Radhika Krishna Rukmini. Darshan.Dainik.13.V2.S :7.
©️®️M.S.Media.
Shakti Project.
कृण्वन्तो विश्वमार्यम.
In association with.
A & M Media.
Pratham Media.
Times Media.
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Radhika Krishna Rukmini.
Darshan.Dainik.
Number.13.Volume : 2. Series : 7.
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Monthly. May. Web Blog Magzine Page Address.
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प्यार.व्यवहार.संस्कार.
राधिका कृष्ण रुक्मिणी दर्शन : १३.
पत्रिका आवरण पृष्ठ.
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* जो तुम छोड़ो पिया मैं नाही तोडू रे : त्रिशक्ति राधिका कृष्ण रुक्मिणी : १३ : दैनिक आवरण पृष्ठ. * |
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जो तुम छोड़ो पिया मैं नाही तोडू रे : त्रिशक्ति प्रस्तुति. राधिका कृष्ण रुक्मिणी दर्शन : पत्रिका : में जाने व पढ़ने के लिए नीचे दिए गए लिंक को दवाएं.
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प्यार. व्यवहार. संस्कार
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राधिकाकृष्णरुक्मिणी.दर्शन.
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आत्म दीपो भवः
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विक्रम संवत : २०८३ शक संवत : १९४८ .
दिनांक : ३१ .०७.२६ .
श्रावण : कृष्णपक्ष : द्वितीया
दिन. शुक्रवार.
शक्ति दिवस . मूलांक : ४ .
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a rising Sun GIF.
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जागो उठ कर देखो
जीवन जोत उजागर है
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राधिकाकृष्णरुक्मिणी.दर्शन : विषय सूची : पृष्ठ : ०.
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शक्ति. विचार धारा.
अनुभाग : १
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त्रिशक्ति.
प्रेम : प्रकृति.पृष्ठ : ०.
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राधिकाकृष्ण: प्रेम प्रकृति. दर्शन : नैनीताल डेस्क : पृष्ठ : ० / १.
रुक्मिणीकृष्ण. प्रेम प्रकृति. दर्शन : आज : नैनीताल डेस्क : पृष्ठ :० /२.
मीराकृष्ण : प्रेम प्रकृति. दर्शन : मेवाड़ डेस्क : पृष्ठ ० / ३ .
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त्रिशक्ति.
जीवन : दर्शन.
*
त्रि शक्ति : विचार धारा : पृष्ठ : १.
राधिकाकृष्ण : जीवन दर्शन : दृश्यम : शब्द चित्र : वृन्दावन.डेस्क : पृष्ठ : १ / १.
रुक्मिणीकृष्ण :जीवनदर्शन : दृश्यम : शब्द चित्र : विदर्भ डेस्क: पृष्ठ : १ / २.
मीराकृष्ण : जीवन दर्शन : शब्द चित्र : मेवाड़ डेस्क.पृष्ठ १ /३.
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सम्पादकीय शक्ति.
अनुभाग : २.
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राधिकाकृष्णरुक्मिणी : सम्पादकीय शक्ति : पृष्ठ :२.
सम्पादकीय शक्ति. समूह. नवशक्ति.विचार धारा : अंततः : पृष्ठ :२/ १.
सम्पादकीय : त्रिशक्ति : गोरी साँवरे सलोनी : गद्य संग्रह : आलेख : पृष्ठ : २ / २.
सम्पादकीय :त्रिशक्ति : गोरी साँवरे सलोनी : पद्य संग्रह : आलेख : पृष्ठ : २ / ३.
शक्ति दर्शन.
आलेख विषय वस्तु : अनुभाग : ३.
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राधिकाकृष्णरुक्मिणी : आज का गीत : जीवन संगीत :भजन : पृष्ठ : ३.
राधिकाकृष्णरुक्मिणी : शक्ति : कोलाज दीर्घा : पृष्ठ : ४.
राधिकाकृष्णरुक्मिणी : शक्ति : कला दीर्घा : पृष्ठ : ५ .
दिन विशेष : आज का पंचांग : राशि फल : पृष्ठ : ६.
राधिकाकृष्णरुक्मिणी : शक्ति : फोटो दीर्घा : पृष्ठ :७.
राधिकाकृष्णरुक्मिणी : समसामयिकी.समाचार : दृश्यम दिन विशेष : पृष्ठ : ८.
गीता ज्ञान : मुझे भी कुछ कहना है : आभार : पृष्ठ :९.
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राधिका कृष्ण रुक्मिणी
प्यार.व्यवहार.संस्कार.
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महाशक्ति मीडिया प्रस्तुति.
त्रिशक्ति त्रिवेणी : विचार धारा
राधिकाकृष्ण : रुक्मिणीकृष्ण : मीराकृष्ण
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राधिकाकृष्ण: प्रेम प्रकृति दर्शन : नैनीताल डेस्क : पृष्ठ : ० / १.
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राधिका डेस्क.
राधाकृष्ण मंदिर.मुक्तेश्वर.नैनीताल.
संपादन
शक्ति.डॉ.अनु मधुप रितु .
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शक्ति. राधिकाकृष्ण दृश्यम : विशेष : विचार.
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देख मुझे सब है पता सुनता है तू मन की सदा
*
साभार इस्कॉन मंदिर : पाटलिपुत्र : दृश्यम
*
*
तेरी मेरी कहानी है.
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शब्द विचार
तोरा मन दर्पण कहलाए :
*
*
विचार सन्दर्भ माया
कृति शक्ति : डॉ अनु : छाया.
*
जब व्यक्ति स्वयं के गुण दोष को स्वीकार करने और सम्यक
जनों के लिए सम्मान करना शुरू कर देता है,
तो परिवर्तित जीवन में आनंद ही आनंद उत्पन्न होता है.
*
तेरी मेरी कहानी है
*
फ़र्क इसमें नहीं है कि लोग क्या कहेंगे
फ़िक्र तो इस बात में है आप क्या कहेंगे
*
तोरा मन दर्पण कहलाए : शब्द : विचार
*
*
विचार सन्दर्भ माया
शक्ति. रितु सिंह : कृति छाया
*
मौन हूँ, निःशब्द हूँ मगर निस्सार नहीं, अर्थ पूर्ण हूँ
भले बुरे की परख़ मुझे, जागृत हूँ, हो साथ माधव तो सार्थक हूँ सम्पूर्ण हूँ
*
दृष्टि के समक्ष तो हृदय में वर्तमान
वास्तविक प्रेम का परीक्षण,साथ तो अनुपस्थित, दूरी और निःशब्दता के साथ में है
शोध विचार @ शक्ति.प्रिया मधुप रितु .
*
*
विचार सन्दर्भ माया.
शक्ति. प्रिया मधुप : कृति छाया
*
लघुता से प्रभुता.
*
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©️®️M.S.Media.Madhup. Painting Water Colour. 95 / 26. |
*
विचार सन्दर्भ माया
कृति : मधुप : छाया.
*लघुता से प्रभुता.
*
जब पत्थर तोड़ कर भगवान बन सकते हैं
तो अपने अहंकार खत्म कर हम इंसान क्यों नहीं हो सकते
ज़रा सोचिए
*
लघुता क्या है क्षणिक आवेश, अनावश्यक क्रोध ,तत्क्षण निकले
अमर्यादित, अपरीक्षित सत्य रहित शब्दों का स्वयं के मानवीय आचरण
में संवहन करना
प्रभुता क्या है समय ,सत्य ,शब्द की विशालता, निजता और सहनशीलता, का सम्मान
*
तोरा मन दर्पण कहलाए.
जो व्यक्ति अपने मन के साथ साथ दूसरे वैष्णव जन के मन को समझ लेता है
उस अंतर्यामी को दुनिया समझने की
कोई आवश्यकता नहीं रह जाती...
*
शोध विचार @ शक्ति. प्रिया मधुप अनुभूति.
*
--------- रुक्मिणीकृष्ण : प्रकृति प्रेम : दृश्यम : आज : पृष्ठ : ० / २ . ---------- राधाकृष्ण मंदिर.मुक्तेश्वर. नैनीताल डेस्क संपादन शक्ति.रेनू मधुप मीना . |
*
शक्ति. रूक्मिणीकृष्ण दृश्यम : विशेष : विचार
*
प्यार : व्यवहार : संस्कार.
*
*
रुक्मिणी कृष्णे हृदयम, शांतिः भवेत.
*
गोविन्द बोलो हरि गोपाल बोलो.
*
स्वयं शक्ति मीना सिंह अभिनीत
भजन सुनने व देखने के लिए नीचे दिए गए लिंक को दवाएं.
©️®️MS* Media Shakti Short Film.
Dr. Sunita Meena Priya.
*
बड़े बड़ाई न करे बड़े न बोले बोल
जो जितने बड़े उसमें उतनी ही विनयशीलता
जो जितने छोटे उसमें उतनी ही हठधर्मिता
विचार करें आप किस श्रेणी में हैं
*
राम : रावण और अंतर्मन
*
पहले रावण बाहर था आज का रावण
स्वयं के भीतर और आस पास भी है इसलिए धर्म युद्ध
अब धनुष का नहीं स्वयं के विवेक का है
इसलिए सत्कर्म करें ,सजग रहें और सकारात्मक भी रहें
*
जहाँ जाइएगा हमें पाइएगा
लगाव में खोने के डर से हम किसी को पकड़ कर रखते हैं
जबकि प्रेम में यह विश्वास है कि उन्हें लौट कर हमारे पास ही आना है
*
प्रकृति : फूल और कांटें
©️®️M.S.Media.Madhup.
Painting Water Colour. 80 / 26.
*
विचार सन्दर्भ माया
कृति मधुप : छाया.
*लेकिन इसकी खुशबू जो फ़िजा में सदियों तलक लोगों की रूहों में
रच बस जाती है ...एक प्रकृति की सुन्दर प्रेम कहानी ही है
*
शोध विचार @ शक्ति.रेनू मधुप मीना.
*
*
कोई तो है
*
*
सन्दर्भ : विचार : माया.
शक्ति : अनु : छाया.
*
कितना मुश्किल है दिल को समझाना कि कोई था, अब नहीं है
सच्चाई मन से पूछिए कोई था,अब भी है ,और रहेगा भी
*
यदि जीवंतता है, व्यक्ति की स्वतंत्रता मान्य है तो भिन्नता के साथ असंगतता होगी ही
तब जीवन में भिन्नता, स्वतंत्रता के साथ सामंजस्य स्थापित करने का नाम ही
जीवन है
*
शब्द सम्हारे बोलिए,
शब्द सम्हारे बोलिए, शब्द के हाथ न पाँव
एक शब्द औषधि करे, एक शब्द करे घाव.
*
*
विचार सन्दर्भ माया
शक्ति. रितु सिंह : छाया.
*
जीवन का वास्तविक मूल्य संग्रह में नहीं
बल्कि उस विग्रह में है जो सुकर्म से अर्जित किए गए विरासत में आप
अपने बाद बहुजन के हृदय में स्मृति वश छोड़ जाते हैं
*
देखा है जिंदगी को कुछ इतना क़रीब से
अपनी जिंदगी में ' समय ', ' शब्द ' और ' शख्स '
को पढ़ने, जानने और समझने की सलाहियत जरूर रखिए
क़ामयाबी आपके क़दम चूमेगी
विचार @ शक्ति.डॉ.राखी मधुप कंचन.
*
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राधिकाकृष्ण : प्रेम प्रकृति : ड्योढ़ी : दर्शन : वृन्दावन.डेस्क : आज : पृष्ठ : १ / १.
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प्यार : व्यवहार : संस्कार
*
राधिकाकृष्ण.
वरसाने.वृन्दावन.डेस्क.
. प्रादुर्भाव वर्ष :१९७६.
संस्थापना वर्ष : १९९८.महीना : जुलाई. दिवस :४.
*
संपादन
*
शक्ति. प्रिया मधुप.डॉ.सुनीता
*
*
जागो उठ कर देखो
जीवन जोत उजागर है
*
©️®️M.S.Media. Water Colour .25 / 26
*
सन्दर्भ : विचार : माया.
शक्ति रितु कृति : मधुप : छाया.
*
जब जब तू मेरे सामने आए.
*
आसक्ति यदि सकारात्मक, रचनात्मक व सर्वहित में है तो श्रेष्यकर
अनासक्ति स्वार्थी, एकाकी सर्व हित से परे है तो इसका क्या औचित्य
*
विनम्रता मानव का सबसे अहम गुण है जो संयम से
जनित है जिससे मानव का ' क़द ' और ' क़िरदार '
दोनों ऊँचा होता है
*
शोध विचार शक्ति रेनू मधुप रितु .
*
तुम्हें दूसरे से मधुर सुनना प्रिय है , तो उसे क्यों नहीं ?
तुम्हें दूसरे की कटुता नहीं भाती है , तो दूसरे को तुम्हारे कड़वे बोल कैसे भले लगेंगे ?
अपने दिल से जानिए पराए दिल का हाल
*
शोध विचार शक्ति सीमा सुनीता रंजीता
*
मूल प्रश्न तो हमारे समक्ष यह है कि हम मृत्यु से पहले कितना, कब ,कहाँ कैसे
और किसके लिए सम्यक जीते हैं ?
*
शोध विचार @ शक्ति सीमा सुनीता रंजीता.
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राधिकाकृष्ण : जीवन दर्शन : दृश्यम : शब्द चित्र : पृष्ठ : १ / १.
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वृन्दावन.डेस्क.
संपादन
शक्ति. गुल मधुप शबनम
*
आ बता दे कि तुझे कैसे जिया जाता हैं
*
विचार सन्दर्भ माया
मधुप शक्ति.अनु : छाया.
*
अपने लिए, सब के लिए तो जी कर देख लिया, माधव !
अब सम्यक मन सम्यक जन के लिए जीना चाहता है
*
मैनें तेरे लिए ही सात रंग के सपने चुने.
प्यार , व्यवहार और संस्कार के साथ
ख़ुशीपूर्वक जीने के लिए क्या लगता नहीं कि मेरे अपने सपने देखना जरुरी है ?
तनिक विचार कीजिये
*
विचार @ शक्ति.प्रिया.मधुप अनु
रुक्मिणीकृष्ण : जीवनदर्शन : दृश्यम : शब्द चित्र : पृष्ठ : १ / २.
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*
विदर्भ डेस्क : महाराष्ट्र
संपादन
शक्ति.शालिनी डॉ.सुनीता मधुप.
शक्ति.शालिनी डॉ.सुनीता मधुप.
*

Art Work MS*. Water Colour 95 / 26 ©️®️M.S.Media.
*
विचार सन्दर्भ माया
शक्ति. कृति : डॉ.सुनीता मधुप : छाया.
*
जागो मोहन प्यारे
*
क्या स्वयं का जीवन संघर्ष महाभारत नहीं ?
क्या अपने आस पास धृतराष्ट्र ,शकुनि, दुर्योधन नहीं ?
क्या अपने भीतर छल प्रपंच, ईर्ष्या द्वेष ,लोभ कामना नहीं ?
यदि है तो आज के परिपेक्ष्य में आवश्यकता किस की है , विचार कीजिए
सत्य हरिश्चंद्र की , मर्यादा पुरुषोत्तम राम की या व्यवहारिक योगीराज कर्मयोगी श्री कृष्ण की
*
उत्तिष्ठत जाग्रत
स्वप्न से शीघ्र जाग जाना ही श्रेष्यकर है..प्रिय
फिर चाहे वह ' नींद ' से हो, ' वहम ' से हो,या ' अहम ' से
*
*
विचार सन्दर्भ माया
शक्ति.रितु सिंह : छाया.
*
त्रेता युग : द्वापर युग : कल युग
मन रे इस ' कलयुग ' छल प्रपंच, स्वार्थ ,धोखा युक्त मायावी संसार में
तू ' सतयुग ' के हरिश्चन्द्र , ' त्रेता युग ' के राम को काहे को ढूंढें ?
द्वापर युग के श्रीकृष्ण, मनमोहन है ना, तेरे पास
*
नीयत, नीति और नियति.
मनुष्य के स्वयं नियति का रास्ता उसकी स्वयं की नीति और
उसकी नीयत से ही जुड़ा है कि वो सफ़लता या विफलता किस पड़ाव पर
पर पहुंचेगा
शोध विचार शक्ति @ शालिनी रितु मधुप.
*
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मीराकृष्ण : जीवन दर्शन : शब्द चित्र : दृश्यम : मेवाड़ : डेस्क : पृष्ठ : १ / ३.
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*
मीरा डेस्क.
मेवाड़ डेस्क.जयपुर.
प्रादुर्भाव वर्ष : १९८२.
संस्थापना वर्ष : १९८९. महीना : सितम्बर.दिवस : ९.
*
मेवाड़ डेस्क.जयपुर.
संपादन.
शक्ति.जया अनीता गरिमा
*
साची कहूं तुमसे.
*
जिंदगी का सफ़र ये है कैसा सफ़र.
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विचार : सन्दर्भ माया छोटू कृष्णा : छाया. |
*
कहीं आप वो तो नहीं
*
द्वेष, क्रोध, लोभ, काम और अहंकार मानव जीवन के वर्तमान पांच अवगुण है
जो मानव के सही गलत निर्णय लेने के विवेक को हर लेते है
अपने अंतर्मन में ढूंढ लीजिए
*
जीवन में
चैन से जीने के लिए सभी बैचेन है.माधव !
सिर्फ़ अपने लिए
*
जिंदगी का हिसाब लगाया तो मालूम चला
मुनाफा तो ख़ुद के लिए जीने में था
मगर हम दूसरों के लिए ख़र्च हो गए
*
विचार शक्ति.अनीता गरिमा वाणी.
*
*
है कौन वो दुनियाँ में
न पाप किया जिसने
*
कुछ दूसरों की कमियों को भी सहना सीख लीजिए
मत भूलें कि हममें भी कई खामियाँ हैं जिन्हें दूसरे सहन करते हैं
*
तुलसी.
धीरज, धरम, मित्र अरु नारी।
आपद काल परिखिअहिं चारी॥
*
उसने हर मुस्कान की क़ीमत वसूल ली
जबकि उम्मीद ये थी कि हर क्षण जीवन शक्ति मुस्कुरा के ही मिलेगी
*
शोध विचार @ शक्ति.डॉ.रजनी मधुप गरिमा*
तुम्हें ही शीघ्रता थी मुझसे दूर जाने की
अन्यथा मुझमें कहाँ इतनी शक्ति थी कि मैं तुम्हें खो दूँ
*
फ़िर वही तलाश
*
*
विचार : सन्दर्भ : माया.
शक्ति. डॉ.सुनीता मधुप : कृति छाया.
*
ख़्वाब में हर असंभव में जो संभव है हक़ीक़त में
बस उसी की तलाश है मुझे
*
शोध विचार @ शक्ति.डॉ.रजनी मधुप गरिमा.
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सम्पादकीय शक्ति पृष्ठ : २.
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अब मैं नाचूं बहुत गोपाल
*
अनु : प्रेम किसके जैसा होना चाहिए शिव पार्वती की भाँति या कृष्ण ,राधा रुक्मिणी जैसा ?
मन : शिव शक्ति के लिए एकनिष्ठ थे, असहज हुए बाद में प्रलयंकारी भी
दूसरी तरफ माधव राधा रुक्मिणी के लिए स्वाभाविक, सहज और व्यवहारिक थे
इसलिए प्रेम अमर हो गया....अब आप अपने मन से सुनिश्चित करें
आप किस पक्ष में हैं ?
*
*
लघु कथा : डॉ.मधुप
*
मन का संयम टूटा जाए
*
राधिका : माधव मेरी यह वर्तमान अभिलाषा है इसे पूर्ण कर दें
माधव : जैसी आपकी इच्छा
( थोड़े ही दिनों में राधिका के मन की आरोपित इच्छा ही मन का बंधन बन गयी.घुटन होने लगी )
राधिका : नहीं माधव जैसे पूर्ववत था वही होने दें
माधव : जैसा आप चाहे
( पुनः राधिका के मन में कहीं न कही फांस रह ही गयी...कुछेक दिनों बाद )
राधिका : स्वयं में ही प्रश्न किया : अब मैं नाचूं बहुत गोपाल ?
माधव चित को अभी भी शांति नहीं मिली प्रभु ,चाहती हूँ मेरे अवगुण मेरे चित ना धरो
माधव : यथार्थ राधिके ! सम्यक साथ, सोच,शब्द और सत्कर्म ही मानव की अंतिम अभिलाषा होनी चाहिए
*
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सम्पादकीय : त्रिशक्ति : गोरी साँवरे सलोनी : गद्य संग्रह : आलेख : पृष्ठ : २ / २.
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अ 'भय हो : अति सूक्ष्म लघु कथा.
शक्ति. डॉ.सुनीता मधुप अनुभूति
*
बचपन की कहानी तेरी मेरी। बरसों बीत गए । बात पुरानी है। एक कहानी है। हमारे पार्श्व में लगभग ढाई साल का एक बच्चा रहता था। बहुत ही प्यारा दुलारा। सीधा साधा आज्ञाकारी। भोले भाव मिले रघुराई। मैं प्यार से उन्हें छोटू कृष्णा कहता। माँ ने उन्हें कुछ कुछ बोलना सिखाया ।
जैसे ....क्रो, काऊ, ...आदि। एक दिन उसने बिल्ली देखी ...मां ने कहा,.... कैट ....म्याऊ।
एक दिन इसी तरह उन्होंने कहा : पई ! मैं समझ नहीं पाया। माँ से जानना चाहा ,तब उसकी माँ ने कहा वह कह रहे है, ... .पढ़ रहे है।
अवस्था पांच साल की हुई। अब स्कूल में दाखिले की बारी आयी। पूरी तैयारी के साथ उन्हें मना फुसला कर पाठशाला ले जाया गया।
लेकिन त्रासदी देखिए परिसर में प्रवेश करते ही उन्होंने गुरु जी को ख़जूर की छड़ी से एक बच्चे को मारते हुए देख लिया। साथ ही साथ गुरु जी बच्चे पर चीख चिल्ला भी रहे थे।
पार्श्व में ही कुछ शरारती बच्चें मुर्गा भी बने हुए थे। वो काफी सहम गए। माँ के पीछे जा छिपे।
आगे इस भयपूर्ण वातावरण ,चीखने चिल्लाने की घटना ने उनके मनो मस्तिष्क पर इतना दुष्प्रभाव डाला कि कई दिनों तक़ वह विद्यालय ही नहीं गए। कदाचित औपचारिक शिक्षा से दूरी ही बना ली।
दशक बीत गए। अनायास ही एक दिन उनकी माँ से मुलाक़ात हो गयी।
पूछा , कहाँ है छोटू कृष्णा ? ...क्या कर रहें है ?
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| शक्ति. काजल |
सुनना अच्छा लगा। उनकी माँ कह रही थी, ....बमुश्किल स्कूल गए। अधिकतर शिक्षा अनौपचारिक ही पूरी की। ..अभी मनोविज्ञान के शोधार्थी है। .. मन ...मस्तिष्क....व्यवहार....वाणी ...भय ...और वातावरण पर शोध कर रहे है। याद आ गया बच्चे ही बड़े ( विकसित ) के पिता होते हैं। बचपन की आदतें ही बड़ेपन में घर कर लेती हैं ना ।
सीख : अपने आम जीवन में बदलते घटना क्रम में कभी न कभी में भय का मन में पैदा होना तो लाज़िमी ही है। लेकिन अभय हो इसका सम्यक प्रयास पीड़ित और दोषी दोनों की तरफ़ से होना चाहिए। सच ही रविंद्र ने कहा व्हेर माइंड इज विदाउट फियर।
आधी सच्ची आधी झूठी। यह अर्थपूर्ण लघु कथा जीवन की कई सत्य घटनाओं से प्रेरित है।
*
विशेष संपादन : शक्ति.काजल. डॉ.मनीष.अंजू नई दिल्ली.
सज्जा : शक्ति. रंजिता सीमा अनुभूति .
*
शक्ति आलेख.
तोरा मन दर्पण कहलाए : जीवन संस्मरण
मातृ शक्ति की कलम से.
*
शक्ति.निर्मला सिन्हा.
प्रधान आचार्या.
*
परिवर्तन ही जीवन का शाश्वत नियम है : ईश्वर ने इस परिवर्तन शील ब्रह्माण्ड में अनेकों प्रकार के जीव - जन्तु , पेड़ - पौधे पैदा किए हैं । सभी जन्म लेते हैं। परिर्वतनशील जीवन में आगे बढ़ते हैं। और परिवर्तित होते जाते हैं। अस्थायीत्व सभी में हैं। स्थायित्व तो कहीं भी नहीं है सिर्फ इसका सृष्टिकर्ता ही स्थायी हो सकता है।
बीज से पेड़ पेड़ से फल और पुनः फल से बीज और पेड़ की उत्पति होती है। जीव जंतुओं में भी अपनी पौराणिक मान्यताओं के अनुसार चौरासी लाख योनियों की संख्या बतलाई गई है। और प्रत्येक एक जीव में एक अंनत सता का निवास है जो कथित आत्मा है। वह कभी क्षीण नहीं होती। रूप परिवर्तन भले ही हो जाए लेकिन उस आत्मा का विनाश नहीं होता। जब व्यक्ति जन्म लेता है तो परिवार में बंध जाता है उसका अपना समाज होता है। जीवन चक्र परिवर्तन के साथ निरंतर गतिशील है।
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©️®️M.S.Media.Madhup Painting Water Colour 03/ 26. |
स्मृतियाँ जहाँ जीवन को संजोती हैं, वहीं कठोर यथार्थ का सामना होने पर भूलने की विवशता मनुष्य का सबसे बड़ा सुरक्षा कवच बन जाती है। इस विषय को अपने जीवन में अनुभव से अर्जित निम्नलिखित तीन मुख्य बिंदुओं के माध्यम से समझा जा सकता है।
मानसिक संतुलन : पुरानी कड़वी यादों को न भूल पाने से व्यक्ति वर्तमान को खुलकर नहीं जी पाता है , इसलिए आगे बढ़ने के लिए विस्मृति आवश्यक है। हमें भरसक प्रयत्न करना ही चाहिए।
परिवर्तन की स्वीकार्यता : भी अनिवार्य है। समय निरंतर बदलता है और पुराने घावों को पीछे छोड़ना ही प्रकृति का नियम है। जिसने बदलाव को नहीं माना दिक्कतें हुई।
भावनात्मक मुक्ति : कुछ घटनाओं को भूलना कोई कमजोरी नहीं, बल्कि मानसिक शांति और नई शुरुआत के लिए उठाया गया एक व्यावहारिक कदम है। इसे अपनाना ही होगा सम्यक परिवर्तनों के साथ।
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*
मेरे : गीत : समर्थित : तोरा मन दर्पण कहलाय
जग से चाहे : भाग ले कोई मन से भाग न पाय
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साभार : फ़िल्म काजल : मीना कुमारी
प्रस्तुति : डॉ. सुनीता मधुप सीमा.
*ईश्वर की ख़ोज : मन में या मंदिरों में : मैंने खूब यात्रायें की। अयोध्या देखी द्वारिका देखी। मथुरा वृन्दावन गोकुल भी देखा। बंगलोर, मैसूर ,रामेश्वरम मदुरई ,तिरुपति, मीनाक्षी मंदिर, द्वारिका, पुरी के साथ साथ अन्य धार्मिक स्थलों की भी यात्राएं की । मंदिरों की भव्यता ने सिद्ध कर दिया है कि भारत कलाकारों और महान निर्माण कर्ताओं का देश है। भावनाएं मिली, मूर्तियों में दर्शन भी हुए ..... लेकिन ईश्वर मिले....?
मानती हूँ मन चंगा तो कठौती में गंगा। मन पवित्र है तो मन ही देवता है। जग से भाग लीजिए मन से कैसे भागेंगे ? सच में आपके मन में अच्छे बुरे सभी कर्मों का लेखा जोखा है। अपने मन से निर्दोष बनिए जग को दिखलाने के लिए नहीं
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| श्री हरि : बद्री विशाल के दर्शन : निर्मला सिन्हा : फोटो : प्रत्येश |
कर्मों का लेखा-जोखा स्वयं के भीतर ही : आप दुनिया की नज़रों से अपने गलत कर्म या विचार छुपा सकते हैं, लेकिन अपने स्वयं के मन से कुछ भी नहीं छुपा सकते. आपका मन आपके हर भले-बुरे कर्म को देखता भी है और आपको उसका अहसास भी कराता है।
मन की पवित्रता : इस भजन में आगे सीख दी गई है कि इंसान को इस ' मन रूपी दर्पण ' पर कभी भी झूठ, ईर्ष्या या लालच की धूल नहीं जमने देनी चाहिए, ताकि उसकी अंतरात्मा हमेशा शुद्ध और सत्य का मार्ग दिखाती रहे। संक्षेप में, यह पंक्ति इंसान को आत्म-मंथनऔर ईमानदारी से जीने की प्रेरणा देती है।
*
संपादन सज्जा
शक्ति. डॉ. सुनीता मधुप सीमा
*
क्रमशः जारी
सीकर : राजस्थान के खाटूश्यामजी
भीम के पुत्र घटोत्कच के पुत्र महान धनुर्धर बर्बरीक
*
शक्ति. सीमा. डॉ.आर के. मधुप.
शांति के प्रयास व्यर्थ हुए। कुरु वंश में पांडवों और कौरवों के मध्य महाभारत निश्चित था। समस्त आर्यावर्त के राजा अपने पक्ष को मर्यादित कर रहें थे कि उन्हें किसे साथ देना है ? इनमें से महावली भीम के पौत्र महान धनुर्धर बर्बरीक भी थे जिनके अजीब गरीब प्रण ने श्रीकृष्ण को दुविधा में डाल रखा था।
बर्बरीक एक महान धनुर्धर परिचय : भीम के पुत्र घटोत्कच के पुत्र थे बर्बरीक। उनकी माता: नागकन्या मोरवी या अहिलवती थी। उनके पितामह पांडव पुत्र भीम थे।
बर्बरीक की अद्भुत शक्तियाँ और तीन बाण : बर्बरीक को शिव जी और नवदुर्गा की तपस्या से तीन ऐसे बाण प्राप्त थे, जिससे वे पूरी दुनिया को कुछ ही मिनटों में जीत सकते थे।
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बर्बरीक श्रीकृष्ण को शीश दान करते हुए |
हारे का सहारा : महाभारत के युद्ध में जाने से पहले बर्बरीक ने अपनी माता को वचन दिया था कि कुरुक्षेत्र में जो पक्ष हार रहा होगा, वे उसकी ओर से लड़ेंगे। भगवान श्रीकृष्ण जानते थे कि कौरवों की हार निश्चित है। ऐसे में अगर बर्बरीक कौरवों की तरफ से लड़ते, तो पांडवों की हार हो जाती। इस स्थिति को बदलने के लिए बर्बरीक को फिर से पांडवों की तरफ आना पड़ता, जिससे दोनों ओर की सेनाएं पूरी तरह नष्ट हो जातीं। बर्बरीक की इस दुविधापूर्ण निर्णय की स्थिति को लेकर श्री कृष्ण ने एक युक्ति सोची।
बर्बरीक का पांडवों के हित में शीश दान करना : बर्बरीक की क्षमता देखकर श्रीकृष्ण ने ब्राह्मण वेश में उनसे दान में उस का शीश ही मांग लिया। तब भगवान श्रीकृष्ण ब्राह्मण का भेष बनाकर सुबह बर्बरीक के शिविर के द्वार पर पहुंच गए और दान मांगने लगे।
बर्बरीक ने कहा, ' मांगो ब्राह्मण! क्या चाहिए। ..? ब्राह्मणरूपी कृष्ण ने कहा कि तुम दे न सकोगे।
लेकिन बर्बरीक कृष्ण के जाल में फंस गए और कृष्ण ने उससे उसका शीश मांग लिया। बर्बरीक द्वारा अपने पितामह पांडवों की विजय हेतु स्वेच्छा के साथ शीशदान कर दिया गया।
बर्बरीक ने खुशी-खुशी अपना शीश दान कर दिया, लेकिन महाभारत युद्ध देखने की इच्छा प्रकट की। श्रीकृष्ण ने उनके कटे सिर को एक ऊंचे स्थान पर रख दिया, जहाँ से उन्होंने पूरा युद्ध देखा। अब प्रश्न उठता है कि ये बर्बरीक थे कौन और कहां से किस दृष्टि से पुरा युद्ध देख रहे थे कि उन्होंने युद्ध का तात्विक हक़ीक़त देख पाये।
श्रीकृष्ण द्वारा खाटू श्याम बनने का वरदान : युद्ध की समाप्ति के बाद श्रीकृष्ण ने बर्बरीक के महान बलिदान से प्रसन्न होकर उन्हें वरदान दिया कि कलयुग में उन्हें श्रीकृष्ण के नाम ' श्याम ' से पूजा जाएगा। आज उन्हें राजस्थान के सीकर जिले में स्थित प्रसिद्ध खाटू श्याम मंदिर में बाबा खाटू श्याम के रूप में पूजा जाता है।
महाभारत के युद्ध समाप्ति के बाद जब पाण्डवों में विजयश्री के श्रेय के लिए होड़ लगी थी तब श्री कृष्ण ने कहा कि इसका निर्णय तो बर्बरीक का शीश ही बेहतर कर सकता हैं। बर्बरीक ने तब बताया कि युद्ध में दोनों ओर श्री कृष्ण का ही सुदर्शन चल रहा था और द्रौपदी महाकाली बन रक्तपान कर रही थी।
हारने वाले का साथ : बर्बरीक दुनिया के सर्वश्रेष्ठ धनुर्धर थे। बर्बरीक के लिए तीन बाण ही काफी थे जिसके बल पर वे कौरवों और पांडवों की पूरी सेना को समाप्त कर सकते थे। युद्ध के मैदान में भीम पौत्र बर्बरीक दोनों खेमों के मध्य बिन्दु एक पीपल के वृक्ष के नीचे खड़े हो गए और यह घोषणा कर डाली कि मैं उस पक्ष की तरफ से लडूंगा जो हार रहा होगा। बर्बरीक की इस घोषणा से कृष्ण चिंतित हो गए।
बर्बरीक का अतुलनीय पराक्रम : भीम के पौत्र बर्बरीक के समक्ष जब अर्जुन तथा भगवान श्रीकृष्ण उसकी वीरता का चमत्कार देखने के लिए उपस्थित हुए तब बर्बरीक ने अपनी वीरता का छोटा-सा नमूना मात्र ही दिखाया। कृष्ण ने कहा कि यह जो वृक्ष है इसके सारे पत्तों को एक ही तीर से छेद दो तो मैं मान जाऊंगा।
बर्बरीक ने आज्ञा लेकर तीर को वृक्ष की ओर छोड़ दिया।
जब तीर एक-एक कर सारे पत्तों को छेदता जा रहा था उसी दौरान एक पत्ता टूटकर नीचे गिर पड़ा। कृष्ण ने उस पत्ते पर यह सोचकर पैर रखकर उसे छुपा लिया की यह छेद होने से बच जाएगा, लेकिन सभी पत्तों को छेदता हुआ वह तीर कृष्ण के पैरों के पास आकर रुक गया।
तब बर्बरीक ने कहा कि प्रभु आपके पैर के नीचे एक पत्ता दबा है कृपया पैर हटा लीजिए, क्योंकि मैंने तीर को सिर्फ पत्तों को छेदने की आज्ञा दे रखी है आपके पैर को छेदने की नहीं।
उसके इस चमत्कार को देखकर कृष्ण चिंतित हो गए। भगवान श्रीकृष्ण यह बात जानते थे कि बर्बरीक प्रतिज्ञावश हारने वाले का साथ देगा। यदि कौरव हारते हुए नजर आए तो फिर पांडवों के लिए संकट खड़ा हो जाएगा और यदि जब पांडव बर्बरीक के सामने हारते नजर आए तो फिर वह पांडवों का साथ देगा। इस तरह वह दोनों ओर की सेना को एक ही तीर से खत्म कर देगा।
बर्बरीक के इस बलिदान को देखकर दान के पश्चात श्रीकृष्ण ने बर्बरीक को कलियुग में स्वयं के नाम से पूजित होने का वर दिया। आज बर्बरीक को खाटू श्याम के नाम से पूजा जाता है। जहां कृष्ण ने उसका शीश रखा था उस स्थान का नाम खाटू है।
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संपादन : शक्ति शालिनी रंजिता रेनू
संपादन : शक्ति शालिनी रंजिता रेनू
सज्जा शक्ति. मंजिता अनुभूति स्वाति.
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त्रिशक्ति
सम्पादकीय विचार धारा : पृष्ठ : २
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सम्पादकीय :त्रिशक्ति : गोरी साँवरे सलोनी : पद्य संग्रह : आलेख : पृष्ठ : २ / ३.
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संपादन
शक्ति. डॉ.रजनी मानसी रेनू
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शक्ति. अनुभाग
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शक्ति. रेनू शब्दमुखर.
लेखिका कवयित्री सम्पादिका.
जयपुर.
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सीपिकाएँ
नदी और नारी
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मैं कोई आईना नहीं थी
जो हर चेहरा लौटा देती.
मैं तो वो नदी थी
*
जिसने पत्थर को
भी बहना सीखा दिया.
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संपादन सज्जा
शक्ति.शालिनी मधुप अनुभूति .
शक्ति.शालिनी मधुप अनुभूति .
शक्ति. अनुभाग
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डॉ.रजनी परमार *
कवयित्री. लेखिका. एंकर पटना दूरदर्शन.
सम्पादिका. एम एस मीडिया.
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भाविकाएँ
सज कनुप्रिया के जूड़े
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प्रेम में देना मुझे
कनेर के फूल प्रिय !
सज कनुप्रिया के जूड़े
ज्यों इतराऊँ
पीत पट श्याम सा
हर धूप,धूल,बारिश
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और झेलते हुए उपेक्षा दंश को
जब भी बंशी की टेर सुनूं
कर श्रृंगार कनेल के फूलों से
दौड़ पड़ूं सब छोड़ छाड़
हिय लगने को तेरे प्रिय !
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संपादन सज्जा
शक्ति. डॉ. सुनीता रंजिता सीमा.
संपादन सज्जा
शक्ति. डॉ. सुनीता रंजिता सीमा.
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राधिकाकृष्णरुक्मिणी : आज का गीत : जीवन संगीत :भजन : पृष्ठ : ३.
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शक्ति.श्रद्धा मीना गुल
मुंबई डेस्क
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ए एंड एम मीडिया ब्लॉग प्रस्तुति
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राधिकाकृष्णरुक्मिणी : आज का गीत : जीवन संगीत : भजन : पृष्ठ : ३.
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शक्ति.श्रद्धा मीना गुल
मुंबई डेस्क
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धुन : दृश्यम.
ढ़ाई अक्षर प्रेम का : शक्ति : प्रिया अनुभूति.
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तराने : दृश्यम : लोकेशंस : नेपाल.
कुछ कहो तो कहा नहीं जाता
दर्दे दिल का सहा नहीं जाता.
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बीती बातों का कुछ ख़्याल करो
कुछ तो बोलों कुछ हमसे बात करो
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फिल्म : अभिनेत्री : हेमा.शशि कपूर.
क्या करें हम भी मौसम ऐसा है
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दार्जलिंग : टॉय ट्रेन : फिल्म : आराधना
दार्जलिंग डेस्क : शक्ति. प्रिया मधुप अनुभूति प्रस्तुति.
ढ़ाई अक्षर प्रेम का : शक्ति : धुन : दृश्यम.
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तुम्हारा दिल या हमारा दिल है
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शक्ति : प्रेम धुन : दृश्यम
गायन : अभिनय : शक्ति. गुल सक्सेना. मुंबई.
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अँखियों को रहने दो अँखियों के आस पास
कहीं दीप जले कही दिल ज़रा देख ले आके परवाने
तेरी कौन सी है मंजिल
बाग में जा खड़ी की खड़ी रह गयी.
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राधिकाकृष्णरुक्मिणी : शक्ति : प्रेम प्रकृति : कला दीर्घा : पृष्ठ : ५ .
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शिमला डेस्क
संपादन
शक्ति. स्वाति मधुप अनुभूति.
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राधिकाकृष्णरुक्मिणी : प्रेम प्रकृति शक्ति : फोटो दीर्घा : पृष्ठ :७.
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संपादन
शक्ति. मंजू संजू लक्षिका जोशी
शिमला डेस्क.
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गीता ज्ञान : मुझे भी कुछ कहना है : आभार : पृष्ठ :९.
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संपादन
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गीता ज्ञान : मुझे भी कुछ कहना है : आभार : पृष्ठ :९. ----------
संपादन
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शक्ति.अनु डॉ.रजनी सीमा
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मुझे भी कुछ कहना है : पृष्ठ : ९ / २.
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गीता ज्ञान : मुझे भी कुछ कहना है : आभार : पृष्ठ :९. ----------
संपादन
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शक्ति.अनु डॉ.रजनी सीमा
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मुझे भी कुछ कहना है : पृष्ठ : ९ / २.
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अंतराष्ट्रीय मित्रता दिवस : ३० जुलाई.
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भेदभाव से परे पवित्र नाता, अर्जुन, कृष्ण - द्रौपदी की अटूट मित्रता।
सच्ची मित्रता का रखे वो मान, पार्थ कृष्ण -द्रौपदी की पहचान।
सुख-दुख में जो साथ निभाए, वही सखा गोविंद कहलाए।
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महाशक्ति मीडिया प्रस्तुति
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शक्ति : ख़ुशी : देहरादून : अभिनीत
तराने : आया सावन झूम के
शक्ति. पल्लवी. गायिका : मध्य प्रदेश / मुंबई
फ़िर थामी थी साजन तूने मेरी कलाई क्यूँ
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ज़ी चाहे जब हमको आवाज दो
हम है वही हम थे जहाँ
प्रस्तुति : शक्ति सोनी मधुप रितु
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दृश्यम : भावना : प्रेम ही विश्वास है.
हम है वही हम थे जहाँ
प्रस्तुति : शक्ति सोनी मधुप रितु
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दृश्यम : भावना : प्रेम ही विश्वास है.
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यूला कांडा : किन्नौर कृष्ण मंदिर से : शक्ति तनु
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संभवामि युगे युगे
संभवामि युगे युगे
सूक्ष्मिकाएँ.

माधव : माया : छाया
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मौन है , मगर जागृत है ,
निःशब्द है, मगर निस्सार नहीं,
' मीन ' लक्ष्य सा ' खग 'लिए
मन में सिद्ध है अर्थपूर्ण है
भले बुरे की परख़, जिसे
दुर्जनों का अंत.
शिव शक्तियों का सम्मान सही
त्रिकालदर्शी
जो शब्दों का सारथी है
है साथ माधव जिसके
वह सार्थक है सम्पूर्ण है
सुसुप्त नहीं ,वह मौन सही.
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©️®️M.S.Media.डॉ. मधुप.
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Shakti Editorial Poem : 4.
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Editor.
Shakti. Priya.Seema Kajal
Darjeeling.Desk.
*
My dreams Sparkling beams.
Poem.
Shakti. Priya.Darjeeling.
*
The golden rays of morning kissed my face,
While I still rested in my peaceful place.
I wandered through my dreams with quiet delight,
Their gentle glow still shining warm and bright.
*
That lovely dream refused to fade away,
For in its arms I longed a while to stay.
But sparkling beams awakened me at last,
Though I wished those precious moments wouldn't pass.
*
The rising sun crept softly to my bed,
Its golden warmth around my blanket spread.
A ringing bell declared the break of day,
Reminding me there was no time to stay.
*
Yet still I dream,
and hope continues high.
poem.
*
Priya : Darjeeling : Monastery :
Photo Water Colour Painting
*
Oh, what a life—so busy like a bee,
From office work to home, no time feels free.
Each day repeats beneath the endless sky,
Yet still I dream, and hope continues high.
*
Editing : Decorative
Shakti. Naina Madhavee.Manjita Anubhuti.
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Shakti Vibes : English : Page : 5
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Editor.
Darjeeling Desk.
Shakti. Priya Seema Vani.
*
Something humbly you accept as true, good and the best for all
what you believe is the right belief.
*
@ Shakti. Dr.Sunita Ranjita Seema.
*
Either Silence or Better Seaking
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Radhika : Krishna : Rukmini : Photo Gallery.Page : 6
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Editor
Shakti. Dr.Anu Ritu Naina.
*
![]() |
Highest Krishna Temple Yulla Kanda : Kinnaur : Shakti.Manju Tanu Anubhuti. |
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Visuals News : News : Editorial Page : 7
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Editor.
Shakti. Naina Madhvee Seema
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You Said it : Courtesy : Page : 9.
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Editor.
Shakti. Kajal Seema.R.K.
Indraprasth Desk.
*
9th of July.
Our heartiest wishes on
*
Happy Marriage Anniversary
to You Both.
and for your United Lovable Life Journey
Editor.
Shakti.Manju Shreeram
Kinnaur. Himachal.
*
*
Hum Dev Shakti Family.
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Courtesy : Page : 9 / 2
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Editor.
Shakti. Dr.Sunita Ranjita Seema.
*
to
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Shakti.Vidisha.Advocate.Legal Advisor. Shakti.Seema Kumari.Advocate.
Shakti.Jasika Singh.Advocate.
*for providing us Nyayik Sanrakshan.
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You Said it : Wishes : Page : 9.
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Editor.
Shakti.Kajal.Seema.R.K.
Indraprasth Desk.
*
You Said It.
*
About Art Gallery .
A very nice and unforgettable memory for us.Really it's a very fabulous water color painting.
N.K. Singh.Varanasi.
N.K. Singh.Varanasi.
*
about Short Story
अ 'भय हो : अति सूक्ष्म लघु कथा.
The short story seems to be the real story of my kids joining first time the school....even I went into my childhood while I used to witness such an event...
Dr.Manish New Delhi.
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about Short Story
अ 'भय हो : अति सूक्ष्म लघु कथा.
Kahani padhne se apne bachon ke bachpan ki yaad aa gayi 😀
Anju.New Delhi.
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Such a heartwarming story !
Absolutely adorable !
It perfectly captures the innocence of a toddler.
This brought a huge smile to my face.😊
Shakti Editor. Kajal.New Delhi.
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