Radhika Krishna Rukmini. Darshan. Patrika.15.V2.S 9.

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कृण्वन्तो विश्वमार्यम. 
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Radhika Krishna Rukmini.  
Darshan.Patrika.
Number.15.Volume : 2. Series : 9.
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प्यार.व्यवहार.संस्कार.राधिकाकृष्णरुक्मिणी : दर्शन : १५.पत्रिका.आवरण पृष्ठ.महाशक्ति मीडिया. 
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प्यार.व्यवहार.संस्कार.
राधिकाकृष्णरुक्मिणी : दर्शन : १५.दैनिक.
में जाने के लिए 
नीचे दिए गए उपलब्ध लिंक को दवाएं. 
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Radha * Raman Rukmini : WCP. 26

प्यार : व्यवहार : संस्कार. 
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विषय सूची : पृष्ठ :०.

शक्ति. विचार धारा. 
अनुभाग : १. 
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त्रिशक्ति.
प्रेम : प्रकृति.पृष्ठ : ०. 
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राधिकाकृष्ण: प्रेम प्रकृति. दर्शन : नैनीताल डेस्क : पृष्ठ : ० / १.
रुक्मिणीकृष्ण. प्रेम प्रकृति. दर्शन : आज : नैनीताल डेस्क : पृष्ठ :० /२.
मीराकृष्ण : प्रेम प्रकृति. दर्शन :  नैनीताल डेस्क : पृष्ठ ० / ३. .  
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त्रिशक्ति.
जीवन : दर्शन.
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त्रि शक्ति : विचार धारा : पृष्ठ : १. 
 राधिकाकृष्ण : जीवन दर्शन : दृश्यम : शब्द चित्र : वृन्दावन.डेस्क : पृष्ठ : १ / १.
रुक्मिणीकृष्ण :जीवनदर्शन : दृश्यम : शब्द चित्र : विदर्भ डेस्क: पृष्ठ : १ / २.
मीराकृष्ण : जीवन दर्शन : शब्द चित्र : मेवाड़ डेस्क.पृष्ठ १ /३.
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सम्पादकीय शक्ति. 
अनुभाग :२. 
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राधिकाकृष्णरुक्मिणी : सम्पादकीय शक्ति : पृष्ठ :२. 
सम्पादकीय शक्ति. समूह. नवशक्ति.विचार धारा : अंततः : पृष्ठ :२/ १.
सम्पादकीय : त्रिशक्ति : गोरी साँवरे सलोनी : गद्य संग्रह : आलेख : पृष्ठ : २ / २.  
सम्पादकीय :त्रिशक्ति : गोरी साँवरे सलोनी : पद्य संग्रह : आलेख : पृष्ठ : २ / ३.
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शक्ति दर्शन. 
आलेख विषय वस्तु : अनुभाग : ३. 
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राधिकाकृष्णरुक्मिणी : आज का गीत : जीवन संगीत :भजन : पृष्ठ : ३.
राधिकाकृष्णरुक्मिणी : शक्ति : कोलाज दीर्घा : पृष्ठ : ४. 
राधिकाकृष्णरुक्मिणी : शक्ति : कला दीर्घा : पृष्ठ : ५ .
दिन विशेष : आज का पंचांग : राशि फल : पृष्ठ : ६.
राधिकाकृष्णरुक्मिणी : शक्ति : फोटो दीर्घा : पृष्ठ :७. 
राधिकाकृष्णरुक्मिणी : समसामयिकी.समाचार : दृश्यम दिन विशेष : पृष्ठ : ८.
गीता ज्ञान : मुझे भी कुछ कहना है : आभार : पृष्ठ :९.
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शक्ति ज्योति.आर्य नरेंद्र.वायर एक्सिस प्राइवेट लिमिटेड मार्केट रिसर्च :नवी मुंबई समर्थित.
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शक्ति.राशि.
   प्रतीक चिन्ह.सिंह. 
मति : राजत्व : 
शक्ति. 
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आत्म दीपो भवः 
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विक्रम संवत : २०८३. शक संवत :१९४८.
दिनांक : २५ .०९.२६ . 
भाद्र : शुक्ल पक्ष : चतुर्दशी.    
दिन.शुक्रवार. 
 दिवस. मूलांक :७ .
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a rising Sun GIF.
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जागो उठ कर देखो 
जीवन जोत उजागर है. 
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राधिकाकृष्णरुक्मिणी.दर्शन. 
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सम्पादकीय त्रिशक्ति : पृष्ठ : ०. 
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 लेखकीय प्रधान. 
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©️®️M.S.Media.WCP 26
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शक्ति.शालिनी मधुप रेनू. 
नैनीताल.डेस्क. 
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  त्रिशक्ति.
दिग्दर्शिका सम्पादकीय


शक्ति.डॉ. रजनी तनु अनु . 
द्वारिका.डेस्क. 
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 संशोधक 
      सम्पादकीय त्रिशक्ति : पृष्ठ : ०. 
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©️®️M.S.Media. WCP . Nilam. Dr.R.K. Reeta. 21 / 99 / 21 / 26
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शक्ति.नीलम.डॉ.आर के.रीता. 
   वाराणसी डेस्क.
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राधिकाकृष्ण: प्रेम प्रकृति. दर्शन : नैनीताल डेस्क : पृष्ठ : ० / १.
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प्यार : व्यवहार : संस्कार 
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संपादन
शक्ति.डॉ.अनु मधुप रितु. 
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देख मुझे सब है पता 
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विचार संदर्भ माया
शक्ति : रितु सिंह : छाया.
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तुम्हारे लिए

अहंकार, अधिकार और मैं कहाँ प्रेम में ? तेरी मेरी कहानी में
तो कर्तव्य,त्याग, समर्पण और तुम ही ज़्यादा अहम हो.
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आपकी आस्था ,कृपा से बड़ा कोई भाव नहीं, माधव !
जो अपने जीवन में हर असंभव को भी सम्भव कर दे 
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रुक्मिणीकृष्ण. प्रेम प्रकृति. दर्शन : आज : नैनीताल डेस्क : पृष्ठ : ० / २.
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रुक्मिणीकृष्ण.मुक्तेश्वर.
नैनीताल डेस्क
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संपादन.
शक्ति.शालिनी मधुप मीना.
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विचार संदर्भ माया.
शक्ति.प्रियंका चौहान : छाया.
*
जब दीप जले आना.

ज़रा सुनिए .....सृजन में समय लगता है विसर्जन में नहीं
फिर चाहे कोई उत्सव हो या हमारा रिश्ता ज़रा देखिए ना ?

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नैनों में दर्पण है दर्पण में कोई

शिकायतें, नाराज़गी, उपक्षायें व अपेक्षाएं किसी रिश्तें नाते का अंत नहीं 
प्रत्युत जीवन में मधुरिमा व प्रेम के सजीव रहने के सार्थक प्रमाण है 
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विचार  @ शक्ति.शालिनी प्रियंका अमित चौहान. 

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प्रथम मीडिया शक्ति प्रस्तुति.
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मीराकृष्ण : प्रेम प्रकृति. दर्शन : नैनीताल डेस्क : पृष्ठ ० / ३
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मीरा डेस्क.
मुक्तेश्वर डेस्क.नैनीताल .
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संपादन.
शक्ति.डॉ.राखी मधुप कंचन.
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विचार संदर्भ माया.
शक्ति.अनु : नैनीताल : छाया.
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मौन रहना ही बेहतर है यदि हम सार्वजानिक तौर बोलना नहीं जानते
यदि बोलना जानते है तो ऐसे शब्द बोलिए जो मौन से भी ज्यादा क़ीमती हो
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शक्ति. सोनालिका आर्य डॉ दीना नाथ वर्मा : दृष्टि क्लिनिक : किसान बाग : बिहारशरीफ़ समर्थित 
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राधिकाकृष्ण : जीवन दर्शन : दृश्यम : शब्द चित्र : पृष्ठ : १ / १.
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वृन्दावन.डेस्क.
संपादन  
शक्ति.रेनू मधुप शबनम.  
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आपकी इनायतें आपके करम
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विचार :सन्दर्भ : माया
शक्ति.शबनम : इंद्रप्रस्थ : छाया.
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आपकी इनायतें आपके करम

रह जायेंगी आपकी अच्छाइयां और आपके करम
आपको हम बताए कैसे भूलेंगे हम ?
*
राधा मोहन शरणम 

 राधा मोहन ! .... तुम्हारी आँखों में कोई न कोई सम्मोहन तो ज़रूर है, 
तभी तो कोई तुम्हें देख ले या तुम जिसे देख लो वो बहकता तो ज़रूर है
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विचार @ शक्ति.रेनू मधुप शबनम.  
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रुक्मिणीकृष्ण : जीवनदर्शन : दृश्यम : शब्द चित्र : पृष्ठ : १ / २.
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साथ : शक्ति : सत्कर्म 
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संपादन
विदर्भ डेस्क : महाराष्ट्र.
शक्ति.डॉ.सुनीता मधुप रेनू.
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धर्मो रक्षति रक्षितः
*
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विचार संदर्भ माया
शक्ति रुक्मिणी : कृष्ण : छाया
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जैसा करम करेगा वैसा फल देगा भगवान
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व्यक्ति का समय कर्म और परिणाम परस्पर एक दूसरे से जुड़े हुए हैं
व्यक्ति के स्वयं किए गए कर्मों का परिणाम भी समय अनुसार उसे ही देखना पड़ता हैं
*
जब अपने ही अधर्म के मार्ग के लिए प्रेरित व गतिमान दिखें
तो स्वजनों का काल,परिस्थिति,और भविष्य के परिणाम को देखते हुए
उस व्यक्ति विशेष को निरंतर सलाह, असहयोग, निषेध तत्पश्चात परित्याग कर देना
अत्यंत आवश्यक हो जाता है....
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मीराकृष्ण : जीवन दर्शन : शब्द चित्र : दृश्यम : मेवाड़ : डेस्क : पृष्ठ : १ / ३.
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मीरा डेस्क.
मेवाड़ डेस्क.जयपुर.
प्रादुर्भाव वर्ष : १९८२.
संस्थापना वर्ष : १९८९. महीना : सितम्बर.दिवस : ९.
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संपादन.
शक्ति.जया अनीता सेजल
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साची कहूं तुमसे.
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सत्यम शिवम् सुंदरम 
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एक पक्षीय नहीं बहुपक्षीय खुशियों की भावना कहीं ज्यादा महत्वपूर्ण होती हैं।
ऐसी खुशियों का सम्बन्ध न केवल भावनाओं से है बल्कि
खुशियों की ऐसी अवधारणा और सोच हमें सदैव सकारात्मक और रचनात्मक बनाए रखने में सहायक होती हैं, ज़रा विचार कीजिए

शोध विचार @ शक्ति डॉ.सुनीता आरती अनीता
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जिंदगी और कुछ भी नहीं

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विचार :सन्दर्भ : माया
शक्ति.वान्या : इंद्रप्रस्थ :छाया.
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जिंदगी और कुछ भी नहीं 
बस आपके ही समझ, संयम ,सत्कर्म ,सदव्यवहार और शब्दों से 
लिखी आपकी , तेरी मेरी ही कहानी है कि आप और हम इसे कैसे किस तरह लिखते हैं ?
*
शोध विचार @ शक्ति.श्रद्धा मधुप भारती. 


शक्ति
तनु. आर्य रजत.निदेशक. स्वर्णिका ज्वेलर्स. सोहसराय. बिहार शरीफ समर्थित. 
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सम्पादकीय शक्ति पृष्ठ : २.
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त्रिशक्ति 
प्रधान सम्पादिका.
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शक्ति.
डॉ.राखी सीमा प्रीति.
पुणे डेस्क.महाराष्ट्र. 
*
त्रिशक्ति 
कार्यकारी सम्पादिका. 

 ©️®️M.S.Media.WCP. 95/13/24/ 26
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मुक्तेश्वर.नैनीताल डेस्क. 
शक्ति.डॉ.सुनीता रंजिता मीना. 
*
फोटो रील कला 
त्रिशक्ति संपादिका.
*

शक्ति. 
प्रियंका चौहान. देहरादून. 
शक्ति. मंजु. किन्नौर. हिमाचल. 
शक्ति. लक्षिका जोशी. नैनीताल.   
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त्रिशक्ति सम्पादकीय शक्ति दर्शन : दृश्यम : पृष्ठ : २.
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श्याम तेरे कई  नाम : तेरी वंशी को बजने से काम 
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श्याम : मुरली बजाते हुए : गीफ़ 
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इंडोनेशिया फ़्रांस इंग्लैंड अमेरिका  : श्री कृष्ण
उत्तर प्रदेश में भगवान श्रीकृष्ण को : गोपाल गोविंद 
राजस्थान में : श्रीनाथजी या ठाकुर जी 
महाराष्ट्र में भगवान श्रीकृष्ण : विट्ठल 
ओडिशा में उन्हें : जगन्नाथ भगवान 
बंगाल में श्रीकृष्ण : गोपालजी 
दक्षिण भारत में कृष्ण : वेंकटेश या गोविंदा 
वहीं गुजरात राज्य में उन्हें : द्वारकाधीश 
असम, त्रिपुरा, नेपाल जैसे पूर्वोत्तर क्षेत्रों में उनकी पूजा : कृष्ण नाम से ही की जाती है. 
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 शक्ति.शालिनी मधुप रेनू प्रस्तुति.
  सह हम समस्त देव शक्ति परिवार.
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ए एंड एम मीडिया समर्थित 
*
त्रिशक्ति विचार धारा 

प्रेम की भव्यता व सुंदरता इसके निःशर्त उदगम होने,
अन्य से प्राप्त गहरे सम्मान व्यवहार तथा कृत्यज्ञता में ही है 
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त्रिशक्ति विचार धारा 
साथ, संयम, शब्द
*
समंय आसन्न है ... सदैव जीवन की विषम परिस्थितियों में ही 
तुम्हारी सहन व समझ शक्ति के साथ तुम्हारे साथ, संयम, शब्द 
की परीक्षा होती है , स्मृत रहे ,प्रिय  

शक्ति डॉ. सुनीता मधुप तनु सर्वाधिकारी 
*
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शक्ति.
डॉ. रश्मि  आर्य डॉ. अमरदीप
नारायण.हड्डी रोग विशेषज्ञ : बिहार शरीफ़ समर्थित. 
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सम्पादकीय : त्रिशक्ति : गोरी साँवरे सलोनी : गद्य संग्रह : आलेख : पृष्ठ : २ / २. 
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समय : शब्द : शक्ति. 
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संपादन 
शक्ति.नीलम प्रीति रीता. 
पुणे डेस्क. 
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शक्ति आलेख :१ : पार्वती : शिव : गणपति. 
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शक्ति. शालिनी डॉ. सुनीता मधुप अनुभूति  

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काशी, शिव,पार्वती , कैलाश और उनके गिरजानंदन 
गणपति. विघ्नहर्ता महाकाय मंगलकारी हैं.

भारतवर्ष विविधताओं का देश है।  लोग  भाषा भाषी ,प्रांत अनेक है। संस्कृति भिन्न हैं।  फिर भी हमारी अनेकता में भी एकता है। फिर भी हम सभी एक सूत्र में बंधे  हैं । हमारे घर में भी गणपति बिराजे हुए हैं। 
विसर्जन की परंपरा के लिए गणपति का स्थान परिवर्तन कर देतें हैं। 
भाद्र मास शुक्ल पक्ष तृतीया तीज का शुभ दिन : भाद्र मास शुक्ल पक्ष तृतीया का शुभ दिन जब शक्तियां शिव की आकांक्षा में निर्जला तीज व्रत करती है। तब उनकी एक मात्र अभिलाषा होती है कि कई जन्मों तक उनके स्वामी भोले शिव शंकर जैसे ही मिले और वो एक पत्नी निष्ठ हो। शायद शिव की महिमा ही ऐसी है। 
शिव ही शक्ति है। शिव ही भक्ति है। अंत भी शिव आदि भी शिव। सत्य ही  शिव है शिव ही सुन्दर है। हम  सत्यम शिवम सुंदरम की खोज में हम कई बार काशी गए । शिव की नगरी। सुनते हैं काशी में शिव विराजते हैं। सत्य की तलाश की। शिव को ढूँढा। उसी में जीवन के सुन्दर सार मिल गए। रहना नहीं देश वीराना है। 
काशी, शिव  पार्वती : और अस्सी : काशी की अस्सी,हरिश्चंद्र , दशाश्वमेघ व मणिकर्णिका घाट पर घूमते हुए शक्ति पार्वती की कई कहानियां भी सुनी। भली भाँति जानते हैं सती पार्वती ने शिव को पाने के लिए घोर तपस्या की थी। यह हम भी जानते हैं उन्होंने तीज व्रत भी किया।  निर्जला रही थी। भला क्यों ? 
कई ऐसा तो नहीं कि शिव अत्यंत सरल, सीधे साधे, भोले भाले, कल्याणकारी रहे इसलिए पार्वती को भा गए। कहते हैं प्रेम हो तो सिर्फ शिव पार्वती के जैसा। मिले तो कई जन्मों के लिए नहीं तो बैरागी हो गए।


शिव पार्वती काशी और शक्ति : अस्सी वाराणसी : फोटो कोलाज : शक्ति. स्वाति मधुप अनुभूति 

भाद्र शुक्ल पक्ष गणेश चतुर्थी गिरजानंदन  का शुभ आगमन   : तिथि का संयोग देखिए ठीक इसके एक दिन बाद ही भाद्र शुक्ल पक्ष गणेश चतुर्थी का दिन आता है। इस दिन ही विघ्नहर्ता, वक्रतुंड, महाकाय, गणेश जी का  शुभ आगमन होता है। गणेश का स्थान सर्वोच्च है क्योंकि उन्हें अपने माता पार्वती पिता शिव का आर्शीवाद प्राप्त था। 
सनातनी परंपरा के अनुसार हम अपने प्रत्येक शुभ कार्य करने के पहले गजानन को स्मृत करते हैं और बार-बार दोहराते हैं, श्री गणेशाय नमः। 
गणेश उत्सव इतिहास के झरोखें से  : ज्ञात हो ब्रिटिश कालीन भारत में १९०४ - १९०५ के बंग भंग आंदोलन के विरुद्ध  महाराष्ट्र  केसरी बाल  गंगाधर तिलक, बंगाल के विपिन चंद्र पाल और पंजाब केसरी लाला लाजपत राय  ने महाराष्ट्र, बंगाल, पंजाब में गणेश उत्सव मनाने की परंपरा समस्त भारत में  शुरू की थी और एकीकृत होने की प्रेरणा समस्त भारतीय को दी थी। गणेश उत्सव आज समस्त भारतीय  को सामाजिक व सांस्कृतिक रूप से जोड़ने में  सक्षम होती दिख रही  है। बल्कि यूँ कहें आज गणेश उत्सव की यह परंपरा विश्व व्यापी हो गई है। 

गणपति बप्पा मोरिया. मेरे घर में पधारो गजानन जी : कोलाज : शक्ति.रितु सेजल विदिशा शैली  

महाराष्ट्र में गणेश उत्सव की परम्पराएं : महाराष्ट्र में सार्वजानिक गणेशोत्सव आम तौर पर १० दिनों तक़ चलता है और ग्यारहवें  दिन अनंत चतुर्दशी के दिन मूर्ति विसर्जन के साथ समाप्त होता है। अगले वर्ष तू जल्दी आ इस कामना के साथ हम सब प्रतीक्षा रत होते हैं। 
सामान्य तौर पर गणेश उत्सव पूरे भारत वर्ष में १० दिनों तक ही मनाया जाता है, जो गणेश चतुर्थी से शुरू होकर अनंत चतुर्दशी के दिन समाप्त होता है। हालांकि, लोग अपनी पारिवारिक परंपरा और श्रद्धा के अनुसार गणपति बप्पा को घर में अलग-अलग अवधियों के लिए स्थापित करते हैं।
स्थान परिवर्तन ही हमारे गणपति का प्राकृतिक, सांकेतिक विसर्जन :  हम पर्यावरण  को संरक्षित करते हैं।आप बप्पा को अपनी सुविधानुसार निम्नलिखित दिनों के लिए रख सकते हैं यथा डेढ़ दिन ,बहुत से लोग चतुर्थी के दिन स्थापना कर के अगले दिन विसर्जन कर देते हैं।
३  दिन, ५ दिन या ७  दिन  शास्त्रों में इन विषम  दिनों में भी विसर्जन करने का विधान है।
१०  या ११  दिन : सार्वजनिक पंडालों और कई घरों में बप्पा पूरे १०  दिनों तक रहते हैं और आखिरी दिन अनंत चतुर्दशी को  उनका विसर्जन किया जाता है। गणेश जी सभी के लिए कष्टहर्ता बने यह हमारी हार्दिक आकांक्षा है। सब के कार्य मंगल मय हो। हम गणपति बप्पा मोरया की ह्रदय से वंदना करते हैं।
*
आपके समक्ष है : महाशक्ति मीडिया की भक्ति की शक्ति प्रस्तुति 
काशी, शिव : पार्वती  तीज और गणपति 
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संपादन :  डॉ रजनी रेनू प्रीति रंजिता 
सज्जा : शक्ति सीमा मंजिता स्वाति अनुभूति 



हिंदी दिवस : १४ सितम्बर 
लघु कथा : हिंदी है हम
 शक्ति.रेनू शब्द मुखर  

कॉलेज  के प्रांगण में चहल-पहल थी। दोस्तों के बीच बहस छिड़ी आजकल तो अंग्रेजी ही सब कुछ है, हिंदी में बात करोगे तो लोग हंसेंगे, अजय ने ठहाका लगाया।
रवि भी मुस्कुराया, ' सही कह रहे हो, हिंदी में तो कोई फ्यूचर नहीं। '
उसी शाम रवि अपने गांव पहुंचा। उसकी दादी गंभीर रूप से अस्वस्थ थीं। डॉक्टर ने दवा की पर्ची दी, पूरा विवरण अंग्रेजी में। दादी ने कांपते हाथों से पर्ची रवि को थमाते हुए पूछा, 'बेटा, ये दवा कब लेनी है ? '
रवि चुप रह गया। उसे पर्ची समझने में दिक्कत हो रही थी। अंग्रेजी जानने का गर्व उस क्षण बेमानी हो गया।
दादी ने धीमे स्वर में कहा, ' बेटा, अंग्रेजी जरूरी है, पर अपनी भाषा से रिश्ता मत तोड़ना। पेड़ अगर जड़ों से कट जाए तो कितना भी हरा भरा क्यों न हो, सूखने में देर नहीं लगती। '
रवि की आंखों में आत्मग्लानि उतर आई। उसी रात उसने सोशल मीडिया पर लिखा, ' हिंदी दिवस पर संकल्प लें कि हम अपनी भाषा का मान बढ़ाएंगे। यह सिर्फ भाषा नहीं, हमारी पहचान है। '
अगले दिन कॉलेज में रवि मंच पर हिंदी कविता पढ़ रहा था, ' हिंदी छोड़ोगे, तो खुद को छोड़ दोगे।'
तालियों की गूंज ने उसे एहसास दिलाया भाषा का कर्ज आज से चुकाना शुरू हुआ है।
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संपादन सज्जा : 
शक्ति. शालिनी रंजिता अनुभूति 





शिव शक्ति की दिव्य प्रेम कहानी : हरतालिका तीज: लोक पर्व 
भारतीय सभ्यता संस्कृति की अद्भुत कहानी : एक महिला -केंद्रित उत्सव 
शक्ति आलेख ' हरतालिका ' शब्द का अर्थ है ' सखियों द्वारा हरण '
शक्ति. प्रिया डॉ.सुनीता सीमा 
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सजना है मुझे ....ज़रा मेहंदी के रंग उतार लूँ : फोटो कोलाज :
शक्ति. मीना रितु अनुभूति 

तीज : शिव शक्ति की  प्रेम कहानी : हरतालिका तीज : जब कभी भी तीज आता है तो अम्मा याद आ जाती है। बड़ी विधि विधान से तीज व्रत करवाती थी। आज भी हम सभी इस लोक पर्व  की संस्कृति को संरक्षित करने का प्रयास कर रही है। 
मेरी माने तो लोक पर्व  भारतीय सभ्यता संस्कृति की अद्भुत कहानी है तीज. भगवान शिव और पार्वती की कहानी सती के रूप में शिव की पत्नी के दोबारा जन्म से शुरू होती है, जो शिव को पति रूप में पाने के लिए कठोर तपस्या करती हैं, शिव उनकी परीक्षा लेते हैं,और अंत में वे उन्हें वर के रूप में प्राप्त कर शिव की अर्धांगिनी बनती हैं.शिव के प्रति शक्ति का प्रेम अतुलनीय है।
१. हरियाली तीज : यह श्रावण : सावन मास के शुक्ल पक्ष की तृतीया तिथि को मनाई जाती है। सावन के महीने में चारों तरफ हरियाली होने के कारण इसे हरियाली तीज कहा जाता है। इस दिन महिलाएं हरे रंग के कपड़े, चूड़ियां पहनती हैं और हाथों में मेहंदी लगाती हैं। मान्यता है कि इसी दिन माता पार्वती ने अपनी १०८ वें जन्म की कठोर तपस्या के बाद भगवान शिव को पति रूप में प्राप्त किया था।
२. कजरी तीज : यह भाद्रपद : भादों मास के कृष्ण पक्ष की तृतीया तिथि को मनाई जाती है। इसे बूढ़ी तीज या सातुड़ी तीज भी कहा जाता है।इस  दिन महिलाएं जौ, गेहूं, और चने के सत्तू के विभिन्न पकवान बनाती हैं। इस व्रत में शाम के समय नीमड़ी माता की पूजा करने और चंद्रमा को अर्घ्य देने की विशेष परंपरा है।
३. हरतालिका तीज :  यह भाद्रपद मास के शुक्ल पक्ष की तृतीया तिथि को मनाई जाती है। यह तीनों तीज में सबसे कठिन माना जाता है क्योंकि यह व्रत निर्जला और निराहार बिना अन्न-जल के रखा जाता है। इस दिन महिलाएं बालू मिट्टी से भगवान शिव, माता पार्वती और गणेश जी की प्रतिमा बनाकर रात्रि भर चारों पहर की विशेष पूजा और जागरण करती हैं। ' हरतालिका ' शब्द का अर्थ है ' सखियों द्वारा हरण ', क्योंकि माता पार्वती की सखियां उन्हें उनके पिता की इच्छा के विरुद्ध घने जंगल में ले गई थीं ताकि वे शिव जी को प्राप्त करने के लिए तपस्या कर सकें। 

गतांक से आगे : १ 
लोक पर्व उत्सव की मुख्य गतिविधियाँ. 
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तीज की अत्यंत मनभावन परम्पराएं : मेहंदी लगाना : फोटो कोलाज  : शक्ति डॉ सुनीता प्रेरणा सीमा 

उपवास और पूजा : महिलाएं पति की लंबी उम्र के लिए व्रत रखती हैं और शिव -पार्वती की पूजा करती हैं. पति पत्नी के मध्य अमर प्रेम की चर्चा होती है तो हरतालिका तीज: भाद्रपद माह के शुक्ल पक्ष की तृतीया को मनाई जाने वाली हरतालिका तीज की चर्चा होती है। 
झूला झूलना: यह तीज का एक प्रमुख आकर्षण है, जिसमें महिलाएं पेड़ों से बंधी डालियों पर झूला झूलती हैं. सावन के झूले खूब चर्चें में होते हैं। गांवों में इसका प्रचलन अब भी है। 
सजावट : महिलाएं नए और रंगीन वस्त्र पहनती हैं, हाथों में मेहंदी लगाती हैं और अन्य पारंपरिक श्रृंगार करती हैं. अलता पैरों में लगाती हैं। खूब सजती सवरती है। तीज के दौरान महिलाएं अपनी बेहतरीन एक्सेसरीज और पोशाक पहनती हैं। वे अक्सर अपने हाथों पर मेहंदी या मेहंदी की सजावट भी करवाती हैं। वे कई गीत गाते हैं जो त्योहार से जुड़े होते हैं। वे झूलों पर झूलते हैं जो पेड़ की बड़ी शाखाओं से बंधे होते हैं। वे उपवास और भव्य, भव्य दावतों के संयोजन का भी अनुभव करते हैं। नृत्य एक और विशिष्ट तीज गतिविधि है। 
संगीत और नृत्य: इस अवसर पर लोकगीत गाए जाते हैं और नृत्य प्रस्तुतियां दी जाती हैं. पूजा संपन्न होने के बाद बिहार झारखण्ड में महिलाओं को लोक गीत गाते हुए देखा जा सकता हैं जिसमें शक्ति की शिव को पाने के लिए कठिन तपस्या की बात होती हैं। 
त्योहार के व्यंजन : पारंपरिक घेवर मिठाई तीज से जुड़ी हुई है. गुजिया ठेकुए आदि बनते हैं। 
जुलूस : राजस्थान जैसे राज्यों में, जयपुर में तीज का भव्य जुलूस निकाला जाता है. 
महत्व : जीवन में वैवाहिक सुख का : यह पर्व भगवान शिव और माता पार्वती के पुनर्मिलन की याद में मनाया जाता है, जो अटूट प्रेम और समर्पण का प्रतीक है. यह त्योहार सुहागन महिलाओं के लिए बहुत महत्व रखता है, जो पति की दीर्घायु और वैवाहिक सुख की कामना करती हैं. 
तीज पत्नी पार्वती और पति शिव के बीच संबंधों का प्रतिनिधित्व करती है। यह त्योहार पार्वती के अपने पति के प्रति अटूट समर्पण की याद दिलाता है। जब भारतीय महिलाएं तीज के दौरान अपने आशीर्वाद की तलाश करती हैं, तो वे एक मजबूत विवाह – और गुणवत्तापूर्ण पति प्राप्त करने के साधन के रूप में ऐसा करती हैं। तीज न केवल एक मजबूत शादी के इर्द-गिर्द केंद्रित है, बल्कि यह बच्चों की खुशी और स्वास्थ्य पर भी ध्यान केंद्रित करती है।
प्रकृति का उत्सव : यह मानसून के आगमन और चारों ओर फैली हरियाली का भी उत्सव है. हम हरीतिमा को बचा सकें,यह सन्देश भी हम देना चाहते हैं। 
तीज नाम को एक छोटे लाल कीट का संदर्भ माना जाता है जो मानसून के मौसम में जमीन से निकलता है। हिंदू मिथकों का मानना ​​​​है कि जब ऐसा हुआ, तो पार्वती ने शिव के निवास का दौरा किया। इसने पुरुष और महिला के रूप में उनके संबंध को सील कर दिया।
तीज न केवल शादी और पारिवारिक संबंधों पर ध्यान केंद्रित करती है, बल्कि यह मानसून पर भी ध्यान केंद्रित करती है। मानसून लोगों को गर्मी के महीनों की भीषण गर्मी से आराम देता है।
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संपादन : शक्ति : शालिनी प्रीति रंजिता 
सज्जा : शक्ति अनुभूति स्वाति मंजिता 


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शक्ति रेनू शब्दमुखर.
लेखिका.कवयित्री.प्रधान सम्पादिका.जयपुर.
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शक्ति. आलेख : २ / २ / १.  
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कृष्ण केवल जन्मे नहीं थे, वे आज भी आवश्यक हैं.
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अर्जुन :  कृष्ण : कुरुक्षेत्र : गीता ज्ञान : GIF. 

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सह शक्ति.शालिनी मधुप. 
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कर्म करें। वास्तविक कर्म ही पूजा है। कर्म कांड नहीं। सनातनी होते हुए थोड़ा कबीर भी बन जाये न।कल्पना कीजिए यदि सभी लोग कर्मकांड में ही व्यस्त रहें, और दिनचर्या दिन भर के पूजा के क्रियाकलापों में ही चलता  रहा तो आम जीवन कैसेचलेगा ? दिनचर्या कैसे चलेगी ? दैनिक क्रियाकलाप कैसे चलेंगे ? 
इसलिए अपनी सदवाणी रखें और हिस्सें का सुनिश्चित सतकर्म करते रहिए। फल अनुरूप ही मिलेगा। 
हर वर्ष जन्माष्टमी आती है। मंदिर सजते हैं, झाँकियाँ निकलती हैं, माखन-मिश्री का भोग लगता है और आधी रात को शंखनाद के साथ घोषणा होती है- " नंद के आनंद भयो..."। 
लेकिन एक प्रश्न हर बार अनुत्तरित रह जाता है- क्या हमने कृष्ण को केवल जन्मोत्सव तक सीमित कर दिया है ? कृष्ण का जन्म किसी राजमहल में नहीं, कारागार में हुआ था। यह केवल एक पौराणिक प्रसंग नहीं, बल्कि एक शाश्वत संकेत है कि जब-जब समाज भय, अन्याय, असमानता और सत्ता के अहंकार की बेड़ियों में जकड़ता है, तब परिवर्तन का जन्म होता है। 
कृष्ण पहले व्यक्ति नहीं, पहले विचार बनकर आते हैं। आज कारागारों की दीवारें ईंट-पत्थर की नहीं हैं। वे मनुष्य के भीतर खड़ी हैं। कोई लोभ का बंदी है, कोई क्रोध का, कोई दिखावे का, कोई डिजिटल भीड़ में अपनी पहचान खो देने का। हमने सुविधाएँ तो अर्जित कर लीं, पर भीतर की स्वतंत्रता खो दी। 
कृष्ण की सबसे बड़ी शिक्षा है- स्वयं को पहचानो : ऐसे समय में कृष्ण की सबसे बड़ी शिक्षा है- स्वयं को पहचानो। कृष्ण ने जीवन को कभी एक रंग में नहीं जिया। वे ग्वालबालों के मित्र भी हैं, राधा के प्रिय भी, अर्जुन के सारथी भी, कूटनीतिज्ञ भी और धर्मरक्षक भी। 
वे बताते हैं कि जीवन एक ही भूमिका में ठहरने का नाम नहीं, बल्कि हर परिस्थिति में सत्य और संतुलन के साथ खड़े रहने का साहस है। आज का समाज संवाद से अधिक शोर में विश्वास करने लगा है। हर व्यक्ति बोल रहा है, पर सुनने वाला कोई नहीं। 
सबसे बड़ा महाभारत अपने अंतर्मन में ही : कृष्ण ने गीता युद्धभूमि में सुनाई थी, क्योंकि सबसे बड़ा युद्ध बाहर नहीं, भीतर होता है। अर्जुन का संशय आज भी हमारे भीतर जीवित है- निर्णय का भय, असफलता की आशंका और सुविधा के सामने सत्य का मौन।
आज जब समाज छोटी-छोटी पहचानों में बँटता जा रहा है, तब कृष्ण हमें जोड़ने का संदेश देते हैं, तोड़ने का नहीं। जन्माष्टमी केवल व्रत रखने का पर्व नहीं है; यह अपने भीतर जन्मे कंस को पहचानने का दिन भी है। ईर्ष्या, अहंकार, छल, असहिष्णुता और संवेदनहीनता- यही वे कंस हैं जिन्हें हर युग में समाप्त करना होगा। यदि आधी रात को मंदिर की घंटियाँ बजें और हमारे भीतर का अंधकार वैसा ही बना रहे, तो उत्सव केवल परंपरा रह जाएगा, परिवर्तन नहीं। 
कृष्ण माखन खाते हुए : GIF 
कृष्ण आज भी कहते हैं- कर्म करो, क्योंकि निष्क्रियता सबसे बड़ा अन्याय :
 कृष्ण आज भी कहते हैं- कर्म करो, क्योंकि निष्क्रियता सबसे बड़ा अन्याय है। यदि हम सचमुच कृष्ण को मानते हैं, तो हमें यह भी स्वीकार करना होगा कि वे रूढ़ियों के पक्षधर नहीं थे। उन्होंने प्रश्न किए, व्यवस्था को आईना दिखाया, मित्रता को जाति से ऊपर रखा, स्त्री के सम्मान की रक्षा की और सत्ता को धर्म से बड़ा नहीं माना। 
कृष्ण : गीता ज्ञान के दीपक अपने भीतर जलाएं मंदिरों में नहीं : कृष्ण का जन्म हर वर्ष कैलेंडर में नहीं होता ; उनका जन्म तब होता है जब कोई अन्याय के सामने निर्भय होकर खड़ा होता है, जब कोई स्वार्थ से ऊपर उठकर लोकमंगल चुनता है, जब कोई टूटते हुए मन को आशा देता है, जब कोई सत्य का साथ देने का साहस करता है। 
इस जन्माष्टमी यदि हम सचमुच दीप जलाना चाहते हैं, तो मंदिरों के साथ अपने अंतर्मन में भी एक दीप जलाएँ। क्योंकि कृष्ण को सबसे अधिक आवश्यकता हमारे घरों में नहीं, हमारे चरित्र में है। शायद तब आधी रात का वह जन्मोत्सव केवल एक धार्मिक अनुष्ठान नहीं रहेगा, बल्कि मनुष्य के भीतर मानवता के पुनर्जन्म का उत्सव बन जाएगा। 
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संपादन : शक्ति. डॉ.रजनी प्रीति रंजिता. 
सज्जा : शक्ति.डॉ सुनीता सीमा अनुभूति.  

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शक्ति. आलेख : २ / २ / २ 
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शिक्षक दिवस पर विशेष.

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शक्ति.रेनू शब्दमुखर.
लेखिका.कवयित्री.प्रधान सम्पादिका.जयपुर.
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सह : शक्ति. शालिनी मधुप. 
जिस समाज ने गुरु खोया, उसने अपना भविष्य खो दिया
सभ्यताएँ युद्धों से कम, अपने गुरुओं के अवमूल्यन से अधिक हारती हैं.
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दीप बुझे तो अँधेरा केवल घर में उतरता है, 
गुरु बुझ जाए तो अंधेरा पीढ़ियों में उतरता है।
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गुरु का सम्मान वास्तव में या सिर्फ़ अभिनय : शिक्षक दिवस आते ही समाज गुरु को स्मरण करता है। मंच सजते हैं, मालाएँ पहनाई जाती हैं, प्रशस्तियाँ पढ़ी जाती हैं और सोशल मीडिया पर सम्मान के शब्दों की बाढ़ आ जाती है। किंतु एक प्रश्न है जो इन औपचारिकताओं के बीच अनुत्तरित रह जाता है- क्या हम सचमुच गुरु का सम्मान करते हैं, या केवल उसके सम्मान का अभिनय करते हैं ?
फोटो कोलाज : राम : कृष्ण : अर्जुन 
किसी भी राष्ट्र का भविष्य संसदों में नहीं, सबसे पहले कक्षाओं में लिखा जाता है। संविधान नागरिकों को अधिकार देता है, पर गुरु उन्हें उन अधिकारों का विवेकपूर्ण उपयोग करना सिखाता है। यदि शिक्षक केवल पाठ्यक्रम पढ़ाने तक सीमित हो जाए और समाज उसे केवल परिणाम देने वाली मशीन समझने लगे, तो यह शिक्षा का नहीं, सभ्यता का संकट है।
अक्षर तो पुस्तकें भी सिखा देती हैं, मनुष्य होना कंवल गुरु सिखाता है।
मोबाइल गुरु बनता जा रहा है और गुरु विकल्प : आज शिक्षा व्यवस्था अनेक दबावों से घिरी है। शिक्षक से अपेक्षा है कि वह उत्कृष्ट परिणाम भी दे, बचों के संस्कार भी सँवारे, तकनीक भी सीखे, प्रशासनिक दायित्व भी निभाए, अभिभावकों की अपेक्षाओं पर भी खरा उत्तरे और हर परिस्थिति में मुस्कुराता भी रहे। किंतु क्या हमने कभी यह सोचा कि जो व्यक्ति पूरी पीढ़ी का मन गढ़ रहा है. उसके अपने मन का सहारा कौन है ? 
हमारे समय की सबसे बड़ी विडंबना यह नहीं कि बचों के हाथ में मोबाइल आ गया है, विडंबना यह है कि धीरे धीरे मोबाइल गुरु बनता जा रहा है और गुरु विकल्प। जानकारी का विस्फोट हुआ है, लेकिन विवेक का विस्तार नहीं। 
इंटरनेट उत्तर दे सकता है, पर उत्तरदायित्व नहीं सिखा सकता। कृत्रिम बुद्धिमत्ता तथ्य  दे सकती है पर चरित्र नहीं गढ़ सकती। 

ज्ञान की नदियाँ बहती रहें तो भी प्यास बाकी रहती है.
जब तक गुरु का स्पर्श न मिले, शिक्षा अधूरी रहती है।

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गतांक से आगे. १  
आदर्श, सम्यक गुरुओं की गरिमा ही समाज असली , समृद्धि :


शिक्षक समाज में भी कमियाँ : यह भी स्वीकार करना होगा कि शिक्षक समाज से अलग कोई नहीं है। उसमें भी कमियाँ हो सकती हैं। किंतु किसी व्यवस्था की त्रुटियों को आधार बनाकर पूरी गुरु-परंपरा को कटघरे में खड़ा कर आत्मघाती दृष्टि है। 
यदि खेत में कुछ पौधे सूख जाएँ, तो किसान खेतीछोड़  नहीं देता।  वह मिट्टी को बेहतर बनाता है। आज आवश्यकता भी यही गुरु को कठघरे में खड़ा करने से पहले शिक्षा की मिट्टी को समझने  की है।
हम अपने बच्चों  से कहते हैं अपने शिक्षकों का सम्मान करो। लेकिन वही बच्चा जब घर में शिक्षक के बारे में उपहास, अविश्वास अपमान सुनता है, तो उसके भीतर सम्मान का बीज अंकुरित कैसे होगा ? मूल्य केवल पढ़ाए नहीं जाते, जीए भी जाते हैं।
सफलता के पीछे किसी न किसी  गुरु का हाथ : आज समाज सफलता का उत्सव मनाता है, पर सफलता के पीछे किसी  गुरु को भूल जाता है। डॉक्टर की सफलता पर तालियाँ बजती है, वैज्ञानिकों  के आविष्कार पर गर्व होता है। न्यायाधीश के निर्णय की चर्चा होती लेकिन उन सबके जीवन में कभी कभी एक ऐसा शिक्षक अवश्य होता है जिसने उनकी दृष्टि को आकार दिया। विडंबना यह है कि हम फलों  को पहचानते हैं, जड़ों को नहीं।
गुरु का सम्मान किसी एक दिन का आयोजन मात्र नहीं :  गुरु का सम्मान किसी एक दिन का आयोजन नहीं, बल्कि समाज की सामूहिक चेतना का स्थायी संस्कार होना चाहिए। शिक्षक दिवस पर पुष्प अर्पित करने से अधिक महत्त्वपूर्ण है कि वर्ष के शेष ३६४ दिनों में भी शिक्षक को गरिमा, विश्वास और सहयोग मिले। 
क्योंकि सम्मान का सबसे प्रामाणिक रूप शब्द नहीं. व्यवहार होता है। फूल एक दिन महकते हैं, सम्मान जीवन भर, गुरु को उपहार नहीं, विश्वास चाहिए निरंतर। यह समय शिक्षा पर पुनर्विचार का ही  नहीं, गुरु के स्थान पर पुनर्विचार का भी है। यदि शिक्षक का आत्मविश्वास टूटेगा, तो विद्यार्थियों का भविष्य भी बिखरेगा।आदर्श , सम्यक गुरुओं की गरिमा ही समाज असली , समृद्धि : यदि गुरु का सामाजिक सम्मान क्षीण होगा, तो अगली पीढ़ी के आदर्श भी धुँधले पड़ेंगे। 


और जब आदर्श धुँधले पड़ जाते हैं, तब राष्ट्र केवल विकसित दिखता है. वास्तव में विकसित नहीं होता। 
इसलिए यह केवल एक भावनात्मक कथन नहीं, एक राष्ट्रीय चेतावनी जिस समाज ने गुरु खोया उसने अपना भविष्य खो दिया। राष्ट्र की सबसे बड़ी पूँजी सोना चाँदी नहीं होती उसके गुरुओं की गरिमा ही उसकी असली , समृद्धि होती है।
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आगे जारी 
संपादन : शक्ति.डॉ.रजनी प्रीति रीता.
सज्जा : शक्ति.मंजिता सीमा अनुभूति. 
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शक्ति आलेख : २ / २ / ३  
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श्रीकृष्ण : विराट रूप : GIF 
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द्वापर में ही नहीं, सार्वभौमिक और‌ सार्वकालिक हैं 
श्री कृष्ण,उनकी ५२५३ वीं जयन्ती है।
 राम की मर्यादा :कृष्ण के कर्म और उनकी सहन शक्ति 
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शक्ति.आरती अरुण आस्था.
रांची डेस्क.  

औपनिषदिक दर्शन और चिन्तन : कृष्ण वाणी श्रीमद्भागवत गीता : जिन्होंने सम्पूर्ण औपनिषदिक दर्शन और चिन्तन को एक काव्य  श्रीमद्भागवत गीता  में ढाल दिया, जिन्होंने उद्दात्त और उन्मुक्त प्रेम को प्रदर्शित किया।  जिन्होने सम्पूर्ण संसार को निष्काम कर्म योग का दर्शन दिया, जो परम आनन्द के कारण है। जो सबको आकर्षित करने की क्षमता रखते हैं , जो सभी प्रेमियों के लिए आराध्य हैं।  जिनके स्मरण मात्र से लौकिक व्याधियाँ नष्ट हो जाती है, जो युग पुरूष और योगेश्वर हैं, उन वसुदेव कृष्ण को मैं बारम्बार नमन करता हूँ।
भारत की भारतीयता और आत्मा शिव, राम और कृष्ण में बसती है। बुद्ध, महावीर, नानक, कबीर, रविदास, तुलसी, रहीम, मीरा, सूरदास और रसखान भारतीय चेतना रूपी उद्यान के सुगंधित पुष्प है जिनसे भारत भूमि सुवासित होती रहती है।
पर जब बात श्री कृष्ण की आती है तो एक अद्भुत अनुभूति हृदय में होती है। अपने काल के ही नहीं जो आज भी प्रासंगिक हैं और यथार्थ चेतना से युक्त है। मैं अकिंचन उन पर क्या लिखूँगा पर हृदय के भावना पुष्प तो इन शब्दों के माध्यम से समर्पित कर ही सकता हूँ पर विराट को तो शब्दों में नहीं बांधा जा सकता है।
राधिका कृष्ण : मुरली : GIF 
उद्धव, मोहे ब्रज बिसरत नाहीं : एक भावुक प्रेमी जो अपने बालसखा और सखियों से बिछुड़ कर एक आम आदमी की तरह अपने परम सखा निर्गुण ब्रह्म उपासक उद्धव जी के सामने विलाप करने लगते हैं, " उद्धव, मोहे ब्रज बिसरत नाहीं। " 
यह पीड़ा जो प्रेम में अन्तस को आहत कर देता है, सम्पूर्ण वैश्विक साहित्य में अन्यत्र दुर्लभ है। एक महान कूटनीतिक रणनीतिकार जो साध्य की प्राप्ति करने में साधन की परवाह नहीं करते है कि यदि साध्य पवित्र, धर्म और न्याय आधारित हो तो उसकी विजय सुनिश्चित करने के लिए किसी भी मार्ग का अनुसरण किया जा सकता है। 
पार्थ के सारथी और द्रौपदी के सखि व  रक्षक : रणछोड़ कृष्ण : पार्थ के सखा सारथी और रक्षक, मैत्री धर्म पालन करने वाले,नारी जाति के समुद्धारक, आश्रितों  के रक्षार्थ रणछोड़ बनने वाले और प्रेम की वंशी बजाने के साथ-साथ आपात्काल में सुदर्शन चक्र उठाने वाले, महान योद्धा ,पार्थसारथी का  हम जन्मदिन मना रहे है। 
परन्तु जरूरत है , उनकी तरह समय पर वंशी वादन की और धर्मार्थ - न्यायार्थ शस्त्र  उठाने की ताकि न्यायार्थ अपने बन्धुओं को भी दण्डित किया जा सके।
भारतीय जन चेतना के केंद्र शिव, श्री विष्णु : श्री राम कृष्ण : पुनश्च परम चैतन्य आत्मा ब्रह्माण्डीय ऊर्जा शिव श्री राम और श्री कृष्ण को बार-बार नमन करते हुए भारत के महान समाजवादी चिन्तक और राजनीतिक दार्शनिक डा. राम मनोहर लोहिया जी को उद्धृत करना चाहुँगा, उन्होने १९९५  में मैनकाइंड पत्रिका में लिखा था, " हे भारत माता, हमें शिव का मस्तिष्क दो, कृष्ण का विराट हृदय दो, राम का कर्म वचन और मर्यादा दो। हमे असीम मस्तिष्क और उन्मुक्त हृदय के साथ-साथ जीवन की मर्यादा से रचो।"
एक अद्भुत, अनुपम, अद्वितीय, अप्रतिम और महामानव जो नाचता भी है और नचाता भी है, वंशी बजाता और गोपियों को रिझाता भी है। दही माखन चुराकर खाता और बांटता भी है, रासलीला करता है तो अद्वैत का दर्शन देते हुए योग की विशद् और अनुपम व्याख्या करते हुए योगेश्वर भी कहलाता है। 
कहीं मर्यादाहीन तो कहीं मर्यादा के रक्षार्थ  : सबके अहंकार और मिथ्याभिमान का मानमर्दन भी करता है। सामाजिक नैतिक नीतियों में बंधा हुआ भी है तो उन्मुक्त और स्वच्छन्द भी है। प्रेम के द्वारा ही मुक्ति मिल सकती है का दर्शन भी देता है, कहीं मर्यादाहीन नजर आता है तो कहीं मर्यादा के रक्षार्थ चरम पर खड़ा भी दिखाई देता है। और अन्त में कर्म की, कर्त्तव्य पालन की श्रेष्ठता का संदेश भी देता है, ऐसे हैं योगेश्वर कृष्ण जिनकी महिमा आज भारत की सीमाओं के पार जा चुकी है। और एशियाई देशों के साथ साथ यू एस, यूरोप, आस्ट्रेलिया और अफ्रीका की धरती हरे रामा हरे कृष्णा हरे कृष्णा हरे रामा की गायन से गूंजती दिखाई पड़ती है और आज भी इनकी प्रासंगिकता उतनी ही है जितनी द्वापर में थी।
सभी श्री कृष्ण प्रेमियों और साधकों को श्री कृष्णाष्टमी ५२५३ वीं जयन्ती की अनन्त शुभकामनाएँ और बधाईयाँ । सम्पूर्ण वैश्विक क्रियाशीलताओं मे प्रेम शान्ति और सद्भावना का संचार हो। श्री राधा मोहन शरणम् । जय जय श्री राधेकृष्ण
*
संपादन : शक्ति. शालिनी रंजिता रेनू 
सज्जा : शक्ति. मंजिता सीमा अनुभूति
* 
*

शक्ति सोनालिका आर्य डॉ दीना नाथ वर्मा : दृष्टि क्लिनिक : किसान बाग : बिहारशरीफ़ समर्थित.

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सम्पादकीय :
त्रिशक्ति : गोरी साँवरे सलोनी : पद्य संग्रह : आलेख : पृष्ठ : २ / ३.
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साथ : संवाद : शक्ति. 
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संपादन. 
*
शक्ति.डॉ.रजनी सीमा तनु सर्वाधिकारी.
बंगलोर डेस्क
*
*
शक्ति. अनुभाग.
शक्ति.तनु सर्वाधिकारी.बंगलोर
*
भाविका
बरखा बहार आई
*

शक्ति. शालिनी राय
लेखिका.कवयित्री.सम्पादिका.
*

बरखा की ये बूँदें लाईं,
मनभावन संदेश,
जाग उठी है प्यास मिलन की,
तजकर धीर-अशेष.

नभ से उतरी चपल नटी-सी,
रिमझिम की स्वर-लहरी,
अंबर के आँगन में गूँजी,
सुधि बन अतिशय गहरी. 

मलयज-शीतल पवन बही जब, 
मृदु सरगोशी करती,
मृण्मय तन की प्यास बुझाने,
नवल सुधा-रस भरती.
*

अनुभाग
स्मृतियों के रंग बिखरे हैं,
*
भाविका
शक्ति शालिनी
*
*
माया : सोनी : इंद्रप्रस्थ : छाया

*
आह्वान आया है उनका, भीग रहा परिवेश... जाग उठी है प्यास मिलन की, तजकर धीर-अशेष।। अंग-अंग अभिसार प्रज्ज्वलित, नवल बिम्ब मुस्काया मृत्तिका की सौंधी गंध ने, सघन विरह जगाया। ​ताम-वर्ण की तड़ित चंचला ज्यों कंचन की रेख, मन-मयूरा थिरक उठा है, पाकर प्रियमय लेख। स्मृतियों के रंग बिखरे हैं, जैसे सुंदर भेष... जाग उठी है प्यास मिलन की, तजकर धीर-अशेष।।

भीग रही पावन अमराई, 
भीग रही हर क्यारी,
अलंकार बन ओस सजी है, 
वसुधा अति सुकुमारी।
बिंदु-बिंदु में प्रतिध्वनित है, 
प्रियतम तेरा नाम,
उत्कंठित है चित्त मेरा, 
तजकर जग के सब काम।

संपादन व सज्जा.
शक्ति.रेनू 
 सीमा रंजिता.
 
*
आगे जारी 

*
भाविका. १
*
 कौन है तू ? 
क्यों कर आई ?
*

©️®️M.S.Media. PWCP.89/ 26.
*
शक्ति.तनु सर्वाधिकारी.
आत्म लेखिका.कवयित्री
बंगलोर.
*
क्या भूलूँ क्या याद रखूं

अबतक जो खुद में धारण किया,
आरोहण ....अवरोहण यापन किया, 
कुछ खोट रहा - जो मोट रहा
कुछ संजोया, कुछ दरिया में बहा.
अब प्रतीत है कि सब निरर्थक नहीं
गढ़ने ढलने के लिए आवश्यक यही.
*
*
भाविका : सन्दर्भ : छाया
शक्ति : सोनी : इद्रप्रस्थ : माया
*
पदचिन्ह,पीछे छुटे बहती सरिता में-
वो निराधार भले ही,
पर सत्य यह कि यहां तक का सफर,
आगे के फेरे यूं ही गतिमान निरंतर.
कुछ खोट रहा -जो मोट रहा
*
शक्ति. तनु.
द्वारिका डेस्क.
२३.सितम्बर, २०२६.
*
 *
भाविका : २ 

*
नैनों में दर्पण है 
दर्पण में कोई. 

*
दो नयनों के दर्पण में झांका, 
कुछ ओझल रहा कुछ दिखा,
जानी पहचानी निस्तब्ध शब्द.
चेहरे पर झलका फिर हो गया फीका.
प्रस्तर युग से भी परे कहीं छुपा, 
प्रेम प्रीत अहंकार बोध है दुबका.
कौन है तू ? क्यों कर आई
सखी सुहानी बहुत याद दिलाई.
अब मैं ढलानों पर खड़ी या चली,
सपनों के बोझ पीछे उतारे चली.
*

*
भाविका : सन्दर्भ : छाया
शक्ति.प्रियंका : देहरादून : माया
*

न कोई कोलाहल न कोई कलरव

धुन पर सवार क्षितिज का पड़ाव. 
दीप जलेगा मध्यम मध्यम
एक और वर्ष एक बढता कदम.
एकान्त प्रिय भटकते बादल
कब बरस पड़ूं कब जाऊं थम.
मैं और मेरी अलग थलग चाहत
सबसे रखे अलग यही है राहत.

*
संपादन व सज्जा.
शक्ति.
शालिनी सीमा रंजीता .
 
*

शक्ति.अनुभाग 
*
शक्ति.
प्रिया मधुप.  
दार्जलिंग. 
*
जब हम न होंगे
  
रुकोगे  चलते चलते
*

*
भाविका सन्दर्भ : छाया 
राधिका 
माया : छाया 
*
जब हम न होंगे
  
रुकोगे  चलते चलते
सबसे जुदा  !
रह रह कर कुछ इस तरह 
नुक़्स निकालते है हममें 
वो ना ख़ुदा, 
कि जैसे उन्हें इसी जमीं पर ही
जन्नत चाहिए था. 
 हम तो ठहरे 
मग़र एक 
अदना से इन्सान 
कहीं इसी जिंदगी में तो उनको नहीं, 
आदमी के वेश में
फ़रिश्ता या ख़ुदा चाहिए था ? 
*
संपादन व सज्जा.
शक्ति.डॉ.अनु रंजिता 
अनुभूति .
 
*

*
शक्ति.अनुभाग सीमा 
*
हिंदी दिवस विशेष 
कृष्ण भजन.
डॉ.आर. के. दुबे
*
कान्हा हम भी प्रीत की प्यासी हैं, प्यास बुझाओ तो जाने,
हम कुंज-गलिन में भटकी हैं, अब राह दिखाओ तो जाने।

छोड़ दिया हमनें जग सारा, बिसराया घर द्वार हमारा,
इस लोक-लाज की बेड़ी से, अब हमें छुड़ाओ तो जाने। 
कान्हा हम भी प्रीत की प्यासी हैं..
*

साभार : फोटो : राधिका : कृष्ण : बरसाने 
*
जमुना का किनारा सूना है, इस दिल में दर्द दूना है,
तुम छुपकर बैठे मधुक्न में, सम्मुख आ जाओ तो जाने।
हम कुंज-गलिन में भटकी हैं..

पनघट पर गगरी फूट गई.. आस मिलन की टूट गई. 
बरसाने की इन आँखों में, तुम प्रेम जगाओ तो जाने। 
कान्हा हम भी प्रीत की प्यासी है..
*

डॉ.आर. के.दुबे 
*
संपादन व सज्जा.
शक्ति.रेनू सीमा
अनुभूति .
 
*
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राधिकाकृष्णरुक्मिणी : आज का गीत : जीवन संगीत :भजन : पृष्ठ : ३.
---------------
संपादन. 
शक्ति. रितु प्रियंका अमित चौहान 
 देहरादून डेस्क. 
*
शॉर्ट रील : साभार :मृगनयनी 
*
तेरा मेरा साथ रहें : धूप हो छाया हो 
दिन हो की रात रहें : 
तेरा मेरा साथ रहें :
*

*
शॉर्ट रील : साभार : शक्ति श्वेता श्रीवास्तव 
*
कल किसने देखा है कल किसने जाना है 
जीने वाले सोच लें यहीं वक़्त है कर ले पूरी कर ले आरजू 


शक्ति. प्रियंका अमित चौहान अनुभूति 

*
मोहे मोहे ऐसे नहीं छेड़ों सांवरे 
सुन सुन मोसे नहीं खेलो दांव रे
*
---------- राधिकाकृष्णरुक्मिणी : शक्ति : कला दीर्घा : पृष्ठ : ५ . 
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संपादन शिमला डेस्क
शक्ति.अनुभूति मंजिता स्वाति.
*
वक्रतुण्ड महाकाय सूर्यकोटि समप्रभ : गणपति : कलाकृति : शक्ति. मंजिता चंडीगढ़
मेहंदी : सजना है मुझे : शिव शक्ति : तीज : कलाकृति : शक्ति. डॉ सुनीता सीमा प्रेरणा  
श्याम तेरी बंशी पुकारे राधा नाम : कलाकृति : शक्ति. मंजिता सुनीता अनुभूति. 

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राधिकाकृष्णरुक्मिणी : शक्ति : फोटो दीर्घा : पृष्ठ :७. 
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संपादन
शक्ति.प्रियंका रितु स्मिता.
*
राधिका : लाड़ली जी का मंदिर : बरसाने : फोटो कोलाज : शक्ति. मंजु रितु संगीता 
 बाढ़ पीड़ितों के साथ उनके दर्द में भागीदारी : शक्ति. रितु. संपादन शक्ति.डॉ. सुनीता अनुभूति 
शिव के लिए शक्ति की पूजा : तीज़ संपन्न : कोलाज : शक्ति. डॉ.सुनीता एशा स्मिता.गुजरात  
महाशक्ति मीडिया कला  सम्पादिका शक्ति मंजिता : साथ में अभिनेत्री सांसद मथुरा हेमा मालिनी  
जन्माष्टमी : राधिका कृष्ण श्रृंगार : फोटो कोलाज : शक्ति.प्रियंका अमित चौहान आस्था. 
छाया सम्पादिका : शक्ति. रितु सिंह : राधिका स्वरुप : कृष्ण राधिका शाश्वत प्रेम : अभिनीत करते हुए.
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राधिकाकृष्णरुक्मिणी : समसामयिकी.समाचार : दृश्यम दिन विशेष : पृष्ठ : ८.
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संपादन
शक्ति. डॉ.रजनी स्मिता बीना जोशी
*

अनंत चतुर्दशी : श्री लक्ष्मीनारायण की पूजा 
गणपति विसर्जन
शक्ति पार्वती स्वरूपा नंदा सुनंदा की घर वापसी : कैलाश यात्रा. 
*
शक्ति. डॉ. सुनीता भारती बीना जोशी 
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शक्ति नंदा सुनंदा महोत्सव : नैनीताल : उत्तराखंड : फोटो कोलाज : डॉ. सुनीता बीना भुवन जोशी 

विक्रम संवत : २०८३. शक संवत :१९४८. दिनांक : २५ .०९.२६ .भाद्र : शुक्ल पक्ष चतुर्दशी. दिन.शुक्रवार. दिवस. मूलांक :७ है। भाद्र शुक्ल पक्ष चतुर्दशी अनंत चतुर्दशी का पवित्र दिवस है। शक्ति पार्वती स्वरूपा नंदा सुनंदा महोत्सव ( कुमायूं  : उत्तराखंड ), श्री लक्ष्मी नारायण : सिया राम : राधिका रुक्मिणी कृष्ण 
गणपति विसर्जन के  पवित्र दिवस पर हम देव शक्ति परिवार की तरफ से आप समस्त को अनंत शिव शक्ति शुभकामनायें प्रेषित है।
जहाँ महाराष्ट्र गणपति के विसर्जन में डूबा होगा वहीं उत्तराखंड में पार्वती स्वरूपा शक्ति नंदा सुनंदा अपने मायके से विदा होकर स्वामी भोले शंकर के घर कैलाश के लिए प्रस्थित हो गयी होगी।
वहीं लोग आज अनंत चतुर्दशी का पवित्र दिवस को श्री लक्ष्मी नारायण : उनकी अवतरित शक्तियां  सियाराम,  राधिकारुक्मिणीकृष्ण की आराधना करते हुए हरि अनंत हरि कथा अंनता की आराधना करेंगे व अनंत बांधेंगे।
नंदा देवी  महोत्सव.उत्तराखंड 



देवी नंदा सुंनदा। उत्तराखंड की अधिष्ठात्री देवी। भाद्र मास। शुक्ल पक्ष पंचमी का दिन। इन्हीं दिनों शक्ति पार्वती स्वरूपा नंदा सुनंदा महोत्सव की शुरुआत उत्तराखंड में होती है। और अनंत चतुर्दशी के पवित्र दिवस को भव्य शोभा यात्रा व विसर्जन के साथ इस उत्सव का समापन भी होता है। 
पार्वती स्वरूपा शक्ति नंदा सुनंदा अपने मायके से डोले में विदा होकर अपने स्वामी भोले शंकर के घर कैलाश के लिए विदा हो जाती हैं।
उत्तराखंड के लोक विश्वास और संस्कृति में मां नंदा और सुनंदा को बहनों या सहचरी साथ रहने वाली के रूप में पूजा जाता है, जो संपूर्ण पर्वतीय क्षेत्र की कुलदेवी और लोकमाता मानी जाती हैं।
पौराणिक कथा और पृष्ठभूमि नंदा देवी : धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, नंदा देवी को राजा हिमालय : हेमंत और मेनावती की पुत्री हैं। उन्हें तथा भगवान शिव की अर्धांगिनी : पार्वती का रूप माना जाता है।
सुनंदा देवी : सुनंदा को नंदा देवी की बहन या प्रिय सहचरी कहा जाता है, जो मुख्य चोटी के पूर्वी शिखर के पास निवास करती हैं। मुख्य नंदा देवी पर्वत के ठीक पूर्व में स्थित निचली चोटी को सुनंदा नंदा देवी ईस्ट भी कहा जाता है।
मायके और ससुराल की कथा : ऐसी मान्यता है कि विवाह के बाद नंदा शिवजी के साथ कैलाश चली जाती हैं, लेकिन हर साल या विशेष अवसरों पर वे अपनी बहन सुनंदा के साथ अपने मायके उत्तराखंड के कुमाऊं और गढ़वाल क्षेत्र आती हैं। तब इसी उपलक्ष्य पर नंदा देवी महोत्सव के निमित विशेष मेले व उत्सव का आयोजन समस्त उत्तराखंड में अपने विशेष अंदाज में होता है।
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सज्जा व संपादन
शक्ति सीमा रंजिता दीप्ती

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गणपति बप्पा मोरया. भक्ति रस में डूबा महाराष्ट्र : समस्त आर्यवर्त 
शक्ति. डॉ. सुनीता मधुप अनुभूति. 
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भारतवर्ष विविधताओं का देश है। भाषा भाषी  प्रांत अनेक है फिर भी हम सभी के मध्य एकता स्थापित है।  भाद्र मास शुक्ल पक्ष तृतीया का शुभ दिन जब शक्तियां शिव की आकांक्षा में तीज व्रत करती है तब उनकी एक मात्र अभिलाष होती है कि उनके स्वामी भोले शिव शंकर जैसे हो एक पत्नी निष्ठ। 
ठीक इसके एक दिन बाद ही विघ्नहर्ता, वक्रतुंड, महाकाय, गणेश जी का शुभ आगमन शुभ आगमन होता है ज्ञात हो ब्रिटिश कालीन भारत में १९०४ - १९०५ के बंग भंग  आंदोलन के विरुद्ध  महाराष्ट्र  केसरी बाल  गंगाधर तिलक ने महाराष्ट्र, बंगाल में ही नहीं  गणेश उत्सव की परंपरा समस्त भारत में  शुरू की थी जो आज समस्त भारत में खूब प्रचारित व प्रसारित हो गई है। 
बल्कि यूँ कहें आज यह गणेश उत्सव की परंपरा विश्व व्यापी हो गई है।सनातनी परंपरा के अनुसार हम अपने प्रत्येक शुभ कार्य करने के पहले बार-बार दोहराते हैं, श्री गणेशाय नमः। गणेश जी सभी के लिए कष्टहर्ता बने यह हमारी आकांक्षा है। हम गणपति बप्पा मोरया की ह्रदय से वंदना करते हैं। गणपति ख़ुश होंगे तो हमें ऋद्धि : समृद्धि , सिद्धि : सफलता की प्राप्ति स्वतः हो जाएगी।  


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पूजे गए ब्रह्मांड के पहले इंजीनियर और वास्तुकार : भगवान विश्वकर्मा

वर्ष में एक निश्चित तिथि १७  सितंबर को भगवान विश्वकर्मा की पूजा की जाती है जो सृजन  कौशल व समृद्धि के पर्याय माने जाते हैं।
पौराणिक कथाओं की माने तो भगवान विश्वकर्मा इस ब्रह्मांड के पहले इंजीनियर और वास्तुकार समझ जा सकते हैं  जिन्होंने सतयुग से लेकर द्वापर युग तक देवताओं के लिए कई दिव्य महल राजधानियां अस्त्र शस्त्रों का निर्माण किया था।
उन्होंने रावण की लंका , कृष्ण की द्वारिका नगरी और पांडवों की माया सभा जैसे दिव्य, अभूतपूर्व नगरों व महलों का निर्माण किया था। 
यह वैसे निर्माण हैं जिसे वास्तु कला के लिए अभी भी याद किया जाता है। दर्शनीय व प्रशंसनीय  हैं ।  यह त्यौहार मुख्य रूप से औद्योगिक क्षेत्र, दुकानों और कार्य स्थलों पर मनाया जाता है जिसमें इंजीनियर शिल्पकार, कारीगर, मैकेनिक, वेल्डर और श्रमिक इस दिन अपने भविष्य सुरक्षित कामकाजी परिस्थितियों और व्यापार को लेकर के भगवान से प्रार्थना करते हैं। 


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दिन विशेष : पृष्ठ : ८ / २
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संपादन 
शक्ति मीना  सीमा रंजिता 
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भाद्र शुक्ल पक्ष चतुर्दशी 
 अनंत चतुर्दशी 
शक्ति पार्वती स्वरूपा नंदा सुनंदा महोत्सव (  उत्तराखंड )  
श्री लक्ष्मी नारायण : सिया राम : राधिका रुक्मिणी कृष्ण 
गणपति विसर्जन के 
पवित्र दिवस पर 
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हम देव शक्ति परिवार की तरफ से आप समस्त
को अनंत शिव शक्ति शुभकामनायें
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कौशल ,सृजन व समृद्धि के लिए
विश्व कर्मा पूजा की अनंत शिव शक्ति शुभकामनाएं
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हम देव शक्ति परिवार की तरफ से आप समस्त
को हरतालिका तीज की अनंत शिव शक्ति शुभकामनायें
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हम
शक्ति.मीना अनु रितु सीमा
तथा सभी 
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हरतालिका : तीज : तिथि : मुहूर्त

प्रस्तुति : शक्ति. शालिनी सीमा सुनीता अनुभूति
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आजकल : व्यंग्य चित्र : मधुप


न्यूज़ : कई जिलों में बाढ़ की स्थिति : डूबे स्कूल
सिलेबस कैसे पूरा हो

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वैदिक रीति रिवाज़ों को स्मृत करते हुए
संदीपनी मुनि आश्रम : कृष्ण, सुदामा व बलराम
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समस्त ' हम ' देवशक्ति आर्य परिवार की तरफ़ से
आप सभी को शिक्षक दिवस की अनंत शिव शक्ति शुभकामनाएं
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शक्ति. शालिनी मधुप रेनू
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दिन विशेष : जन्माष्टमी :


दृश्यम : कोलाज
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प्यार : व्यवहार : संस्कार.
ज्ञान : कर्म : धर्म : साथ : नीति के
पर्याय रहें गोविन्द के जन्मोत्सव के उपलक्ष्य पर
हम समस्त शक्ति देव परिवार की तरफ़ से आप सभी को
अनंत शिव शुभकामनाएं.
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शक्ति देव समूह
शक्ति.डॉ.रजनी शालिनी रेनू अनुभूति
शक्ति.डॉ.अनु सुनीता रंजिता सीमा
तथा अन्य समस्त
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समाचार : दृश्यम दिन विशेष : पृष्ठ : ८ / २ .
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संपादन
शक्ति. रितु प्रियंका अमित चौहान
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शक्ति. नंदा सुनंदा शोभा यात्रा : दृश्यम : नैनीताल  


रील :शक्ति ललिता दीप्ती भुवन जोशी. नैनीताल 
 
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 तीज लोक गीत : गायन : 


शक्ति. सीमा सुनीता स्मिता अनुभूति 
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का ले  के शिव के मनाईब  हो शिव मानत नाहीं 
लोक पर्व तीज लघु फिल्म अवधि : २.२४. मिनट 
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शक्ति. रितु सिंह : दृश्यम


गणपति बप्पा मोरिया : मुंबई डेस्क.
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दिन विशेष : पृष्ठ : ८ / ३ .
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शुभकामनाएं
जन्मदिन की
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२३. ०९. 
*
©️®️M.S.Media. Shakti. Tanu. 89 / 26
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लेखिका. विचारक. कवयित्री.
संपादिका बंगलोर डेस्क
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को उनके अवतरण दिवस : जन्मदिन
विशेष की ' हम ' ' देव शक्ति ' परिवार की तरफ़ से
' अनंत ' ' शिव ' ' शक्ति ' शुभकामनाएं
*
दिए जलते हैं. फूल खिलते हैं. 

भेंट स्वरुप : जलते दिए 
*
शक्ति.डॉ.सुनीता मधुप प्रशांत
सह शक्ति हम लोग
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समसामयिकी.समाचार : छाया : दृश्यम : पृष्ठ : ८ / ३.
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संपादन
शक्ति.डॉ.रजनी स्मिता बीना जोशी
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सम्पूर्ण आर्यावर्त में गणेशोत्सव की धूम : फोटो कोलाज : शक्ति रितु विदिशा सेजल : मुंबई 
१७ सितम्बर : सृजन व कौशल  दिवस : विश्वकर्मा पूजा: फोटो डॉ सुनीता रंजिता प्रियांशी 

शिक्षक दिवस : जिसने सम्यक गुरु खोया उसने सर्वस्व खो दिया : फोटो : शक्ति. शालिनी मधुप रेनू 
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गीता ज्ञान : मुझे भी कुछ कहना है : आभार : पृष्ठ :९.
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गीता ज्ञान
शक्ति.सीमा आर के मधुप
*
२ अध्याय.श्लोक ४८

*
दृश्यम
श्री कृष्ण : कुरुक्षेत्र : अर्जुन : गीता ज्ञान
*
योगस्थ: कुरु कर्माणि सङ्गं त्यक्त्वा धनञ्जय ।
सिद्ध्यसिद्ध्यो: समो भूत्वा समत्वं योग उच्यते ॥
*
भावार्थ
हे धनंजय, अर्जुन ! आसक्ति : फल की इच्छा या लगाव को पूरी तरह त्यागकर और सफलता तथा असफलता में समान भाव : समता रखते हुए, योग में स्थिर होकर अपने कर्तव्य कर्मों को करो। मन की इस समभाव या संतुलन की स्थिति को ही योग कहा जाता है।
*
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मुझे भी कुछ कहना है : ९ / २
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संपादन
शक्ति. डॉ.अनु मीना रितु
साहस : संवाद : साथ : शक्ति.

स्वर्ग यहीं नर्क यहीं
*
सच कहें तो विवाह भी एक जुआ ही है
यदि भाग्य ने साथ दे दिया तो जीवन में स्वर्ग यहीं
यदि इसने दगा दे दिया तो जीते जी नर्क यहीं

*


शक्ति रितु : राधिका : फेरो न नजर से नजरिया 
*
उसने कहा था.
*
हरि अनंत हरि कथा अनंता.
*
*
विचार : सन्दर्भ : साभार माया.
ऋषिभृगु : नारायण  : लक्ष्मी : छाया. 
*
भृगु ऋषि : श्री लक्ष्मीनारायण : सहन समझ शक्ति.
*
 भृगु ऋषि ने वैकुंठ में योग निद्रा में लीन श्री हरि की सहन शक्ति परीक्षण के लिए उन में कितना अहंकार या क्रोध है ? ...उनके वक्षस्थल पर जोर से पैर का प्रहार कर दिया...
ऋषि के इस प्रहार से जागने पर भी श्रीविष्णु को क्रोध नहीं आया। उन्होंने उलटे महर्षि भृगु के चरण पकड़ लिए और विनम्रता से पूछा कि उनके कोमल चरणों में उनकी कठोर छाती लगने से कोई चोट तो नहीं आई.
*
शोध विचार @ शक्ति.डॉ. सुनीता  मधुप सीमा 


लोग क्या कहेंगे ?
*

*
विचार : सन्दर्भ : माया.
राम : रावण : सीता : छाया. 
*
सीता जीवित मिली ये राम की शक्ति थी. 
सीता पवित्र रही ये रावण की मर्यादा थी. 
लेकिन पवित्र सीता पर उँगली उठी ये संकीर्ण समाज की अपवित्र सोच थी. 
विचार कीजिए ज़रा सोचिए..
* 
उसने कहा था.
*
अथ श्री महाभारत कथा. 
*
*
विचार : सन्दर्भ : माया.
भीम : अश्वत्थामा : छाया.  
*
कृष्ण ने तो सार्थक ही प्रयास किया कि कर्म शब्दशः ही हो,
जो कहा जाए वही किया भी जाए,  
लेकिन धृतराष्ट्र, शकुनि, दुर्योधन, दुःशासन, शिशुपाल,अश्वत्थामा
जनित कुछ ऐसी परिस्थितियां हो गयी कि धर्म की संस्थापना के लिए   
उन्हें युधिष्ठिर के 'अश्वत्थामा हतो नरो वा कुंजरो वा ' जैसे अर्धसत्य 
का सहारा लेना ही पड़ा.
*
शोध विचार @ शक्ति.शालिनी मधुप रेनू. 

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English Section
*
Shakti.Pooja. Arya.Dr.Rajeev Ranjan.Child Specialist. Biharsharif.supporting
*

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Contents.
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English Editorial Section : Cover Contents Page 1
Shakti Editorial. English Page : 2
Shakti Editorial. Prose : English Page : 3
Shakti Editorial. Poem : English Page : 4
Shakti Vibes : .Page : 5
Radhika : Krishna : Rukmini  : Photo Gallery.Page : 6
Visuals News : News : Editorial Page : 7
Shakti Art  Gallery  : Radhika : Krishna : Rukmini : English : Page 8.
Gratitude : Day Special : You Said it : Page : 9.
*
*
Times Media Powered
*
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Shakti. Editorial. English Page : 2
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Chief Editor.
*
Chandigarh Desk.
*
©️®️M.S.Media. WCP.Dr.Anu.Er.Manish.Nikita
26/../ 24/ 26.
*
Shakti. Dr.Anuradha.Chandigarh.
Arya.Er.Manish.IITian.USA.
Shakti. Nikita.Australia.
*
Executive Editor.


*
Shakti. Seema Priya Kajal .
Darjeeling Desk.
*
Photo Reel Editor.
Jaipur Desk
*

Shakti. Ritu Naina Soni 
*
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Shakti Vibes : .Page : 5.
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Editor.
Shakti Dr.Anu Naina Ankita. 
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Power / Behaviour.
*

  Self : Collecting Inspiration 
with a galaxy of stars : Collage : Thought related.
*
Remaining balanced in success and failure

Actions with equal mind,remaining balanced in success and failure
will lead you towards success indeed. 
*
When you focus yourself from competition
to contribution life becomes a celebration.
*
Never try to defeat the people by your power 
just make win their heart by your own behaviour.
*
@ Shakti.Dr.Anu Madhup Seema. 
*
*
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Radhika : Krishna : Rukmini : Photo Gallery.Page : 6
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Editor.
Shakti. Meena Shaily Sejal
Mumbai Desk.
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Entire nation observing Ganpati Utsav : Shakti.Ritu Shailly Sejal.Mumbai.
Hariyali Teez Shakti : Mehandi : Collage : Shakti. Ritu Meena Anubhuti.
 Janmashtami. Krishna Gokul Gwalwale : photo : Shakti Shailly Vidisha Sejal

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Visuals News : News Today  : English :  Page : 7
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Editor.
Shakti.Dr.Anuradha.Priya.Seema.
*
*
124th Nanda Sunanda Mahotsav 26. gets started in Nainital on 16 th of September : Shakti.Deepti Bharti Lakshika

*
Teachers’ Day Celebrated with Grandeur everywhere.
*

Photo : Courtesy : Guru.Brahma Vishnu Mahesh.
Remembering Gurus as Guru Brahma Vishnu Mahesh,Krishna, 
Guru Vashisht, Sandipani and Drone,
*
News Column : Shakti.Dr.Sunita Ranjita Seema

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collage : the great disciples as 
Lord Rama,Lord Krishna and Arjuna.  

CRS / Kolkotta. Teachers’ Day gets 
Shakti Editor : Seema : PCWP
celebrated with great enthusiasm and gratitude to honour the dedication and contribution of teachers throughout the country. 
MS* Media Dev Shakti Editorial team simply remembers all the unprecedented  gurus, go for their unforgettable contributions to the society. 
As Guru Brahma Vishnu Mahesh,Krishna,Guru Vashisht, Sandipani and Drone, are very creative they shape their disciples as Lord Rama ,Lord Krishna and Arjuna that rescued the world community.
Traditionally the special Student-as-Teacher activity is the highlight of the day in the school premises, paying floral tribute to Dr.Radhakrishnan, where students  step into the role of teachers and conducted classes for their juniors, experiencing the joy and responsibility of teaching.
As part of the CCA activities, students participate enthusiastically in bouquet-making and card-making for their favourite teachers. Through their colourful creations and heartfelt messages, they express their love and gratitude towards their mentors.
*
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Teacher's Day Celebration amongst Davian Fraternity : photo collage :

Shakti.Ranjita. Sunita Seema.
*
The celebration also includes speeches, songs and cultural performances dedicated to the teachers. 
The day concludes with smiles, appreciation and beautiful memories of exclusive teacher who shape their students , celebrating the special bond between teachers and students. 
On this day remembering Radha Krishnan, ex. President of India  with all other  mighty and divine gurus as Guru Brahma Vishnu Mahesh, Krishna, Guru Vashisht, Sandipani and Drone, we also recall their disciples too Lord Rama , Lord Krishna and Arjuna.
*
Editing : Shakti.Madhvee.Shalini.Dr.Anuradha.Kajal. 
Decoration : Shakti. Manjita Shwati  Lakshika Anubhuti .

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Shakti Art  Gallery  : Radhika : Krishna : Rukmini : English : Page 8.
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Editor.
Shakti. Manjita Swati Anubhuti.
 Kashi Desk.
*
Shiv Shakti Assi : Ammi Je Tomar Varanasi : Art : Shakti. Swati Madhup Anubhuti
MS* Media Shakti Editorial Team celebrating : Janmashtami : collage : Shakti. Dr.Sunita Ranjita Seema. 
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You Said It : Credits : Wishes : English : Page  9
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Editor.
Shakti.Naina Seema Priya.
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Indraprastha Desk 
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18 th of September
Birthday Wishes 

for 
Shakti. Editor.English 
Kajal.Gurugram 
*

MS* Media. Shakti Kajal. PWCP.24 /26
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You don't get older,
you get more better and better.
*
We Dev Shakti
Media Hum Family
*
Happy Janmashtami.
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*
a baby krishna : courtesy : GIF
*
we Dev Shakti parivar unitedly celebrating the divine birth of Lord Krishna
 : 
with you all that believe in Krishna' existence and his philosophy.
*
Perform your assigned obligatory duty because action  is must ,necessary and indeed better than inaction in your life 
*
Dr. Sunita Madhup R K.
*
Your consistency and hard work are seriously paying off.
Shakti. Shahina Naz.Shakti Editor.Ex.Davian.Principal ( Present )
*
Really it is well said, ' Well begun is half done'.
Santosh.Patna.
*
Excellent Post. Keep it up 
Dr.Prashant Singh.Gujarat
*
Credit : Page : 9/2.
Dr.Sunita.Ranjita.Seema.
*
*
Blog.GIF.
*
Blog / Designer/ Promoter / Protector.
an AI. Skilled. IT Sector Engineer's Team 
Shakti. Er.Jyoti. Er.Aryan Siddhant.
Shakti.Er.Snigdha.Er.Indroneel 
Bangalore. 


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