ओम नमो शिवाय :फोटो. * शक्ति.डॉ.सुनीता मधुप प्रिया. * विषय सूची. 
फोर स्क्वायर होटल : रांची : समर्थित : आवरण पृष्ठ : विषय सूची : मार्स मिडिया ऐड : नई दिल्ली. ⭐ ------- शक्ति शिव : दृश्यम : आजकल : पृष्ठ : ० -------- संपादन शक्ति. डॉ.अनु मीना शबनम नैनीताल डेस्क. * महाशक्ति मीडिया प्रस्तुति तीज लोक गीत : गायन : शक्ति.सीमा सुनीता अनुभूति * काहे के शिव के मनायव हो शिव मानत नहीं * लोक पर्व तीज लघु फिल्म अवधि : २.२४ मिनट ⭐
पत्रिका / अनुभाग.. ब्लॉग मैगज़ीन पेज. * विषय सूची : पृष्ठ :०.
* सावन शक्ति शिव : लोक पर्व : तीज विशेष
आवरण.आजकल .पृष्ठ :०. आज और कल : पोस्ट पृष्ठ : ० शक्ति विचार धारा : पृष्ठ : १ सम्पादकीय : पृष्ठ : २. सम्पादकीय शक्ति आलेख : पृष्ठ : ३. शक्ति शिव : फोटो दीर्घा : पृष्ठ : ४ सत्य ही शिव है शिव ही सुन्दर है : शक्ति : गाने : पृष्ठ : ५ शक्ति शिव : कला दीर्घा : पृष्ठ : ६ शक्ति शिव : दृश्यम : पृष्ठ : ७ शक्ति शिव : समाचार : पृष्ठ : ८ आपने कहा : पृष्ठ : ९ *
 | शक्ति.राशि. प्रतीक चिन्ह.सिंह.
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* आत्म दीपो भवः * विक्रम संवत : २०८३ शक संवत : १९४८ . दिनांक : ०३ .०८ .२६ . श्रावण : कृष्णपक्ष : पंचमी दिन. सोमवार. त्रिशक्ति दिवस. मूलांक : ३ . * * a rising Sun GIF. * जागो उठ कर देखो जीवन जोत उजागर है. * आज और कल : पोस्ट --------- शक्ति : शिव : सावन : समाचार : पृष्ठ : ० ----------- श्रावण मास : कृष्ण पक्ष : प्रथम सोमवार * शिव भक्तों की सच्ची व निस्वार्थ सेवा ही शिव की सही आराधना है.
 | | शक्ति की शिव भक्तों के लिए निश्छल सेवा : फोटो : शक्ति.रितु सिंह. |
देवघर : संवाद सूत्र. मां पुष्पा सेवा संस्थान ट्रस्ट , देवघर से जुड़ी नवीनतम समाचार मुख्य रूप से उनके द्वारा आयोजित किए जा रहे जनसेवा और धार्मिक कार्यों से संबंधित हैं। संस्थान से जुड़ी क्रियाकलापों के बारे में जो मुख्य जानकारियां इस प्रकार इकट्ठी की गयी हैं वह यह है कि कांवड़िया सेवा शिविर का आयोजन आषाढ़ गुरु पूर्णिमा पर उद्घाटन के बाद शुभ आरंभ हुआ। देवघर में गुरु पूर्णिमा के पावन अवसर पर मां पुष्पा सेवा संस्थान ट्रस्ट द्वारा एक निःशुल्क कांवड़िया सेवा शिविर का भव्य उद्घाटन किया गया है। ज्ञात हो हमारी छाया सम्पादिका शक्ति रितु सिंह के कथानुसार देवघर आने वाले शिव भक्त कांवड़ियों के लिए एक महीने तक सेवाएं निरंतर जारी ही रहेगी। शक्ति की निश्छल सेवा : श्रावणी मेले के दौरान यह शिविर पूरे एक महीने तक संचालित किया जाएगा। इसमें सुल्तानगंज से जल लेकर आने वाले कांवड़ियों की सेवा की जाएगी। यदि हम मिलने वाली सुविधाएं की बात करें तो शिविर में आने वाले भक्तों के लिए शुद्ध पेयजल, उत्तम भोजन, रहने के लिए उत्तम व्यवस्था और चौबीसों घंटे निःशुल्क चिकित्सा सुविधाएं उपलब्ध कराई जा रही हैं।शिविर का एकमात्र उद्देश्य : उद्घाटन के दौरान समाजसेवियों जैसे डॉ. सुनील खवाड़े ने कहा कि देवघर आने वाले कांवड़ियों की नि:स्वार्थ सेवा करना ही भगवान शिव की सच्ची भक्ति है। मां पुष्पा सेवा संस्थान संस्था देवघर के बारे में : इस सेवा संस्थान ट्रस्ट की स्थापना रितु सिंह द्वारा की गई है, जो विभिन्न समाजसेवियों के सहयोग से इसे संचालित करती हैं। कार्यालय और स्थान संस्था का मुख्य कार्यालय देवघर के करनीबाग क्षेत्र में थड़ी दुलमपुर गवर्नमेंट स्कूल के पास स्थित है। इस सेवा भाव के पीछे मूल उद्देश्य यह है कि कांवड़िया सेवा के अलावा यह ट्रस्ट मुख्य रूप से गरीब और वंचित समुदायों के उत्थान के लिए शिक्षा, स्वास्थ्य और महिला सशक्तिकरण के क्षेत्र में नियमित रूप से कार्य करता है।
* संपादन व सज्जा : शक्ति. शालिनी डॉ.रजनी अनुभूति.
महाशक्ति मीडिया. शक्ति.प्रस्तुति. * अनंत शिव शक्ति विचार धारा संपादन शक्ति शक्ति डॉ.सुनीता नैना सीमा * त्रि शक्तियां संरक्षण * जब आपके साथ आपकी समर्थित संरक्षित त्रि शक्तियां हैं तो आपके जीवन में सब कुछ संभव अनंत शिव होना सुनिश्चित है * क्रोध : पछतावा * क्रोध सदैव मूर्खता से शुरू होता है और पछतावे पर ख़त्म होता है * समय , साथ, संयम ,और शिव शक्ति * सब छुट जाए लेकिन समय के साथ ' संयम ' , ' साहस ' , ' संकल्प ' और समयक वाणी कभी न छुटने पाए शक्ति ! देख लेना..... इस अनंत ' शक्ति ' के जीवन में ' शिव ' ही शिव होंगे. * ------- सम्पादकीय : पृष्ठ : २. ---------- शक्ति.कार्यकारी सम्पादिका. * त्रिशक्ति कार्यकारी सम्पादिका. * ©️®️M.S.Media.WCP. 95/13/24/ 26 * मुक्तेश्वर.नैनीताल डेस्क. शक्ति.डॉ.सुनीता रंजिता मीना. * नैना देवी.नैनीताल डेस्क. प्रादुर्भाव वर्ष : १९७०. संस्थापना वर्ष :१९९६.महीना: जनवरी: दिवस :६. * तीज का श्रृंगार मुन्ना लाल महेश लाल आर्य एंड संस ज्वेलर्स समर्थित *
* -------- सम्पादकीय शक्ति आलेख : पृष्ठ : ३. ---------- संपादन शक्ति शक्ति : शालिनी रेनू नीलम * महाशक्ति मीडिया प्रस्तुति * 
कजरी और सावन * कइसे खेले जइबू सावन में कजरिया बदरिया घेरी आइल ननदी...! * कइसे खेले जइबू सावन में कजरिया बदरिया घेरी आइल ननदी...! सावन : झूले : कजरी शक्ति. आलेख.
शक्ति. शालिनी मधुप अनुभूति लेखिका.कवयित्री. सम्पादिका.
कजरी सावन की फुहारों में भीगी लोक संवेदना है : डॉ.आर के दुबे कहते है कजरी सावन की फुहारों में भीगी, विरह की पीड़ा और मिलन की मधुर आशा को स्वर देती लोक -संवेदना की अनमोल धरोहर है। इसकी लय में नदियों-सी कोमलता, बादलों-सा गाम्भीर्य और मन की अनकही भावनाओं की सजीव छवि मिलती है।पूर्वी भारत की धरती से उपजी यह गायन-परंपरा कभी झूले की मस्ती बनती है, तो कभी प्रिय-वियोग की करुण पुकार। कजरी का प्रत्येक सुर वर्षा, श्रृंगार और लोकजीवन की सादगी को एक साथ पिरोकर मन में भीगी हुई-सी मिठास छोड़ जाता है। कजरी भारत के उत्तर प्रदेश विशेषकर मिर्जापुर, वाराणसी, अवध और बिहार क्षेत्र का एक बेहद लोकप्रिय वर्षा ऋतु का लोकगीत है। यह मुख्य रूप से सावन के महीने में महिलाओं द्वारा झूला झूलते समय, तीज के त्योहार पर या रिमझिम बारिश के दौरान गाया जाता है। गाँव के नीम और आम के पेड़ों पर पड़ते झूले : कुछ त्योहार कैलेंडर की तारीख नहीं होते, वे हमारी स्मृतियों में बसे पूरे संसार का नाम होते हैं। भोजपुरी अंचल की नाग पंचमी यानी पचईंया भी ऐसा ही एक पर्व था। पचईंया की सुबह घर-आँगन की सफाई, नागदेवता की पूजा और दूध-लावा छिड़कने की परंपरा से शुरू होती थी। रसोई में बनते पारंपरिक पकवानों की खुशबू पूरे घर को उत्सव में बदल देती थी। फिर गाँव के नीम और आम के पेड़ों पर पड़ते झूले..बच्चों की किलकारियाँ..और सबसे मधुर..महिलाओं की सामूहिक कजरी.. एक कंठ से उठता हुआ सुर धीरे-धीरे कई कंठों में घुल जाता था। कइसे खेले जइबू सावन में कजरिया बदरिया घेरी आइल ननदी...! कजरी : गीत नहीं खुशी, विरह, प्रेम, मायके की याद : कजरी केवल गीत नहीं थी : वह गाँव की स्त्रियों की खुशी, विरह, प्रेम, मायके की याद और लोकजीवन की जीवन्त अभिव्यक्ति थी। उधर बच्चे दिनभर झूले और खेलों में मस्त रहते, तो युवाओं के लिए मैदान में कबड्डी का रोमांच चरम पर होता। दो टीमों के बीच जीत-हार की जोरदार टक्कर और चारों ओर खड़े बुजुर्गों की निर्णायक भूमिका. प्रतिस्पर्धा होती थी, पर मन में कटुता नहीं.. आज समय बदल गया है। मोबाइल ने मैदानों की जगह ले ली, व्यस्तता ने चौपालों को छोटा कर दिया और स्थानीय पर्वों से जुड़े अवकाश भी कम होते गए।  | | राधिका कृष्ण झूले में : GIF | सरकारी अवकाश केवल काम से छुट्टी नहीं होता कई बार वह अपनी जड़ों से मिलने का अवसर भी होता है।कजरी और सावन : पचईंया की छुट्टी में बच्चे गाँव लौटते थे, परिवार के सभी लोगों से मिलते थे, महिलाएँ कजरी गाती थीं, झूले पड़ते थे, कबड्डी होती थी और एक पूरी पीढ़ी अपनी संस्कृति को जीकर सीखती थी। हर लोकपर्व को राजकीय अवकाश मिले, यह संभव न हो; लेकिन क्या स्थानीय संस्कृति के ऐसे पर्वों के लिए वैकल्पिक अवकाश या सांस्कृतिक आयोजन का कोई रास्ता नहीं निकाला जा सकता..? क्योंकि... देश की संस्कृति केवल बड़े त्योहारों से नहीं बनती; वह उन छोटे-छोटे लोकपर्वों से भी बनती है, जिन्हें महिलाएँ गीतों में, बच्चे खेलों में और बुजुर्ग अपनी स्मृतियों में सँजोकर रखते हैं। आइए, पचईंया को केवल याद न करें बल्कि उसे फिर से जीने का प्रयास करें. फिर कभी किसी नीम पर झूला पड़े, किसी आँगन से कजरी की आवाज आए, मैदान में कबड्डी की हुंकार गूँजे और किसी बच्चे की आवाज सुनाई दे... अम्मा! आज पचईंया हऽ… आज त पूरा दिन खेलब ! ” तब समझिएगा... पचईंया खत्म नहीं हुई थी, हमने बस उसे कुछ समय के लिए भुला दिया था.
* स्तंभ सज्जा संपादन : शक्ति. रंजिता मंजिता रेनू
शक्ति. आलेख : सावन शिव और शक्ति विशेष. * शिव: ब्रह्माण्डीय ऊर्जा और चेतना, मानवीय संवेदना, चेतना,सेवा और त्याग. सृजन,लय और प्रलय की सत्ता शक्ति. आरती अरुण आस्था  | ओम नमो शिवाय : सुबह सुबह ले शिव का नाम :ऋषिकेश : शक्ति नैना डॉ.सुनीता प्रिया. |
और क्या क्या नहीं हैं ? शिव : शिव कोई हिन्दूओं के आराध्य भर थोड़े हैं ? शिव तो अखिल ब्रह्माण्डीय ऊर्जा और चेतना हैं, सृष्टि के अधिष्ठान केन्द्र हैं, सृजन की मूल अवधारणा अर्द्धनारीश्वर हैं। ब्रह्माण्डीय ज्ञान के प्रतीक नटराज हैं, योग ध्यान और समाधि के प्रवर्तक हैं, कालजयी महाकाल हैं। नृत्य संगीत के मूल सूत्र हैं, सृजन काल में आनन्द तांडव और विनाश काल में रूद्र तांडव हैं, धैर्य,सहिष्णुता,कष्ट उद्धारकर्ता के प्रतीक हैं। सुर असुर, देव दानव, यक्ष, गंधर्व, किन्नर एवं समस्त जीवों के पूज्य और आधार हैं, सृजन,लय और प्रलय के मूल स्रोत हैं,योगी, दार्शनिक, वैद्य, प्रेमी और कुटनीतिज्ञ भी हैं, ऊॅंकार प्रणव और अमर्त्य विद्या के ज्ञाता हैं और क्या क्या नहीं हैं ? शिव जितने सीधे सरल नहीं है सब देव शक्ति : हिन्दू समाज के सब देवी देवता इतने सहज सरल नहीं हैं जितने शिव हैं। न पीताम्बर चाहिए न स्वर्णाभूषण, न रथ चाहिए न सुख सुविधा, न श्रृंगार चाहिए न छप्पन भोग। पाषाणी चट्टानों पर व्याघ्र चर्म का बिछावन और दीगम्बरा जीवन शैली, कोई कर्मकाण्ड या आयोजन के आकांक्षी नहीं बस यह संदेश देने वाले कि शिवोहम् शिवोहम् शिवोहम् के भाव को हृदय में धारण किए रहिए। अर्थात् सबके कल्याण की भावना हृदय में स्थापित किए रहिए,यही शिव पूजा और आराधना है। वैसे इनके कर्मकाण्ड भी कितने महंगे हैं,बस एक लोटा जल और पांच विल्वपत्र ,बस यही तो भाव उन्हें महायोगी और महादेव बनाता है। चमत्कार यह है कि इनके जितने नाम रखे गए हैं, सबके तथ्य और सत्य भाव भी हैं जैसे हम एक नाम नीलकंठ को ही ले लें, सागर मंथन में जो बहुमूल्य थे देवताओं ने हड़प लिए इसके पीछे देवत्व और सृष्टि की रक्षा के उद्देश्य हैं भोले ओ भोले : तूने कैसे विष पी लिया : पर बारी जब हलाहल या कालकूट ब्रह्माण्डीय विष के लेने की आयी तो दोनों तरफ त्राहिमाम हो गए, अब उसका पान न किया जाए तो जीवन खत्म हो जाए तब सबने महादेव से विनम्र याचना की। महादेव तो महादेव हैं ब्रह्माण्डीय चेतना और ऊर्जा जिसमें विष और अमृत सब समाहित हैं ,कैसा भय, उठाए और पीना शुरू कर दिए। इसी क्षण शक्ति उमा ने कुछेक कारणों से जोर से टोका, तबतक हलाहल उनके कंठ तक पहुंच चुका था। ऊर्जा को रूपांतरित ही तो करना था, उसके प्रभाव को योगबल से जड़ बनाकर कंठ में ही रख लिए पर असर तो कहीं न कहीं होना ही था, सारा कंठ नीला हो गया। सृष्टि उस हलाहल के विनाश से बच गयी, परन्तु शिव नीलकंठ बन गए। * सज्जा व संपादन शक्ति. डॉ.रजनी मधुप शालिनी
गतांक से आगे : १ शुभम् करोती शिवम् भवति, * शक्ति. आलेख : सावन शिव और शक्ति विशेष. *
सर्न प्रसिद्ध नाभीकीय अन्वेषण केन्द्र के मुख्यालय के मुख्य द्वार पर नटराज की प्रतिमा क्यों ? बड़ा विस्मयजनक विस्तार है जिसकी व्याख्या आज क्वांटम भौतिकी कर रहा है और पुरी दुनिया का सबसे प्रसिद्ध नाभीकीय अन्वेषण केन्द्र सर्न के मुख्यालय के मुख्य द्वार पर नटराज की प्रतिमा लगा रखी है। हैं न शिव अद्भुत और इनका अद्भुत होना ही इस ब्रह्माण्डीय सत्ता का सत्य है। शिव शब्द सत्ता और सत्य है : शिव शब्द आदि अनादि काल से कल्याणकारी सत्ता और सत्य है। जिनके मन, हृदय, मस्तिष्क और समस्त चेतना में सर्व कल्याण की भावना अवस्थित है, वही शिव है जिनकी सत्ता समस्त मत,पंथ, विचार, विश्वास आदि से इतर और परे है। समस्त संकीर्ण भावों, विचारों आदि से परे यह परम चेतना, सेवाभाव,त्याग, क्षमा,अपारिग्रह,प्रेम, करुणा, देवत्व और सहज मानवीय संवेदनाओं के प्रतीकात्मक सत्ता हैं। इन्हें उन्मुक्त और त्रिकाल बाधित, सतत् प्रवाहमान,जन्म,मरण और शाश्वत सनातन ऊर्जा और चेतना के रूप में देखने नहीं, अवलोकन करने की जरूरत है। ऐसे तो वैश्विक स्तर पर जब शिव सत्ता का अवलोकन और विश्लेषण किया जाता है तब मानवीय सभ्यता, संसार और संस्कृति की एतिहासिक यात्रा में शिव कहीं न कहीं किसी न किसी रूप में द्रष्टव्य हैं भले ही सैंधव सरस्वती सभ्यता में तो पाशुपत शिव : उनका नाम, प्रतीकात्मक चिह्न कुछ भी हो पर उनकी सत्ता शाश्वत और सनातन है। सैंधव सरस्वती सभ्यता में तो पाशुपत शिव के रूप ई पू ५ से ६ हजार साल पूर्व में उपलब्ध और पूजित हैं। इससे हजारों वर्ष पूर्व म प्र के भीम बेटका की गुफाओं की भित्ति चित्रों में एक नृत्य करती, त्रिशूल धारी आकृति के रूप में मौजूद हैं जिनकी प्राचीनता कार्बन डेटिंग और अन्य पडतालों में लगभग बीस से पच्चीस हजार वर्षों पुराना बताया जा रहा है। हो सकता है कि तत्कालीन मनुष्यों ने किसी ऐसी सत्ता का या तो अनुमान लगाया या साक्षात्कार किया हो,अगर अनुमान या कल्पना ही हो तो अनुमान आधारहीन नहीं होते हैं कि उनके पीछे भी सत्य का अंश होता है, अनुभूतियां होती हैं। अब हम इस शिव सूत्र का अवलोकन करें और कारण कार्य के ब्रह्माण्डीय नियम और क्वांटम भौतिकी के साथ इसका समन्वय कैसे होता है,हो रहा है। शुभम् करोती शिवम् भवति : सूत्र है, शिवं करोति शुभम् भवति शुभम् करोती शिवम् भवति, शाब्दिक व्यूत्पत्ति और उसके अर्थ के अनुसार यह होता है कि जो शिव तत्त्व ( कल्याणकारी भाव की इच्छा करता है या कल्याणकारी कार्य करता है, वहां शुभ घटित होता है और मनुष्य जब निरन्तर शुभ कर्म करता है तब वह स्वयं शिव हो जाता है। यही तो शिव,शिवत्व और शिव तत्व है जो सभी भावों बन्धनों से हमें मुक्त कर विराट और अनन्त की ओर ले जाने के मार्ग को प्रशस्त करता है।
* सज्जा व संपादन शक्ति. शालिनी रंजिता सीमा
गतांक से आगे : २ अंतिम क़िस्त * शुभम् करोति कल्याणमारोग्यम् धन सम्पदा शक्ति. आलेख : सावन शिव और शक्ति विशेष. * *  | * प्रकृति : शिव : बागमती : काठमांडू : शक्ति : भक्ति : कोलाज कलर पेंटिंग : शक्ति सोनी मधुप अनुभूति |
* शिव ऊर्जा है जो कारण कार्य के सिद्धान्त से जुड़कर है : आधुनिक क्वांटम भौतिकी जिस ऊर्जा के संरक्षण और रूपांतरण तथा अविनाशिता की बातें करता है,वही आध्यात्मिक दर्शन और चिन्तन में शिव ऊर्जा है जो कारण कार्य के सिद्धान्त से जुड़कर दोनों पक्षों के यथार्थ को सत्यापित करता है कि संसार आदान - प्रदान के सिद्धान्त पर चलता है, कर्म ( अच्छे बुरे) लौटकर वैसे ही हमारे पास आते हैं जैसे परछाइयां हमारा पीछा नहीं छोड़ती हैं, ठीक यही ऊर्जा संरक्षण और रूपांतरण का सिद्धान्त है। यही दर्शन कपिल मुनि के सांख्य और बौद्ध दर्शन के पटिच्चसमुप्पाद् या प्रतीत्यसमुत्पाद में देखा समझा जाता है। शिव अविनाशी ऊर्जा के प्रतीक सत्य और सत्ता हैं और शुभ अशुभ कर्मों से उत्पन्न फलाफल को प्रक्षेपित और रूपांतरण करने वाले हैं अर्थात् हमारे शुभ अशुभ कर्मों की ऊर्जा शिव हैं, इसलिए शुभ कर्मों के ही चयन किए जाने चाहिए। कश्मीर शैव मत शुभ कल्याणकारी विकल्पों की ओर : कश्मीर शैव मत के शिव सूत्र और स्पन्दकारिका में यह स्वीकार किया गया है कि मानवीय चेतना जब शुभ कल्याणकारी विकल्पों की ओर अग्रसर होती है तब वह अन्ततः वह उसी शिवत्व : परम चेतना / ऊर्जा / प्रकाश ) में समाहित होकर समावेशित हो जाती है जैसे नदियां सागर में मिलकर सागर ही हो जाती हैं। सांसारिक जगत में भी एक शिव सूत्र की मान्यता है कि, शुभम् करोति कल्याणमारोग्यम् धन सम्पदा अर्थात् शुभ कर्म और कल्याण करने वाले कल्याण,आरोग्य,सुख आनन्द और भौतिक सम्पदाओं के भोग के अधिकारी होते हैं। इसलिए शिव सत्ता स्थूल सूक्ष्म और कारणिक है जिनमें सम्यक् समन्वय और संतुलन ही मुक्ति मोक्ष, कैवल्य और निर्वाण का मार्ग है। निष्कर्ष रूप में शिव की व्याख्या नहीं की जा सकती है कि शिव ही प्रेम,करुणा,क्षमा,त्याग, भोग,मुक्ति, सृजन ,लय और प्रलय की सत्ता और सत्य हैं। जो शब्दों से परिभाषित किया जा सके, वह अनन्त और अनिर्वचनीय नहीं हो सकता पर शिव सत्ता तो अनन्त है हरि अनन्त हरि कथा अनंता। जय शिव जय शिव जय शिव। सबके आरोग्य एवं सौभाग्य की मंगलकामनाओं के साथ
* सज्जा व संपादन शक्ति. शालिनी रेनू अनुभूति
 * शिव शक्ति की प्रेम कहानी : हरतालिका तीज: लोक पर्व भारतीय सभ्यता संस्कृति की अद्भुत कहानी : एक महिला -केंद्रित उत्सव शक्ति आलेख डॉ. सुनीता सीमा शक्ति प्रिया *
तीज : शिव शक्ति की प्रेम कहानी : हरतालिका तीज : जब कभी भी तीज आता है तो अम्मा याद आ जाती है। बड़ी विधि विधान से तीज व्रत करवाती थी। आज भी हम सभी इस लोक पर्व की संस्कृति को संरक्षित करने का प्रयास कर रही है। मेरी माने तो लोक पर्व भारतीय सभ्यता संस्कृति की अद्भुत कहानी है तीज. भगवान शिव और पार्वती की कहानी सती के रूप में शिव की पत्नी के दोबारा जन्म से शुरू होती है, जो शिव को पति रूप में पाने के लिए कठोर तपस्या करती हैं, शिव उनकी परीक्षा लेते हैं,और अंत में वे उन्हें वर के रूप में प्राप्त कर शिव की अर्धांगिनी बनती हैं.शिव के प्रति शक्ति का प्रेम अतुलनीय है। भारतीय लोक सभ्यता संस्कृति की अद्भुत कहानी :
 | समर्पण : तपस्या : प्रेम की अमरशिव शक्ति कहानी : हरतालिका तीज : शक्ति मीना. नैनीताल. * |
फसली पर्व :मानसून के मौसम में है यह तीज। चंद्रमा का चक्र निर्धारित करता है कि प्रत्येक वर्ष तीज कब मनाई जाती है। यह त्यौहार भारत के मानसून के मौसम में सालाना जुलाई या अगस्त में मनाया जाता है। यह त्योहार कई राज्यों में मनाया जाता है, मुख्य रूप से देश के मध्य और उत्तरी क्षेत्रों में। हालांकि केवल हरियाणा में यह तीज आधिकारिक सार्वजनिक अवकाश के साथ मनाया जाता है। भारतीय सभ्यता संस्कृति : यह राजस्थान, बिहार, उत्तर प्रदेश, पंजाब और हरियाणा जैसे राज्यों में विशेषतः मनाया जाता है। राजस्थान की राजधानी जयपुर, तीज के कुछ सबसे प्रसिद्ध उत्सवों का घर है। बिहार, में नालन्दा , गया ,नवादा आदि समस्त मगध क्षेत्र में यह लोक पर्व खूब धूमधाम से मनाया जाता है। महिलाएं २४ घंटे का निर्जला उपवास करती है। संध्या के समय गौरी शिव की पूजा की जाती है और यह कामना की जाती हैं कि उनके पति परमेश्वर जैसी स्वस्थ दीर्घ आयु पाएं। और उनका प्रेम शिव शक्ति जैसा ही हो। और दूसरे दिन आसन का विसर्जन होता है। पास के नदी तालाब में मूर्तियां विसर्जित कर दी जाती है इस सन्देश के साथ की अगले वर्ष गौरी शिव की पूजा से जुड़ी तीज का वो व्रत पुनः करें। समस्त विधि विधान के बाद महिलाएं अपना उपवास जल या शर्वत ग्रहण कर तोड़ती हैं। तीज महोत्सव भारत में मानसून के आगमन के साथ मनाया जाने वाला एक महिला -केंद्रित उत्सव है, जिसे मुख्य रूप से श्रावण मास में मनाया जाता है. यह पर्व भगवान शिव और पार्वती के पुनर्मिलन का प्रतीक है, और विवाहित महिलाएं पति की लंबी आयु व वैवाहिक सुख के लिए व्रत रखती हैं. इस दौरान महिलाएं हरे रंग के वस्त्र पहनती हैं, मेहंदी लगाती हैं, झूला झूलती हैं और लोकगीत गाती हैं. यह त्योहार आस्था, उमंग, सौंदर्य और प्रेम का प्रतीक है. तीज के प्रकार :
तीज के प्रकार : हरियाली तीज: सावन के महीने में मनाई जाने वाली हरियाली तीज सबसे प्रसिद्ध है और इसमें प्रकृति की हरियाली का जश्न मनाया जाता है. कजली तीज: यह हरियाली तीज के बाद आने वाला एक और महत्वपूर्ण तीज है, जो पूर्वी उत्तर प्रदेश में मनाई जाती है. हरतालिका तीज : भाद्रपद माह के शुक्ल पक्ष की तृतीया को हरतालिका तीज का व्रत किया जाता है, जिसमें शिव-पार्वती की पूजा होती है. सब तीज हर्ष उल्लास के साथ ही मनाए जाते है।
लोक पर्व उत्सव की.मुख्य गतिविधियाँ
उपवास और पूजा : महिलाएं पति की लंबी उम्र के लिए व्रत रखती हैं और शिव -पार्वती की पूजा करती हैं. पति पत्नी के मध्य अमर प्रेम की चर्चा होती है तो हरतालिका तीज: भाद्रपद माह के शुक्ल पक्ष की तृतीया को मनाई जाने वाली हरतालिका तीज की चर्चा होती है। झूला झूलना: यह तीज का एक प्रमुख आकर्षण है, जिसमें महिलाएं पेड़ों से बंधी डालियों पर झूला झूलती हैं. सावन के झूले खूब चर्चें में होते हैं। गांवों में इसका प्रचलन अब भी है। सजावट : महिलाएं नए और रंगीन वस्त्र पहनती हैं, हाथों में मेहंदी लगाती हैं और अन्य पारंपरिक श्रृंगार करती हैं. अलता पैरों में लगाती हैं। खूब सजती सवरती है। तीज के दौरान महिलाएं अपनी बेहतरीन एक्सेसरीज और पोशाक पहनती हैं। वे अक्सर अपने हाथों पर मेहंदी या मेहंदी की सजावट भी करवाती हैं। वे कई गीत गाते हैं जो त्योहार से जुड़े होते हैं। वे झूलों पर झूलते हैं जो पेड़ की बड़ी शाखाओं से बंधे होते हैं। वे उपवास और भव्य, भव्य दावतों के संयोजन का भी अनुभव करते हैं। नृत्य एक और विशिष्ट तीज गतिविधि है। संगीत और नृत्य: इस अवसर पर लोकगीत गाए जाते हैं और नृत्य प्रस्तुतियां दी जाती हैं. पूजा संपन्न होने के बाद बिहार झारखण्ड में महिलाओं को लोक गीत गाते हुए देखा जा सकता हैं जिसमें शक्ति की शिव को पाने के लिए कठिन तपस्या की बात होती हैं। त्योहार के व्यंजन : पारंपरिक घेवर मिठाई तीज से जुड़ी हुई है. गुजिया ठेकुए आदि बनते हैं। जुलूस : राजस्थान जैसे राज्यों में, जयपुर में तीज का भव्य जुलूस निकाला जाता है. महत्व : जीवन में वैवाहिक सुख का : यह पर्व भगवान शिव और माता पार्वती के पुनर्मिलन की याद में मनाया जाता है, जो अटूट प्रेम और समर्पण का प्रतीक है. यह त्योहार सुहागन महिलाओं के लिए बहुत महत्व रखता है, जो पति की दीर्घायु और वैवाहिक सुख की कामना करती हैं. तीज पत्नी पार्वती और पति शिव के बीच संबंधों का प्रतिनिधित्व करती है। यह त्योहार पार्वती के अपने पति के प्रति अटूट समर्पण की याद दिलाता है। जब भारतीय महिलाएं तीज के दौरान अपने आशीर्वाद की तलाश करती हैं, तो वे एक मजबूत विवाह – और गुणवत्तापूर्ण पति प्राप्त करने के साधन के रूप में ऐसा करती हैं। तीज न केवल एक मजबूत शादी के इर्द-गिर्द केंद्रित है, बल्कि यह बच्चों की खुशी और स्वास्थ्य पर भी ध्यान केंद्रित करती है। प्रकृति का उत्सव : यह मानसून के आगमन और चारों ओर फैली हरियाली का भी उत्सव है. हम हरीतिमा को बचा सकें,यह सन्देश भी हम देना चाहते हैं। तीज नाम को एक छोटे लाल कीट का संदर्भ माना जाता है जो मानसून के मौसम में जमीन से निकलता है। हिंदू मिथकों का मानना है कि जब ऐसा हुआ, तो पार्वती ने शिव के निवास का दौरा किया। इसने पुरुषऔर महिला के रूप में उनके संबंध को सील कर दिया। तीज न केवल शादी और पारिवारिक संबंधों पर ध्यान केंद्रित करती है, बल्कि यह मानसून पर भी ध्यान केंद्रित करती है। मानसून लोगों को गर्मी के महीनों की भीषण गर्मी से आराम देता है। * पृष्ठ सज्जा : शक्ति नैना मीना अनुभूति मंजिता. स्तंभ संपादन : शक्ति शालिनी रेनू नीलम श्रद्धा *  | | * |
शक्ति. डॉ.रश्मि. आर्य. डॉ.अमरदीप नारायण. नालन्दा हड्डी एवं रीढ़ सेंटर.बिहार शरीफ.समर्थित. * महाशक्ति मीडिया.प्रस्तुति. ⭐ -------- शक्ति : शिव : सावन : फोटो दीर्घा : पृष्ठ : ४ ------- संपादन. शक्ति नैना सीमा प्रिया. नैनीताल डेस्क. *
 | | सत्यम शिवम् सुंदरम : हरतालिका तीज की तैयारी : फोटो कोलाज : शक्ति. शालिनी डॉ. सुनीता प्रेरणा |
 | | गंगा अवतरण का दृश्य :शिव की जटा से गंगोत्री : कलाकृति : छाया डॉ.सुनीता वनिता शक्ति प्रिया |
 | ओम नमो शिवाय : सुबह सुबह ले शिव का नाम :ऋषिकेश : शक्ति नैना डॉ.सुनीता प्रिया.
 | | शक्ति यात्रा : गंगा : विंद्याचल शक्ति की आराधना : साभार :कोलाज फोटो : शक्ति रितु. | ⭐ |
-------- सत्य ही शिव है शिव ही सुन्दर है : शक्ति : गाने : पृष्ठ : ५ ------ संपादन शक्ति माधवी संगीता तनु * फिल्म : सत्यम शिवम् सुंदरम.१९७८. सितारे : शशि कपूर. जीनत अमान. गाने : जागो उठ कर देखो जीवन जोत उजागर है ईश्वर सत्य है सत्य ही शिव है शिव ही सुन्दर है
गीत : पंडित नरेंद्र शर्मा. संगीत : लक्ष्मी कांत. प्यारेलाल. गायिका : लता. गाना सुनने व देखने के लिए नीचे दिए गए लिंक को दवाएं
------- शक्ति शिव : दृश्यम : पृष्ठ : ७ -------- संपादन शक्ति. डॉ.अनु मीना शबनम नैनीताल डेस्क. * महाशक्ति मीडिया प्रस्तुति तीज लोक गीत : गायन : शक्ति सीमा सुनीता अनुभूति * काहे के शिव मनायव हो शिव मानत नहीं दृश्यम : अभी भी एक उम्मीद बाक़ी है भोले
शक्ति मीना : मुक्तेश्वर नैनीताल महादेव मंदिर
दृश्यम : गंगा : शक्ति : रितु. * मन पावन हो गंगा में डूबे नहाय मन रावण जो लहरों में क्यों न बहाय.
--------- शक्ति : शिव : सावन : समाचार : पृष्ठ : ८ ----------- ओम नमो शिवाय श्रावण मास : कृष्ण पक्ष : प्रथम सोमवार * शिव भक्तों की सच्ची व निस्वार्थ सेवा ही शिव की सही आराधना है.  | शक्ति की शिव भक्तों के लिए निश्छल सेवा : फोटो : शक्ति.रितु सिंह.
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देवघर : संवाद सूत्र. मां पुष्पा सेवा संस्थान ट्रस्ट , देवघर से जुड़ी नवीनतम समाचार मुख्य रूप से उनके द्वारा आयोजित किए जा रहे जनसेवा और धार्मिक कार्यों से संबंधित हैं। संस्थान से जुड़ी मुख्य जानकारियां इस प्रकार हैं कि कांवड़िया सेवा शिविर का आयोजन गुरु पूर्णिमा पर उद्घाटन हुआ। देवघर में गुरु पूर्णिमा के पावन अवसर पर मां पुष्पा सेवा संस्थान ट्रस्ट द्वारा एक निःशुल्क कांवड़िया सेवा शिविर का भव्य उद्घाटन किया गया है। ज्ञात हो हमारी छाया सम्पादिका शक्ति रितु सिंह के कथानुसार कांवड़ियों के लिए एक महीने तक सेवाएं जारी रहेगी। शक्ति की निश्छल सेवा : श्रावणी मेले के दौरान यह शिविर पूरे एक महीने तक संचालित किया जाएगा। इसमें सुल्तानगंज से जल लेकर आने वाले कांवड़ियों की सेवा की जाएगी। मिलने वाली सुविधाएं की बात करें तो शिविर में आने वाले भक्तों के लिए शुद्ध पेयजल, उत्तम भोजन, रहने के लिए उत्तम व्यवस्था और चौबीसों घंटे निःशुल्क चिकित्सा सुविधाएं उपलब्ध कराई जा रही हैं।शिविर का उद्देश्य : उद्घाटन के दौरान समाजसेवियों जैसे डॉ. सुनील खवाड़े ने कहा कि देवघर आने वाले कांवड़ियों की नि:स्वार्थ सेवा करना ही भगवान शिव की सच्ची भक्ति है। मां पुष्पा सेवा संस्थान संस्था देवघर के बारे में : इस सेवा संस्थान ट्रस्ट की स्थापना रितु सिंह द्वारा की गई है, जो विभिन्न समाजसेवियों के सहयोग से इसे संचालित करती हैं। कार्यालय और स्थान संस्था का मुख्य कार्यालय देवघर के करनीबाग क्षेत्र में थड़ी दुलमपुर गवर्नमेंट स्कूल के पास स्थित है। इस सेवा भाव के पीछे मूल उद्देश्य यह है कि कांवड़िया सेवा के अलावा यह ट्रस्ट मुख्य रूप से गरीब और वंचित समुदायों के उत्थान के लिए शिक्षा, स्वास्थ्य और महिला सशक्तिकरण के क्षेत्र में नियमित रूप से कार्य करता है। संपादन व सज्जा : शक्ति. शालिनी डॉ. रजनी अनुभूति

English Section. *
Shakti. Pooja.Arya.Dr.Rajeev Ranjan. Child Specialist. Biharsharif. supporting * English Editorial Section : Cover Page 0. English Editorial Today's Post : Page 1 Shakti Editorial. English Page : 2 Shakti Editorial. Prose : English Page : 3 Shakti Editorial. Poem : English Page : 4 Shakti Vibes : .Page : 5 Radhika : Krishna : Rukmini : Photo Gallery.Page : 6 Visuals News : News : Editorial Page : 7 Shakti Art Gallery : Radhika : Krishna : Rukmini : English : Page 8. Gratitude : Day Special : You Said it : Page : 9. * --------Shakti. Editorial : Page : 1. ----------
* Shakti Chief Editor. * Shakti. Nushka. Krishna Devotee.UK. Shakti. Archana. TOI Writer.Shimla.India. Shakti.Nicky.Australia. * Executive Editor. * Shakti. Priya Seema Tanu Sarvadhikari. * Guest Editor. Shakti Dr. Anita Bhawna Madhvee.
--------- Shakti Editorial. English : Prose Page : 3 --------- Editor. Shakti. Priya Seema Tanu Sarvadhikari. * a Divine Shakti Article *by * Ashok Karan

* Hindustan Times ( Patna. Ranchi ) Ex.Staff Photographer Public Agenda Ex.Photo Editor :New Delhi Present : Photo Editor M.S Media Blog Magazine Page Free Lance. * Teej :A Celebration of Devotion, Love & Monsoon.
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The Cherished festivals of women : Teej is one of the most vibrant and cherished festivals of women, celebrated with grandeur across India and Nepal during the monsoon season. Dedicated to Goddess Parvati and her eternal union with Lord Shiva, the festival symbolizes love, fidelity, and the strength of womanhood. Women observe fasts as an act of devotion, adorned in bright lehariya sarees, green and red attire, colorful bangles, and intricate henna designs. Temples and homes resonate with devotional songs, rhythmic dances, and joyous laughter. Cultural Highlights of Teej • Traditional Attire: Women wear vibrant lehariya sarees, green bangles, and fresh flowers. • Henna Rituals: Applying intricate mehendi designs on hands and feet for beauty and blessings. • Swings & Celebrations: Decorated swings are hung from trees, symbolizing joy and festivity. • Music & Dance: Folk songs and traditional dances fill the air with devotion and happiness.• Festive Feasts: Special delicacies like ghevar, gujiya, and laddoo are prepared and shared. Worshipping the idol of Goddess Parvati and Lord Shiva, Teej is celebrated in Rajasthan, Uttar Pradesh, Maharashtra, and Nepal, with Jaipur hosting grand processions featuring the idol of Goddess Parvati and Lord Shiva, accompanied by music, dancers, and traditional rituals. Spiritual Significance : The term Teej means "third," referring to the third day of the lunar fortnight after Amavasya (new moon) or Purnima (full moon). The festival is observed in three forms – Hariyali Teej, Kajari Teej, and Hartalika Teej – each carrying its own significance. According to mythology, Teej commemorates the day Goddess Parvati was united with Lord Shiva after years of penance, symbolizing faith, patience, and divine love. Unmarried girls pray for a loving future spouse, while married women fast for the longevity and prosperity of their husbands. In Ranchi Women devotees can be seen worshipping in temples, beautifully dressed, immersed in rituals and prayers, celebrating the onset of the rainy season and the blessings it brings. * Column Editing.Shakti Naina Dr. Sunita Priya. Page Decorative : Shakti Anita Seema Swati.
-------- Shakti Editorial. Poem : English Page : 4 -------- Editor Shakti. Naina Tanu Priya Darjleeng Desk. * a short poem. Savan Special. * The rains Have come again. * Shakti. Priya Madhup Anubhuti. *
©️®️M.S.Media.WC.Painting / Priya Madhup / 16 /26* Oh my beloved one ! The rains Have come again. Bringing tokens of romance in the eyes With lots of admiration inside loving vibes. The beloved one calls out to her Sajana *
Courtesy Photo : Shakti. *The rains have a stirred in the love in her heart The Savan droplets pours so does love in her heart. Her cheeks get all rosy She is ready to get all cozy. Savan is the season On love and longing Send it to your beloved one Only love & feeling Oh my beloved one ! The rains Have come again. * Column Editing & Decorative Shakti. Dr.Sunita Tanu Seema. --------- Vibes : Shakti : English Page : 5 -------- Editor Shakti. Dr.Anu Seema Priya Darjeeling Desk. * Every small win is a step towards greatness. --------- Photo Gallery : Shakti : English Page : 6 -------- Editor.
Shakti. Dr.Anu Seema Priya Darjeeling Desk. * ------- Visuals News : News : Editorial Page : 7 ------- Editor. Shakti. Naina Shaily Gul Saxena Mumbai Desk. * Shakti. Bhawana Om Prakash experiencing the teej festival. Collage : Shakti.Bhwana Singh. Collage : Editor.Dr.Sunita Madhup.
Hariyali Teez Shakti : Mehandi : Collage : Shakti. Ritu Meena Anubhuti.  | | Kinnar Kailash : Darshan : photo Collage : Shakti. Manju Shreeram Aastha |
 | | Ganga : Shaiva Shakti at : Kashi Vishwanath Varanasi : Collage : Shakti. Ritu |
remembering the lord Ganesha for any nice Beginning. Shakti Desk : Shree Ganeshay Namah -------- You Said It : English Page. 9 --------- Shakti. Dr Bhwana Seema Shahina * It is a Shakti based page : everybody will like visiting this page stands for women's empowerment Shakti : Suman : Chandigarh * |
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