Krinvanto Vishwam Aryam : 4 : Karm : Krishna
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कर्म : कृष्ण.
और.कृण्वन्तो विश्वमार्यम.४.
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* विषय सूची : पृष्ठ : ०. ⭐ * कृष्ण : कर्म : कृण्वन्तो विश्वमार्यम. ⭐ आवरण पृष्ठ :०. विषय सूची :०. आजकल : पृष्ठ :०. हार्दिक आभार प्रदर्शन : पृष्ठ : ०. कृण्वन्तो विश्वमार्यम. दर्शन : पृष्ठ :१. सम्पादित. डॉ.सुनीता सीमा शक्ति प्रिया. सम्पादकीय शक्ति : पृष्ठ : २. कृण्वन्तो विश्वमार्यम.आकाश दीप. सम्पादकीय आलेख पद्य संग्रह : पृष्ठ : ३. कृण्वन्तो विश्वमार्यम.तारे जमीन पर.सम्पादकीय आलेख गद्य संग्रह पृष्ठ : ४. कृण्वन्तो विश्वमार्यम : शक्ति : कला दीर्घा : पृष्ठ : ५. दिन विशेष : आज का पंचांग : राशि फल : शुभकामनायें : पृष्ठ :६. कृण्वन्तो विश्वमार्यम : शक्ति : फोटो दीर्घा : पृष्ठ :७. कृण्वन्तो विश्वमार्यम :समसामयिकी. समाचार : दृश्यम पृष्ठ : ८. मुझे भी कुछ कहना है : आपने कहा : आभार :पृष्ठ : ९. * * आज कल : पृष्ठ : ०. * डिजिटल दुनियाँ : तथापि गुरु की आवश्यकता शिक्षक दिवस : गुरु शिष्य परंपरा. शिष्य बनकर कुछ सीखते हैं तो उस गुरु का सम्मान करें. यदि गुरु है तो उसकी मर्यादा को निभाएं * शक्ति. आलेख डॉ.सुनीता रंजिता सीमा. * अन्य संस्थानों की तरह डी ए वी विद्यालयों में भी शिक्षक दिवस की धूम रही। परिसर, व कक्षाएं सजाई गई। सजे सजाए गए डॉ.राधाकृष्णन की फोटो के आगे पुष्पांजलि की गयी। उनकी जीवनी, उनका जीवन संघर्ष, उनके त्याग उनके आदर्श किसने कितना याद किया यह प्रश्न भी अनुत्तरित ही है सब के अपने मन के भीतर है । हम पार्थ हैं श्री कृष्ण ही हमारे गुरु पथ प्रर्दशक हैं : हमने अपने लिए गोविन्द को ही सर्वस्व चुना है। हमारे लिए शिक्षक, भगवान सब वही हैं। तथापि उन समस्त गुरुओं के लिए चाहे उनकी उम्र सीमा कुछ भी हो, बड़े, छोटे या बूढ़े हो उनका हम सदैव सम्मान करते हैं। शिक्षकों को शिक्षक दिवस की भेंट दी गयी। उनका सम्मान हुआ। क्या यह सम्मान सिर्फ एक दिन के लिए हो ? या फिर पूर्ण साल के लिए। विचार करें। गुरु शिष्य परंपरा में किस गुरु किस शिष्य की बात करें। सिर्फ सम्यक के लिए। आज की डिजिटल दुनिया आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, गूगल और इंटरनेट के युग में गुरु का महत्व कम होने के बजाय और भी अधिक बढ़ गया है। जहाँ इंटरनेट और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस हमें कुछ ही सेकंड में किसी भी विषय की असीमित जानकारी दे सकते हैं, वहीं उस जानकारी को सही दिशा में उपयोग करने का विवेक सिर्फ एक गुरु ही सिखा सकता है। डिजिटल युग में गुरु की भूमिका अब केवल ' सूचना देने वाले ' की नहीं, बल्कि एक गाइड, मेंटॉर और फिल्टर की हो गई है. जानकारी और ज्ञान में अंतर : इंटरनेट के पास डेटा का भंडार है, लेकिन गुरु के पास अनुभव और विवेक होता है। डेटा को सार्थक ज्ञान में बदलना केवल गुरु ही सिखा सकते हैं। सही और गलत की पहचान : डिजिटल दुनिया में ' फेक न्यूज़ ' और भ्रामक जानकारियों की भरमार है। गुरु छात्रों को विशाल सामग्री में से प्रासंगिक और विश्वसनीय सामग्री चुनना सिखाते हैं। नैतिक मार्गदर्शन : मशीनें या हमें कोडिंग या गणित तो सिखा सकते हैं, लेकिन वे हमें संस्कार, संवेदनशीलता, ईमानदारी और मानवीय मूल्य नहीं सिखा सकते मानसिक और भावनात्मक सहारा : इंटरनेट स्क्रीन की दुनिया में अक्सर बच्चे अकेलेपन या मानसिक तनाव का शिकार हो जाते हैं। एक गुरु ही शिष्य की मनःस्थिति को समझकर उसे सही और सकारात्मक रास्ता दिखाता है। डिजिटल माध्यमों का सही उपयोग : तकनीक का आँख बंद करके भरोसा करने के बजाय, उसका रचनात्मक और सही इस्तेमाल कैसे किया जाए, यह समझ हमें गुरु से ही मिलती है。 आज डिजिटल गुरु - शिष्य परंपरा के माध्यम से संवाद और भी आसान हो गया है। देश के किसी भी कोने में बैठा छात्र ऑनलाइन कक्षाओं और ई - लर्निंग के जरिए बेहतरीन गुरुओं से जुड़ पा रहा है। निष्कर्षतः तकनीक चाहे जितनी भी उन्नत हो जाए, वह केवल एक साधन है। मशीन हमें 'आजीविका' के साधन दे सकती है, लेकिन जीवन जीने की ' विद्या ' और सही दिशा आज भी सिर्फ एक गुरु ही दे सकता है। अच्छे संस्कार अपनी संस्कृति का ज्ञान गुरु ही दे सकता है , यह सदैव याद रखें। गुरु शिष्य परंपरा : शिष्य बनकर कुछ सीखते हैं तो उसे गुरु का सम्मान करें यदि गुरु है तो उसकी मर्यादा को निभाएं। चलते -चलते गुरु शिष्य परंपरा का निर्वहन करते रहिए यदि गुरु है तो उसकी मर्यादा को निभाएं। यदि शिष्य बनकर कुछ सीखते हैं तो उसे गुरु का सम्मान करें। यही शिक्षक दिवस का निहित संदेश है आप समस्त शिक्षकों को जिनका स्वयं, परिवार, समाज तथा देश के उन्नयन में कुछ न कुछ, कहीं ना कहीं योगदान है उन समस्त शिक्षकों को हम याद करते हैं। और उनके लिए हमारी तरफ से अनंत शिव शक्ति शुभकामनाएं। बने रहिए हमारे साथ सम्यक साथ के लिए हम आपका आभार प्रकट करते हैं. * सज्जा व संपादन : शक्ति : डॉ.भावना माधवी नीलम * |
![]() |
* शक्ति.अर्चना.आर्य डॉ.अजय कुमार.जाह्नवी ऑय केयर रिसर्च सेंटर.बिहार शरीफ़.समर्थित. |
*
हार्दिक आभार प्रदर्शन :पृष्ठ :०.
संपादन
शक्ति.डॉ.भावना माधवी स्मिता
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कृण्वन्तो विश्वमार्यम. पृष्ठ के निर्माण में
सहयोग देने के लिए
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कृण्वन्तो विश्वमार्यम : दर्शन : आज : पृष्ठ :१.
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सम्पादिका.
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शक्ति.नीतू प्रीति भावना सिंह.
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देख मुझे सब है पता.
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सत्यम शिवम् सुंदरम
*
* विचार : सन्दर्भ माया. शक्ति भावना ओम : छाया. |
*
भूले नहीं तो दोनों जहाँ में साथ रहेंगी सिर्फ़ आपकी अच्छाइयां
और स्मृत रहेंगे आपके कर्म.
*
साधना : चिंतन मनन अपने एकाकीपन की अवस्था है
जिसमें स्वयं की गलतियों व कर्मों का आत्म निरीक्षण होता है
*
प्रेम प्राकृतिक, व निःशुल्क है फिर भी किसी के लिए मिले तो अनमोल
ईश्वरीय उपहार है,
*
नीति : नीतीश : कूटनीति
*
सबकुछ जानते हुए भी .....अंजान व मुर्ख बने रहिए
तब ही आप सत्यम शिवम् सुंदरम को परीक्षित कर पायेंगे
*
विचार @ शक्ति संगीता अजीत राजीव सिंह
*
सब से सब्र नहीं होता माधव
लेकिन सब्र से ही तो सब होता है ना ?
विचार @ शक्ति सीमा.गोविन्द डॉ.आर के.
*
अथश्री महाभारत कथा
*
समूह और संख्या मत देखिए
व्यक्ति विशेष और सामर्थ्य पहचानिए
कोरवों ने नारायणी सेना चाही
पांडवों ने नारायण श्री कृष्ण को : परिणाम आप जानते ही हैं
*
कुछ तो लोग कहेंगे लोगों का काम है कहना
*
निंदा व आलोचना से चिंतित हो कर अपने परम लक्ष्य
को कदापि न छोड़ें क्योंकि सफलता मिलते ही निंदकों की
राय बदल जाती है
विचार @ शक्ति. सीमा.गोविन्द डॉ.आर के.
*
साथी हाथ बढ़ाना
*
हमारी आज़ादी सिर्फ़ एक विरासत नहीं बल्कि हमारे कर्तव्यों की याद
दिलाने वाली एक मिसाल है, अपने भीतर समझ, सहन शक्ति को
संरक्षित करते हुए कर्म शील बनें और प्रगति पथ पर सबके साथ बढ़ें
*
यदि गीता का सार जो हो रहा है वो सही है
तो किंचित यह भी सही है कि जितना बेहतर आप खो रहें हैं
उससे भी बेहतर आपको मिलेगा
*
क्रोध आए तो स्वयं से लड़ें लोगों से नहीं
संकट यदि आए तो परिस्थिति से लड़ें स्वयं से नहीं.
*
विचार @ शक्ति सीमा.गोविन्द डॉ. आर के.
*
जिंदगी का सफ़र ये है कैसा सफ़र.
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* विचार : सन्दर्भ माया. छोटू कृष्णा : छाया. |
*
बुरा जो देखन मैं चला
बुरा न मिलया कोई
*
प्रसन्न वही है जो सर्वप्रथम अपना मूल्यांकन करते हैं
परेशां वो है जो सदैव दूसरों का मूल्यांकन सर्वप्रथम करते हैं
*
स्वाधीनता के सही मायने
*
कुविचारों से आजादी ,मन, शुद्धता स्वस्थ्य
मानसिकता की आज़ादी, नकारात्मक विचारों से आज़ादी, वास्तव में अन्य जन मन गण की
आज़ादी का सम्मान ही स्वाधीनता के सही मूल आधार हैं ।
*
विचार @ शक्ति सीमा गोविन्द मधुप
*
सम्यक साथ, सोच और शब्द.
*
' सोच ', ' शब्द ' और ' कर्म ' सम्यक रखें ,अपने आर्य जीवन में
प्रत्येक के लिए सफ़ाई देने की जरूरत नहीं
सब को अपने कर्मों का हिसाब यही दे के जाना है
*
शक्ति. सीमा गोविन्द डॉ. आर के दुबे
*
जीवन में चैन से जीने के लिए सभी बैचेन है, माधव !
शोध विचार @ शक्ति संगीता अजीत राजीव सिंह.
*
भ्रम से हमेशा रिश्तें नाते ही बिखरते है,
प्रेम के कच्चे धागे से तो अजनबी भी बंध जाते है
शोध विचार @ शक्ति. सीमा डॉ. आर के भावना
*
विचार संदर्भित : माया.
शक्ति : कृति : छाया.
*
मात्र सवालों के जवाब रखने से नहीं होता
उन सवालों का सामना के लिए आप
कितना सम्यक तरीक़े से तैयार है, मायने ये हैं
शक्ति.सीमा गोविन्द डॉ.आर के दुबे
*
शब्द भावनाएं और मर्यादाएं
*
जो बोले जाते है वे शब्द हैं
जो बोले नहीं जा सकते वो भावनाएं होती है
और जो बोलना होता है बोल नहीं पाते
वो मर्यादाएं होती हैं
*
शक्ति. सीमा गोविन्द डॉ.आर के दुबे
*
मेरी खूबियों की चर्चा सार्वजनिक करें
मेरी कमियों का जिक्र सिर्फ़ मुझसे व्यक्तिगत करें
शोध विचार @ शक्ति डॉ.शालिनी सुनीता सीमा
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कृण्वन्तो विश्वमार्यम. |
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सम्पादकीय शक्ति : पृष्ठ :२.
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कर्म : कृष्ण : कृण्वन्तो विश्वमार्यम.
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सम्पादकीय.
आर्य शक्ति समूह : पृष्ठ : २.
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संरक्षण.शक्ति.
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शक्ति.अंजलि.प्राचार्या.
शक्ति.प्रिया.प्राचार्या.
शक्ति.साक्षी.भा.पु.से.
*
प्रधान सम्पादिका.
*
*
शक्ति.डॉ.मीरा श्रीवास्तव.
शक्ति.डॉ.भावना.
शक्ति.अंशिमा सिंह.
*
कार्यकारी शक्ति संपादिका.
*
शक्ति.डॉ.सुनीता रंजीता नीलम.
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कृण्वन्तो विश्वमार्यम.आकाश दीप. सम्पादकीय आलेख पद्य संग्रह : पृष्ठ : ३.
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संपादन
शक्ति डॉ.मीरा श्रीवास्तवा.डॉ आर के दुबे .नीलम.
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शक्ति. अनुभाग.
भाविकाएँ
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शक्ति. अनुभाग.
भाविकाएँ
*
शक्ति.सीमा
*
गणपति वंदना
*
गणपति वंदना गा सकूं वो स्वर पा सका नहीं
प्रभु विमुग्ध कैसे करूं वो रीत पा सका नहीं ?
विदग्ध कंठ है मचल रही विहाग रागिनी
प्रशांत मन मचल रहा देखूं सुरत सुहावनी.
तुम्हें विमुग्ध कर सकूं वो रीत पा सका नहीं.
सप्रेम निमंत्रण भेज रहा जला प्रदीप भाव से
संवार मेरे स्वर गीत प्रभु सुभग सुगीत डोर से.
गा गा विमुग्ध कर सकूं वो गीत गा सका नहीं.
समष्टि वाह वाह करें उठें जब स्वर लहरियां
मिले मुझे सनेह और तब उठे किलकारियां.
कृपा करो प्रभु प्रीत मिले जो पा सका नहीं.
*
डॉ.आर. के. दुबे.
साहित्यकार.संपादक.
*
संपादन सज्जा
शक्ति.नीलम सीमा स्मिता
*
शक्ति.स्मिता
छायाकार. सम्पादिका.
*
*
तेरी मेरी कहानी है
*
ज़िंदगी चलती रहती है
ख्वाहिशें मगर रुक सी जाती है.
हर बीता हुआ लम्हा
पुरानी यादें बन जाता है.
न जाने क्यों अनचाहा वक़्त थम सा जाता है ?
अच्छा वक़्त पलभर में क्यों निकल जाता है.
खुशियों के इंतज़ार में,
पूरी उम्र निकल जाती है.
कभी अच्छी कभी बुरी।
ज़िंदगी और कुछ भी नहीं
तेरी मेरी कहानी है
कभी तुम ग़लत तो मैं सही
कभी मैं ग़लत तो कभी तुम सही
*
शक्ति प्रियांशी : छाया
*
मुझमें मुझे ही
ज़िंदा होने नहीं देता
एक शोर है भीतर,
जो सोने नहीं देता.
मौन ऐसा बसा है भीतर,
कि जीने नहीं देता.
इस क़दर हलचल है मन में,
सुकून का एहसास होने नहीं देता.
किससे कहूँ हाल-ए-दिल,
किससे करूँ ये दर्द बयाँ,
मुझमें मुझे ही ज़िंदा होने नहीं देता.
*
सम्पादन व सज्जा.
शक्ति.माधवी सीमा डॉ.भावना.
*
है ! शहीद कारगिल के तुम्हें, है नमन वंदन और प्रणाम.
*
*
देश की आन - बान - शान पर, हो गए जो हंसकर कुर्बान,
है ! शहीद कारगिल के तुम्हें, है नमन, वंदन और प्रणाम
देश की मिट्टी दड़क उठी थी,लहू से अमर शहीदों की,
वंदे मातरम्'के जयघोष से था गूंज रहा नीला आसमान.
था एक ओर पराक्रम " शेरशाह " विक्रम बत्रा का,
दूसरी तरफ योगेंद्र यादव की साहस भरी ललकार.
भांप नहीं पाया दुश्मन, चक्रव्यूह था समझ के पार,
भड़का आग देशप्रेम की, थे जांबाज मनोज पांडे तैयार.
' महावीर ' बलवान और कैप्टन के गुस्से ने बरसाए गोले,
दुश्मन पर सबने मिल के, किए फिर अनगिनत वार,
हो गए छलनी बदन उनके, भरते रहे फिर भी हुंकार.
घुटना टेका फिर दुश्मन ने, भाग गए थे सीमा पार,
पलकें बिछाए देश खड़ा था. थे देख रहे सब सांसें.
तिरंगे में लिपटे इन सपूतों ने विजयश्री से किया विश्राम,
धन्य-धन्य है भारत भूमि, है धन्य मां और पिता महान.
है धन्य वो अधौगिनी, " परमवीर चक्र का जिसको मान,
देश की आन-बान-शान पर हो गए जो हंसकर कुर्बान.
है ! शहीद कारगिल के तुम्हें, है नमन वंदन और प्रणाम.
*
सम्पादन व सज्जा.
शक्ति.डॉ.आर के दुबे .सीमा. अंशिमा सिंह.
*
*
शक्ति अनुभाग
*
*
हिंदी दिवस पर विशेष
लघु कविता
*
हिंदी थी माथे की बिंदी.
शक्ति रंजिता
*
बस इतनी सी बात
*
हिंदी दिवस पर हिंदी ने
मुस्कराकर सवाल किया
"सालभर थी पिछली कतार में,
आज किसने याद किया ? "
अंग्रेज़ी बोली, " मुझसे क्यों ?
दोष मेरा मत बतलाओ ,
मैंने कब कहा,
कि अपनी भाषा बोलने में तुम शर्माओ ? "
' माँ ' को ' मम्मी ' कहना यह आपकी चॉइस है !
पर "माँ" कहने में शर्म कैसी
बस यही सोचने की बात है !
हिंदी अब प्रेम से बोली नहीं,
मानो कंधों का भार हुई ;
जिसे हदय से अपनाना था,
वही आज केवल ' ढोई ' गई.
हिंदी थी माँ के माथे की बिंदी,
हम सबकी आन और पहचान;
फिर क्यों उसी को समझ लिया
अनपढ़ और पिछड़ेपन का निशान ?
*
सम्पादन व सज्जा
शक्ति.डॉ.सुनीता नीलम सीमा.
*
लघु कविता : २.
हम जैसे हैं वैसे ही रहेंगे.
नाप सको तो नाप लेना किरदार हमारा,
जुबान में कड़वाहट हो सकती हैं
लेकिन जमीर में मिलावट नहीं।
सच कहने की आदत हैं हमें, इसलिए अक्सर लोग खफा हो जाते हैं।
पर झूठी तारीफों के सहारे, हम अपने उसूल नहीं बेचते हैं।
हमारी खामोशी को कमजोरी मत समझना,
वक्त आने पर जवाब भी देते हैं।
मगर हर किसी से उलझना हमारी फितरत नहीं,
हम अपने कर्मो से हिसाब देते हैं।
*
भाविका संदर्भित : माया
शक्ति : कृति : छाया.
रिश्ते निभाते हैं पूरे दिल से,
पर स्वाभिमान गिरवी नहीं रखते।
जो साथ चले सम्मान के साथ,
उसे कभी अकेला नहीं छोड़ते।
दौलत से नहीं, नीयत से पहचान होती हैं,
चेहरे से नहीं, चरित्र से शान होती हैं।
हम जैसे हैं वैसे ही रहेंगे हमेशा,
क्योंकि सच्चाई ही हमारी असली पहचान होती हैं।
नाप सको तो नाप लेना किरदार हमारा,
कमी शब्दों में हो सकती है, मगर इंसानियत में नहीं।
*
सम्पादन व सज्जा
शक्ति.डॉ.सुनीता रंजीता सीमा.
*
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कृण्वन्तो विश्वमार्यम.तारे जमीन पर.सम्पादकीय आलेख गद्य संग्रह पृष्ठ : ४.
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संपादन.
शक्ति.रंजिता स्मिता नीलम.
*
शक्ति आलेख : ४ / ०.
*
शक्ति.नीलम. पांडेय.
लेखिका कवयित्री सम्पादिका.
*
सह शक्ति. डॉ.सुनीता रंजिता
' गुरू कुम्हार सीस कुंभ है '
*
भारतरत्न ,भारत के द्वितीय राष्ट्रपति, उपराष्ट्रपति और कई महत्वपूर्ण पदों पर आसीन रह चुके महान दार्शनिक डा.कृष्णन के जन्मदिन शिक्षक दिवस पर डा राधाकृष्णन को शत शत नमन करते हुए अब बात करते हैं, गुरू शिष्य परम्परा की।
वैदिक काल से ही गुरु-शिष्य की परंपरा : वैदिक काल से ही गुरु-शिष्य की परंपरा चली आ रही है. गुरु-शिष्य की परंपरा नई पीढ़ी तक पहुंचाने का सोपान है. गुरु द्वारा जो शिक्षा या विद्या शिष्य को सिखाई जाती है,उस ज्ञान को अर्जित कर बाद में शिष्य गुरु के रूप में अपने शिष्यों को उसकी शिक्षा देता है. यही क्रम चलता रहता है और शिक्षा व विद्या का विस्तार गुरु-शिष्य की परंपरा से होता रहता है।भारतीय परंपरा में शिक्षा दान का कार्य त्यागी लोगों ने ही किया। जब तक ऐसा रहा तब तक भारत का कल्याण हुआ।
स्वामी विवेकानंद के अनुसार इस देश में शिक्षा दान का भार पुन त्यागी लोगों को नहीं दिया जाता तब तक भारत को दूसरे देशों के तलवे चाटने होंगे।केवल पांडित्य प्रदर्शनकारी गुरु नहीं हो सकते। सच्चे गुरु यश, धन आदि जैसी स्वार्थ-सिद्धि लिए शिक्षा नहीं देते। वे प्रेम और कर्तव्यवश अपना कार्य करते हैं।
प्रथम ‘क्या’ सिखाया जाए तथा द्वितीय ‘कैसे’ सिखाया जाए ? भारतीय वांग्मय में हमें गुरुकुल व्यवस्था के विहंगम दिग्दर्शन होते हैं। वैदिक काल में शिक्षा को व्यवस्थित रूप देने के क्रम में सर्वप्रथम दो प्रश्न उभरे। प्रथम ‘क्या’ सिखाया जाए तथा द्वितीय ‘कैसे’ सिखाया जाए? इन प्रश्नों के अन्तर्गत उन विषयों का समावेश हुआ जिनके ज्ञान से मानव समाज में उपयोगी भूमिका निभाने में सक्षम हो सका। प्राचीन काल में शिक्षारूप यह उच्च कोटि का कार्य नगरों और गाँवों से दूर रहकर शान्त, स्वच्छ और सुरम्य प्रकृति की गोद में किया जाता था। इनका संचालन राजाश्रय व जनसहयोग से होता था। इन गुरुकुलों में हर वर्ण के छात्र साथ पढ़ते थे। गरीब-अमीर में किसी प्रकार का भेदभाव नहीं था। सबको समान सुविधाएं दी जाती थी। गुरुकुल में प्रवेश की उम्र आठ साल की होती थी।नई शिक्षा नीति कई मायने में विद्यार्थी के सर्वांगीण विकास को गति प्रदान करने वाली सिद्ध होगी। अब बात करते हैं।
*
गतांक से आगे : १.
जब राष्ट्रपति पद पर आसीन
*
डॉ. राधाकृष्णन *
मिले १०,००० मासिक वेतन की जगह मात्र ढाई हजार रुपे मासिक वेतन लेते थे
*
प्रिय शिक्षक डॉ. राधाकृष्णन की स्मृति में शुरु हो गयी : शिक्षक दिवस की परंपरा : एक ऐसे शिक्षक की जिसके लिए सर्वविदित है कि वर्ष १९२१ मैसूर के महाराजा कॉलेज के भव्य सभागार के बाहर फूलों से सजी-धजी एक बग्घी खड़ी थी। इस बग्घी के चारों ओर छात्रों का विशाल हुजूम उमड़ा हुआ था। इस बग्घी को खींचने के लिए घोड़े नहीं जुड़े हुए थे बल्कि इसे छात्रों को ही खींचना था।अब उस शख्स की बात करते हैं जिसे इस बग्घी की सवारी करनी थी... ये शख्स कोई और नहीं बल्कि थे डॉ. सर्वपल्ली राधाकृष्णन। छात्रों के प्रिय शिक्षक राधाकृष्णन का कोलकाता यूनिवर्सिटी में तबादला हो गया था इसलिए छात्र उन्हें इतनी भावपूर्ण -स्नेहिल बधाई दे रहे थे।
उनका जन्मदिवस यानी ५ सितंबर ही राष्ट्रीय शिक्षक दिवस : भारत के प्रथम उपराष्ट्रपति और दूसरे राष्ट्रपति डॉक्टर सर्वपल्ली राधाकृष्णन अपनी राजनीतिक शख्सियत से इतर एक महान शिक्षक भी थे इसीलिए इनके जन्मदिवस यानी ५ सितंबर को प्रतिवर्ष राष्ट्रीय शिक्षक दिवस के रूप में मनाया जाता है।
५ सितंबर को ही शिक्षक दिवस क्यों मनाया जाता है ?... इसके पीछे भी एक दिलचस्प किस्सा है -" यह बात वर्ष १९६२ की है जब डॉ सर्वपल्ली राधाकृष्णन भारत के दूसरे राष्ट्रपति के रूप में निर्वाचित हो गए थे और उनका निवास दिल्ली स्थित राष्ट्रपति भवन बन चुका था। इसी दरम्यान उनके जन्मतिथि की तारीख यानी ५ सितंबर आने को थी।
जब उनके कुछ दोस्त और छात्र ने उनसे उनका जन्मदिन मनाने का निवेदन किया तब उन्होंने कहा कि यदि उनके जन्मदिन को वार्षिक शिक्षक दिवस के रूप में मनाया जाए तो ये उनके लिए बेहद सौभाग्य की बात होगी।
उनके चाहने वालों ने ठीक ऐसा ही किया... तबसे वार्षिक तौर पर ५ सितंबर को शिक्षक दिवस मनाने की शुरूआत हुई। बाद में इस दिन को राष्ट्रीय शिक्षक दिवस के रूप में मनाया जाने लगा।"
पूरी दुनिया 5 अक्टूबर को शिक्षक दिवस मनाती है पर भारत में ५ सितंबर को ही शिक्षक दिवस डॉ. सर्वपल्ली राधाकृष्णन जी की इच्छा का सम्मान करते हुए मनाया जाता है।
सादा जीवन उच्च विचार : सादा जीवन उच्च विचार यह मुहावरा सुनने में मनमोहक है किंतु इसके अनुरूप जीवन को ढालना अत्यंत कठिन है इस मुहावरे को साकार कर जीवन में उतारने वाले डॉक्टर सर्वपल्ली राधाकृष्णन और महापुरुषों की श्रेणी में आते हैं जिनकी कथनी और करनी में कोई अंतर न था वह जो कहते थे उसे करके ही दम लेते थे डॉ राधाकृष्णन ने जीवन को कठिन तपस्या के रूप में लिया पर स्वयं को किस की आग में तपा कर कुंदन बना दिया तदनंतर उन की चमक से संपूर्ण विश्व में प्रकाशित हो उठा ले किसी राजनीतिक दल अथवा जोशीले भाषणों के बल पर दुनिया में पूजनीय नहीं हुए बल्कि उन्होंने उस सम्मान और ऊंचाइयों को अपनी योग्यता के बल पर प्राप्त किया उनका जीवन एक शिक्षक के रूप में आरंभ हुआ था लेकिन अपने बौद्धिकता और योग्यता के बल पर उन्होंने एक महान दार्शनिक और लेखक के रूप में ख्याति अर्जित की साथ ही एक ओजस्वी वक्ता के रूप में पहचाने गए।
१०,००० मासिक वेतन की जगह मात्र ढाई हजार रुपे मासिक वेतन लेते थे : जब डॉ. राधाकृष्णन राष्ट्रपति पद पर आसीन हुए तो उन्हें ₹ १०,००० मासिक वेतन मिलता था लेकिन यह मात्र ढाई हजार रुपे मासिक वेतन लेते थे उनके वेतन की शेष राशि देश की उन्नति और विकास के कार्यों में खर्च होती थी डॉक्टर राधाकृष्णन देश के प्रति समर्पित व्यक्ति थे ।
माता-पिता, गुरू और वैसे हर व्यक्ति जिससे हमने कुछ सीख ली को नमन-वंदन करते हुए सभी को शिक्षक दिवस की हार्दिक शुभकामनाएं...
*
संपादन व सज्जा
शक्ति. डॉ.भावना प्रिया सीमा.
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कृण्वन्तो विश्वमार्यम : शक्ति : कला दीर्घा : पृष्ठ : ५.
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संपादन
शक्ति.सीमा रंजिता फ़रहीन.
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दिन विशेष : तराने आज : शुभकामनायें : पृष्ठ : ६.
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संपादन
शिमला डेस्क.
शक्ति.डॉ.शालिनी.
आर्य.राकेश कुमार.प्राचार्य.शिमला.
शक्ति.अंशिमा.प्राचार्या.
*
कर्म : कृष्ण : कृण्वन्तो विश्वमार्यम.
*
गणपति महोत्सव : मुंबई डेस्क.
*
वक्रतुण्ड महाकाय सूर्यकोटि समप्रभ।
निर्विघ्नं कुरु मे देव सर्वकार्येषु सर्वदा॥
*
श्री गणेशाय नमः
*
गणेशोत्सव की अनंत शिव शक्ति शुभकामनाएं
शक्ति. डॉ.भावना माधवी शाहिना
*
हिंदी दिवस : १४ सितम्बर.
समस्त को हिंदी दिवस की हार्दिक
अनंत शिव शक्ति शुभकामनाएं
*
मीडिया सेल
शक्ति.अंशिमा रंजिता सीमा.
सत्य प्रकाश आर्य डी.ए.वी. पब्लिक स्कूल.बिहार शरीफ.
*
गुरु गोविन्द दोनों बनें
*
जिनके छात्र राम , कृष्ण व अर्जुन हो
*
शिक्षक दिवस की अनंत शिव शक्ति शुभकामनाएं
शक्ति माधवी शाहिना डॉ. भावना
*
*
कर्म : कृष्ण : कृण्वन्तो विश्वमार्यम
*
शुभकामनायें :
जन्म दिन की : ११ : ०८
*
शक्ति.नमिता सिंह.
शक्ति.नमिता सिंह.
रानीखेत डेस्क..
यात्रा वृतांत लेखिका. व्लॉगर.
छायाकार.सम्पादिका. महाशक्ति मीडिया
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को उनके अवतरण दिवस की हम सभी
की तरफ़ से हार्दिक अनंत शिव शक्ति शुभकामनायें.
*
प्रेरणादायी संगीत.
फ़िल्म : हमराज़.१९६७.
सितारे : सुनील दत्त. विम्मी. राजकुमार.
गीत : साहिर लुधियानवी . संगीत : रवि. गायक : महेंद्र कपूर.
गाना : न मुँह छिपा के जियो न सर झुका के जियो
ग़मों का दौर भी आए तो मुस्कुरा के जिओ
घटा में छिप के सितारें फना नहीं होते
अँधेरी रात के दिल में दिए जला के जिओ
*
गाना सुनने व देखने के लिए नीचे दिए गए लिंक को दवाएं.
*
मेरी पसंद
डॉ.मधुप.
शक्ति.हिमानी. मसूरी.
आर्य.राकेश कुमार.प्राचार्य डी ए वी. शिमला.
*
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कृण्वन्तो विश्वमार्यम : शक्ति : फोटो दीर्घा : पृष्ठ :७.
---------
संपादन
शक्ति.डॉ.भावना स्मिता वाणी.
*
![]() |
| डीएवी : पॉवर ग्रीड : बिहार शरीफ : आज़ादी का जश्न : फोटो : कोलाज. शक्ति. प्रीति मनोज शिवानी. |
![]() |
पर्वत के उस पार : रावी : सतलुज : झेलम : काश्मीर :फोटो डॉ.भावना सुनीता वाणी: पानी और पुल |
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कृण्वन्तो विश्वमार्यम :समसामयिकी. समाचार : दृश्यम पृष्ठ : ८.
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संपादन
शक्ति.शालिनी स्मिता प्रेरणा.
*
*
*
वो जब याद आए
लघु वृत्त चित्र :
शहीदे.आजम भगत सिंह जयंती
२८.०९. १९०७
शिक्षा : लाहौर.डी ए वी.
*
लघु वृत्त चित्र : धारावाहिक : १
*
शहीदे. आजम भगत सिंह : १९०७ - १९३१.
*
*
: शक्ति स्मिता : हम भी ऐसे रंग जाए प्रेम में
*
*
शिक्षक दिवस : लघु फिल्म : प्रस्तुति
*
मीडिया सेल.सत्य प्रकाश आर्य.
लघु फिल्म :अवधि : २.१३.मिनट
शक्ति. डॉ.सुनीता रंजिता सीमा.
*
*
रक्षा बंधन
*
विक्रम संवत : २०८३ शक संवत : १९४८.
दिनांक : २८.०८ .२६ .
श्रावण : शुक्ल पक्ष : पूर्णिमा .
दिन. शुक्रवार.
त्रिशक्ति दिवस. मूलांक :१.
*
शक्ति. फ़रहीन प्रेरणा प्रियांशी.
*
*
वेद प्रचार सप्ताह :
श्रावणी मास. अति लघु फ़िल्म
एम. एस. मीडिया प्रस्तुति
देखने के लिए नीचे दिए गए यूटुब के लिंक को दवाएं.
*
अख़बार की कतरनों में : आज.
दैनिक भास्कर : २७.०८.२६.
बिहारशरीफ : पृष्ठ : ४.
*
दैनिक जागरण : २७.०८.२६.
*
अख़बार की कतरनों में : आज. २७.०८.२६.
प्रथम मीडिया एडवरटाइजिंग : पाटलिपुत्र
सहयोगी एम. एस. मीडिया.
*
*
शक्ति.अंशिमा रंजिता सीमा सिंह
*
*
आजकल : वेद प्रचार सप्ताह : श्रावणी मास. पृष्ठ : ०
*
शक्ति.अंशिमा रंजिता सीमा सिंह.
*
वेद प्रचार सप्ताह : श्रावणी मास.
कृण्वन्तो विश्वमार्यम.
सम्पादकीय : संक्षिप्त वार्ता व ज्ञात सूत्रों की माने तो समस्त डीएवी संस्थाओं, विद्यालयों में वेद प्रचार सप्ताह के अंतर्गत श्रावणी मास में पुरानी वैदिक परंपरा के अनुसार जानी पहचानी पहल होती है । वेदों की ओर लौट चलो के निमित एक आर्य समाज की कल्पना करते हुए हम सभी इस दिशा में सार्थक प्रयास भी करते है।
वेद प्रचार सप्ताह सात दिनों तक चलने वाला एक विशेष सांस्कृतिक और धार्मिक आयोजन है।
इसे मुख्य रूप से आर्य समाज और डीएवी संस्थाओं द्वारा वेदों के ज्ञान, भारतीय संस्कृति, देश प्रेम और मानवीय मूल्यों यथा मानवता , प्रेम दया ,करुणा ,त्याग सहयोग, व सम्यक कार्यों के सब की बराबर सहभागिता, सब का साथ सबका विकास के समवर्धन, प्रचार-प्रसार, के लिए श्रावणी पर्व के आसपास मनाया जाता है।
विद्यार्थियों को वेदों से प्रेरणा लेकर श्रेष्ठ चरित्र निर्माण करने तथा भारतीय संस्कृति एवं प्रकृति के प्रति संवेदनशील बनने के लिए प्रेरित किया जाता है । हम भूले नहीं तो वेदों का ज्ञान में ही जीवन का प्रकाश है।
सच कहें तो यह किसी संस्था विशेष का नहीं आम अवाम का होना चाहिए जिससे व्यक्ति , परिवार, समाज देश परदेश की सर्वांगीण उन्नति होगी। मुख्य गतिविधियाँ में यज्ञ और हवन शुद्धि और सकारात्मकता के लिए सामूहिक यज्ञ किए जाते हैं। प्रवचन बतौर वेदों के सार्वभौमिक संदेश, इसके महत्व और ज्ञान पर चर्चा होती है।
शैक्षणिक कार्यक्रम की यदि बात करें तो स्कूलों में बच्चों के लिए भाषण, पेंटिंग निबंध और वैदिक संस्कृति से जुड़ी प्रतियोगिताएं होती हैं। अनेकता में एकता, भारतीय संस्कृति के मूल उदेश्य को समझना समझाना मुख्य लक्ष्य होता है।
समाचार संवाद सूत्र : इसी वैदिक परंपरा के संरक्षण की दिशा में जिला नालन्दा मुख्यालय बिहार शरीफ़ स्थित एस.पी. आर्य डी.ए.वी. पब्लिक स्कूल में वेद प्रचार सप्ताह का शुभारंभ वैदिक रीति रिवाजों के अनुसार शुरू किया गया । विद्यालय की प्रधानाचार्या श्रीमती अंशिमा सिंह ने शिक्षक - शिक्षिकाओं,छात्र - छात्राओं के साथ दीप प्रज्वलित कर इस कार्यक्रम की शुरुआत की।
इसके पश्चात गायत्री मंत्र का सामूहिक उच्चारण एवं लघु हवन आयोजित हुआ। प्रधानाचार्या ने हवन में आहुतियाँ अर्पित कर सभी के सुख, शांति एवं समृद्धि की कामना की। शिक्षकों विद्यार्थियों और अन्य ने भी श्रद्धापूर्वक हवन में सहभागिता की।
इस अवसर पर विद्यार्थियों को वेदों के महत्त्व, नैतिक मूल्यों, अनुशासन, सदाचार एवं पर्यावरण संरक्षण का संदेश दिया गया। यह आयोजन २२ से २७ अगस्त २०२६ तक सतत रहा, जिसमें वैदिक मंत्र एवं भजन पाठ, प्रश्नोत्तरी, वृक्षारोपण, भाषण, श्लोक उच्चारण, पोस्टर तथा स्लोगन लेखन जैसी गतिविधियाँ आयोजित की गयी ।
प्रधानाचार्या ने विद्यार्थियों को वेदों से प्रेरणा लेकर श्रेष्ठ चरित्र निर्माण करने तथा भारतीय संस्कृति एवं प्रकृति के प्रति संवेदनशील बनने के लिए प्रेरित किया। वेदों का ज्ञान में ही जीवन का प्रकाश है।
संक्षिप्त वार्ता व सूत्रों की माने तो समस्त डीएवी संस्थाओं, यथा डीएवी कैंट एरिया,मानपुर,गया ,नवादा ,व पी जी कैंपस,सत्य प्रकाश आर्य, बिहारशरीफ़ डीएवी विद्यालयों में वेद प्रचार सप्ताह की श्रावणी मास में इस जानी पहचानी वैदिक परंपरा के अनुसार सार्थक पहल हुई।
*
समाचार संपादन : प्रिया.गोविन्द.डॉ.आर.के.
सज्जा : शक्ति.डॉ.सुनीता सीमा प्रेरणा.
*
८० वें स्वतंत्रता दिवस की धूम
हर्षोल्लास से मना ८० स्वतंत्रता दिवस.डी ए वी, संस्थानों में
*
कुविचारों से आजादी
स्वस्थ्य मन : शुद्धता : मानसिकता की आज़ादी
*
कुविचारों से आजादी। स्वस्थ्य मन: शुद्धता : मानसिकता की आज़ादी। कुविचारों नकारात्मक विचारों से आज़ादी ही वास्तव में स्वस्थ मन, आंतरिक शुद्धता और सच्ची मानसिक आज़ादी का आधार है।
जब हमारा मस्तिष्क व्यर्थ और दूषित विचारों से मुक्त होता है, तब हमारी ऊर्जा सही दिशा में लगती है।मानसिक आज़ादी और शुद्धता के मुख्य स्तंभ जागरूकता विचारों को बिना उलझे केवल देखना।
नकारात्मकता को पहचानना।
स्वीकार्यता कमियों को सहजता से स्वीकार करना। खुद को दोष देना बंद करना। सकारात्मक प्रतिस्थापन बुरे विचारों को तुरंत अच्छे विचारों से बदलना।रचनात्मक कार्यों में मन लगाना।
नालन्दा / जिला मुख्यालय बिहार शरीफ, पी जी कैंपस तथा स्थानीय लहेरी मुहल्ला स्थित एस.पी. आर्या
डीएवी पब्लिक स्कूल बिहारशरीफ में घर घर तिरंगा अभियान के तहत तिरंगे का ध्वजारोहण किया गया।
बिहारशरीफ पी जी कैंपस तथा एस.पी. आर्या डी ए वी पब्लिक स्कूल में देश का ८० वां स्वतंत्रता दिवस समारोह बड़े ही हर्षोल्लास एवं देशभक्ति की भावना के साथ मनाया गया।
स्वाधीनता दिवस का अर्थ और इसके महत्व को हम समझे। यह भारतीय समूह की आजादी का प्रतीक है। यह दिन अंग्रेजी हुकूमत से देश की पूर्ण मुक्ति की याद दिलाता है। स्वतः वीरों के बलिदान की बात स्मृत करा जाता है। यह उन महान स्वतंत्रता सेनानियों को याद करने का अवसर है जिन्होंने देश के लिए अपना जीवन समर्पित किया।
यह हम समस्त भारतीयों के लिए राष्ट्रीय गौरव की बात है इस दिन लाल किले पर तिरंगा झंडा फहराया जाता है और राष्ट्रगान गाया जाता है,और हमें बहुत कुछ याद दिला जाता है।
कार्यक्रम का शुभारंभ, पी जी कैंपस डी ए वी विद्यालय के प्राचार्य मनोज कुमार दुबे, सह मुख्य अतिथि रवीश कुमार, डी जी एम, पी जी सी आई एल , तथा प्राचार्या अंशिमा सिंह एस.पी. आर्या डी ए वी पब्लिक की गरिमामय उपस्थिति में तिरंगे का ध्वजारोहण विभिन्न डी ए वी संस्थानों में पूरे उत्साह के साथ हुआ। इसके बाद विद्यालय परिवार द्वारा राष्ट्र गान एवं राष्ट्रगीत प्रस्तुत किया गया। तत्पश्चात स्वाधीनता से जुड़ें
सांस्कृतिक कार्यक्रमों का प्रदर्शन भी किया गया।
इस अवसर पर विद्यालय परिसर देशभक्ति के नारों एवं राष्ट्रीय भावना से गूंज उठा। विद्यालय के प्राचार्यों ने सभी उपस्थित जन मन को स्वतंत्रता दिवस की मनभावन शुभकामनाएं देते हुए विद्यार्थियों को देश की एकता, अखंडता और राष्ट्रहित के प्रति सदैव समर्पित रहने का संदेश दिया। समारोह में शिक्षक -शिक्षिकाओं एवं विद्यार्थियों की उत्साहपूर्ण सहभागिता रही।
स्वाभविक है कि स्वतंत्रता दिवस के अवसर पर स्कूलों, सोसायटियों या कार्यालयों में आयोजित होने वाले सांस्कृतिक कार्यक्रम के तहत राष्ट्रीय चेतना और देशभक्ति को जगाने का सार्थक प्रयास भी किया जाता हैं। इस पावन राष्ट्रीय पर्व को मनाने के लिए निम्नलिखित रचनात्मक और प्रभावशाली सांस्कृतिक कार्यक्रमों की रूपरेखा भी प्रदर्शित की गई।
*
समाचार संकलन : सज्जा
शक्ति प्रिया सीमा रंजीता
*
लघु वृत चित्र : चंद्रशेखर आज़ाद.
*
अवधि : ३ मिनट : धारावाहिक : १ शोध : लेखन : निर्माण : आवाज़ : डॉ. मधुप.
*
*
लघु वृत चित्र : चंद्रशेखर आज़ाद.
*
अवधि : ३ मिनट ४० सेकेंड :धारावाहिक : २ शोध : लेखन : निर्माण : आवाज़ : डॉ. मधुप.
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मुझे भी कुछ कहना है : आपने कहा : आभार : पृष्ठ : ९.
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शक्ति शाहिना सीमा फ़रहीन.
*
मदर टेरेसा.
जयंती
२६.०८.१९१० - ५.९.१९९७.
*
साभार. मदर टेरेसा.GIF.
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मुझे भी कुछ कहना है : पृष्ठ : ९.
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संपादन
ग़जल.
डॉ.आर. के. दुबे
कवि लेखक संपादक
*
ग़ज़ल
हवा के हवाले किया खुद को मैं ने,
हवा के हवाले किया खुद को मैं ने,
नदी के किनारे जिया खुद को मैं ने
निकल कर खला से जहां में समाया,
ज़मीं पर ही बस खो दिया खुद को मैं ने।
फना की ही राहों से होकर गुज़र कर,
बक़ा का पता दे दिया खुद को मैं ने
मिटाया जो खुद को तो हासिल हुई वो,
वही इक बक़ा दे दिया खुद को मैं ने।
समझ में जो आई यहाँ राज़-ए-हस्ती,
फ़ना से मुक़म्मल किया ख़ुद को मैं ने।
डॉ.आर के दुबे.
हमेशा ये दिन सख़्त आते नहीं
निकल जो गये वक्त आते नहीं
बदलते कभी तख्त आते नहीं.
अगर इश्क में दिल के टुकड़े हुए
तो गुजरे वो खुश वक्त आते नहीं.
मुसीबत में दिल को जरा थामना
हमेशा ये दिन सख़्त आते नहीं.
जड़ों से ही जो टूट जाए अगर
तो वो लोग बदबख़्त आते नहीं.
ज़माने की बातों में आना नहीं
भरोसे के वो वक़्त कभी आते नहीं.
*
स्तंभ सज्जा व संपादन
शक्ति. सीमा नीलम शाहिना
*
सरल व सीधे रहें जिससे दूसरे भी जी सकें *
| * |
Shakti.Pooja. Arya.Dr.Rajeev Ranjan.Child Specialist.Biharsharif. Supporting
*
*
Times Media Powered Contents
*
*
Karm : Krishna :
Krinvanto Vishwam Aryam : 4
Blog Magazine Page.
English Section.
⭐
*
Contents Page : English.
Cover Page : 0.
Contents Page : 1.
Shakti Editorial Page : 2.
Krinvanto Vishwam Aryam. Shakti Vibes.Page : 3
Krinvanto Vishwam Aryam. Shakti Editorial Writeups : 4.
Krinvanto Vishwam Aryam. Short Reel : News : Special : Page : 5.
Krinvanto Vishwam Aryam.Shakti Photo Gallery : Page : 6.
Krinvanto Vishwam Aryam.Shakti : Kriti Art Link : Page : 7
Krinvanto Vishwam Aryam.Days Special : English : Page : 8.
Krinvanto Vishwam Aryam. You Said It : Page : 9.
*
Today's Post.
*
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Shakti Editorial English Page : 2.
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Chief Shakti Editor.
Dehradun.Desk
*
Shahina.Bhagwanti.Suruchi.
*
*
Executive Shakti Editor.
Kolkotta Desk.
*
Madhavee. Priyanshi.Seema.
*
Photo Reel Editor.
Mussoorie Desk.
*
©️®️M.S.Media. WCP 24/ ../ 07 / 26
Shakti. Himani.Sudipta.Bani.
*
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Krinvanto Vishwam Aryam. Shakti Vibes.Page : 3.
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Editor.
Shakti. Seema Ranjita Priyanshi.
*
Some people are Human Medicine.
You spend an hour with them and everything feels better.
*
Arya. A.K.Bakshi.Ex Dav Principal
*
Knowledge is like a garden , until and unless it is not cultivated,
it cannot be harvested
*
Kind simple words may be short and easy to speak
but it's echoes are truly endless.
*
Shree A.K. Jana.Davian.Ex.Dav Principal / ARO
*
Never try to go back but repair and learn from the Past is always inspirational
that makes your Present and Future bright & flawless.
*
Nothings called problems...
But absence of an Idea to find its solution.
*
Shree.A.K Jana. Ex.Principal Dav.ARO.
*
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Krinvanto Vishwam Aryam. Shakti Editorial Write Ups : 4.
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Editor.
Shakti. Shahina.Himani Seema
*
Shakti.Shahina Naz.
Davian.Editor.Principal.
*
a short poem.
*
A silent Strength,
A guiding Spark.
*
Teachers are the shining light,
Who makes our classroom and career bright.
Stories and numbers, letters and art,
They sparked our imagination right from the start.
A silent strength, a guiding spark,
That keeps us safe within the dark.
After hours of duty,they still stay near,
Guiding their students wiping each tear.
We'll never forget their tireless way,
The teachers who brighten our darkest days.
They are the one who make us learn,
And make us even capable to earn.
For all the words of tongue or pen,
Either it will be in imagination or zen.
They are an insurance who secure our future,
People with noble and great features.
Hats off to admirable and creditable teachers.
*
Editing : Decoration
Shakti Dr.Sunita Seema Ranjeeta.
*
*
The Supplication.
a Short Poem.
Dr.R.K.Dubey.
*
You tell me, I’ll listen to each word.
The stream confides its tales unto the sea so broad,
At dusk and dawn the earth speaks softly up to sky,
And fingers twined converse, while nights slip slowly by.
*
*Poem Related
a PWCP. Shakti RK.13/ 26
*
A secret breeze leans close to a blossom’s ear,
Awakened pollen hums a tune that stirs the near,
When hidden truth is tasted, cheeks with sunlight glow,
And dewdrops pause their falling—paused in hush and slow.
Each hair becomes an ear, all longing to attend,
Within the heart a throbbing thrush begins to blend,
Breath’s little guests sip trembling from a fragile cup,
While dreams upon the lashes give soft taps, waking up.
*
Column Editor. Decorative
Shakti. Anshima Shahina Seema.
*
a short poem.
*
Hindi.
The Heart of India.
In the land where rivers flow,
A vibrant voice begins to grow,
Hindi, the tongue of millions strong,
In its embrace, we all belong.
From ancient roots of Sanskrit's grace,
It blooms in every time and place,
With fifty-two letters, a tapestry spun,
A bridge uniting, hearts as one.
Easy to read, to write, to speak,
In its rhythm, the future we seek,
Through struggles and dreams, it paved the way,
A common thread in the fight for the day.
Literature rich, tales to unfold,
In every corner, stories told,
From poetry's charm to the prose's might,
Hindi shines, a beacon of light.
So let us cherish this language dear,
In every word, let’s hold it near,
For in Hindi's song, we find our pride,
Together we stand, side by side.
*
Ex.Dav Principal.
Bengaluru.
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Krinvanto Vishwam Aryam.Shakti Photo Gallery : Page : 6.
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Editor.
Mussoorie Desk.
Shakti. Dr.Bhawna.Himani.Partyesh.
*
![]() |
| spreading awareness for Culture & Civilization among the kids by making Rakhi : Photo Collage : Shakti Farheen Priyanshi Prerna |
![]() | ||
ye hai Mumbai meri Jaan : Seeking passion. Collage : Shakti. Shaily Ram Krishna.
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Krinvanto Vishwam Aryam.Shakti : Kriti Art Link : Page : 7.
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Editor.
Shakti. Smita.Priya.Bani.
*
![]() | ||
Ved Prachar Saptah throughout India : PWCP : Shakti Ranjita Seema Priyanshi.
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Krinvanto Vishwam Aryam.Days Special : News English : Page : 8.
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Editor.
Shakti.Dr.Bhawana.Madhvee.Shahina.
*
Bhagat Singh.
*
Being Remembered on his Birthday.
*
Shakti. Bhawana Om Prakash experiencing the teej festival. Collage : Shakti.Bhwana Singh. Collage : Editor.Dr.Sunita Madhup.
Teachers’ Day Celebrated with Grandeur at S.P. Arya DAV Public School.
News Story : Shakti. Seema Ranjita Priyanshi.
*
![]() |
| Shakti Editor : Seema : PCWP |
The special Student-as-Teacher activity was the highlight of the day, where students of ( Class - VIII ) stepped into the role of teachers and conducted classes for their juniors, experiencing the joy and responsibility of teaching.
As part of the CCA activities, students participated enthusiastically in bouquet-making and card-making for their favourite teachers. Through their colourful creations and heartfelt messages, they expressed their love and gratitude towards their mentors.
The celebration also included speeches, songs and cultural performances dedicated to the teachers.
The Principal, Mrs. Anshima Singh, appreciated the efforts of the students and teachers and extended warm wishes on the occasion.The day concluded with smiles, appreciation and beautiful memories, celebrating the special bond between teachers and students.
*
Editing : Shakti. Dr. Sunita Anshima Priya.
Decorative : Shakti.Shalini Farheen Prerna.
*
![]() |
| Dav Sports : Zonal Level : 2026. Dav Cantt Area Gaya : Collage : MS* Media. |
*
The Knowledge of the Vedas : The Light of Life.
Vedic Propagation Week Inaugurated at Different Dav Schools.
SP Arya DAV Public School. Bihar Sharif
a cultural Report : Shakti.Seema Ranjita Sunita.
*
CR / Nalanda / Patna. August 22, 2026. Vedic Prachar Saptah is a week-long annual spiritual and cultural event celebrated across DAV institutions to promote Vedic values, heritage, and the teachings of the Arya Samaj.Key Highlights of the Celebration Havan and Yajna.
Vedic Propagation Week has been being observed at different Dav Schools and Institutions. As it was earlier inaugurated on 22nd of August continued till last week of August.
Usually it repeats itself every year in the month of Sawan and ends by Sawan Poornima.
The week typically begins with a grand community Havan or multi-kundiya Yajna where students, teachers, and principals offer Vedic mantra oblations for peace and world welfare.
Educational Sessions : Teachers and guest speakers deliver talks on the significance of the Vedas, environmental protection, and the historical contributions of social reformers like Swami Dayanand Saraswati and Mahatma Hansraj.
As per the reliable sources from the different Dav Schools at Gaya, Nawada and Nalanda in Bihar will be witnessing the cultural awakening during these days.
SP Arya DAV Public School, Bihar Sharif, marked the commencement of ‘Vedic Propagation Week–2026’ with great enthusiasm. The week-long programme was inaugurated by the Principal, Mrs. Anshima Singh, by lighting the ceremonial lamp. This was followed by the collective chanting of the Gayatri Mantra and a brief Havan ceremony.
The Principal offered ahutis and prayed for the happiness, peace and prosperity of all. Teachers and students also participated in the Hawan with devotion.
On this occasion, students were sensitised to the importance of the Vedas, moral values, discipline, righteous conduct and environmental conservation. The celebration will continue from August 22 to 27, 2026, featuring a variety of activities such as Vedic mantra and bhajan recitation, quizzes, tree plantation, speeches, shloka recitation, poster-making and slogan writing.
The Principal encouraged the students to draw inspiration from the Vedas, develop strong and noble character, and become sensitive towards Indian culture and nature.“The Knowledge of the Vedas — The Light of Life.”
*
Column Editor.
Shakti.Priya. Anshima.Dr.R.K.Dubey
Independence Day 2026.
*
Dav Public Schools.
Celebrates Independence Day with Patriotic Spirit.
PG Campus, SP Arya
DAV Public School, Laheri,Bihar Sharif, Nalanda
News Report : Shakti. Anshima Ranjita Seema.
*
*
a short News Video Clip : SP Arya : Independence Day.
Shakti. Ranjita Seema Prerna
*
Patna / Nalanda : CR : 15 August 2026 : Dav Cantt Area , Manpur Gaya, PG Campus, SP Arya DAV Public School, Laheri, Bihar Sharif, Nalanda, unitedly celebrates the 80th Independence Day of India with great enthusiasm, pride and patriotic fervour.
![]() |
MS* Media WCP : SP Arya.Independence Day. |
The chief guest Shree Ravish Kumar, Sr.DGM PGCIL, Biharsharif witnesses this historic event of 80 th Independence day.
The whole was followed by the National Anthem and cultural programmes. The school campus echoed with patriotic spirit as students and teachers participated enthusiastically in the celebrations.
Students under the guidance of Mrs.Alpana , and Mr. Rajiv presented a variety of cultural programmes, including patriotic songs, speeches and inspiring performances highlighting the sacrifices of our freedom fighters and the values of unity, peace and national responsibility.
Addressing the gathering, Principals both Mr Manoj Kumar Dubey Mrs. Anshima Singh extended their warm wishes to everyone on Independence Day and encouraged students to become responsible citizens who contribute positively to the progress and development of the nation.
Independence Day cultural programmes feature flag hoisting, national anthems, patriotic group songs, regional folk dances, and historical skits honoring freedom fighters. These vibrant events unite communities in schools, colleges, and public spaces to celebrate national heritage
The celebration concluded with a renewed pledge to uphold the ideals of freedom, unity, integrity and patriotism, making the occasion memorable for all.
*
Decorative : Shakti.Shalini.Farheen.Priyanshi.
Editing : Shakti. Dr. Sunita Priya Shivani.
*
Ashadh Shukla Paksh : Poornima
Happy Guru Purnima related
Karm : Krishna : Krinvanto Vishwam Aryam : Slide
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A Guru is the light that shows us the path,
removes darkness and fills life with wisdom
*
*
Shakti. Anjali. Anshima. Piya.
Arya. Shree A.K.Jana.Govind.M.K.Dubey.
Dr.R.K Dubey.Dr.Meera Srivastava. DrBhawana.
Dr.Sunita Seema Ranjita.
*
27 th. of July.
CRPF day.
CRPF Raising Day is celebrated every year on July 27 to honor the founding and service of the Central Reserve Police Force. Today marks the 88th anniversary of the force
*
23rd of July.
Azad Jayanti.
Shakti. Seema Ranjita Anita
*
22 nd of July.
Flag Day : known as National Flag Adoption Day.
*
*
a flying Tiranga : visual : courtesy
*Dr.Bhawana Madhvee Shahina.
*
In India, Flag Day (known as National Flag Adoption Day) is celebrated annually on July 22. It commemorates the historic day in 1947 when the Constituent Assembly officially adopted the Tiranga (the tricolor) as the country's official national flag, just weeks before gaining independence.
The tricolor serves as a timeless symbol of India's unity, freedom, and national pride. Designed by freedom fighter Pingali Venkayya, its elements hold deep significance:
Saffron (Top) : Courage and sacrifice.
White (Middle) : Peace and truth.
Green (Bottom): Faith, fertility, and prosperity.
Ashoka Chakra (Center) : The navy-blue wheel with 24 spokes represents
righteousness, eternal progress, and movement
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Krinvanto Vishwam Aryam.Thankfulness: You Said It : Page : 9.
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Editor.
Dr.CM Chandra. Anita. Pratyesh.
Mussoorie Desk.
*
Let the Raksha Bandhan not only strengthen the nation of Arya Janas
but also boost the Nationality.
Happy Raksha Bandhan to all lovely people that understands the, affection, self respect unity and
integrity of Person Family Nation then World.
May this festival remain awesome for you and shower all happiness.
*
Dr.Sunita Farheen Shahina Naz.
Dr.Sunita Farheen Shahina Naz.
*
Thankfulness :
*
Joint Media Houses : a thanks giving note.
*
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I always learn something new when I visit your blog.wonderful write-up
Shakti. Shahina Naz.Principal
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You Said It : English : Page : 9.
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Editor :
Shakti .Shahina Himani Seema.
*
May lord Vishwakarma bless everyone with
creativity,skill,prosperity and success
*
SP Arya DAV Public School
Shakti.Anshima Ranjita Seema.
*
*
a decorative slide of proud moment
*
*
a gentle step towards success for SP Arya Kids :
competing for National level
Dav Sports : 2026.
Shakti Seema Ranjita Priyanshi.
*
a very short story.
Self Confession.
*
Dr.Madhup.
Through the loneliness. Myself visiting the haunted place ,the Church in the Wilderness,Nainital in 2024.
Me : Confessing ....' Oh ! Father,I am the greatest sinner before any innocent, and good one people. I accept my fault inside and outside me before them...'
Others : ' We ! committing ....mistakes... no ! and never ! Why will we accept our mistakes ...even inside us .? '
Think of that and yourself.
*

















































































I always learn something new when I visit your blog.wonderful write-up✍️
ReplyDeleteKnowledgeable and helpful to learn
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