार,
दूर हो सकता है क्या?
सैकड़ों दीयों की जगमग से।
दूर हो सकता है क्या?
सूरज की रोशनी से !
नहीं मिला उत्तर अब तक!
इक अंधेरे घर में जैसे,
नहीं देख पाती हैं,
 ख़ुद को भी
अपनी ही आंखें ।
दूसरी तरफ,
 गुरु का संबल,
दूर कर देता है,अंधकार
 मन का सारा।
और, जिस तरह,
मन की ,नहीं होती आंखें।
फिर भी,पढ़ लेता है, हर चेहरा वो,
हर दूरी तय कर,
पहुंच सकता है कहीं भी जो।
गुरु की  पारखी आँखें,
और उनका स्नेहिल हस्त,
कर देता है, हम सबका
जीवन मार्ग प्रशस्त ।
वही गुरु कहलाता है. *
*
भाविका
सही-गलत में भेद बताए,
*
शक्ति शालिनी प्रधान सम्पादिका
* सही-गलत में भेद बताए, सत्य, न्याय पर हमें चलाए, मन में कोई द्वंद छिड़ा हो, उसको भी गर वो सुलझाए सच्चा उससे नाता है। वही गुरु कहलाता है।।१।। मुश्किल से जब मन घबराए। लड़ना हमको वो सिखलाए, तमस हृदय में ज्योति जलाए, मन-मंदिर ओजस भर जाए, सबके मन को भाता है। वही गुरु कहलाता है।।२ ।। सारा जहाँ रोशन कर जाए, अंधकार को दूर भगाए, हैं प्रणम्य वो सारे शिक्षक, शिक्षा की जो ज्योति जलाए, विषय सभी समझाता है। वही गुरु कहलाता है।।३ ।।
*

कृष्ण : अर्जुन :संवाद तन्मयता से रोज पढ़ाएं, सभी छात्र के ज्ञान बढ़ाए, पूजनीय वो सारे शिक्षक, नवपथ पर चलना सिखलाए, मन कृतज्ञ हो जाता है। वही गुरु कहलाता है।।४ ।। सिर्फ़ क़िताबी ज्ञान न देकर, जीवन जीना भी सिखलाए, विद्या रूपी धन देकर वह, लक्ष्य प्राप्ति का मार्ग दिखाए, जीवन सफल बनाता है। वही गुरु कहलाता है।।५ ।। कवयित्री. लेखिका.
*
शक्ति शालिनी प्रधान सम्पादिका
*
भाविका 
*
शक्ति. अनुभाग पल्ल्वी.मुकेश 
लघु कवितायें
*
शिक्षक ' मा फलेषु कदाचन '

' मा फलेषु कदाचन '

शिक्षक
गीता में उपदेशित ' मा फलेषु '
वाला कर्म है 
शिक्षक सभी धर्म से
ऊॅंचा धर्म है  
शिक्षक एक प्रवाह है 
 मंजिल नहीं राह है  
शिक्षक पवित्र है  
महक फैलाने वाला इत्र है 
शिक्षक स्वयं जिज्ञासा है 
 खुद कुऑं है पर प्यासा है 
 वह ज्ञान का सागर है  
जीवन का आधार है 


' मा फलेषु कदाचन '
*
अंधेरों में भी दीया जलाकर  
 अहर्निश रोशन करता संसार है  
अपनी ही कोशिशों से सदा 
नई कलाकृति गढ़ने वाला कलाकार है 
धैर्य, सहिष्णुता, त्याग, समर्पण को   
   अक्षरश: करता चरितार्थ है ।  
शिक्षक सहज, सरल जीवनी है । 
वे जग के  तारणहार हैं 
शिक्षक संबल है सत्य के 
वही  नव पालनहार हैं 
 अपने अनगढ़ शिष्य का   
नव चरित्र सृजनकार हैं 
संस्कार का कर समावेश
नव वृत्तिक मूर्तिकार हैं।


शब्द शिल्पी : शक्ति. पल्ल्वी.मुकेश 
*
संपादन सज्जा : शक्ति.डॉ.सुनीता मधुप मंजिता.
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गुरु गोविन्द दोनों खड़े : शक्ति फोटो दीर्घा : पृष्ठ :५.
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सम्पादन
शक्ति. सीमा रेनू नीलम.
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शिक्षक दिवस : जिसने सम्यक गुरु खोया उसने सर्वस्व खो दिया : फोटो : शक्ति. शालिनी मधुप रेनू 


सम्पादिका शक्ति  : शिक्षक दिवस मनाते हुए : फोटो : कोलाज :
शक्ति. सीमा रेनू फ़रहीन. 
 

शक्ति. डॉ.रश्मि.आर्य. डॉ.अमरदीप नारायण. नालन्दा हड्डी एवं रीढ़ सेंटर.बिहार शरीफ.समर्थित


गुरु ब्रह्मा गुरु विष्णु गुरु गुरु देवो महेश्वरा : फोटो : यादें संपादन : शक्ति.सीमा वाणी अनीता.

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गुरु गोविन्द दोनों खड़े : शक्ति तराने : पृष्ठ :६ .
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सम्पादन
शक्ति. शालिनी रेनू नीलम.
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कर्म : कृष्ण : कृण्वन्तो विश्वमार्यम
*
गुरु गोविन्द दोनों बनें 
*

शिक्षक हो महर्षि वशिष्ठ, संदीपनी व श्री कृष्ण जैसे
जिनके  छात्र  राम , कृष्ण व अर्जुन हो 
*
शिक्षक दिवस की अनंत शिव शक्ति शुभकामनाएं 
शक्ति माधवी शाहिना  डॉ. भावना 
*
कर्म : कृष्ण : कृण्वन्तो विश्वमार्यम
*
शक्ति प्रार्थना
फिल्म : अंकुश.१९८६
सितारे : निशा सिंह नाना पाटेकर मदन जैन
गाना : इतनी शक्ति हमें देना दाता
मन का विश्वास कमजोर हो न


गीत : अभिलाष. संगीत : कुलदीप सिंह. गायिका : पुष्पा पगधरे सुषमा श्रेष्ठा
गाना सुनने व देखने के लिए नीचे दिए गए लिंक को दवाएं
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फिल्म : थ्री इडियट्स.२००९. 
गाना : आल इज वेल. 
सितारे : आमिर खान करीना कपूर सिमरन 
गीत : स्वानंद. संगीत : शांतनु मित्रा. गायक : सोनू निगम. शान.
 


गाना सुनने देखने के लिए नीचे दिए गए लिंक को दवाएं  
https://www.youtube.com/watch?v=7PzwOiW8-n0&list=RD7PzwOiW8-n0&start_radio=1

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Times Media Powered

Guru Govind Dono Khade.
Social Cultural Day Special.
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A Complete e - Blog Magazine Festival Story Cultural Theme.
English Editorial Section.
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Chief Editor
Shakti. Priya.Seema Tanu Sarvadhikari.
*

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Executive Editor
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Shakti . Shahina Dr. Bhwana Farheen.
*
Exclusive Guest Editor.
Shakti.Dr.Anupam Anjali.Anita.Anju.
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English Section.
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Shree Laxami Narayan Desk
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Shakti Editorial : Write up : Prose : English : Page : 2
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Editor.
Shakti Manjita Seema Priya Tanu Sarvadhikari.


Shakti.Pooja.Arya.Dr.Rajeev Ranjan. Child Specialist. Biharsharif. supporting
*
Saraswati Shakti of Musical Speeches
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Teachers’ Day Celebrated with Grandeur everywhere.26 
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Photo : Courtesy : Guru.Brahma Vishnu Mahesh.
Remembering Gurus as Guru Brahma Vishnu Mahesh,Krishna, 
Guru Vashisht, Sandipani and Drone,
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News Column : Shakti.Dr.Sunita Ranjita Seema

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collage : the great disciples as 
Lord Rama,Lord Krishna and Arjuna.  

CRS / Kolkotta. Teachers’ Day gets 
Shakti Editor : Seema : PCWP
celebrated with great enthusiasm and gratitude to honour the dedication and contribution of teachers throughout the country. 
MS* Media Dev Shakti Editorial team simply remembers all the unprecedented  gurus, go for their unforgettable contributions to the society. 
As Guru Brahma Vishnu Mahesh,Krishna,Guru Vashisht, Sandipani and Drone, are very creative they shape their disciples as Lord Rama ,Lord Krishna and Arjuna that rescued the world community.
Traditionally the special Student-as-Teacher activity is the highlight of the day in the school premises, paying floral tribute to Dr.Radhakrishnan, where students  step into the role of teachers and conducted classes for their juniors, experiencing the joy and responsibility of teaching.
As part of the CCA activities, students participate enthusiastically in bouquet-making and card-making for their favourite teachers. Through their colourful creations and heartfelt messages, they express their love and gratitude towards their mentors.
*
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Teacher's Day Celebration amongst Davian Fraternity : photo collage :

Shakti.Ranjita. Sunita Seema.
*
The celebration also includes speeches, songs and cultural performances dedicated to the teachers. 
The day concludes with smiles, appreciation and beautiful memories of exclusive teacher who shape their students , celebrating the special bond between teachers and students. 
On this day remembering Radha Krishnan, ex. President of India  with all other  mighty and divine gurus as Guru Brahma Vishnu Mahesh, Krishna, Guru Vashisht, Sandipani and Drone, we also recall their disciples too Lord Rama , Lord Krishna and Arjuna.
*
Editing : Shakti.Madhvee.Shalini.Dr.Anuradha.Kajal. 
Decoration : Shakti. Manjita Shwati  Lakshika Anubhuti .
We should be caring in our speeches that we deliver to others .
Dr.Sunita Shakti Priya
*
I believe that first Saraswati should be taken care in our mind .It is a power of keeping control over voice. We should be caring in our speeches that we deliver. Shakti Saraswati is the Hindu goddess of knowledge, music, arts, wisdom, and learning, often depicted with a veena ( lute), a book, and a white lotus. She is revered in Hinduism, Buddhism, and Jainism, with a strong connection to the Rigveda as a river goddess of creative inspiration and wisdom. A consort of Lord Brahma, the creator, she represents the union of creative intelligence and the ability to bring new concepts into existence. Key Aspects : These are the Key Aspects : Goddess of Knowledge: Saraswati is primarily known as the deity of knowledge, enlightenment, and wisdom. Patron of the Arts: She is also revered as the goddess of music, arts, and culture. Connection to Speech : She embodies speech, learning, and the invention of the Sanskrit language and the musical instrument known as the veena. Association with Brahma: She is often depicted as the consort of Lord Brahma, the creator of the universe, symbolizing the fusion of inventive intelligence and the birth of new ideas. Iconography Appearance : Saraswati is typically portrayed as a beautiful woman with a white complexion, dressed in white clothes. Symbols : She is shown holding a veena (a stringed musical instrument), a book, and sometimes a rosary. Vehicle: Her vehicle is the swan or goose (Hamsavahini), a symbol of spiritual perfection, concentration, and the ability to discern truth from falsehood. Symbol of Purity: She is often depicted seated on a white lotus, representing purity and profound knowledge. Cultural Significance Worship: Saraswati is worshiped by students, scholars, scientists, artists, and performers to seek blessings for intellectual and spiritual growth. Festivals : The Vasant Panchami festival, also known as Saraswati Jayanti or Saraswati Puja, celebrates her, particularly with young children learning to write the alphabet. Modern Relevance: Her images are found in schools and libraries, and she continues to inspire as a source of motivation for those engaged in creative and intellectual pursuits.

Column Editor : Shakti Madhvee Seema Shahina.
Page Decorative : Shakti Manjita Swati Anubhuti



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Shakti Editorial : 25
Let Lord Krishna be : My Teacher : a Friend Philosopher and Guide for me
Shakti *. Priya Dr. Sunita.Madhup.
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Photo : Madhav Somewhat Made for Madhup
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Let Krishna be My Teacher : a Friend Philosopher and Guide for me : I live Krishna. I love Krishna. I follow Krishna. He is the divine iconic face that I assume him my teacher.
Really Krishna should be my Teacher : a Friend Philosopher and Guide for me.
He is worshipped as the eighth avatar of Vishnu and also as the Supreme God in his own right. He is the god of protection, compassion, protection ,tenderness, and love.
I love him as He loves his loved ones. I cannot quit them as He never quits his friends in problems. Remember, every one knows how does he save Sudama, Krishne ( Draupadi ) and Arjuna in troubles.
I remember he serves as the ultimate preacher and teacher through the Bhagavad Gita, where he imparts wisdom to Arjuna on the battlefield of Kurukshetra, emphasizing dharma, karma, and devotion.
His teachings provide universal lessons on living a righteous life, performing duties without attachment to results, understanding the unity of all creation, and achieving spiritual fulfillment. Key aspects of his teaching include self-awareness, emotional regulation through detachment, selfless service, and aligning one's life with divine will.


Shaktis Celebrating Teacher's Day :Collage : Shakti* Priya.Dr.Sunita Anshima.

In India, Teacher's Day is celebrated on September 5th, marking the birth anniversary of Dr. Sarvepalli Radhakrishnan, a renowned philosopher, statesman, and former President of India....
With all enthusiasm the entire teaching community and faculty celebrates teacher's day throughout the world specially in India. Teacher is always respected everywhere.
Davians Celebrating Teacher's Day : Photo Collage : Shakti* Priya.Dr.Sunita Anshima Singh.
Teacher's Day ! Really we need a teacher in our life . And 5th of September is a very special day to remember, appreciate and honor the hard work and dedication of teachers that shaped the valuable future. I have a respect for those including my teacher students,kids and above all divine powers that guide me in a very different way.
Like others we remain also very grateful to the persons who have made a significant impact differently on my life. I decided to do something anew.Your teaching has helped me grow and learn in ways I never thought possible in my life.
I come here with some ideas for Teacher's Day wishes that remain in our mind. My beloved power, Teacher, my mentor Shakti : First of all I wish a very Happy Teacher's Day to all the amazing educators linked with me and us out there ! their patience, guidance, and support make a huge difference in students' lives."
I always assume that my teacher should be alike Shree Krishna that always protect the good ones in our life.He removes the darkness lying in the mind sets of like Arjuna.
Once upon a time ,it was around 1989 I was trying to achieve something a new in my life. I remember my beloved power, teacher, and my mentor that insists me to be the unique, exclusive in my life .I kept striving in my life,and still it continues .I become a free lance cartoonist,writer and a blogger due to her proper guidelines. I used to very happy while sharing my published cartoons to my mentor power.
What I do that Shaktis Decide : We are really remain thankful to you all for being an inspiration and a role model in our life.You're not only just a teacher, you're indeed a mentor and a friend for me forever in my life that keeps guiding me on and on.
Corona, Care and Digital Research : They feel free to modify us to fit our personal style and relationship with others.
Your teacher may be your student . Learning may be coming from all sides.I remember when entire community was at stake of Corona,We teachers with our students were seeking the ways. We were being digital for our survival . Then my students namely Abhishek, and Tejasvee suggested me to be a Vlogger and Blogger. I followed their path now what I am you all are observing.
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Courtesy Photos : Shakti Anshima.Shakti Pallavi Mukesh.Shakti Jaya Manoj
Column Editor: Shakti Madhavee. Shahina. Tanu Sarvadhikari.
Decorative : Shakti.Manjita Seema Farheen.
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Shakti Editorial : Poems : English : Page : 3
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Editor.
Shakti. Dr. Anjali Shahina Anubhuti
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Strive from the Deep Heart's Core.
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Short Poem.

Shakti Shahina Naz.
*
Teaching is not profession It's a indescribable passion. To educate and enlighten the manners in the pore Strive from the deep heart's core. Teachers are the heart of every classroom Students will motivate by whom. The soul of every school Their process of learning is so cool. A teacher's heart,a guiding star Who opens door,show us how far.


Each lesson taught,each smile you share A path to wisdom beyond compare For passing knowledge through the years When you were eliminating fears. For educators,motivaters,builders and many cause. Let's give a big round of applause.
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poem
Editing : Dr Bhawna Seema Farheen
Decorative : Shakti Manjita Shweta Anubhuti
Shimla Desk.

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Shikshan : Shakti : Photo Gallery. Page : 6
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Editor
Shakti Shaina Seema Bhagwanti
Dehradun Desk.
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witnessing Teachers' Day Celebration: photo Collage :Dr.Sunita Ranjita Seema Anubhuti
Shaktis Celebrating Teacher's Day :Collage : Shakti* Priya.Dr.Sunita Anshima.
Davians Shakti Community celebrating teacher's day : photo Dr.Sunita Alpana Anshima. 

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You Said it : आपने कहा : Page : 6
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Editor.
Shakti : Dr. Bhwana Madhvee Seema .
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Shakti. Prarthana.
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Fim : Ankush.21 July 1986.
Tithi Mulank : 3
Starring : Nisha Singh.Nana Patekar. Madan jain.
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Song : Itni Shakti Hame Dena Data.
To Watch the Shakti Prarthana press the given link.

' बुराई से बचते रहें हम '


Shakti : Shahina

A teacher takes a hand,opens a mind and touches a heart

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