Radhika Krishna Rukmini. Darshan.Patrika.14.V2.S : 8.
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कृण्वन्तो विश्वमार्यम.
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Pratham Media.
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Radhika Krishna Rukmini.
Darshan.Patrika.
Number.14.Volume : 2. Series : 8.
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प्यार.व्यवहार.संस्कार.
राधिकाकृष्णरुक्मिणी दर्शन :१४.
पत्रिका आवरण पृष्ठ.
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प्यार.व्यवहार.संस्कार.राधिका कृष्ण रुक्मिणी दर्शन : १४.दैनिक.
में जाने के लिए नीचे दिए गए लिंक को दवाएं.
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| शक्ति.राशि. प्रतीक चिन्ह.सिंह. |
आत्म दीपो भवः
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विक्रम संवत : २०८३ शक संवत : १९४८.
दिनांक : ०१.०९.२६ .
भाद्र : कृष्ण पक्ष : चतुर्थी / पंचमी .
दिन.मंगलवार.
त्रिशक्ति एकता दिवस. मूलांक :१ .
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a rising Sun GIF.
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जागो उठ कर देखो
जीवन जोत उजागर है.
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विषय सूची : पृष्ठ : ०.
शक्ति. विचार धारा.
अनुभाग : १.
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* त्रिशक्ति. प्रेम : प्रकृति.पृष्ठ : ०. |
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राधिकाकृष्ण: प्रेम प्रकृति. दर्शन : नैनीताल डेस्क : पृष्ठ : ० / १.
रुक्मिणीकृष्ण. प्रेम प्रकृति. दर्शन : आज : नैनीताल डेस्क : पृष्ठ :० /२.
मीराकृष्ण : प्रेम प्रकृति. दर्शन : नैनीताल डेस्क : पृष्ठ ० / ३ .
*
त्रिशक्ति.
जीवन : दर्शन.
*
त्रि शक्ति : विचार धारा : पृष्ठ : १.
राधिकाकृष्ण : जीवन दर्शन : दृश्यम : शब्द चित्र : वृन्दावन.डेस्क : पृष्ठ : १ / १.
रुक्मिणीकृष्ण :जीवनदर्शन : दृश्यम : शब्द चित्र : विदर्भ डेस्क: पृष्ठ : १ / २.
मीराकृष्ण : जीवन दर्शन : शब्द चित्र : मेवाड़ डेस्क.पृष्ठ १ /३.
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*
सम्पादकीय शक्ति.
अनुभाग :२.
*
राधिकाकृष्णरुक्मिणी : सम्पादकीय शक्ति : पृष्ठ :२.
सम्पादकीय शक्ति. समूह. नवशक्ति.विचार धारा : अंततः : पृष्ठ :२/ १.
सम्पादकीय : त्रिशक्ति : गोरी साँवरे सलोनी : गद्य संग्रह : आलेख : पृष्ठ : २ / २.
सम्पादकीय :त्रिशक्ति : गोरी साँवरे सलोनी : पद्य संग्रह : आलेख : पृष्ठ : २ / ३.
राधिकाकृष्णरुक्मिणी : आज का गीत : जीवन संगीत :भजन : पृष्ठ : ३.
राधिकाकृष्णरुक्मिणी : शक्ति : कोलाज दीर्घा : पृष्ठ : ४.
राधिकाकृष्णरुक्मिणी : शक्ति : कला दीर्घा : पृष्ठ : ५ .
दिन विशेष : आज का पंचांग : राशि फल : पृष्ठ : ६.
राधिकाकृष्णरुक्मिणी : शक्ति : फोटो दीर्घा : पृष्ठ :७.
राधिकाकृष्णरुक्मिणी : समसामयिकी.समाचार : दृश्यम दिन विशेष : पृष्ठ : ८.
गीता ज्ञान : मुझे भी कुछ कहना है : आभार : पृष्ठ :९.
*
*
सम्पादकीय त्रिशक्ति : पृष्ठ : ०.
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राधिकाकृष्णरुक्मिणी.दर्शन
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राधिकाकृष्ण: प्रेम प्रकृति. दर्शन : नैनीताल डेस्क : पृष्ठ : ० / १.
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राधिका डेस्क.
राधाकृष्ण मंदिर.मुक्तेश्वर.नैनीताल.
संपादन
शक्ति.डॉ.अनु मधुप रितु.
*
' तुम्हारे विश्व विजय की कामनार्थ ,
कच्चे धागे से मैं तुम्हें सम्यक ' सोच ',शब्द , साथ ,सतकर्म, धर्म व सम्यक संसार निर्माण के लिए
पवित्र और प्रेम के चिर स्थायी, दिव्य मजबूत रक्षा सूत्र : कच्चे धागे से बांधती हूँ।
हे रक्षासूत्र ( रक्षे ) ! तुम स्थिर रहना और अपने संकल्प से कभी विचलित मत होना।
आप रक्षित रहें तथा सर्वदा धर्म की रक्षा करें ...' शची, इंद्राणी
*
शोध विचार @ शक्ति.शालिनी मधुप रेनू.
*
सिर्फ़ तुम्हारे लिए.
शक्ति साध्वी सज्जन
*
*
विचार सन्दर्भ : माया
कलाकृति : १९९८ मधुप : नैनीताल : छाया.
*
आज हम उनकी दुआओं का असर देखेंगे
*
इस स्वयं के लिए अर्थ तलाशती दुनियाँ में पैसे तो
नहीं कम से कम अपने सम्यक सोच व कर्म से दूसरों के लिए
थोड़ी सी हँसी थोड़ी सी ख़ुशी तो देकर देखें
शायद इससे आपका ही भला हो जाए
*
ढ़ाई आखर प्रेम का
*
तथा जिस रिश्तें नातें में मधुर शब्द व्यवहार और संस्कार होते है
जिसमें सम्यक समझना, सहना, बोलना और सराहना, होती है.
*
तुम मुझे यूँ भुला न पाओगे
*
देखते देखते ही सब कुछ अपनी जिंदगी में आँखों के सामने गुजर जाता है
लेकिन क्या यह सच नहीं है कि दिल से
कुछ भी नहीं भुलाया जा सकता है, जिंदगी भर के लिए.
*
विचार सन्दर्भ : माया
शक्ति.तनु : बंगलोर : छाया.
*
जिंदगी की बहुत सारी उलझनों का जवाब यही है
मैं अपनी जगह सही हूँ, वो अपनी जगह सही है
*
शक्ति.डॉ.अनु मधुप शालिनी
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रुक्मिणीकृष्ण. प्रेम प्रकृति. दर्शन : आज : नैनीताल डेस्क : पृष्ठ : ० / २.
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*
*
रुक्मिणीकृष्ण.मुक्तेश्वर. नैनीताल डेस्क. * संपादन शक्ति.शालिनी मधुप मीना. |
*
सावन को आने दो.दृश्यम.
*
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*
शक्तियां जो दुर्जनों के लिए महाकाल व
सोना सज्जन, साधु जन के लिए अनंत शिव हैं
वही सत्यम, शिवम् और सुंदरम हैं.
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मीराकृष्ण : प्रेम प्रकृति. दर्शन : नैनीताल डेस्क : पृष्ठ ० / ३
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*
मीरा डेस्क.
मुक्तेश्वर डेस्क.नैनीताल .
प्रादुर्भाव वर्ष : १९७८.
संस्थापना वर्ष : २०२४.महीना :जून.दिवस : ६.
*
*
संपादन.
शक्ति.डॉ.राखी मधुप कंचन.
*
* अपनी जिंदगी में ' समय ',' शब्द ' और ' शख्स ' को पढ़ने, ' जानने ' और समझने की ' सलाहियत ' जरूर रखिए क़ामयाबी आपके क़दम चूमेगी * |
न जाने क्या हुआ
*
अपने अंतर्मन में घट रहा सब कुछ ठीक नहीं होता , माधव !
*
ईमान धरम और करम
*
कोई हमारा बुरा करे यह उसका करम है
लेकिन हम किसी का बुरा ना करें ये हमारा ईमान धरम और करम है
लेकिन हम किसी का बुरा ना करें ये हमारा ईमान धरम और करम है
*
विचार @ शक्ति.डॉ.अनीता प्रशांत.डॉ.सुनीता.
द्वारिका डेस्क. गुजरात.
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राधिकाकृष्ण : जीवन दर्शन : दृश्यम : शब्द चित्र : पृष्ठ : १ / १.
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वृन्दावन.डेस्क.
संपादन
शक्ति.गुल मधुप शबनम.
*
दर्शन ड्योढ़ी : राधिकाकृष्ण.
*
अनहोनी न होय
*
यदि आपमें प्रेम हैं तो और आशा न्यून, तब
कुछ न कुछ तुम्हारे लिए आशातीत ही होगा
*
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रुक्मिणीकृष्ण : जीवनदर्शन : दृश्यम : शब्द चित्र : पृष्ठ : १ / २.
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*
संपादन
विदर्भ डेस्क : महाराष्ट्र.
शक्ति.डॉ.सुनीता मधुप रेनू.
*
कर्म : भाग्य और होनी
*
ईश्वर की बनाई गयी परिस्थितियां
और मानव जीवन में घटित काल और कर्म
जो दिखता तो नहीं है मगर सब कुछ दिखला देता है
*
*
विचार सन्दर्भ : माया
शक्ति सोनी : नेपाल : छाया
*
कृष्णा : सावधान सखि ! सार्वजनिक रूप से
कथित अपमानित, मर्मभेदी शब्दों के बाण से आहत मन में
कही न कहीं प्रतिशोध, संकट व आशंकाओं के बादल मंडराते ही रहते हैं
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मीराकृष्ण : जीवन दर्शन : शब्द चित्र : दृश्यम : मेवाड़ : डेस्क : पृष्ठ : १ / ३.
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मीरा डेस्क.
मेवाड़ डेस्क.जयपुर.
प्रादुर्भाव वर्ष : १९८२.
संस्थापना वर्ष : १९८९. महीना : सितम्बर.दिवस : ९.
*
संपादन.
शक्ति.जया अनीता सेजल
*
साची कहूं तुमसे.
*
योगः कर्मसु कौशलम्
*
बुद्धियुक्तो जहातीह उभे सुकृतदुष्कृते.
तस्माद्योगाय युज्यस्व योगः कर्मसु कौशलम्.
*
अर्थ : समत्व बुद्धि से युक्त मनुष्य इस लोक में
पुण्य और पाप दोनों का इसी जन्म में त्याग कर देता है अर्थात उनसे मुक्त हो जाता है .
इसलिए तुम इस समत्व रूप योग में लग जाओ, क्योंकि कर्मों में कुशलता ही योग है.
*
गीता : अध्याय : २ : श्लोक : ५०.
*
देख मुझे सब है पता
सुनता है तू मन की सदा
*
विशेष, संवेदनशील, दिव्य द्वैत प्रेम पूर्ण मैत्री ही सर्वोच्च है
जिसमें इच्छा रखने वाले सदैव मौन ही रहते है.... सुदामा की तरह
बिना बोले ही अपने प्रिय की अभिलाषा पूर्ण कर देते हैं, ....माधव की तरह
*
*
जिंदगी और कुछ भी नहीं
*
जिंदगी और कुछ भी नहीं
बस आपके ही समझ, संयम ,सत्कर्म ,सदव्यवहार और शब्दों से
लिखी आपकी ही कहानी है कि आप इसे किस तरह लिखते हैं ?
*
शोध विचार @ शक्ति. श्रद्धा मधुप भारती
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सम्पादकीय शक्ति पृष्ठ : २.
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*
नैनीताल डेस्क.
शक्ति. डॉ.राखी मानसी प्रीति
*
त्रिशक्ति
कार्यकारी सम्पादिका.
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©️®️M.S.Media.WCP. 95/13/24/ 26 * मुक्तेश्वर.नैनीताल डेस्क. शक्ति.डॉ.सुनीता रंजिता मीना. |
*
त्रिशक्ति
कला सम्पादिका.
*
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त्रिशक्ति सम्पादकीय शक्ति दर्शन : दृश्यम : पृष्ठ : २.
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प्रार्थना आस्था और कर्म : १
स्वाधीनता : स्वयं : सार्थकता : २.
©️®️M.S.Media.WCP.Seema.Ranjita.Sunita.
*
हम छ : सन्दर्भ विचार माया : छाया शक्ति. डॉ.सुनीता सीमा फरहीन प्रियांशी रंजीता प्रेरणा.
*
शिव शक्ति ,सोना सज्जन, साधु जन की आजादी ,मानसिक संकीर्णता से आजादी ,
सद विचारों में नकारात्मक भावों से आज़ादी , तथा वास्तव में स्वस्थ मन,
सम्यक साथ , कर्म और वाणी में ही स्वअधीन सम्यक समाज व संसार का अभिप्राय है, ..प्रिय
*
शोध विचार @ शक्ति शालिनी मधुप रेनू.
*
समय निश्चित है, होना या न होना भी सम्भाव्य ही है,
लेकिन क्या हमारे दृढ़ और सार्थक प्रयास से यह सम्भव नहीं कि हम
कि हम अनहोनी को होनी या होनी को अनहोनी कर दें
*
शोध विचार @ शक्ति शालिनी मधुप रेनू.
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सम्पादकीय : त्रिशक्ति : गोरी साँवरे सलोनी : गद्य संग्रह : आलेख : पृष्ठ : २ / २.
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संपादन
शक्ति. नीलम प्रीति रीता
पुणे डेस्क.
*
शक्ति. आलेख. ४ / ४.
रक्षा बंधन : रक्षा सूत्र के सही मायने.
*
येन बद्धो बली राजा दानवेन्द्रो महाबलः।
तेन त्वाम् अभिबध्नामि रक्षे मा चल मा चल॥
*
शक्ति.शालिनी मधुप रेनू
सत्य, धर्म व आर्य गुणों व जनों से बंधे व उन्हें अपने देव तुल्य व्यवहार से बांधे :परंपरा से अलग हटे। सोच विकसित करें। एक दिन ही नहीं सोना सज्जन ,साधु जन, शिव शक्तियों व पर्यावरण को संरक्षित करें। धर्मो रक्षति रक्षितः के निमित सम्यक साथ, सोच और धर्म के कच्चे धागे रक्षा सूत्र से स्वयं बंधे और दूसरों को भी बांधे। प्रश्न है किसकी रक्षा ? श्रेष्ठ जनों की सुरक्षा, शिव शक्तियों का संरक्षण, जो कोई भी हो सच ,प्रेम ,करुणा , दया , क्षमाशीलता ,सहन व समझ शक्ति रखते हो उनकी विशेषतः रक्षा होनी चाहिए।
| फोटो : पत्नी इंद्राणी शची ने पति देवराज इंद्र को बांधा रक्षा सूत्र |
गुरु बृहस्पति की सलाह: तब इंद्र ने अपने गुरु बृहस्पति से उपाय पूछा। गुरु बृहस्पति ने श्रावण पूर्णिमा के दिन वैदिक मंत्रों से एक रक्षा पोटली : धागा तैयार करवाकर इंद्राणी द्वारा इंद्र की दाहिने कलाई पर बंधवाने को कहा।
उनकी पत्नी इंद्राणी शची ने पौराणिक कथाओं के अनुसार, देवराज इंद्र को रक्षा सूत्र पत्नी इंद्राणी में बांधा था। *
' तुम्हारे विश्व विजय के कामनार्थ, मैं तुम्हें कच्चे धागे से सम्यक सोच ,शब्द ,साथ , सतकर्म व सम्यक संसार निर्माण के लिए पवित्र और प्रेम के चिर स्थायी, दिव्य मजबूत रक्षा सूत्र : बांधती हूँ। हे रक्षासूत्र ( रक्षे ) ! तुम स्थिर रहना और अपने संकल्प से कभी विचलित मत होना। आप रक्षित रहें तथा सर्वदा धर्म की रक्षा करें ...' शची, इंद्राणी .
इस पवित्र रक्षा सूत्र के प्रभाव से देवराज इंद्र को युद्ध में विजय मिली और उनका खोया हुआ राज्य वापस मिल गया।
सम्यक संकल्प से कभी विचलित मत हो : सदियों पुरानी बात है। अम्मा के समय से ही पंडित जी आते रहे। रक्षा बंधन,सत्य नारायण पूजा व विजयादशमी के दिन दाहिने हाथ में कुछ मंत्रो उच्चारण करते हुए एक लाल कच्चा धागे बांधते थे। वो मन्त्र अब याद करता हूँ। ..येन बद्धो बली राजा दानवेन्द्रो महाबलः।
इसकी सरल हिंदी व अर्थमंत्र का भाव कुछ इस प्रकार है :" जिस प्रकार रक्षा सूत्र से दानवों के महाबली और दानी राजा को बांधा गया था, उसी पवित्र और मजबूत धागे से मैं तुम्हें बांधती / बांधता हूँ। हे रक्षासूत्र ( रक्षे ) ! तुम स्थिर रहना और अपने संकल्प से कभी विचलित मत होना।"
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| छोटू कृष्णा : फ़ोटो : डॉ. सुनीता सीमा अनभूति |
स्वयं मेरा रक्षा बंधन : छोटू कृष्णा के साथ : मैंने अपना रक्षा बंधन एक ढाई साल के छोटू कृष्णा से बंधवाया। अभी ठीक से बोलते भी नहीं है। सिर्फ़ जाऊ, माउ, काऊ ही बोलते है। बच्चे मन के सच्चे होते हैं। भाव यह है कि बच्चों का हृदय एकदम पवित्र, छल-कपट से रहित और भगवान के समान निर्मल होता है। निर्मलता और पवित्रता बच्चों का मन शीशे की तरह साफ होता है। उनके मन में किसी के प्रति कोई द्वेष या बुराई नहीं होती।
छल - कपट से दूर वे जो महसूस करते हैं, वही कहते हैं। उनके व्यवहार में कोई दिखावा या झूठ नहीं होता। बच्चों में अमीर-गरीब, जात-पात या ऊंच-नीच का कोई भेद नहीं होता। वे हर किसी से प्रेम करना जानते हैं। ईश्वर का रूप उनकी मासूमियत और सच्चाई ही उन्हें भगवान के सबसे करीब मानती है। उनसे स्पर्शित कच्चे धागे या रक्षा सूत्र से स्वयं के बांधे जाने का तात्पर्य अपने अंतर्मन के निर्मलता, छल - कपट भाव से दूर होना, सहन व समझ शक्ति और पवित्रता को संरक्षित करना है।
*
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अनुभाग : २ : परम्पराएं रक्षा बंधन की.
राजा बलि : देवी लक्ष्मी : और नारायण
पौराणिक कथा . वामन अवतार और राजा बलि का दान : पौराणिक कथा के अनुसार, असुरों के राजा बलि बहुत दानवीर और शक्तिशाली थे। उन्होंने अपने १०० यज्ञ पूरे कर स्वर्ग पर अधिकार करने का प्रयास किया।
तब देवताओं की रक्षा के लिए भगवान विष्णु ने वामन अवतार बौने ब्राह्मण का रूप धारण किया और राजा बलि से भिक्षा में तीन पग भूमि मांगी। राजा बलि ने हां कर दी। भगवान ने दो ही पग में पूरी धरती और आकाश नाप लिया। तीसरा पग रखने के लिए जब कोई जगह नहीं बची, तो राजा बलि ने अपना सिर भगवान के आगे झुका दिया।
भगवान विष्णु बने पाताल लोक में राजा बलि के पहरेदार : भगवान विष्णु बने पाताल के पहरेदार राजा बलि के इस परम दान और भक्ति से भगवान विष्णु अत्यंत प्रसन्न हुए। उन्होंने बलि को पाताल लोक का राजा बना दिया और उनसे एक वरदान मांगने को कहा। राजा बलि ने वरदान में मांगा कि भगवान विष्णु हमेशा उनके सामने प्रत्यक्ष रहें और उनके महल के पहरेदार बनकर रहें।
| फोटो राजा बलि : देवी लक्ष्मी : रक्षा बंधन |
उन्होंने कहा कि आप राजा बलि को अपना भाई बना लीजिए और उपहार में भगवान विष्णु को मांग लीजिए।
तब देवी लक्ष्मी ने बांधी राखी राजा बलि को : नारद जी की सलाह पर माता लक्ष्मी ने एक साधारण गरीब महिला का रूप धारण किया और पाताल लोक में राजा बलि के पास पहुंचीं। श्रावण मास की पूर्णिमा के दिन माता लक्ष्मी ने राजा बलि की कलाई पर एक पवित्र रक्षा सूत्र (राखी) बांधा और उन्हें अपना भाई माना।
बलि को राखी बांधने के बाद उपहार में मांग लिया देवी लक्ष्मी ने नारायण की मुक्ति : जब राजा बलि ने अपनी बहन लक्ष्मी से कुछ उपहार मांगने को कहा, तो देवी लक्ष्मी ने अपने असली रूप में आकर उंगली से द्वारपाल की तरफ इशारा किया और कहा कि वे भगवान विष्णु को उपहार स्वरूप वापस चाहती हैं।
राजा बलि ने अपनी बहन को दिया वचन निभाया और भगवान विष्णु को उनके बंधन से मुक्त कर वैकुंठ वापस भेज दिया।जाते-जाते भगवान विष्णु ने बलि को आशीर्वाद दिया कि वे हर साल चार महीने या चातुर्मास पाताल लोक में उन्हीं के पास निवास करेंगे।
*
संपादन : शक्ति. मानसी डॉ. सुनीता सीमा
सज्जा : मंजिता स्वाति अनुभूति.
शक्ति. आलेख : नाग पंचमी यानी पचईंया
कजरी और सावन.
*
कजरी : गीत : दृश्यम : साभार. कइसे खेले जइबू सावन में कजरिया बदरिया घेरी आइल ननदी...!
*
पचईंया : एक त्योहार नहीं, बचपन की पूरी दुनिया
शक्ति. आलेख.
शक्ति. शालिनी
सह अनुभूति मधुप
लेखिका.कवयित्री. सम्पादिका.
कजरी सावन की फुहारों में भीगी लोक संवेदना है : डॉ.आर के दुबे कहते है कजरी सावन की फुहारों में भीगी, विरह की पीड़ा और मिलन की मधुर आशा को स्वर देती लोक - संवेदना की अनमोल धरोहर है। इसकी लय में नदियों-सी कोमलता, बादलों-सा गाम्भीर्य और मन की अनकही भावनाओं की सजीव छवि मिलती है।
पूर्वी भारत की धरती से उपजी यह गायन-परंपरा कभी झूले की मस्ती बनती है, तो कभी प्रिय-वियोग की करुण पुकार। कजरी का प्रत्येक सुर वर्षा,श्रृंगार और लोकजीवन की सादगी को एक साथ पिरोकर मन में भीगी हुई-सी मिठास छोड़ जाता है।
कजरी भारत के उत्तर प्रदेश विशेषकर मिर्जापुर, वाराणसी, अवध और बिहार क्षेत्र का एक बेहद लोकप्रिय वर्षा ऋतु का लोकगीत है। यह मुख्य रूप से सावन के महीने में महिलाओं द्वारा झूला झूलते समय, तीज के त्योहार पर या रिमझिम बारिश के दौरान गाया जाता है।
गाँव के नीम और आम के पेड़ों पर पड़ते झूले : कुछ त्योहार कैलेंडर की तारीख नहीं होते, वे हमारी स्मृतियों में बसे पूरे संसार का नाम होते हैं। भोजपुरी अंचल की नाग पंचमी यानी पचईंया भी ऐसा ही एक पर्व था। पचईंया की सुबह घर-आँगन की सफाई, नागदेवता की पूजा और दूध-लावा छिड़कने की परंपरा से शुरू होती थी। रसोई में बनते पारंपरिक पकवानों की खुशबू पूरे घर को उत्सव में बदल देती थी।
फिर गाँव के नीम और आम के पेड़ों पर पड़ते झूले..बच्चों की किलकारियाँ..और सबसे मधुर..महिलाओं की सामूहिक कजरी.. एक कंठ से उठता हुआ सुर धीरे-धीरे कई कंठों में घुल जाता था। कइसे खेले जइबू सावन में कजरिया बदरिया घेरी आइल ननदी...!
कजरी : गीत नहीं खुशी, विरह, प्रेम, मायके की याद : कजरी केवल गीत नहीं थी : वह गाँव की स्त्रियों की खुशी, विरह, प्रेम, मायके की याद और लोकजीवन की जीवन्त अभिव्यक्ति थी। उधर बच्चे दिनभर झूले और खेलों में मस्त रहते, तो युवाओं के लिए मैदान में कबड्डी का रोमांच चरम पर होता। दो टीमों के बीच जीत-हार की जोरदार टक्कर और चारों ओर खड़े बुजुर्गों की निर्णायक भूमिका. प्रतिस्पर्धा होती थी, पर मन में कटुता नहीं..
आज समय बदल गया है। मोबाइल ने मैदानों की जगह ले ली, व्यस्तता ने चौपालों को छोटा कर दिया और स्थानीय पर्वों से जुड़े अवकाश भी कम होते गए।
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| राधिका कृष्ण झूले में : GIF |
कजरी और सावन : पचईंया की छुट्टी में बच्चे गाँव लौटते थे, परिवार के सभी लोगों से मिलते थे, महिलाएँ कजरी गाती थीं, झूले पड़ते थे, कबड्डी होती थी और एक पूरी पीढ़ी अपनी संस्कृति को जीकर सीखती थी।
हर लोकपर्व को राजकीय अवकाश मिले, यह संभव न हो; लेकिन क्या स्थानीय संस्कृति के ऐसे पर्वों के लिए वैकल्पिक अवकाश या सांस्कृतिक आयोजन का कोई रास्ता नहीं निकाला जा सकता..?
क्योंकि... देश की संस्कृति केवल बड़े त्योहारों से नहीं बनती; वह उन छोटे-छोटे लोकपर्वों से भी बनती है, जिन्हें महिलाएँ गीतों में, बच्चे खेलों में और बुजुर्ग अपनी स्मृतियों में सँजोकर रखते हैं।
आइए, पचईंया को केवल याद न करें बल्कि उसे फिर से जीने का प्रयास करें. फिर कभी किसी नीम पर झूला पड़े, किसी आँगन से कजरी की आवाज आए,
मैदान में कबड्डी की हुंकार गूँजे और किसी बच्चे की आवाज सुनाई दे... अम्मा! आज पचईंया हऽ… आज त पूरा दिन खेलब ! ” तब समझिएगा... पचईंया खत्म नहीं हुई थी, हमने बस उसे कुछ समय के लिए भुला दिया था.
*
स्तंभ सज्जा संपादन : डॉ.आर के दुबे.
शक्ति. रंजिता मंजिता रेनू.
८० वें स्वाधीनता दिवस.
शक्ति आलेख : स्व अधीनता का वास्तविक अर्थ
शक्ति. शालिनी मधुप सीमा
सह शक्ति आरती अरुण अनुभूति
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भारतीयता के प्रतीक तीन रंग राष्ट्रीय एकता, अखंडता, सम्प्रभूता नौनिहाल : पेंटिंग : शक्ति. अनुभूति मधुप रितु |
८० वें स्वाधीनता दिवस की समस्त भारतवासियों को हार्दिक बधाईयां एवं शुभकामनाएं कि हमारा सम्प्रभूता सम्पन्न, स्वाधीन और स्वतंत्र भारत का परचम विश्व पटल पर लहराता रहे और हम सगर्व भारत माता की जय घोष करते रहें।
स्व अधीनता का वास्तविक अर्थ : स्वाधीनता का वास्तविक अर्थ है अपने अधीन होना यानी खुद पर अपना शासन होना। इसका मतलब सिर्फ विदेशी शासन या गुलामी से छूट पाना नहीं है, बल्कि अपने फैसले स्वयं लेना, विचारों की आज़ादी होना और देश व समाज से गरीबी, डर, भेद-भाव और कमियों को दूर करना है।
आजादी हमारी विरासत है। प्रगति हमारी जिम्मेदारी है। इस स्वतंत्रता दिवस पर, हम एक ऐसे देश की भावना का जश्न मनाते हैं जो आगे बढ़ता रहता है, मजबूत होता है और एक उज्जवल कल को आकार देता है।
राजनीतिक : आर्थिक : सामाजिक और सांस्कृतिक स्वाधीनता : राजनीतिक स्वाधीनता : देश का शासन बाहर के लोगों के हाथ में न होकर खुद देश के नागरिकों या उनकी चुनी हुई सरकार के हाथ में होना।
आर्थिक स्वाधीनता : देश और उसके लोगों का इतना मजबूत होना कि वे अपनी ज़रूरतें खुद पूरी कर सकें। इसमें गरीबी और भुखमरी से आज़ादी शामिल है।
सामाजिक और सांस्कृतिक स्वाधीनता : समाज में हर इंसान को बराबरी का हक मिलना। जाति, धर्म या लिंग के आधार पर किसी के साथ भेदभाव न होना और अपने विचारों को खुलकर रखने की छूट होना।
व्यक्तिगत स्वाधीनता : एक आम इंसान को अपनी पसंद की ज़िंदगी जीने, आगे बढ़ने और अपने अधिकारों का सही इस्तेमाल करने की आज़ादी मिलना।
भारतीयता के प्रतीक तीन रंगों राष्ट्रीय एकता, अखंडता, सम्प्रभूता : भारत भूमि पर हम सब भारतीयता के प्रतीक तीन रंगों के रसों में डूबकर सराबोर होते रहें और राष्ट्रीय एकता, अखंडता, सम्प्रभूता को अक्षुण्ण बनाए रखने में अपना सर्वस्व न्यौछावर करने के लिए तत्पर रहें।
कोई भी राष्ट्र अपनी राष्ट्रीय गरिमा की रक्षा वहां के समर्पित और निष्ठावान नागरिकों के बल पर ही करता है या हम इसे ऐसे भी कह सकते हैं कि समर्पित, निष्ठावान,बलिदान भावनाओं से अनुप्राणित नागरिक ही उस राष्ट्र की गरिमा,एकता,अखंडता, सम्प्रभूता और राष्ट्रीय मोल एवं मूल्यों के रक्षक और प्रहरी होते हैं कि कोई भी राष्ट्र जाति,वर्ग, मत,पंथ, विचार,विश्वास, सम्प्रदाय आदि के भाव और विचारों से बहुत ऊपर होता है और यही राष्ट्रभक्ति और राष्ट्र सेवा है।
दो पंक्तियां आपके सादर अवलोकनार्थ समर्पित करता हूॅं, स्वाधीन भारत की भूमि पर वन्देमातरम का जयघोष हुआ गोरों का साम्राज्य टूटा भारत ने हुंकार किया सपनों में जो देखा था उस स्वाधीन भारत का निर्माण हुआ जय हिन्द जय भारत जय मातृभूमि।
टुटी बेड़ियां उस दासता की
१५ अगस्त को हम स्वाधीन हुए
एक तंत्र बना २६ जनवरी को और हम स्वतंत्र हुए
१५ अगस्त वो दिन था जिसने नया सबेरा लाया
यूनियन जैक नीचे उतरा तिरंगा शान से लहराया
कटी गुलामी की जंजीरें अस्तित्व हमारा स्वाधीन हुआ.
*
स्तंभ सज्जा संपादन :
शक्ति मंजिता रेनू नीलम
शक्ति. आलेख : सावन शिव और शक्ति विशेष.
*
शिव: ब्रह्माण्डीय ऊर्जा और चेतना, मानवीय संवेदना, चेतना,सेवा और त्याग.
सृजन,लय और प्रलय की सत्ता
शक्ति. आरती अरुण आस्था
और क्या क्या नहीं हैं ? शिव : शिव कोई हिन्दूओं के आराध्य भर थोड़े हैं ? शिव तो अखिल ब्रह्माण्डीय ऊर्जा और चेतना हैं, सृष्टि के अधिष्ठान केन्द्र हैं, सृजन की मूल अवधारणा अर्द्धनारीश्वर हैं। ब्रह्माण्डीय ज्ञान के प्रतीक नटराज हैं, योग ध्यान और समाधि के प्रवर्तक हैं, कालजयी महाकाल हैं। नृत्य संगीत के मूल सूत्र हैं, सृजन काल में आनन्द तांडव और विनाश काल में रूद्र तांडव हैं, धैर्य,सहिष्णुता,कष्ट उद्धारकर्ता के प्रतीक हैं।
सुर असुर, देव दानव, यक्ष, गंधर्व, किन्नर एवं समस्त जीवों के पूज्य और आधार हैं, सृजन,लय और प्रलय के मूल स्रोत हैं,योगी, दार्शनिक, वैद्य, प्रेमी और कुटनीतिज्ञ भी हैं, ऊॅंकार प्रणव और अमर्त्य विद्या के ज्ञाता हैं और क्या क्या नहीं हैं ?
शिव जितने सीधे सरल नहीं है सब देव शक्ति : हिन्दू समाज के सब देवी देवता इतने सहज सरल नहीं हैं जितने शिव हैं। न पीताम्बर चाहिए न स्वर्णाभूषण, न रथ चाहिए न सुख सुविधा, न श्रृंगार चाहिए न छप्पन भोग। पाषाणी चट्टानों पर व्याघ्र चर्म का बिछावन और दीगम्बरा जीवन शैली, कोई कर्मकाण्ड या आयोजन के आकांक्षी नहीं बस यह संदेश देने वाले कि शिवोहम् शिवोहम् शिवोहम् के भाव को हृदय में धारण किए रहिए।
अर्थात् सबके कल्याण की भावना हृदय में स्थापित किए रहिए,यही शिव पूजा और आराधना है। वैसे इनके कर्मकाण्ड भी कितने महंगे हैं,बस एक लोटा जल और पांच विल्वपत्र ,बस यही तो भाव उन्हें महायोगी और महादेव बनाता है।
चमत्कार यह है कि इनके जितने नाम रखे गए हैं, सबके तथ्य और सत्य भाव भी हैं जैसे हम एक नाम नीलकंठ को ही ले लें, सागर मंथन में जो बहुमूल्य थे देवताओं ने हड़प लिए इसके पीछे देवत्व और सृष्टि की रक्षा के उद्देश्य हैं
भोले ओ भोले : तूने कैसे विष पी लिया : पर बारी जब हलाहल या कालकूट ब्रह्माण्डीय विष के लेने की आयी तो दोनों तरफ त्राहिमाम हो गए, अब उसका पान न किया जाए तो जीवन खत्म हो जाए तब सबने महादेव से विनम्र याचना की।
महादेव तो महादेव हैं ब्रह्माण्डीय चेतना और ऊर्जा जिसमें विष और अमृत सब समाहित हैं ,कैसा भय, उठाए और पीना शुरू कर दिए। इसी क्षण शक्ति उमा ने कुछेक कारणों से जोर से टोका, तबतक हलाहल उनके कंठ तक पहुंच चुका था। ऊर्जा को रूपांतरित ही तो करना था, उसके प्रभाव को योगबल से जड़ बनाकर कंठ में ही रख लिए पर असर तो कहीं न कहीं होना ही था, सारा कंठ नीला हो गया।
सृष्टि उस हलाहल के विनाश से बच गयी, परन्तु शिव नीलकंठ बन गए।
गतांक से आगे : १
शुभम् करोती शिवम् भवति,
*
शक्ति. आलेख : सावन शिव और शक्ति विशेष.
*
शक्ति. आरती अरुण आस्था
सर्न प्रसिद्ध नाभीकीय अन्वेषण केन्द्र के मुख्यालय के मुख्य द्वार पर नटराज की प्रतिमा क्यों ? बड़ा विस्मयजनक विस्तार है जिसकी व्याख्या आज क्वांटम भौतिकी कर रहा है और पुरी दुनिया का सबसे प्रसिद्ध नाभीकीय अन्वेषण केन्द्र सर्न के मुख्यालय के मुख्य द्वार पर नटराज की प्रतिमा लगा रखी है।
हैं न शिव अद्भुत और इनका अद्भुत होना ही इस ब्रह्माण्डीय सत्ता का सत्य है।
शिव शब्द सत्ता और सत्य है : शिव शब्द आदि अनादि काल से कल्याणकारी सत्ता और सत्य है। जिनके मन, हृदय, मस्तिष्क और समस्त चेतना में सर्व कल्याण की भावना अवस्थित है, वही शिव है जिनकी सत्ता समस्त मत,पंथ, विचार, विश्वास आदि से इतर और परे है। समस्त संकीर्ण भावों, विचारों आदि से परे यह परम चेतना, सेवाभाव,त्याग, क्षमा,अपारिग्रह,प्रेम, करुणा, देवत्व और सहज मानवीय संवेदनाओं के प्रतीकात्मक सत्ता हैं। इन्हें उन्मुक्त और त्रिकाल बाधित, सतत् प्रवाहमान,जन्म,मरण और शाश्वत सनातन ऊर्जा और चेतना के रूप में देखने नहीं, अवलोकन करने की जरूरत है।
ऐसे तो वैश्विक स्तर पर जब शिव सत्ता का अवलोकन और विश्लेषण किया जाता है तब मानवीय सभ्यता, संसार और संस्कृति की एतिहासिक यात्रा में शिव कहीं न कहीं किसी न किसी रूप में द्रष्टव्य हैं भले ही सैंधव सरस्वती सभ्यता में तो पाशुपत शिव : उनका नाम, प्रतीकात्मक चिह्न कुछ भी हो पर उनकी सत्ता शाश्वत और सनातन है।
सैंधव सरस्वती सभ्यता में तो पाशुपत शिव के रूप ई पू ५ से ६ हजार साल पूर्व में उपलब्ध और पूजित हैं। इससे हजारों वर्ष पूर्व म प्र के भीम बेटका की गुफाओं की भित्ति चित्रों में एक नृत्य करती, त्रिशूल धारी
आकृति के रूप में मौजूद हैं जिनकी प्राचीनता कार्बन डेटिंग और अन्य पडतालों में लगभग बीस से पच्चीस हजार वर्षों पुराना बताया जा रहा है। हो सकता है कि तत्कालीन मनुष्यों ने किसी ऐसी सत्ता का या तो अनुमान लगाया या साक्षात्कार किया हो,अगर अनुमान या कल्पना ही हो तो अनुमान आधारहीन नहीं होते हैं कि उनके पीछे भी सत्य का अंश होता है, अनुभूतियां होती हैं। अब हम इस शिव सूत्र का अवलोकन करें और कारण कार्य के ब्रह्माण्डीय नियम और क्वांटम भौतिकी के साथ इसका समन्वय कैसे होता है,हो रहा है।
शुभम् करोती शिवम् भवति : सूत्र है, शिवं करोति शुभम् भवति शुभम् करोती शिवम् भवति, शाब्दिक व्यूत्पत्ति और उसके अर्थ के अनुसार यह होता है कि जो शिव तत्त्व ( कल्याणकारी भाव की इच्छा करता है या कल्याणकारी कार्य करता है, वहां शुभ घटित होता है और मनुष्य जब निरन्तर शुभ कर्म करता है तब वह स्वयं शिव हो जाता है।
यही तो शिव,शिवत्व और शिव तत्व है जो सभी भावों बन्धनों से हमें मुक्त कर विराट और अनन्त की ओर ले जाने के मार्ग को प्रशस्त करता है।
*
सज्जा व संपादन
शक्ति. शालिनी रंजिता सीमा
गतांक से आगे : २ अंतिम क़िस्त
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शुभम् करोति कल्याणमारोग्यम् धन सम्पदा
शक्ति. आलेख : सावन शिव और शक्ति विशेष.
*
शक्ति. आरती अरुण आस्था
*
![]() |
| * प्रकृति : शिव : बागमती : काठमांडू : शक्ति : भक्ति : कोलाज कलर पेंटिंग : शक्ति सोनी मधुप अनुभूति |
*
शिव ऊर्जा है जो कारण कार्य के सिद्धान्त से जुड़कर है : आधुनिक क्वांटम भौतिकी जिस ऊर्जा के संरक्षण और रूपांतरण तथा अविनाशिता की बातें करता है,वही आध्यात्मिक दर्शन और चिन्तन में शिव ऊर्जा है जो कारण कार्य के सिद्धान्त से जुड़कर दोनों पक्षों के यथार्थ को सत्यापित करता है कि संसार आदान - प्रदान के सिद्धान्त पर चलता है, कर्म ( अच्छे बुरे) लौटकर वैसे ही हमारे पास आते हैं जैसे परछाइयां हमारा पीछा नहीं छोड़ती हैं, ठीक यही ऊर्जा संरक्षण और रूपांतरण का सिद्धान्त है। यही दर्शन कपिल मुनि के सांख्य और बौद्ध दर्शन के पटिच्चसमुप्पाद् या प्रतीत्यसमुत्पाद में देखा समझा जाता है।
शिव अविनाशी ऊर्जा के प्रतीक सत्य और सत्ता हैं और शुभ अशुभ कर्मों से उत्पन्न फलाफल को प्रक्षेपित और रूपांतरण करने वाले हैं अर्थात् हमारे शुभ अशुभ कर्मों की ऊर्जा शिव हैं, इसलिए शुभ कर्मों के ही चयन किए जाने चाहिए।
कश्मीर शैव मत शुभ कल्याणकारी विकल्पों की ओर : कश्मीर शैव मत के शिव सूत्र और स्पन्दकारिका में यह स्वीकार किया गया है कि मानवीय चेतना जब शुभ कल्याणकारी विकल्पों की ओर अग्रसर होती है तब वह अन्ततः वह उसी शिवत्व : परम चेतना / ऊर्जा / प्रकाश ) में समाहित होकर समावेशित हो जाती है जैसे नदियां सागर में मिलकर सागर ही हो जाती हैं। सांसारिक जगत में भी एक शिव सूत्र की मान्यता है कि,
शुभम् करोति कल्याणमारोग्यम् धन सम्पदा
अर्थात् शुभ कर्म और कल्याण करने वाले कल्याण,आरोग्य,सुख आनन्द और भौतिक सम्पदाओं के भोग के अधिकारी होते हैं। इसलिए शिव सत्ता स्थूल सूक्ष्म और कारणिक है जिनमें सम्यक् समन्वय और संतुलन ही मुक्ति मोक्ष, कैवल्य और निर्वाण का मार्ग है। निष्कर्ष रूप में शिव की व्याख्या नहीं की जा सकती है कि शिव ही प्रेम,करुणा,क्षमा,त्याग,
भोग,मुक्ति, सृजन ,लय और प्रलय की सत्ता और सत्य हैं। जो शब्दों से परिभाषित किया जा सके, वह अनन्त और अनिर्वचनीय नहीं हो सकता पर शिव सत्ता तो अनन्त है हरि अनन्त हरि कथा अनंता। जय शिव जय शिव जय शिव। सबके आरोग्य एवं सौभाग्य की मंगलकामनाओं के साथ
*
सज्जा व संपादन
शक्ति. शालिनी रेनू अनुभूति
शक्ति आलेख : मित्रता दिवस विशेष.
*
मेरे दिल की ये दुआ है तू दूर कहीं न जाए
शक्ति. रेनू ' शब्दमुखर '
जयपुर.
*
ये बंधन तो प्यार का बंधन है :
हम शक्ति बहनें : फोटो : शक्ति. मीना. मुक्तेश्वर.
*
मित्रता : कच्चे धागे की डोर तो ईश्वर ही बांधता है : मित्रता का भी अपना एक मौसम होता है… वह किसी कैलेंडर की तारीख़ का मोहताज नहीं होता। वह तब खिलता है, जब जीवन की धूप बहुत तेज़ हो और कोई चुपचाप आपके सिर पर स्नेह की छाँव कर दे।
पीछे मुड़कर देखती हूँ, तो लगता है-जीवन ने मुझे जितनी परीक्षाएँ दीं, ईश्वर ने उतने ही सुंदर मित्र भी दिए।
आप सब मेरे जीवन के वे अध्याय हैं, जिन्हें मैं पढ़ती नहीं… जीती हूँ।
जब अस्पताल की खामोश दीवारों के बीच मन डर से भर जाता था, तब कुमुद का सर पर हाथ, सारिका, मधुमिता का एक संदेश,जसप्रीत, अनु , विजया , लता , आरती, भारती , मोनिका की एक प्रार्थना और मित्रों की आवाज एक आवाज़ मेरे भीतर फिर से जीने का साहस जगा देती थी। जब मेरी कलम को सम्मान मिला, तो सबसे पहले तुम्हारी आँखों में खुशी खिली।
उस दिन समझ आया कि सच्चे मित्र ताली नहीं बजाते, वे दिल से दुआ देते हैं। कहते हैं, रिश्ते बनाए जाते हैं… पर मित्रता तो शायद ऊपर वाला लिखकर भेजता है।
आपकी अनुपस्थिति में भी जो आपका सम्मान बचाए रखें : हर किसी को ऐसे लोग नहीं मिलते, जो आपकी चुप्पी पढ़ लें, आपकी कमज़ोरियों को ढँक लें, आपकी अनुपस्थिति में भी आपका सम्मान बचाए रखें, और आपकी सफलता पर अपनी जीत जैसा उल्लास महसूस करें। यदि जीवन मेरी लिखी हुई एक कविता है, तो उसमें सबसे सुंदर उपमा मेरे मित्र हैं।
जीवन की सबसे अनमोल व्यक्तिगत पूँजी प्रेमपूर्ण मैत्री : यदि जीवन एक नदी है, तो उसके सबसे शांत किनारे मेरे मित्र हैं। यदि जीवन एक दीप है, तो उसकी सबसे स्थिर लौ मेरे मित्र हैं। कल आज के मित्रता दिवस पर मैं ईश्वर के सामने केवल एक प्रार्थना रखती हूँ, हे प्रभु !
यदि मेरे जीवन की कोई सबसे अनमोल पूँजी है, तो उसे कभी मुझसे दूर मत करना।
मुझे धन से अधिक मेरे मित्र प्रिय हैं, क्योंकि धन जीवन को आसान बनाता है, पर मित्र जीवन को सुंदर बना देते हैं। मेरे प्रिय दोस्तों तुम सबके लिए मेरे हृदय में जो स्थान है, उसे शब्द कभी पूरा व्यक्त नहीं कर सकते।
आप मेरे जीवन की कहानी नहीं… मेरे जीवन का विश्वास हैं।
स्नेह, कृतज्ञता और आत्मीयता सहित… आपकी अपनी दोस्त
*
शक्ति. आलेख रेनू ' शब्दमुखर ' जयपुर.
लेखिका.कवयित्री.प्रधान सम्पादिका.
*
सज्जा व संपादन
शक्ति. मंजिता रीता
*
![]() |
शक्ति. नेहा आर्य अतुल. मुन्ना लाल महेश लाल आर्य एंड संस ज्वेलर्स. बिहार शरीफ/ बरबीघा समर्थित |
-----------
सम्पादकीय : त्रिशक्ति : गोरी साँवरे सलोनी : पद्य संग्रह : आलेख : पृष्ठ : २ / ३.
-------------
संपादन
शक्ति. शालिनी डॉ. रजनी रेनू
*
शक्ति.अनुभाग.
*
शक्ति.प्रिया.
कवयित्री. लेखिका. सम्पादिका.
महाशक्ति मीडिया.अंग्रेजी अनुभाग.
दार्जलिंग.
*
भाविका
*
हरेक शख्स
परेशां सा क्यों है
*
रिश्तों की उलझनों में
मन का कोना ख़ाली सा क्यूँ है ?
किस्सें ,कहानियाँ ,
मोहब्बतों के ढ़ेर सारे अफ़सानें
दफ़न हैं बहुत सारे दिल में
फिर भी ये शख्स
परेशां सा क्यूँ है ?
*
अब भी आप पूछेंगे ?
लोग कहते हैं, झुकना नहीं,
कभी किसी के आगे रुकना नहीं.
जब बात हो अपने स्वाभिमान की,
तो फिर पीछे मुड़कर देखना नहीं.
*
![]() |
* भाविका संदर्भित माया : छाया : ९८ पेंटिंग. शक्ति. अनु : अयारपाटा : नैनीताल. |
कितना आसान होता है कहना,
' आख़िर करती ही क्या हो तुम ?'
' दिन भर बस घर में रहती हो,'
कह देना कितना आसान है यूँ.
*
कितना आसान होता है कहना,
| * भाविका संदर्भित माया : छाया : पेंटिंग. शक्ति.प्रिया . दार्जलिंग . |
पर कलम उठाऊँ तो थमती नहीं,
दिल की बातें यूँ छिपती नहीं.
पन्ने ख़त्म हो जाते हैं मगर काम नहीं,
स्याही सूख जाती है, मगर जज़्बात नहीं.
*
सुबह की किरण से रात के अँधियारे तक,
हर पल निभाती हूँ अपना हर फ़र्ज़.
अपनों की ख़ुशियों में ख़ुद को भुलाकर,
हर दर्द सहती हूँ चुपचाप हर वक़्त.
ज़िम्मेदारियाँ गिनने बैठूँ अगर,
शब्द भी शायद कम पड़ जाएँ.
उम्र गुज़र जाए लिखते-लिखते,
फिर भी किस्से पूरे न हो पाएँ.
अब भी आप पूछेंगे, " क्या करती हो ?"
तो बस मुस्कुराकर इतना कहूँगी
जो नज़र नहीं आता दुनिया को,
वही सबसे ज़्यादा करती हूँ.
*
अनुवादित : अंग्रेजी से हिंदी में
*
सज्जा संपादन.
शक्ति.शालिनी मधुप अनुभूति
*
*
कवयित्री लेखिका
*
भाविका
रेशम की डोरी.
कलाई पर बँधा यह धागा रेशम का नहीं, विश्वास का होता है.
इसमें बहन की आँखों में छिपी वह निःशब्द प्रार्थना भी…
कि समय चाहे कितना ही बदल जाए,
भाई के स्नेह की छाँव कभी कम न हो.
रक्षाबंधन केवल रक्षा का वचन नहीं,
शक्ति. रेनू शब्द मुखर : भाई : रक्षा बंधन
*
*
यह उस प्रेम का उत्सव है
जो अधिकार नहीं माँगता,फिर भी जीवन भर साथ निभाता है.
ईश्वर करे हर कलाई पर बँधा विश्वास अटूट रहे,
हर आँगन रिश्तों की खुशबू से महकता रहे,
और हर बहन की मुस्कान उसके भाई की सबसे बड़ी ताक़त बनी रहे.
सुनो खिड़की खुली रहने दो
*
शक्ति सोनी : माया : प्रेम पर्वत : नेपाल
*
*
मत बंद करो हर खिड़की को.
कुछ हवाएँ बिना बुलाए भी अच्छी लगती हैं.
कुछ लोग भी.
तुम्हारे आने के बाद मैंने सीखा,
कि प्रेम अधिकार नहीं, विश्वास है.
वह खुली खिड़की है,
जहाँ से रोशनी भी आती है और ताज़ी हवा भी.
जिसे बाँधने की कोशिश करो, तो वह प्रेम नहीं रहता.
*
भाविकाएँ
प्रेमचंद जयंती विशेष : ३१ जुलाई
*
प्रेमचंद.
*
मुंशी प्रेमचन्द.
हिन्दी कथा साहित्य के अद्भुत चितेरे :
उपन्यास सम्राट : कलम के सिपाही की १४६ वीं जयन्ती.
*
धुन : मेरे तुम्हारे बीच में अब तो न पर्वत न सागर
अब आन मिलो सजना अब आन मिलो.
शक्ति. स्मिता.
जन्मदिन विशेष की ' हम ' ' देव शक्ति ' परिवार की तरफ़ से
गांधारी : तप दृष्टि : कदली : दुर्योधन
*
*
स्याही से नहीं, संवेदनाओं से लिखते थे,
सूखी आँखों में भी सपनों के दीपक दिखते थे.
झोपड़ियों का दर्द लिखा,
महलों का अभिमान लिखा,
भूखे बच्चे , रोती माँ, किसानों का अरमान लिखा.
कलम उनकी तलवार बनी,
सच का खुला ऐलान बनी,
अन्यायों के अँधियारों में
आशा की पहचान बनी.
*
ईदगाह में हमीद हँसा,
पूस की रात में हल्कू जागा,
गोदान का होरी अब भी हर खेत -खलिहान में भागा.
वे कहते थे मनुष्य बड़ा है, धन नहीं,
सचाई से बढ़कर कोई वचन नहीं
*
*
आज अगर वे फिर आ जाते,
क्या क्या दृश्य उन्हें दिख जाते !
मोबाइल में खोया बचपन,
रिश्तों का सूना आँगन,
कृत्रिम बुद्धि का बढ़ता युग,
लेकिन घटता मानव जोवन.
*
प्रेमचंद
कहीं न कपट का व्यापार
*
कहीं प्रदूषण, कहीं अवसाद,
कहीं न कपट का व्यापार
शायद फिर लिखते प्रेमचंद जागो, अभी है सहो
उनकी कलम आज भी कहती इंसानियत मत हारों
सच श्रम प्रेम और रुणा से अपना भारत सँवारो
तुम.प्रेमचंद केवल नाम नहीं
जन जन की आवाज हैं.
जब तक अन्याय रहेगा जग में
तब तक वह जीवित आज है.
आओ उनकी राह चले सत्य का दीपक जलाएं हम
शब्द नहीं जीवन लिखें यही प्रेमचंद को श्रद्धांजलि दे हम
*
सज्जा संपादन.
शक्ति.शालिनी मधुप अनुभूति
*
*
शक्ति.
अनुभाग
चाँद मेरी खिड़की पर
आज फिर चाँद मेरी खिड़की पे
ठहर आया है,
जैसे कोई भूला अफ़साना
नज़र आया है.
रात चुप थी, मगर एहसास
बहुत बोल उठे,
दिल के वीरान मकाँ में
कोई घर आया है.
मैंने परदे की झिरी से
उसे देखा चुपके,
जैसे बरसों बाद कोई
हमसफ़र आया है.
उसकी चाँदी -सी किरन
रूह तलक उतरी है,
आज सुकूतों में भी इक
नया स्वर आया है.
न कोई ख़त, न कोई नाम,
न कोई पैग़ाम,
फिर भी लगता है कि
कोई ख़बर लाया है.
*
*
मेरी तन्हाई ने जब ओढ़ ली
रातों की रिदा,
मेरी तन्हाई ने जब ओढ़ ली
रातों की रिदा, ( चादर )
चाँद बनकर कोई ख़्वाबों में
उतर आया है.
मैंने पूछा कि सफ़र
कैसा रहा सदियों का,
वो मुस्कुराए कि बस
वक़्त इधर आया है.
उसकी रौशन-सी निगाहों में
अजब ठहराव,
जैसे दरिया से दूर समंदर,
मिलने आया है.
रात ढल जाएगी,
यह चाँद भी खो जाएगा
दिल को इक उम्र का
मीठा-सा असर आया है.
*
सज्जा संपादन.
शक्ति.रेनू मधुप अनुभूति
*
----------
लगी आज सावन की फिर से झड़ी है : प्रेम : पृष्ठ : ३.
---------
शक्ति.रितु मीना श्रद्धा
*
धुन : प्यार हुआ चुपके से : प्रकृति प्रेम पर्वत
धुन : पन्ना की तमन्ना है कि हीरा मुझे मिल जाए.
धुन : रिमझिम गिरे सावन सुलग सुलग जाए मन
अब आन मिलो सजना अब आन मिलो.
---------
राधिकाकृष्णरुक्मिणी : शक्ति : कला दीर्घा : पृष्ठ : ५ .
---------
*
शक्ति. मंजिता सीमा अनुभूति
शिमला डेस्क.
*
----------
उसने कहा था : शुभकामनाएं : पृष्ठ : ८ / २
----------
संपादन.
शक्ति. स्मिता.श्रद्धा. वान्या.
पाटलिपुत्र. उत्तरकाशी. इंद्रप्रस्थ.
| * ©️®️M.S.Media. WCP.Smita.07 / 24 / 26 /26. * * रचनाएं बहुत ही प्रेरणादायी रहीं हैं । दिन दूनी और रात चौगुनी तरक्की करें, यह हमारी हार्दिक शुभकामनायें हैं । सम्पादकीय : त्रिशक्ति : गोरी साँवरे सलोनी : गद्य संग्रह : आलेख : पृष्ठ : २ / २. अनुभाग अत्यंत रुचिकर व प्रभावी रहा है। * डॉ. प्रशांत सिंह. स्वास्थ्य अधिकारी. बड़ौदा. गुजरात. * यह वाकई बहुत प्रभावशाली लग रहा है ! इसकी अवधारणा और प्रस्तुति काफी आकर्षक है । कुल मिलाकर इसका रूप शानदार, रचनात्मक और प्रभावशाली है। |
छाया व रील सम्पादिका.महाशक्ति मीडिया.
प्रस्तोता : पटना दूरदर्शन.
प्रस्तोता : पटना दूरदर्शन.
*
बहुत ही शानदार पहल आपकी.
भिन्न भिन्न विषयों को समावेशित करते हुए आपका प्रकाशन सभी वर्ग के लिए लाभप्रद होता है.
बहुत बहुत बधाई एवं शुभकामनाएं आपको.
*
शक्ति.डॉ.रजनीप्रभा. महाशक्ति मीडिया सम्पादिका
प्रस्तोता : पटना दूरदर्शन.
*
आत्मीय आभार
अभिनन्दन है कि आपने शिव की अवधारणा पर हमारे आलेख को स्थान दिया है।
उपकृत और अनुग्रहित हैं सम्पादक मंडल के प्रति कि आपका स्नेह प्रेम बना रहे।
सादर, अरुण कुमार सिन्हा
सेवानिवृत अधिकारी.बिहार.
अभिनन्दन है कि आपने शिव की अवधारणा पर हमारे आलेख को स्थान दिया है।
उपकृत और अनुग्रहित हैं सम्पादक मंडल के प्रति कि आपका स्नेह प्रेम बना रहे।
सादर, अरुण कुमार सिन्हा
सेवानिवृत अधिकारी.बिहार.
*
सब को फूल बाँट कर
हम पत्थर के हो गए
*
होने थे जितने खेल मुक़द्दर के हो गए
हम टूटी नाव ले के समंदर के हो गए.
खुशबू हमारे हांथों से छूकर गुजर गयी
हम सब को फूल बाँट कर पत्थर के हो गए.
*
दिन विशेष : जन्मदिन.
२२. ०८. २६.
मूलांक दिवस : हम चार : ४
*
कृष्ण : साथ : समझशक्ति और धर्म
के लिए
©️®️M.S.Media. WCP.Dr.Prashant.1976.
*
डॉ.प्रशांत.
बालसखा : सहयात्री : संपादक : लेखक. समालोचक
स्वास्थ्य अधिकारी. बड़ौदा. गुजरात
को उनके जन्मदिन विशेष की ' हम ' ' देव शक्ति ' परिवार की तरफ़ से
' अनंत ' ' शिव' शक्ति शुभकामनाएं
*
निवेदक : डॉ सुनीता मधुप
डॉ.अनीता
*
शक्ति अवतरण दिवस
*
११ अगस्त
श्रावण : कृष्णपक्ष : त्रियोदशी
दिन. मंगल वार.
*
Dr. Bhawna : 70 /26
प्रो. (डॉ.) भावना
छायाकार. यात्रा वृतांत लेखिका.
संरक्षिका. सम्पादिका. महाशक्ति मीडिया
*
सत्यम शिवम सुंदरम
काशी : उज्जैन : देवघर :
*
को उनके अवतरण दिवस की हम सभी देवशक्ति मीडिया परिवार
की तरफ़ से हार्दिक अनंत शिव शक्ति शुभकामनायें.
*
निवेदक
विशेष शक्ति माधवी सुनीता संगीता
*
२. अगस्त
श्रावण : कृष्णपक्ष : चतुर्थी
दिन. रविवार.
*
शक्ति.मानसी पंत. नैनीताल.
शक्ति.मानसी पंत. नैनीताल.
लेखिका. कवयित्री.
सम्पादिका.महाशक्ति मीडिया
*
को उनके अवतरण दिवस की हम सभी देव शक्ति मीडिया परिवार
की तरफ़ से हार्दिक अनंत शिव शक्ति शुभकामनायें.
-----------
गीता ज्ञान : मुझे भी कुछ कहना है : आभार : पृष्ठ :९.
-----------
डॉ.सुनीता मधुप सीमा
*
गीता : अध्याय : २. श्लोक : २३.
नैनं छिन्दन्ति शस्त्राणि नैनं दहति पावकः।
न चैनं क्लेदयन्त्यापो न शोषयति मारुतः॥
| * |
श्रीकृष्ण : मृत्यु केवल भौतिक शरीर की होती है,जबकि आत्मा अमर, शाश्वत और अविनाशी है।
संसार की कोई भी भौतिक शक्ति या तत्व जैसे ,
अग्नि, जल या हवा आत्मा को कोई नुकसान नहीं पहुँचा सकते, पार्थ ।
*
दुर्योधन : कृष्ण : शकुनि : दृश्यम : साभार
जब धर्म की संस्थापना के लिए छल ही धर्म हो जाए
गांधारी : तप दृष्टि : कदली : दुर्योधन
का शरीर बज्र का कैसे बना ?
-----------
मुझे भी कुछ कहना है : पृष्ठ : ९ / २.
-----------
संपादन
शक्ति. डॉ.रजनी रंजिता रितु
*
सावन : शक्ति : शिव
*
उठ जाग मुसाफ़िर भोर भई
अब रैन कहाँ जो सोबत है
*
विरासत में हमें क्या मिला ?
यह अधिक महत्वपूर्ण नहीं है
भविष्य को क्या देकर जा रहे हैं ?
यह आज अधिक महत्वपूर्ण है.
हर उलझन के अंदर ही
उस उलझन का हल मिलता है.
कोशिश करने से ही
मनचाहा कल मिलता है.
सोच समझ ले रे पथिक !
कर्म अग्निपथ पर चलने से पहले
जानना, समझना, सहना होगा.
थक हार कर भी निरंतर रहना होगा.
इस जीवन के कुरुक्षेत्र में
अनुमान ,सपन मन की कल्पना हैं
तो कर्म, अनुभव, और संघर्ष
जिंदगी के सबक में अपना है.
उठ जाग मुसाफ़िर भोर भई
अब रैन कहाँ जो सोबत है
*
पुनःसम्पादित
शक्ति.डॉ.सुनीता सीमा रंजिता
*
शक्ति. सीमा
डॉ.आर के दुबे.
लेखक. कवि. गीतकार.
*
महिला समानता दिवस
२६.०८.१९२०.
*
*
दिव्य शिव शक्तियों,उनकी एकता, उनके सम्यक साथ, सम्मान व समानता
से ही पूर्ण होगी सम्यक समाज की परिकल्पना व निर्माण
*शक्ति.डॉ.सुनीता रंजिता प्रिया.
शक्ति.शालिनी सीमा रेनू.
*
MS Media Powered English Section
*
*
Contents.
*
English Editorial Section : Cover Contents Page 1
Shakti Editorial. English Page : 2
Shakti Editorial. Prose : English Page : 3
Shakti Editorial. Poem : English Page : 4
Shakti Vibes : .Page : 5
Radhika : Krishna : Rukmini : Photo Gallery.Page : 6
Visuals News : News : Editorial Page : 7
Shakti Art Gallery : Radhika : Krishna : Rukmini : English : Page 8.
Gratitude : Day Special : You Said it : Page : 9.
Shakti Editorial. English Page : 2
Shakti Editorial. Prose : English Page : 3
Shakti Editorial. Poem : English Page : 4
Shakti Vibes : .Page : 5
Radhika : Krishna : Rukmini : Photo Gallery.Page : 6
Visuals News : News : Editorial Page : 7
Shakti Art Gallery : Radhika : Krishna : Rukmini : English : Page 8.
Gratitude : Day Special : You Said it : Page : 9.
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Times Media Advertising Shakti Powered.
Contents.
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Times Media Powered
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Shakti. Editorial. English Page : 2
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Chief Editor.
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Chandigarh Desk.
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26/../ 24/ 26.
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Shakti. Dr.Anuradha. Chandigarh.
Arya.Er.Manish.IITian.USA.
Shakti. Nikita.Australia.
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Executive Editor.
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Shakti. Seema Priya Vani.
Darjeeling Desk.
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Photo Reel Editor.
Jaipur Desk
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Shakti Editorial. Poem : English Page : 4
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Editor
Shakti. Naina Tanu Priya
Darjleeng Desk.
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a short poem.
Savan Special.
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The rains
Have come again.
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Shakti.
Priya Madhup Anubhuti.
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Oh my beloved one !
The rains
Have come again.
Bringing tokens of romance in the eyes
With lots of admiration inside loving vibes.
The beloved one calls out to her Sajana
*
The rains have a stirred in the love in her heart
The Savan droplets pours so does love in her heart.
Her cheeks get all rosy
She is ready to get all cozy.
Savan is the season
On love and longing
Send it to your beloved one
Only love & feeling
Oh my beloved one !
The rains
Have come again.
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Column Editing & Decorative
Shakti. Dr.Sunita Tanu Seema.
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Shakti Picture Vibes : .Page : 5
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Shakti. Dr.Anuradha Seema Kajal.
Speaks much more.
0r in Nature .....following
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a Positive Attitude.
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a positive attitude has a great deal of power to turn
obstacles in to great opportunities.
©️®️M.S.Media.
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Tri Shakti Art Gallery : Radhika : Krishna : Rukmini : English : Page 8.
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Editor.
Shakti. Naina Manjita Shwati
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Tri Shakti Art Gallery : Radhika : Krishna : Rukmini : English : Page 8.
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Editor.
Shakti. Naina Manjita Swati.
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Visuals News : News : Editorial Page : 7
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Editor.
Shakti. Naina Shaily Gul Saxena
Mumbai Desk.
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Gratitude : Day Special : You Said it : Page : 9.
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Editor.
Shakti. Ankita Vani Isha
Ayodhya Desk
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Short Reel : Courtesy Video
Nepal Flash Floods : Nepal Tragedy
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Deepest sorrow for Nepal's loss.
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Nepal weeps, but hope remains.Deepest sorrow for Nepal's loss.Hearts break for flood victims.Mourning lives lost in Nepal.In grief, we joint media houses with our entire family stand together.
Nepal weeps, but hope remains.Deepest sorrow for Nepal's loss.Hearts break for flood victims.Mourning lives lost in Nepal.In grief, we joint media houses with our entire family stand together.
Joint Social Media Houses Editorial Shakti Team.
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We greatly celebrating
80th Independence Day
on August 15, 2026
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Vande Matram : Jai Hind.
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Independence day is the day not only to engage ourselves in celebrations
but also to remember each and every sacrifice made to make day this possible
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Dr.Bhawna Shahina Madhvee
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Day Special.Somvar.
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Sawan.Shiv.Shakti.
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Shakti.Nilam.RK.Ritu Singh.
Varanasi.
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You Said it : Page : 9 / 2.
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Editor.
Shakti.Kajal.Suruchi. Seema.
Kolkotta Desk.
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"The smallest hands tie the strongest bonds of love today."
Getting a Rakhi tied by a tiny, little child is the purest and most heartwarming moment of Raksha Bandhan.
Shakti.Kajal.Gurugram
Getting a Rakhi tied by a tiny, little child is the purest and most heartwarming moment of Raksha Bandhan.
Shakti.Kajal.Gurugram
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A very devotional page specially literature reflects our ancient culture.
Shakti. Anupriya.
a critic and reader.Pataliputra.
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बहुत ही शानदार पहल आपकी।भिन्न भिन्न विषयों को समावेशित करते हुए आपका प्रकाशन सभी वर्ग के लिए लाभप्रद होता है।बहुत बहुत बधाई एवं शुभकामनाएं आपको।
ReplyDeleteयह वाकई बहुत प्रभावशाली लग रहा है ! इसकी अवधारणा और प्रस्तुति काफी आकर्षक है । कुल मिलाकर इसका रूप शानदार, रचनात्मक और प्रभावशाली है। शक्ति. स्मिता.
ReplyDeleteA very devotional page specially literature reflects our ancient culture.
ReplyDeleteआत्मीय आभार
ReplyDeleteअभिनन्दन है कि आपने शिव की अवधारणा पर हमारे आलेख को स्थान दिया है।
उपकृत और अनुग्रहित हैं सम्पादक मंडल के प्रति कि आपका स्नेह प्रेम बना रहे।
सादर, अरुण कुमार सिन्हा
सेवानिवृत अधिकारी.बिहार.
रचनाएं बहुत ही प्रेरणादायी रहीं हैं । दिन दूनी और रात चौगुनी तरक्की करें, यह हमारी हार्दिक शुभकामनायें हैं । सम्पादकीय : त्रिशक्ति : गोरी साँवरे सलोनी : गद्य संग्रह : आलेख : पृष्ठ : २ / २. अनुभाग अत्यंत रुचिकर व प्रभावी रहा है ।
ReplyDeleteSuch a helpful guide! Thank you for breaking it down so clearly and truly.
ReplyDelete"The smallest hands tie the strongest bonds of love today."
ReplyDeleteGetting a Rakhi tied by a tiny, little child is the purest and most heartwarming moment of Raksha Bandhan.😊
Shakti. Kajal.
I first time visiting this blog magazine page...really published articles, art work , photos are too good and impressive...
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