Radhika Krishna Rukmini. Darshan.Patrika.12.V2.S6.
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कृण्वन्तो विश्वमार्यम.
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Radhika Krishna Rukmini.
Darshan.Patrika.
Number.12.Volume : 2. Series : 6.
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प्यार.व्यवहार.संस्कार.
राधिका कृष्ण रुक्मिणी दर्शन : १२.
पत्रिका आवरण पृष्ठ.
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शक्ति. राधिकाकृष्ण दृश्यम : विशेष : विचार.
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देख मुझे सब है पता
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विचार सन्दर्भ माया
शक्ति. प्रिया मधुप : कृति छाया.
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छोटी छोटी सी बात न जाने क्यूँ
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एक बार की गई ' गलती ' कई ' सुधारों ' पर
एक बार कहा गया ' ना ' कई ' हाँ ' पर क्यों हावी हो जाता है
हर किसी को अपने पक्ष में शब्द , संवाद ,सुधार ,संवेदनशीलता, और शक्ति क्यों चाहिए ?
विचार करें फ़िर इसके लिए सकारात्मक कर्म भी करें
*
तुम मुझे यूँ भूला न पाओगे
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भूलना और भूल जाना ये सब कहने की बात है
जो जन मन में है किसने समझा कि किसने किसको भूला दिया
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हर चीज़ झूठी हो सकती है ,लेकिन ,माधव
प्रेम में कहे भाव भींगे शब्द व गिरे आँसू नहीं
*
ये जीवन है इस जीवन का
सम्यक ' मति ', ' गति ' और ' शक्ति '
यदि आपके साथ हैं तो जीवन में निश्चित है सफलता की प्रस्तुति
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ओ छलिए को छलने वाले
छल के साथ छल तो समझते हैं लेकिन सरल के साथ जटिलता क्यों
स्मृत रहें प्रिय भोले भाव मिले रघुराई
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शोध विचार शक्ति @ प्रिया मधुप अनुभूति
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सुनता है तू मन की सदा.
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विचार सन्दर्भ माया
माधव : छाया.
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प्रेम : समर्पण : शर्त
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कैसे कोई तुमसे प्रेम की रीत निभाए
जब जब हुए हम तुम्हारे प्यार के काबिल
तुम शर्त बदलते चले गए
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सत्यम शिवम् सुंदरम
ईश्वर उन की अवश्य पुकार सुनते हैं
जो सभी के लिए उपकार चुनते हैं ।
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सत्कर्म : ख़ुशी और ईश्वर
जो दूसरे की ख़ुशी में अपनी ख़ुशी ढूंढ़ लेते हैं
ईश्वर उनके दुखों का अंत स्वयं ढूंढ लेते हैं
संयम : सब : समय.
सब से सब्र नहीं होता लेकिन सब्र से सब होता है
उम्मीद का दामन कभी न छोड़े क्या पता आने वाला पल
कल ही बदल दे.
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शोध विचार शक्ति @ सीमा.आर.के.सुनीता
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इच्छा : कर्म : प्रार्थना और वरदान
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हम कर्म और प्रार्थना साथ करते हैं
इच्छा और वरदान की कामना भी रखते हैं वरदान मांगते समय
लोभी डाही की कहानी सदैव स्मृत रखें, प्रिय !
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जिंदगी के सफ़र में गुजर जाते हैं जो मकां
फिर नहीं आते
*
कभी कभी इस क्षणभंगुर जीवन के अनजाने सफ़र में
किसी अपरिचित से हम क्षण भर के लिए मिलते हैं शायद फिर कभी दुवारा न
मिलने के लिएही लेकिन न जाने क्यों ऐसा लगे कि काश
फिर मिल जाते दुवारा
*
जब जब तू मेरे सामने आए.
जीवन की इसी भागमभागी ,परेशानी में ही पल दो पल दो का साथ
सुकून,संयम और शांति की तलाश कर लीजिए
समय विशेष कोई आता नहीं
*
कैसी लागी लगन.
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मानवीय प्रेम जब तक निर्भीक,स्वतंत्र, भयरहित, निस्वार्थ और प्राकृतिक है
तबतक मनभावन और शाश्वत है
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जिसको हम अपना कह लेते
एकांतिक जीवन में पृथकता वादी सिद्धांतों के मध्य ही
कोई तो होता और पल दो पल साथ की बात व महत्ता की बात समझ में आती है, राधिके
सर्वव्यापी सर्वकालिक
*
सुन रहे हो न ? मैं दिखता नहीं हूँ....
मगर देखता,समझता, व सुनता सबकुछ हूँ
*
कृष्ण क्यों प्रिय हैं ?
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सर्वकालिक,अंतर्यामी, सर्वाधिक १६ कलाओं, से युक्त
सर्वदा समय, शब्द, साथ निभाने निभाने वाले
व्यवहार कुशल, कर्मयोगी, योगीराज, मौन मुखर अलौकिक शक्ति प्रतीक रहें
*
विचार शक्ति @ शालिनी मधुप रेनू
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टाइम्स मीडिया एडवरटाइजिंग समर्थित
*
--------- रुक्मिणीकृष्ण : प्रकृति प्रेम : दृश्यम : आज : पृष्ठ : ० / १. ---------- राधाकृष्ण मंदिर.मुक्तेश्वर. नैनीताल डेस्क संपादन शक्ति.रेनू मधुप प्रिया. |
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शक्ति. रूक्मिणीकृष्ण दृश्यम : विशेष : विचार
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प्यार : व्यवहार : संस्कार.
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रुक्मिणी कृष्णे हृदयम, शांतिः भवेत
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ये जीवन है इस जीवन का : विचार दृश्यम
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यही है जिंदगी का कुरुक्षेत्र
हर किसी के मन में महाभारत छिड़ा है
हर एक पक्ष को श्रीकृष्ण ही चाहिए
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माधव : पक्षपात तो मैं करता ही हूँ
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विश्वास कर्मकांड में नहीं सिर्फ़ सम्यक कर्म करने में रखिए
श्रेष्यकर होगा : माधव
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आपकी अदालत
यदि प्रत्येक अपने व अपनों के लिए अपनी
अन्तरात्मा में की गई मानवीय भूलों की समझ रखते हुए सार्वजनिक न
करते हुए आत्मीय व्यक्तिगत बन कर
साथ, संवाद और सुधार के लिए सतत रखें तो परिणाम सुखद होंगे
*
डॉ.अनु मधुप गुल सक्सेना
*
विचार : सन्दर्भ माया
शक्ति : गुल : मुंबई : छाया.
*
मन का विश्वास कमज़ोर हो न
कोई व्यक्ति आपके साथ कितना भी छल ,कपट या बुरा कर ले ये उसका
व्यवहार और संस्कार है
आपको अपने भीतर की अच्छाई और सच्चाई की तिलांजलि नहीं देनी है
क्योंकि ये आपका संस्कार और व्यवहार होगा
*
अनु उपलब्धता में ही व्यक्ति की महत्ता हैं उपलब्धता में मान की न्यूनता
ठीक वैसे ही जैसे गंगा के किनारे रहने वाले लोग गंगा को प्रणाम करना
भी भूल जाते हैं.
*
शोध विचार @ शक्ति रेनू मधुप गुल सक्सेना
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इतनी शक्ति हमें देना
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मात्र ईश्वर और कर्म में आस्था रखते हुए
अपने जीवन की सार्थकता के लिए केवल सम्यक जन मन गण की खोज सतत रखते हुए
सम्यक सोच संसार के लिए गतिशील बनें रहें
*
स्वर्ग यही नर्क यही
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विचार : सन्दर्भ माया
शक्ति : ख़ुशी : देहरादून : छाया.
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गवाह है चाँद तारे गवाह है, दामिनी.
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जिस शक्ति की मति में सहन शक्ति और समझ शक्ति
दोनों आ गयी वो संसार की सर्वश्रेष्ठ शक्ति हो गयी
*
शोध विचार शक्ति @.सीमा रंजिता डॉ.सुनीता
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यदि तुम्हारा साथ ,सोच और करम सम्यक नहीं तो नर्क यही है
यदि तुम्हारे साथ के लोग सम्यक , सोच सच्ची ,करम अच्छे तो स्वर्ग यहीं हैं
*
नज़र आती नहीं मंजिल.
जो आपको भय, असत्य, अस्पष्टता,संकीर्णता और संवादहीनता की
धुंध की ओर ले जाए वह मार्ग क्या चलने योग्य है ? विचार कीजिए
*
शोध विचार शक्ति @ डॉ.अनु मधुप रजनी.
*
प्रथम मीडिया शक्ति प्रस्तुति.
*
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मीरा डेस्क.
मुक्तेश्वर डेस्क.नैनीताल .
प्रादुर्भाव वर्ष : १९७८.
संस्थापना वर्ष : २०२४.महीना :जून. दिवस : ६.
*
*
संपादन.
शक्ति.डॉ.राखी मानसी मीना.
*
मेरे तो गिरधर गोपाल दूसरों न कोय
*
कोई गीत बजने दो
सम्यक आँखों से आपको दुनियाँ सम्यक दिखेगी
और आपके कहे गए सम्यक शब्दों से आप लोगों को सम्यक दिखेंगे
*
ओम नमो शिवाय
*
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विचार : सन्दर्भ माया
शक्ति गुल : महाराष्ट्र : छाया.
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फूल और कांटें.
लोगों की मुहब्बत की इजहार में पत्ता पत्ता बिखर गया
ढाई आखर प्रेम का
*
समस्त सांसारिक सीमाओं से परे द्वैत प्रेम की ऐसी अद्वैत भावना है
मन का ऐसा शाश्वत बंधन है जो सम्यक चेहरे से उतर कर मधुर वाणी व व्यवहार से और
भी प्रगाढ़ हो जाता है
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विचार @ शक्ति डॉ.राखी मधुप मीना
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राधिकाकृष्ण : जीवन दर्शन : शब्द चित्र : दृश्यम : वृन्दावन.डेस्क : पृष्ठ : १ / १.
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वरसाने.वृन्दावन.डेस्क.
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संपादन
शक्ति.रितु मधुप प्रिया
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आज का दर्शन
*
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राधा का भी श्याम वो
तो मीरा का भी श्याम.
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शासन : धन : मन का अहंकार जन को
ऊँचा नही अकेला व पतनोन्मुख बनाता है, यह सदैव स्मृत रहे प्रिये !
विभीषण का अपने सहोदर भाई का अंततः परित्याग व लंका नरेश रावण की मति और गति
न भूले.
*
एक बंजारा गाए जीवन के गीत सुनाए.
किसी भी धर्म का सार स्वयं के विश्वास से उत्पन्न मन में अनुभवशील
सम्यक विचारों की सतत निर्मल धारा है
जो मानव को गतिशीलता के साथ सही जीने की कला बताती है
शोध विचार शक्ति @ शालिनी मधुप रेनू.
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रुक्मिणीकृष्ण : जीवन दर्शन : शब्द चित्र : दृश्यम : विदर्भ डेस्क : पृष्ठ : १ / २ .
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प्यार : व्यवहार : संस्कार
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रुक्मिणी डेस्क.
विदर्भ डेस्क.महाराष्ट्र.
प्रादुर्भाव वर्ष : १९७८.
संस्थापना वर्ष : १९८७.महीना : अगस्त : दिवस : ६.
*
संपादन
शक्ति.शालिनी डॉ सुनीता मधुप.
रुक्मिणी डेस्क.
विदर्भ डेस्क.महाराष्ट्र.
प्रादुर्भाव वर्ष : १९७८.
संस्थापना वर्ष : १९८७.महीना : अगस्त : दिवस : ६.
*
संपादन
शक्ति.शालिनी डॉ सुनीता मधुप.
*
जीवन दर्शन
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शक्ति : क्षमा : उपकार
*
कुरु सभा : दुर्योधन : शिशुपाल प्रसंग : छाया.
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तोरा मन दर्पण कहलाए
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अथ श्री महाभारत कथा
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वास्तव में असंयमित अमर्यादित शब्दों से कुतर्क :
कुतर्क से क्रोध .....क्रोध से महाभारत ...महाभारत से महाविनाश
इन विकट परिस्थितियों में सावधानी, संयम और समझ की परख आवश्यक है ,पार्थ !
बड़े बड़ाई न करे बड़े न बोले बोल.
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ईश्वरीय गुण रखते हैं वे लोग
जो अपने विरुद्ध किए गए सार्वजानिक अपमान, अपकार को भी विस्मृत करते हुए
अपनों के लिए भलाई और उपकार की अंतिम सम्यक सोच ,कर्म व प्रयास करते रहते हैं
*
शोध विचार शक्ति @ शालिनी मधुप रेनू
©️®️M.S.Media.
*
हो हिमालय से ऊँचा तेरा हौसला
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विचार : सन्दर्भ माया
शक्ति रितु : छाया.
*
ये जीवन है इस जीवन का
अर्ध्य सत्य जीवन का
*
शनैः शनैः विश्वास को समझने के लिए
प्रथमतः अविश्वास को ही जानना होगा यह दुनियाँ का सबसे बड़ा सच है कि
सबसे पहले विश्वासघात भी अपने ही अपनों के विरुद्ध करते हैं
शत्रु नहीं
शोध विचार शक्ति @ डॉ. अनु मधुप रितु
*
*
प्रथमतः चयनित, कथित शब्दों से
आम जीवन के संघर्ष में तुम्हारी आधी विजय सुनिश्चित ही है
शेष पूर्ण विजय व्यवहार व धैर्य में तुम्हारी मति और गति तय करेगी
*
मुसीबतों ने लाख कोशिशें की मुझे... झुकाने की
मेरे हौसलों ने हर बार चुन ली नई उड़ान
*
व्यक्ति के अंदर जो आवश्यक है स्वाभिमान, रखें
जो व्यक्तिव से बाहर छलक जाए वह अभिमान है , अनावश्यक है, इससे बचें
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विचार शक्ति.@ शालिनी मधुप रितु .
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मीराकृष्ण : जीवन दर्शन : शब्द चित्र : दृश्यम : मेवाड़ : डेस्क : पृष्ठ : १ / ३ .
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मीरा डेस्क.
मेवाड़ डेस्क.जयपुर.
प्रादुर्भाव वर्ष : १९८२.
संस्थापना वर्ष : १९८९. महीना : सितम्बर.दिवस : ९.
*
मेवाड़ डेस्क.जयपुर.
संपादन.
शक्ति.जया अनीता गरिमा
*
साची कहूं तुमसे.
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जिंदगी का सफ़र ये है कैसा सफ़र
चैन से जीने के लिए सभी बैचेन है
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पर उपदेश कुशल बहुतेरे
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माने नहीं मन, अपनी ग़लती अपना दोष, कहे स्वयं का अभिमान
पर दोष ढूँढे, परनिंदा देखें रहें वो, अन्य जन का मिथ्या अभिमान
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शोध विचार शक्ति @ शालिनी मधुप रेनू
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कुछ रीत जगत की ऐसी है
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भोले शंकर, वरदान, भस्मासुर और मोहिनी.
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वरदान देते समय
ईश्वर को , मानव या दानव के गुणों ,अवगुणों, व अंतर का यथोचित विश्लेषण करना होगा
अन्यथा शंकर से वरदान प्राप्त भस्मासुर से स्वयं भोले के प्राण रक्षा की विकट समस्या.. तदोपरांत संकट निवारण के लिए तत्क्षण प्रगट हुए श्री हरि का मोहनी रूप भी स्मरण ही रहे
*
शोध विचार शक्ति @ डॉ.अनीता. प्रशांत. बैशाखी.
बड़ौदा. गुजरात.
*
जीवन में सारे अर्जित किए गए यशस्वी कर्म एक ग़लत निर्णय
और कार्य से अपयश में परिणत हो जाते हैं इसलिए
क्षणावेश में त्वरित दुष्प्रभावी निर्णय लेने से बचें
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विचार सन्दर्भ माया
शक्ति : रितु सिंह : छाया.
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ये जीवन है इस जीवन का
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यदि आप समस्याओं से भाग रहें हैं तो
समझिए आप और भी कई समस्याओं को आमंत्रित कर रहें हैं
एक मुलाकात जरुरी है
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फैली हवाओं और अफवाहों पर ध्यान न दें
किसी व्यक्ति विशेष के बारे में राय बनाने से पूर्व उस व्यक्ति के सम्मेलन के पश्चात्, उसके जीवन वृत्त के दीर्घ इतिहास,आचरण , संवाद तथा कर्मों का सूक्ष्म, व्यक्तिगत शोधपूर्ण अति आवश्यक है
*
दुःख है दुःख का कारण भी है
आशाएं कम रखिए, आशाएं रखना ही दुःख का कारण हैं
फिर आशाएं भी अपनों से ही रखी जाती है इसलिए अधिकतर कष्ट
भी अपने ही पहुंचाते हैं,अन्य नहीं
*
शोध विचार @ शक्ति गरिमा मधुप रितु
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सम्पादकीय शक्ति पृष्ठ : २.
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त्रिशक्ति संरक्षण
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शक्ति. साक्षी. भा.पु.से.
आर्य. चिरंजीव नाथ सिन्हा.भा.पु.से.
शक्ति. रश्मि श्रीवास्तवा.भा.पु.से.
*
त्रिशक्ति विधिक संरक्षण
*
*
शक्ति. मंजूश्री. मुख्य न्यायिक दंडाधिकारी.
शक्ति. सीमा कुमारी. उप कानूनी सहायता रक्षा अधिवक्ता.
जिला विधिक सेवा प्राधिकरण.
शक्ति.जसिका सिंह.अधिवक्ता.उच्च न्यायलय. प्रयाग राज.
*
त्रिशक्ति छाया :
लघु फ़िल्म सम्पादिका
*
इंद्रप्रस्थ डेस्क. नई दिल्ली
*
*
सम्पादकीय
त्रिशक्ति विचार धारा :पृष्ठ : २ / २
संपादन
शक्ति.शालिनी मधुप रेनू.
*
नृपस्य चित्तं, कृपणस्य वित्तं, मनोरथाः दुर्जनमानवानाम्।
त्रिया चरित्रं, पुरुषस्य भाग्यं, देवो न जानाति कुतो मनुष्यः॥
*
भावार्थ
*
राजा का मन , कंजूस का धन ,
दुष्टों की इच्छाएँ, स्त्री का चरित्र और पुरुष का भाग्य
इन पाँचों का रहस्य स्वयं देवता भी नहीं जान सके , तो फिर साधारण मनुष्य की तो बात ही क्या है ?
*
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सम्पादकीय : त्रिशक्ति : गोरी साँवरे सलोनी : गद्य संग्रह : आलेख : पृष्ठ : २ / २.
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शक्ति मूल आलेख : ०
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१२ वां अन्तर्राष्ट्रीय योग दिवस : २१ : जून.
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योग: कर्म सु कौशलम् : भगवद्गीता.
योग : की व्यूत्पत्ति : भारतीय योग : आज वैश्विक धरोहर.
*
शक्ति.आरती अरुण अनुभूति
रांची डेस्क.
ऐसे तो यह मूलतः दो शब्दों यथा,योग और आसन से बना है परन्तु आमतौर पर लोग योग के नाम से ही जानते हैं परन्तु इसकी समग्र व्याख्या तो अद्भुत है जैसे ईश्वर की समग्र व्याख्या नहीं की जा सकती है वैसे ही योग भी है।
योग : की व्यूत्पत्ति : जब हम इसके व्यूत्पत्ति पर विचार करते हैं तो यह यूज् धातु से बना है जिसका शाब्दिक अर्थ जोड़ना होता है और यहीं से इसकी गहराईयों से पड़ताल शुरू हो जाती है कि किससे और कैसे जोड़ना और क्यों जोड़ना तो हम ज्यादा गहराईयों में न जाकर इस रुप में आपके समक्ष रखने का प्रयास करुंगा कि आप सहजता और सरलता से समझ लें और इसे आत्मसात करने की कोशिश करें।
ऐसे तो शिव संवाद, वेदों, उपनिषदों,योग शास्त्रों,जैन और बौद्ध मतों में इसकी विशद् व्याख्या की गयी है जिससे अनुप्रेरित अनुप्राणित होकर यह चीन, जापान, तिब्बत, कोरिया और अन्य द पू एशियाई देशों में भी व्यापक रुप में फैल गया।
द पू एशियाई देशों में इसे स्थापित करने का काम बोधिधर्मन ने किया जो भारतीय ध्यान पद्धति से झेन या जेन बन गया। हम दो सूत्र वाक्यों पर ही इसकी महत्ता, उपयोगिता और उपादेयता पर प्रकाश डालने की कोशिश करता हूॅं,वे दो सूत्र वाक्य,
योगश्चित्तवृत्ति निरोध : है और इसे हम सहज तरीके से आपके समक्ष रखने की कोशिश करेंगे। लेकिन इसके पहले यह बताना भी उचित प्रतीत होता है कि जैसे मानव शरीर स्थूल, सूक्ष्म एवं कारणिक होता है वैसे ही योग विद्या के तीन आयाम होते हैं,आसन, स्थूल अवस्था,प्राणायाम,सूक्ष्मावस्था और योग,कारणिक अवस्था से जुड़ा है जो हमारे समस्त क्रियाशीलताओं से युक्त है।
आसन से शरीर शुद्ध और स्वस्थ होता है तो प्राणायाम, हमारे प्राणशक्ति को सशक्त करता है और योग साधना आत्मा और अन्तश्चेतना को परम शक्ति से जोड़ने का काम करता है और ये समस्त क्रियाशीलताऍं
अष्टांगयोग या मार्ग से जुड़े हैं जिनमें ध्यान की बड़ी महत्ता और महिमा है जिसे मेडिटेशन भी कहा जाता है जो वैश्विक स्तर पर सभी मत,पंथ और सम्प्रदायों में द्रष्टव्य है। अब हम उपरोक्त दो सूत्र वाक्यों पर आते हैं जिसे समझना बहुत जरूरी है।
योग: कर्म सु कौशलम् : भगवद्गीता : पहला सूत्र क्या कहता है जो भगवद्गीता से उद्धृत है,योग: कर्म सु कौशलम् अर्थात् योग और कुछ नहीं आपके विहित और निर्धारित कर्तव्यों का निष्ठापूर्वक पालन करना है,इसे समझना ही संसार चक्र को समझना है। हम सभी मनुष्यों को कुछ न कुछ कामों के लिए निर्दिष्ट किया गया है जिसका पालन करना
हमारा परम धर्म ( कर्तव्य) है और इससे पलायन ही अपकर्म या पाप है। अर्जुन कुरुक्षेत्र में युद्ध करने से इन्कार कर रहा है तब श्री कृष्ण उसे कर्मयोग का ज्ञान देते हुए बताते हैं कि इस कर्मक्षेत्र में जो कर्म तुम्हारे लिए निर्धारित है अर्थात् युद्ध करना, उसमें श्रेष्ठता ही योग है। जो जिस कर्म करने के लिए चयनित हैं, उसका श्रेष्ठतापूर्वक पालन करना ही योगी का धर्म और धर्म का मर्म है और वही कर्मयोगी भी है। कितना सुन्दर और व्यवहारिक संदेश है कि बगैर किसी पुर्वाग्रह या दूराग्रह के हमें अपने अपने कर्तव्यों का पालन करना चाहिए,क्या इससे कोई इन्कार कर सकता है, नहीं और यही परम सत्य है जो हमें हमारे संसार चक्र से मुक्त करता है।
दूसरा सूत्र जो योग शास्त्रों, औपनिषदिक दर्शन और जैन तथा बौद्ध मतों का सार है,
योगश्चित्तवृत्ति निरोध: अर्थात् अपनी अपनी चित्तवृत्तियों का निरोध ही योग है। मनुष्य के दुःख के मूल में इच्छा, कामना, तृष्णा, वासना,मोह, आकर्षण,अतीत आदि की सत्ता है। इच्छा और कामना हमारी चित्तवृत्तियों को संचालित, नियमित और नियंत्रित करती हैं और इच्छाओं के संसार का कोई अंत नहीं है,एक की प्राप्ति हुयी नहीं कि दूसरी पैदा है गयी, रक्तबीज की तरह अनन्त हैं ये इच्छाएं और कामनाएं जो कभी तृप्त ही नहीं हो सकती हैं और इनका तृप्त न होना ही दुःख और क्लेश को जन्म देता है। हमारे संसाधन सीमित और न्यून हैं जिनसे वांछित की प्राप्ति हो ही नहीं सकती है।यदि आप समस्त संसाधनों से युक्त भी हैं तो आरोग्य,भूख, नींद, शान्ति आदि नहीं खरीद सकते हैं तब क्या करना है, अपने मन चित्त को योग-साधना के द्वारा नियंत्रित करने की कोशिश करनी है ताकि जीवन संयमित, मर्यादित और परिमार्जित हो सके।
योग कला और विज्ञान भी योग : चंचल मन तन का स्वास्थ्य : चित्त की चंचलता हम मनुष्यों को दिग्भ्रमित करती रहती है, माया,भ्रम और कल्पनाओं के संसार का सृजन करती रहती है, हमें सत्य से सदैव दूर ले जाने का काम करती है, इसलिए योग-साधना के द्वारा ही हम सुखी रह सकते हैं।
यह औषधियों का औषधि है,मानव जाति के लिए वरदान है और निरपेक्ष भाव से युक्त है।
इसे गहराई से समझने की जरूरत है कि किसे सुख और शान्ति नहीं चाहिए पर उनकी खोज हम बाहर करते हैं जबकि वह हमारे भीतर ही उपलब्ध है, इसलिए योग सिर्फ अपने अपने इष्ट से जुड़ने की कला और विज्ञान नहीं है बल्कि स्वयं को स्वयं से जोड़ने की कला और विज्ञान भी योग है।
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स्तंभ संपादन : शक्ति रेनू डॉ.आर के. रीता
सज्जा : शक्ति मंजिता.सीमा. स्वाति
शक्ति मूल आलेख : १
विश्व पर्यावरण दिवस : ५ जून
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ये पौधे ये फूल ये हवाएं.
मन कहे मैं झूमूँ
शक्ति.शालिनी रंजिता मंजिता अनुभूति.
एक दिन का दिखावा या जीवन भर का संकल्प : मन की बात सिर्फ एक दिन का दिखावा या जीवन भर का संकल्प..? विकास के नाम पर कटते जंगल, और जून की तपती धूप में एक पौधे का ढोंग...ज़रा सोचिए, हम आने वाली पीढ़ी को क्या सौंप रहे हैं...?" खोखली नीतियां, सुलगती धरती या दिखावे का पर्यावरण...?
विश्व पर्यावरण दिवस ५ जून पर केवल सोशल मीडिया पर फोटो खिंचवाने से पर्यावरण नहीं बचेगा..!
विनाश बनाम विकास का यह जो दौर चला है वह एक तरफ बसे-बसाए जंगलों को विकास की बलि चढ़ा दिया जाता है, और दूसरी तरफ ' माँ के नाम ' पर या अभियानों के नाम पर पौधे लगाने का नाटक होता है..! विडम्बना यह रही कि एक सत्र मैं भी एक संस्था के बैनर तले इस नाटक का हिस्सा बनी और पेड़ ख़रीदने के लिए न केवल सहयोग किया अपितु बाँटने में भी सशक्त भूमिका निभाई पर जब मुझसे पूछा गया कि आप नहीं ले जाएंगी पेड़..?
तो मैंने संकोचवश दो पेड़ उठा लिया फिर सोचा इस भीषण गर्मी में जहाँ हम लोग दिन-भर ठंडा पानी पीते हैं, ए सी में रहते हैं फिर भी वातावरण का प्रकोप नहीं झेल पा रहे हैं तो क्या ये पौधे झेल पाएंगे..?
![]() |
| ये पौधे ये फूल ये हवाएं : फोटो : शक्ति रितु सिंह |
हमारी मम्मी को प्लांटिंग आती है इसलिए मॉयके में घर के चारों तरफ की हरियाली में फोटोशूट कराने के बाद अक्सर लोग पूछते हैं, उत्तराखंड की तस्वीर है क्या..? मुझे पेड़-पौधे, नदियाँ, पहाड़ ये सभी आकर्षित करते हैं और मैं चाहती हूँ कि सरकार इनके संरक्षण का कोई पुख़्ता इंतज़ाम करे..!
पर सरकार का भी कुछ समझ नहीं आ रहा..कि इस जानलेवा गर्मी में हरे-भरे पेड़ ही हमारी जान बचा रहे हैं, फिर भी उन्हें काटने की अनुमति क्यों दी जा रही है..? और इस विषम वातावरण में पौधे लगवाने का ढोंग क्यों..?
पर्यावरण संरक्षण ३६५ दिन का कर्तव्य न कि एक दिन का : सही समय, सही नीयत से पौधे लगाए जाएं, तभी विकास को गति मिलेगी क्योंकि भीषण जून की गर्मी में लगाए गए पौधे अक्सर सूख जाते हैं। पेड़ लगाने का सबसे बेहतरीन और प्राकृतिक समय सावन मानसून का महीना है और पर्यावरण संरक्षण ३६५ दिन का कर्तव्य है..!
पर्यावरण बचाना किसी एक दिन का उत्सव नहीं, बल्कि हमारी हर दिन की ज़िम्मेदारी होनी चाहिए...! फोटो खिंचवाने के लिए नहीं, पौधे को जीवित रखने की ज़िम्मेदारी के साथ पेड़ लगाएं, कृपया दिखावा बन्द करें..!
पेड़ केवल कागज़ों या नारों में नहीं, बल्कि हमारी ज़मीन पर हो : नए पौधे लगाने से कहीं ज्यादा ज़रूरी है पुराने और घने पेड़ों को कटने से बचाना। आपके द्वारा निष्ठा से लगाये गए पौधे आपकी आने वाली पीढ़ियों को सुरक्षा प्रदान करेगी किन्तु हमारे-आपके लिए वर्तमान जंगलों बचाना अत्यधिक जरूरी है।
बड़े-बड़े उद्योगपतियों को जंगल बेच दिए जा रहे हैं। जंगल काटकर इमारतें खड़ी की जा रही हैं। यह सब चिंतन का विषय है..! आप सभी से अनुरोध है कि नेताओं और प्रशासन से सवाल करें और विकास के नाम पर होने वाले अंधाधुंध पर्यावरण विनाश के खिलाफ आवाज़ उठाएं..याद रखें..
पेड़ केवल कागज़ों या नारों में नहीं, बल्कि हमारी ज़मीन पर और हमारी सांसों में होने चाहिए।" पर्यावरण की रक्षा एक दिन का शून्य-संकल्प नहीं, अपितु रोज़ का काम है..! कृपया जागरूक हों..पर्यावरण बचाएं.. स्वयं को सुरक्षित बनाएं..! प्रकृति बचेगी, तभी हम बचेंगे..!
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संपादन : शक्ति माधवी सीमा रेनू
सज्जा : शक्ति डॉ.अनु रितु स्वाति
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शक्ति मूल आलेख : २ : शक्ति धारावाहिक : यात्रा
संपादन.
शक्ति शालिनी प्रिया रंजिता
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यात्रा संस्मरण : वीरगंज : नेपाल : पोखरा : मुक्ति नाथ
शक्ति धारावाहिक : यात्रा
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प्रकृति : पहाड़ : प्रेम : पुरुषोत्तम.
शिव : शक्ति : अनंत भक्ति
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शक्ति. सोनी.मधुप रितु
दार्जलिंग डेस्क
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शक्ति मूल आलेख : २ / १ : शक्ति धारावाहिक : यात्रा
रक्सौल : वीरजगंज : दो जुड़वा शहर : काठमांडू का प्रवेश द्वार.
अंतरराष्ट्रीय सीमावर्ती भारतीय शहर रक्सौल : ३१ मई। फोटो शक्ति सम्पादिका सोनी को रक्सौल के रास्ते बीरगंज, काठमांडू, पोखरा, मुक्ति नाथ, जनक पुर की यात्रा करनी थी । दिए गए सलाह के अनुसार रात पटना से बस की स्लीपर सेवा ली गई। किराये के ६०० रूपये मात्र ख़रच हुए। सुबह सुबह हम रक्सौल पहुंच गए थे।
पटना से रक्सौल यातायात के लिए ढ़ेर सारी लग्जरी बसें उपलब्ध हैं, जिसका किराया ६०० रूपये है । बताते चले पटना से रक्सौल की दूरी २१० किलोमीटर है जो आप छ से सात घंटे में पूरे कर सकते है।
रक्सौल से जुड़े जुड़वाँ शहर वीर गंज से आपको मात्र १४० किलोमीटर का फासला और तय करना होगा आप हिन्दू धर्म मतालम्बी राष्ट्र नेपाल की वादियों में होंगे।
बिहार राज्य के पूर्वी चंपारण ज़िला, मुख्यालय रक्सौल की अंतरराष्ट्रीय सीमा नेपाल के बीरगंज शहर से सटी हुई है। वीरगंज से हमने नेपाल काठमांडू के लिए साझेदारी वाली टैक्सी ली जिसके लिए हमने सात सौ से आठ सौ रुपये खर्च किये। हमें काठमांडू पहुंचने में छ से सात घंटे लगे।
परिवहन की सुविधा : यह एक महत्वपूर्ण रेलवे जंक्शन स्टेशन कोड RXL है, जहाँ से दिल्ली, कोलकाता और हैदराबाद जैसे कई प्रमुख शहरों के लिए सीधी ट्रेनें उपलब्ध हैं। आर्थिक महत्व के लिए यह भारत और नेपाल के बीच द्विपक्षीय व्यापार का सबसे व्यस्त और प्रमुख पारगमन मार्ग है , जहाँ से पर्यटन उद्योग पनपते है ।
नेपाल की व्यावसायिक राजधानी बीरगंज : दक्षिणी नेपाल के मधेस प्रांत के पर्सा जिले में स्थित एक प्रमुख महानगर और औद्योगिक शहर है। इसे नेपाल की व्यावसायिक राजधानी और भारत से नेपाल में प्रवेश करने का प्रमुख द्वार माना जाता है।
सीमा और महत्व : यह शहर भारतीय राज्य बिहार के पूर्वी चंपारण जिले के रक्सौल से सटा हुआ है। यह भारत और नेपाल के बीच सड़क मार्ग द्वारा व्यापार का सबसे बड़ा केंद्र है।
बीरगंज : की ऐतिहासिकता : यह शहर नेपाल की राजधानी काठमांडू से लगभग १३५ किलोमीटर या ८४ मील दक्षिण में स्थित है।
१८९७ में बीर शमशेर जंग बहादुर राणा द्वारा स्थापित इस शहर का प्राचीन नाम ' गहवा ' था।
पर्यटन और आवागमन : भारत की ओर से नेपाल जाने वाले पर्यटकों और व्यापारियों के लिए यह सड़क मार्ग का सबसे आसान और सुगम रास्ता है।
बीरगंज में घूमने और देखने लायक प्रमुख जगहें :
घड़ियारवा पोखरी : घड़ियारवा पोखरी शहर के बीचों-बीच स्थित यह एक बेहद खूबसूरत और शांत तालाब। यहाँ आप शाम के समय सुकून से टहल सकते हैं और मछलियों को दाना खिला सकते हैं।
श्री गहवा माई मंदिर : यहाँ का सबसे प्रसिद्ध और आस्था का मुख्य केंद्र। स्थानीय लोगों के साथ-साथ दूर-दूर से पर्यटक भी माता के दर्शन के लिए यहाँ आते हैं।
विशाल बजार और स्थानीय मार्केट्स : बीरगंज अपनी हलचल भरी मार्केट के लिए जाना जाता है। यहाँ से आप काफी किफायती दामों में नेपाली हस्तशिल्प, कपड़े, मसाले और सूखे मेवे खरीद सकते हैं।
घंटाघर : शहर के मुख्य चौराहे पर स्थित यह विशाल क्लॉक टावर शहर की एक प्रमुख पहचान है। मुझे याद है, साल २००७, जब हम बीरगंज में घंटा घर तक चहल कदमी करते चले गए थे। कुछेक कैलकुलेटर भी ख़रीदे थे जो आज भी कही पड़ी होगी। सोनी कह रही थी तब से अब तो बीरगंज काफ़ी बदल गया है, न ,काफी व्यावसायिक इमारतें बन गयी हैं ।
परसा राष्ट्रीय उद्यान : यदि आपको वाइल्डलाइफ पसंद है, तो बीरगंज से लगभग कुछ ही दूरी पर स्थित इस पार्क में हाथी, बाघ और कई प्रजाति के पक्षी देखे जा सकते हैं।
टाइम्स मीडिया एडवरटाइजिंग समर्थित
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गतांक से आगे : २ / २
पर्वतों के पेड़ों पर शाम का बसेरा है.
धारावाहिक : यात्रा संस्मरण : नेपाल.
काठमांडू : कांची रे कांची रे प्रीत मेरी साची.
कांची रे कांची रे प्रीत मेरी साची : १९७१ : फिल्म हरे रामा हरे कृष्णा और काठमांडू : साल १९७१। देव आनंद की ब्लॉकबस्टर फिल्म ' हरे रामा हरे कृष्णा ' फिल्म प्रदर्शित हुई थी। इस फिल्म की मुख्य शूटिंग काठमांडू, नेपाल के विभिन्न प्रतिष्ठित स्थानों पर की गई थी।
फिल्म में काठमांडू के मुख्य दर्शनीय स्थलों जैसे पशुपतिनाथ मंदिर, काठमांडू दरबार स्क्वायर और शहर की सड़कों को प्रमुखता से दिखाया गया है।
फिल्म से जुड़ी खास बातें कहानी यह है कि एक भारतीय भाई अपनी खोई हुई बहन ज़ीनत अमान को तलाशने नेपाल जाता है, जो वहां जाकर हिप्पियों के एक समूह में शामिल हो जाती है। लोकप्रिय स्थान: फिल्म में दिखाई गई काठमांडू की लोकेशंस स्थलों ने १९७० के दशक में नेपाल में पर्यटन को बहुत बढ़ावा दिया था।
स्टारकास्ट की बात करें तो इसमें देव आनंद के साथ ज़ीनत अमान और मुमताज़ मुख्य भूमिकाओं में थे।
एक अत्यंत लोकप्रिय मधुर गाना कांची रे कांची रे प्रीत मेरी साची काठमांडू में फिल्म अभिनेता देव आनंद और अभिनेत्री मुमताज़ पर शूट किया गया था। यह प्रेम से जुड़ा कालजयी गीत संगीत जो आज भी हमारे मन को भाता है।
काठमांडू नेपाल की राजधानी अपनी प्राचीन संस्कृति, भव्य मंदिरों और हिमालय की तलहटी में बसी खूबसूरत वास्तुकला के लिए दुनिया भर में प्रसिद्ध है। यहाँ घूमने के लिए प्रमुख ऐतिहासिक और धार्मिक स्थान मौजूद हैं।
हम अर्थात मैं, शक्ति समूह सुनीता, राशि रतनिका साल २००७ में नेपाल पोखरा के भ्रमण पर थे । इसके बाद हमारी शक्ति समूह सम्पादिका रितु सिंह साल २०२५, व शक्ति सोनी संजय साल २०२६ में नेपाल के जनकपुर, काठमांडू, पोखरा, मुक्तिधाम की ख़ोज के लिए निकले थे।
इस्कॉन मंदिर : राजधानी काठमांडू : हे राम : मुझे याद है जब हम वहां गए थे तो जगजीत सिंह का गाया हुआ भजन हे राम बज रहा था। हम मंत्रमुग्ध थे। बैठे हुए भजन सुन रहे थे। हमने वहां दीर्घ समय बिताया था।
नेपाल का प्रमुख इस्कॉन मंदिर राजधानी काठमांडू में बुद्धनीलकंठ नारायण के पास स्थित है। 'श्री श्री राधागोविन्द हरि ' को समर्पित यह मंदिर भक्ति, योग और शाकाहार का एक प्रमुख आध्यात्मिक केंद्र है।
मुख्य विशेषताएं और जानकारी ,स्थानांतरण / स्थान के बारे में बात करें तो यह मंदिर शिवपुरी पर्वत की तलहटी में और पवित्र बिष्णुमती नदी के पास स्थित है। पूजित देव यहाँ मुख्य रूप से श्री श्री राधागोविन्द हरि, श्री श्री गौर सुंदर, नितई सुंदर, जगन्नाथ बलदेव, सुभद्रा और भगवान नरसिम्हा की पूजा की जाती है।विशेष आयोजन में यहाँ हर साल भव्य रूप से जगन्नाथ रथ यात्रा निकाली जाती है, जिसमें हजारों स्थानीय और विदेशी श्रद्धालु भाग लेते हैं।
याद रखें दर्शन का समय : मंदिर सुबह मंगला आरती से लेकर रात को शयन आरती तक खुला रहता है। इस्कॉन के बारे में अधिक जानकारी व अपडेट्स के लिए आप इस्कॉन डिज़ायर ट्री या इस्कॉन की आधिकारिक वेबसाइट देख सकते हैं।
यदि आप दर्शन करने की योजना बना रहे हैं या मंदिर के समय के बारे में विस्तार से जानना चाहते हैं, तो क्या आप मंदिर के त्योहारों जैसे जन्माष्टमी या आसपास रुकने के स्थानों के बारे में जानना चाहते हैं जानकारी पहले इकट्ठी कर लें ?
और क्या देखें : पशुपतिनाथ मंदिर : बागमती नदी के तट पर स्थित यह भगवान शिव का सबसे पवित्र और प्राचीन मंदिर है। यहाँ की शाम की महाआरती और आध्यात्मिक माहौल बहुत शांति प्रदान करता है। पार्श्व में ही काशी की तरह यहाँ भी श्मशान है जहाँ चिताएं सदैव जलती रहती हैं।
बौद्धनाथ स्तूप : यह दुनिया के सबसे बड़े स्तूपों में से एक है। तिब्बती बौद्ध धर्म का यह मुख्य केंद्र चारों तरफ से मठों और सुंदर प्रार्थना चक्रों से घिरा हुआ है। यहाँ शांति का अनुभव करने के लिए बौद्धनाथ स्तूप टूर बुक कर सकते हैं।
स्वयंभूनाथ स्तूप : इसे मंकी टेंपल : बंदर मंदिर भी कहा जाता है। काठमांडू घाटी की एक ऊँची पहाड़ी पर स्थित इस जगह से पूरे शहर का शानदार नज़ारा दिखाई देता है। यहाँ बौद्ध धर्म का एक प्रमुख और प्राचीन मंदिर / स्तूप है। कुछ कुछ मुझे याद है हल्की चढ़ाई के बाद हम स्वयंभू नाथ स्तूप पहुँच गए थे।
दरबार स्क्वायर : नेपाल के प्राचीन राजाओं के राजसी महल और उत्कृष्ट नक्काशी वाले लकड़ी के मंदिर यहाँ के मुख्य आकर्षण हैं। इसमें ' काठमांडू दरबार स्क्वायर ' और ' पाटन दरबार स्क्वायर ' दोनों प्रमुख हैं। यह यूनेस्को विश्व धरोहर स्थलों में शामिल है। यहाँ प्राचीन मंदिर, मूर्तियां और पुराना शाही महल स्थित है
पाटन स्क्वायर : काठमांडू घाटी का सबसे पुराना शहर। यह अपनी बेहतरीन नेवारी वास्तुकला और लकड़ी की नक्काशी के लिए जाना जाता है
थामेल स्ट्रीट : अगर आप शॉपिंग, स्ट्रीट फ़ूड और काठमांडू की नाइटलाइफ़ का अनुभव करना चाहते हैं, तो यह सबसे बेहतरीन जगह है। यहाँ कई कैफे और पब हैं।काठमांडू के इन प्रमुख और शानदार पर्यटन स्थलों की झलक देखें।
नारायणहिती पैलेस संग्रहालय : यह नेपाल के पूर्व शाही परिवार का महल था, जिसे अब एक संग्रहालय में बदल दिया गया है।
| * पशुपति नाथ मंदिर : काठमांडू : संध्या आरती : दृश्यम |
प्रस्तुति :शक्ति.सोनी प्रिया मधुप.
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गतांक से आगे : २ / ३
पर्वतों के पेड़ों पर शाम का बसेरा है.
धारावाहिक : यात्रा संस्मरण : नेपाल.
भक्तपुर : मध्ययुगीन स्वरूप और भव्य नेपाली वास्तुकला.
यूनेस्को विश्व धरोहर स्थल.
भक्तपुर : नेपाल की काठमांडू घाटी में स्थित एक प्राचीन और सांस्कृतिक रूप से समृद्ध शहर है। यह काठमांडू से पूर्व में लगभग १३ किलोमीटर या ८ मील की दूरी पर स्थित है। नेपाल यात्रा में भक्तपुर अवश्य देखने योग्य शहर है। मुझे याद है घूमना बड़ा अच्छा लगा था।
'भक्तों का शहर ' कहलाने वाले इस स्थान को 'भादगाँव ' या ' ख्वोपा ' भी कहा जाता है। अपने मध्ययुगीन स्वरूप और भव्य वास्तुकला के कारण यह यूनेस्को की विश्व धरोहर स्थलों में शामिल है। शहर के संकरे और पारंपरिक रास्तों पर घूमने के दौरान आप कई ऐतिहासिक और सांस्कृतिक स्थलों को देख सकते हैं ।भक्तपुर दरबार स्क्वायर : यह एक खुला ऐतिहासिक प्रांगण है जहाँ १५ वीं सदी का पचपन्ना झ्याले दरबार ५५ खिड़कियों वाला महल और कलात्मक गोल्डन गेट मौजूद है।
न्यातपोल मंदिर : पाँच मंजिला यह पैगोडा शैली का मंदिर नेपाल का सबसे ऊंचा मंदिर है, जो अपनी भव्यता के लिए प्रसिद्ध है।
दत्तात्रेय स्क्वायर : यहाँ तीन मंजिला दत्तात्रेय मंदिर और लकड़ी की उत्कृष्ट नक्काशी वाली मयूर खिड़कियां पीकॉक विंडो आकर्षण का मुख्य केंद्र हैं। स्थानीय व्यंजन और कलाजूजू धौ भक्तपुर का यह खास मीठा दही भैंस के दूध से बनाया जाता है और यह स्थानीय संस्कृति का सबसे स्वादिष्ट हिस्सा है।
हस्तशिल्प और पॉटरी : यह शहर अपनी अद्भुत लकड़ी की नक्काशी, पत्थर की मूर्तियों और मिट्टी के बर्तनों के लिए देश भर में मशहूर है।
पर्यटन शुल्क : शहर में प्रवेश करने के लिए विदेशी पर्यटकों को प्रवेश शुल्क लगभग १५०० नेपाली रुपये देना होता है, जिसके पास के साथ आप यहाँ कई दिन बिता सकते हैं।भक्तपुर के ऐतिहासिक मंदिरों, नेवार वास्तुकला और प्रसिद्ध आकर्षक स्थलों की झलक देखने के लिए, आप भक्तपुर जरूर देखें:
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पर्वतों के पेड़ों पर शाम का बसेरा है.
धारावाहिक : यात्रा संस्मरण : नेपाल. पोखरा
अन्नपूर्णा रेंज में बसा यह शहर : नेपाल की पर्यटन राजधानी
पोखरा, काठमांडू के बाद नेपाल का दूसरा सबसे बड़ा और सबसे खूबसूरत पर्यटन शहर है। हिमालय की गोद अन्नपूर्णा रेंज में बसा यह शहर अपनी शांत झीलों, साहसिक खेलों जैसे पैराग्लाइडिंग , और ट्रैकिंग मार्गों के लिए दुनिया भर में प्रसिद्ध है।
पोखरा नेपाल घूमने का सबसे अच्छा समय सितंबर से नवंबर शरद ऋतु और मार्च से मई वसंत ऋतु के बीच का है। इस दौरान मौसम सुहावना रहता है, आसमान साफ रहता है और हिमालय की चोटियों अन्नपूर्णा रेंज के सबसे बेहतरीन नज़ारे देखने को मिलते हैं
यह नेपाल की अनौपचारिक पर्यटन राजधानी भी माना जाता है। नेपाल के पोखरा में देखने के लिए सबसे प्रमुख जगहें फेवा झील, सारंगकोट हिमालय के नज़ारों के लिए , विश्व शांति पैगोडा वर्ल्ड पीस पगोडा और डेविस फॉल्स हैं।
पोखरा में घूमने के लिए बेहतरीन और चुनिंदा जगहों की सूची यहाँ दी गई है जिसे आप याद रखें।
फेवा झील : यह पोखरा की सबसे प्रसिद्ध और दूसरी सबसे बड़ी झील है। यहाँ आप बोटिंग का आनंद ले सकते हैं। झील के बीच में ताल बाराही मंदिर स्थित है।
पोखरा लेकसाइड : यह पोखरा का मुख्य टूरिस्ट हब है। यहाँ कैफे, पब, और होटलों की लंबी कतारें हैं। शाम के समय यहाँ घूमने का अलग ही मज़ा है।
सारंगकोट : यह जगह अन्नपूर्णा पर्वत श्रृंखला और सूर्योदय का अद्भुत नज़ारा पेश करती है। यह पैराग्लाइडिंग का मुख्य लॉन्चिंग पॉइंट भी है।
विश्व शांति पैगोडा : फेवा झील के पार एक पहाड़ी की चोटी पर स्थित यह स्तूप, सफेद रंग की एक खूबसूरत बौद्ध स्मारक है। यहाँ से पूरी पोखरा घाटी और हिमालय का शानदार दृश्य दिखाई देता है。डेविस फॉल्स और गुप्तेश्वर महादेव गुफा : डेविस फॉल्स एक अनोखा भूमिगत झरना है। इसी के ठीक सामने गुप्तेश्वर गुफा है, जिसके अंदर एक प्राकृतिक शिवलिंग और बहते हुए पानी का अद्भुत नजारा देखा जा सकता है।
अंतरराष्ट्रीय पर्वतीय संग्रहालय : अगर आप पहाड़ों, पर्वतारोहियों और उनकी कहानियों में रुचि रखते हैं, तो यह संग्रहालय आपके लिए बेहतरीन है। इसमें एवरेस्ट और अन्य चोटियों से जुड़ी जानकारी रखी गई है।विंध्यवासिनी मंदिर : यह शहर के सबसे पुराने और पूजनीय मंदिरों में से एक है जो एक पहाड़ी पर स्थित है।
बेतनास झील : अगर आप भीड़भाड़ से दूर शांति चाहते हैं, तो फेवा झील से कुछ दूरी पर स्थित इस शांत और खूबसूरत झील पर ज़रूर जाएँ .
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गतांक से आगे : २ / ५
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नेपाल : शोध : शक्ति : यात्रा संस्मरण.
शक्ति सोनी मधुप रितु.
दार्जलिंग डेस्क.
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गतांक से आगे : मुक्ति नाथ यात्रा
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मारफा : पत्थरों के घर
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लेकिन धड़कती हैं दिल में , पहाड़ी देव शक्ति की सभ्यता और संस्कृति.
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| पत्थरों के घरों में दिल : धड़कती हैं सभ्यता और संस्कृति : फोटो कोलाज : शक्ति रितु मधुप सोनी |
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ए.एंड एम. मीडिया अधिकृत
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गतांक से आगे : २ / ६
श्री लक्ष्मी नारायण : भगवान विष्णु को समर्पित. मुक्ति नाथ
एक महत्वपूर्ण हिन्दू मंदिर
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शक्ति यात्रा आलेख : शक्ति रितु मधुप सोनी
मुक्ति नाथ : मुस्तांग : नेपाल : यात्रा संस्मरण.
मुक्ति नाथ गांव से इसके प्रवेश द्वार से मंदिर तक पहुंचने में समय २० मिनट का लगता है। यहाँ से पैदल चढ़ते हुए संख्या में लगभग ३०० सीढियाँ चढ़नी पड़ती है।
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फोटो व रील सम्पादिका : महाशक्ति
शक्ति रितु दृश्यम : रिपोर्टिंग : मुक्ति नाथ : नेपाल *
गतांक से आगे : २ / ७
नेपाल : शोध शक्ति : यात्रा संस्मरण. मुक्तिनाथ
अनंत धाराएं शक्ति लक्ष्मी सरस्वती कुंड : मुक्ति स्नान
शक्ति सोनी मधुप रितु.
दार्जलिंग डेस्क.
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अनंत धारायें : दिव्य शक्ति कुंड लक्ष्मी सरस्वती कुंड में : मुक्ति स्नान : फोटो : कोलाज : शक्ति रितु मधुप सोनी |
कितना ठंढ़ था। आस पास ओले जैसा बरफ जमा था। पानी जमने जैसा ही। कुंड में डुबकी लगाते ही लगा जैसा शरीर बर्फ़ में तब्दील हो गया हो। हरि जाप लेते हुए ही मुक्ति मिल गयी। यह तीर्थ ३८०० मीटर की ऊंचाई पर स्थित है शायद विश्व का सबसे ऊँचा श्री लक्ष्मी नारायण का मंदिर है।
१०८ जल की नल धाराओं ,२ पवित्र तालाब यथा लक्ष्मी व सरस्वती कुंड : और यहाँ १०८ जल कुंड तथा धुँए की धारा हैं,जहाँ श्रद्धालु पवित्र स्नान करते हैं। हिमालय से निसृत होती १०८जल कुंड धाराओं के ठंडे जल में स्नान करना एक खास आध्यात्मिक अनुभव है।
मुक्तिनाथ मंदिर भगवान विष्णु को समर्पित है मंदिर परिसर के पीछे १०८ जल की हिमालय निःसृत नल धाराएं, व २ पवित्र कुंड यथा लक्ष्मी व सरस्वती कुंड है। कहते है १०८ जल की नल धाराओं ,२ पवित्र तालाब यथा लक्ष्मी व सरस्वती कुंड में स्नान करने से जन्म जन्मांतर के पाप धुलते हैं। शक्ति ने कितने लोगों को पंक्ति बद्ध होते हुए इस जल धारा में स्न्नान करने के पश्चात लक्ष्मी व सरस्वती कुंड में डूबकी लगाते हुए देखा था।
सर्द पानी। बर्फानी हवा। पानी में प्रवेश करते ही लगे की शरीर जम जाए। लेकिन लक्ष्मी नारायण के हांथों से मुक्ति जो पानी है। और यहाँ हिमाचल के ज्वाला देवी की तरह जमीन से निकली प्राकृतिक गैस की ज्वाला भी है।
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साभार शॉर्ट रील : नेपाली भाषा : दार्जलिंग डेस्क
मुक्तिनाथ मंदिर मा हवा चले सर....र.. र ..आ
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गतांक से आगे : २ / ८
पर्वतों के पेड़ों पर शाम का बसेरा है.
धारावाहिक : यात्रा संस्मरण : जनकपुर नेपाल. अंतिम क़िस्त
राम सिया की यहीं है कहानी.
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जनकपुर जनकपुरधाम नेपाल के मधेश प्रदेश में स्थित एक अत्यंत ऐतिहासिक और धार्मिक शहर है, जो भारत के बिहार राज्य की सीमा के नजदीक है। हिंदू पौराणिक कथाओं के अनुसार, यह शहर प्राचीन मिथिला साम्राज्य की राजधानी था और राजा जनक का महल यहीं स्थित था।
सांस्कृतिक केंद्र : यह शहर आज भी अपनी समृद्ध मिथिला संस्कृति और कला मिथिला पेंटिंग के लिए दुनिया भर में प्रसिद्ध है. जनकपुर के मुख्य दार्शनिक स्थल निम्न है।
धार्मिक एवं ऐतिहासिक महत्व सीता की जन्मस्थली: पौराणिक मान्यताओं के अनुसार, राजा जनक को इसी भूमि से हल चलाते समय सीता जानकी प्राप्त हुई थीं.
राम-सीता विवाह स्थल : भगवान श्रीराम ने इसी पावन नगरी में शिव का धनुष तोड़कर सीता से विवाह रचाया था.
जानकी मंदिर : यह जनकपुर का सबसे बड़ा और मुख्य आकर्षण है. इसे ' नौलखा मंदिर ' भी कहा जाता है, क्योंकि सन १९११ में इसके निर्माण में ₹ ९ लाख खर्च हुए थे. इस भव्य मंदिर का निर्माण टीकमगढ़ की महारानी वृषभानु कुमारी ने करवाया था.
विवाह मंडप : जानकी मंदिर के पास ही स्थित वह स्थान है जहाँ माना जाता है कि भगवान राम और माता सीता का विवाह संपन्न हुआ था.
पवित्र तालाब पोखर : जनकपुर को 'तालाबों का शहर' भी कहा जाता है. यहाँ कई पवित्र तालाब हैं जैसे गंगा सागर, धनुष सागर और राम सागर, जहाँ शाम को भव्य आरती होती है.भाषा और संस्कृतियहाँ की मुख्य भाषा मैथिली है, लेकिन भारत से निकटता और धार्मिक जुड़ाव के कारण यहाँ हिंदी, भोजपुरी और अवधी बोलने और समझने वाले लोगों की भी बहुत बड़ी संख्या में हैं।
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शॉर्ट रील : जनकपुर : शक्ति रितु
राम जी से पूछे जनकपुर के नारी
बता दा बबुआ लोगवा देत काहे गारी
बता दा बबुआ
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संपादन : शक्ति. शालिनी मधुप रेनू
सज्जा : शक्ति.रितु सोनी अनुभूति.
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गोरी साँवरे सलोनी : पद्य संग्रह : अनुभाग.
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ढाई आखर प्रेम का : प्रेम के सात रंग
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सम्पादकीय :त्रिशक्ति : गोरी साँवरे सलोनी :पद्य संग्रह : आलेख : पृष्ठ : २ / ३.
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संपादन
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संपादन
शक्ति. रेनू डॉ.आर के.सीमा
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भाविका.
शक्ति. अनुभाग.
शक्ति.रेनू शब्दमुखर.जयपुर
कवयित्री. लेखिका. सम्पादिका महाशक्ति मीडिया.
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तुम्हारे लिए.
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मुझे पूरा पढ़ो
तुमने देखा
मेरी खामोशी का एक कोना,
और लिख दिया फैसला
मेरे पूरे व्यक्तित्व पर.
तुमने सुनी
मेरी नाराज़गी की एक ध्वनि,
पर नहीं सुना
वह सन्नाटा
जिसमें मैंने कितनी बार
खुद को समझाया था.
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भाविका : संदर्भित :माया
शक्ति गुल : मुंबई : छाया
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इतनी भी बुरी नहीं.
हाँ, मैं कभी-कभी
स्पष्ट शब्दों में सच कह देती हूँ,
पर इसका अर्थ यह नहीं
कि मेरे भीतर
ममता के झरने नहीं बहते.
मेरी आँखों में भी
दूसरों के लिए दुआएँ पलती हैं,
मैं भी चुपके से
अपनों के दुःख अपने हिस्से कर लेती हूँ.
इसलिए फैसला सुनाने से पहले
मुझे पूरा पढ़ो-
क्योंकि मैं
तुम्हारी धारणा जितनी कठोर नहीं,
और सच कहूँ,
इतनी भी बुरी नहीं.
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संपादन सज्जा.
शक्ति. कंचन मंजिता अनुभूति.
नैनीताल डेस्क
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शक्ति. रेनू शब्द मुखर.
जयपुर.
कवयित्री. लेखिका. प्रधान सम्पादिका
महाशक्ति मीडिया
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भाविका : सन्दर्भ : माया स्वयं : शक्ति रेनू : छाया.
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जिंदगी एक नई जंग है
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थककर बैठ जाना हार नहीं
फिर से उठ जाना जीत है
आंसुओं को ताकत बना लेना
यही जीवन की असली रीत है
जो संघर्षों से दोस्ती कर ले
वह इतिहास बदल देते हैं
जो खुद पर विश्वास रख ले
वे दुनिया को नया रास्ता दे देते हैं
संघर्षों की धूप में जो मुस्कुराना सीख लेते हैं
वही अपने जीवन को स्वर्णिम पहचान देते हैं
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संपादन / सज्जा
शक्ति. शालिनी सीमा अनुभूति
भाविका सन्दर्भ : माया स्वयं शक्ति डॉ. रजनी छाया * नहीं चाहिए़ महल अटारी बूढ़े बरगद की छांव चाहिए फिर से सखि मुझे गांव चाहिएं. बहुत हो चुकी दौड़ सभ्यता बस ट्रेनों की भीड़ खचाखच कंकर –पत्थर की किचकिच से दूर नदी और नाव चाहिए फिर से सखि. एडी घिस–घिस चूल्हा जलता तब घर में नन्हा छौना पलता फटी बिवाइयां चीख रही है हारे श्रमिक को ठहराव चहिए फिर से सखि. * संपादन सज्जा शक्ति मानसी कंचन मंजिता स्वाति
शक्ति अनुभाग.
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शक्ति शालिनी
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विश्व पर्यावरण दिवस.विशेष
५.६.२६
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मैं धरती का शृंगार हूँ..!
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भाविका : सन्दर्भ : माया स्वयं : शक्ति : शालिनी : छाया.
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मैं वृक्ष हूँ तेरी साँसों का,
युग-युग से मुख्य आधार हूँ,
मत काट मुझे तू हे मानव,
मैं धरती का शृंगार हूँ..!
सदियों से मैं तो खड़ा रहा,
इस वसुधा का संवाहक हूँ.
तेरी साँसों का सर्जक हूँ,
जीवन का आदि-विधायक हूँ.
जो छाँव तले, थकान हरी,
मैं शीतल वही बयार हूँ.
मत काट मुझे तू हे मानव,
मैं धरती का शृंगार हूँ..!
जब बीज रूप में सोया था,
मिट्टी ने मुझे सँवारा था.
अनजान था मैं इस चिंतन से,
मानव ही काल हमारा था.
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अनुभाग : भाविका
विश्व पर्यावरण दिवस.विशेष.
शक्ति शालिनी
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मेरी मूक चेतना रोती है
ये पौधे ये फूल ये हवाएं : कृति : शक्ति विदिशा
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ज़हरीली हवाएँ पीता हूँ,
अमृत की बहती धार ...हूँ.
मत काट मुझे तू हे मानव,
मैं धरती का शृंगार हूँ..!
मुझमें भी जीवन पलता है,
तू मुझ पर क्रूर प्रहार न कर,
मेरी मूक चेतना रोती है,
मेरे सुख का यूँ संहार न कर.
फल-फूल व जीवन देकर भी,
क्यों आज खड़ा लाचार हूँ..?
मत काट मुझे तू हे मानव,
मैं धरती का शृंगार हूँ..!
मैंने अपनी इन शाखों पर,
नूतन विहंग को पाला है,
तपती दोपहरी को मैंने,
शीतल छाया में ढाला है.
मैं रक्षक हूँ तेरे जीवन का,
तेरी श्वासों का संसार हूँ।
मत काट मुझे तू हे मानव,
मैं धरती का शृंगार हूँ..!
मेरी रग-रग से फूट रही,
जो मीठी रस की धारा है,
पुष्प-पल्लव-फल-औषधियाँ,
यह सब वैभव ही तुम्हारा है.
भाविका सन्दर्भ : माया
शक्ति ;मानसी : छाया
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तेरे हित मे सदा ही खड़ा रहा,
मैं प्रकृति का अवतार हूँ।
मत काट मुझे तू हे मानव,
मैं धरती का शृंगार हूँ..!
मैंने विष पीकर भी तुमको,
अमृत का सदा उपहार दिया,
पर बदले में निष्ठुर मानव..!
तूने क्यों मुझपर वार किया..?
तेरे प्रणय का भी हूँ मैं साक्षी,
सुंदर, शीतल अभिसार हूँ।
मत काट मुझे तू हे मानव,
मैं धरती का शृंगार हूँ..!
जब तेज़ कुल्हाड़ी काया को,
भीतर तक चीर के जाता है,
हर शाख का पत्ता रो-रोकर,
अंतस का लहू बहाता है..!
तू तनिक ठहर और सोच ज़रा,
तेरे जीवन का तार हूँ..!
मत काट मुझे तू हे मानव,
मैं धरती का शृंगार हूँ..!
मेरी ये टहनियाँ कटने से,
लुटता है मेरा श्रृंगार यहाँ.
साँसें भी तेरी घटती जातीं,
और तू समझे कि बहार यहाँ..?
*
अनुभाग : भाविका.
विश्व पर्यावरण दिवस.विशेष.
फिर सावन को हरषाने दो.
शक्ति शालिनी.
मैं वसुंधरा की हरियाली,
हर जीव से करता प्यार हूँ.
मत काट मुझे तू हे मानव,
मैं धरती का शृंगार हूँ..!
है अंधी तरक्की की चाहत,
मत अपना मूल विनाश करो,
मैं धरा-वधू का आभूषण,
न मरुस्थल का विन्यास करो.
वर्षों में होता हूँ वयस्क,
पौधों का बड़ा आकार हूँ।
मत काट मुझे तू हे मानव,
मैं धरती का शृंगार हूँ..!
यदि मैं न रहा तो अंबर से,
कैसे बरसेगा नीर यहाँ..?
तड़पेगी विकल यह मानवता,
जो समझे न मेरी पीर यहाँ.
वर्षा का करता आह्वान,
सब जीवों का आहार हूँ।
मत काट मुझे तू हे मानव,
मैं धरती का शृंगार हूँ..!
एक पौधा रोपो आँगन में,
फिर सावन को हरषाने दो,
इस रोती-बिलखती प्रकृति को,
जीवन देकर, मुस्काने दो.
जब बना रहा तेरा मित्र सदा,
क्यों खड़ा यहाँ लाचार हूँ..?
मत काट मुझे तू हे मानव,
मैं धरती का शृंगार हूँ..!
*
शक्ति शालिनी.
कवयित्री लेखिका सम्पादिका.
उत्तर प्रदेश
*
संपादन / सज्जा
शक्ति. रेनू सीमा अनुभूति
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फोर स्क्वायर होटल : रिसोर्ट : निदेशक : इं.यशवंत रांची : समर्थित :
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राधिकाकृष्णरुक्मिणी : ढाई अक्षर प्रेम का : जीवन संगीत :भजन : पृष्ठ : ३.
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विदर्भ डेस्क. महाराष्ट्र.
संपादन.
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शक्ति.रितु मीना गुल
*
शक्ति.गुल सक्सेना : गायिका : मुंबई :
भजन : आज : कृपा हुई है
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कृपा हुई है जब से तुम्हारी
बदल गयी है मेरी दुनियाँ सारी.
*
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वृन्दावन में हकूम चले बरसाने वाली का
*तेरा जाना दिल के अरमानों का लूट जाना
गायन : हंस कर हमने था कहा तुमसे थी ही जिंदगी
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तराने दिल से : मेरा परदेशी न आया.
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राधिकाकृष्णरुक्मिणी : शक्ति : कला दीर्घा : पृष्ठ : ५ .
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सम्पादन
शक्ति. मंजिता स्वाति अनुभूति
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दिन विशेष : शुभकामनाएं : राशि फल : पृष्ठ : ६.
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नैनीताल डेस्क
संपादन
शक्ति.बीना भारती नवीन जोशी.
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शक्ति अवतरण दिवस
१६.०६.२०२६
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सम्यक
शब्द : संवाद : संकट : साथ : शक्ति
की पर्याय.
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कवयित्री लेखिका.एंकर.पटना दूरदर्शन
दिग्दर्शिका सम्पादिका महाशक्ति मीडिया
राधिकाकृष्णरुक्मिणी.दर्शन विशेष
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शक्ति अवतरण दिवस
०६. ०६. २०२६.
नैनीताल
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निदेशिका.नवीन समाचार.डिजिटल न्यूज़.नैनीताल.
समाचार सम्पादिका.महाशक्ति मीडिया.ब्लॉग पेज
*
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राधिकाकृष्णरुक्मिणी : शक्ति :फोटो दीर्घा : पृष्ठ :७.
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संपादन
शक्ति.रितु दीप्ती सोनी.
नैनीताल डेस्क.
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| प्रकृति पहाड़ पुरुष उत्तम : प्रेम और पुनर्जन्म : कोलाज : काठमांडू : शक्ति.सोनी मधुप अनुभूति |
![]() | ||
शक्ति शिव भक्ति : पशुपतिनाथ मंदिर : काठमांडू : कोलाज : शक्ति. सोनी संजय प्रिया. *-------- राधिकाकृष्णरुक्मिणी : समसामयिकी.समाचार : दृश्यम दिन विशेष : पृष्ठ : ८. -------- संपादन शक्ति. डॉ.रजनी शालिनी रितु सिंह. * २१ जून. हर साल जून का तीसरा रविवार. मनाया सब ने फादर्स डे याने पितृ दिवस : * फादर्स डे : जी आई एफ * शक्ति. रेनू मधुप शालिनी जयपुर डेस्क. जयपुर / संवाद सूत्र : कल २१ जून था। २१ जून हर साल जून का तीसरा रविवार फादर्स डे याने पितृ दिवस के रूप में मनाया जाता है । सब ज्ञानी ने मनाया। सन्देश भेंजे। याद भी किया होगा ये आप जाने या हम। ज्ञात हो हर साल जून के तीसरे रविवार को मनाया जाता है। यह दिन पिता के निस्वार्थ प्रेम, त्याग और परिवार के प्रति उनके समर्पण को सम्मान देने के लिए समर्पित है। महाशक्ति मीडिया की प्रधान सम्पादिका रेनू जयपुर ने एक विशेष सामूहिक कार्यक्रम आयोजन किया था जिसमें पिता के नाम एक शाम के अंतर्गत यह बतलाया गया कि दो वर्णों के संयोग से निर्मित पापा एक शब्द नहीं जिंदगी के आधार वह चेहरे की मुस्कान होते हैं। पिता का मुख्य अर्थ और उनकी भूमिका : परिवार का आधार बनती है। : पिता परिवार की रीढ़ की हड्डी होते हैं, जो पूरे घर को आर्थिक और मानसिक रूप से संभालते हैं। जहाँ मां का अदृश्य प्यारजहां तुरंत दिखाई दे जाता है, वहीं पिता का प्यार एक नारियल फल की तरह होता है बाहर से सख्त लेकिन अंदर से बेहद नरम और सुरक्षात्मक। सच में पिता आपके लिए हीरो ही हैं ! जिनके बिना जीवन अधूरा है। हमारी तरफ़ से फादर्स डे की ढेर सारी शुभकामनाएं आप सभी को ! पिता शब्द की व्याख्या : अपने आप में ही परम है। स्वयं या बच्चें के भीतर के आदर्शों के जनक होते हैं पिता। अनुशासन की कठोर पाठशाला होते हैं, पिता। हमारे भीतर नियमानुसार जीवन यापन करने की कठोर व्यवहारिक शिक्षा देते हैं। गलती करने पर दंड के सख्त प्रावधान भी करते हैं,पिता। किस लिए ताकि हम सभी अपने जीवन का हर संभव सर्वांगीण व्यवहारिक मानवीय विकास कर सकें। मूलतः पितृ ,पिता या जनक शब्द के लिए मैं शत-शत नमन करता हूं। पिता घर की वह नींव हैं, जो दिखती कम है लेकिन सब संभालती है। वे धूप में जलते हैं , छांव मुझे देने के लिए। पिता खुद को भुला देता है,हमारे सपने जीने के लिए। पापा, आपकी कहीं न कहीं मेहनत और प्यार ने मुझे वो बनाया जो आज मैं हूँ। आपको फादर्स डे पर सलाम ! सरल हो जटिल हो, कुछ भी हो वह पिता ही हैं । सबकों अपने पिता पर गर्व ही होता है। मुझे भी अपने पिता,उनके निहित गुणों पर गर्व है। * बाबा नीम करौली : स्थापना दिवस : भुवाली : नैनीताल. शक्ति.श्रद्धा मधुप गुल. *
तराने : अकेले है चले आओ ...जहाँ हो
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साधना : प्रेम अजी हमसे रूठ कर कहाँ जाइएगा
दिल से : लिखा है तेरी आँखों में किसका अफ़साना * शक्ति.गुल तराने : रंगीला रे तेरे रंग में यूँ रंगा है मेरा मन * किसी राह में किसी मोड़ पर कहीं चल न देना तू छोड़ कर, मेरे हमसफ़र गायन : शक्ति. गुल सक्सेना. मुंबई सह गायन : मुख्तार शाह. गुजरात . * सुनो तो गंगा ये क्या सुनाए |
English Section
*
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Contents.
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English Editorial Section : Cover Contents Page 1
Shakti Editorial. English Page : 2
Shakti Editorial. Prose : English Page : 3
Shakti Editorial. Poem : English Page : 4
Shakti Vibes : .Page : 5
Radhika : Krishna : Rukmini : Photo Gallery.Page : 6
Visuals News : News : Editorial Page : 7
Shakti Art Gallery : Radhika : Krishna : Rukmini : English : Page 8.
Gratitude : Day Special : You Said it : Page : 9.
Shakti Editorial. English Page : 2
Shakti Editorial. Prose : English Page : 3
Shakti Editorial. Poem : English Page : 4
Shakti Vibes : .Page : 5
Radhika : Krishna : Rukmini : Photo Gallery.Page : 6
Visuals News : News : Editorial Page : 7
Shakti Art Gallery : Radhika : Krishna : Rukmini : English : Page 8.
Gratitude : Day Special : You Said it : Page : 9.
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Times Media Advertising Shakti Powered.
Contents.
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Times Media Powered
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Shakti. Editorial. English Page : 2
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Chief Editor.
Chandigarh Desk.
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Shakti. Dr. Anuradha. Chandigarh.
Arya.Er. Manish. IITian. USA.
Shakti. Nikita. Australia.
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Lion.
Symbol of Royalty & Loyalty
Shakti : Power : Determination.
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Shakti Vibes : Page : 5
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Editor. Tri shakti.
Shakti. Seema Ranjita Dr. Sunita.
*
if your eyes are positive, you will love the world and if your tongue is positive and sweet the entire world will love you ultimately.
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Radhika : Krishna : Rukmini : Photo Gallery. Page : 6.
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Editor.
Shakti. Lakshika Vani Seema.
*
![]() |
| a statue of Lord Vishnu reclining on the coils of the cosmic serpent: Kathmandu : Shakti. Soni Madhup Ritu. |
![]() |
| parvaton ke pedon par sham ka basera hai : Lakshika Latika Bhuwan Joshi |
![]() | ||||
the Annpurna Peak : Ganesh : Pokhara Nepal : Collage : Shakti Soni Priya Ritu
Shakti Art Gallery : Radhika Krishna Rukmini : English : Page 8. ------------ Shimla Desk. Editor. Shakti. Manjeeta Seema Anubhuti. * |
Gratitude : Day Special : You Said it : Page : 9.
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Shimla Desk.
Shakti. Ankita Tanu Archana
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Day Special : 21st of June.
*
a decorative Yoga GIF.
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International Yoga Day
Prevention from Stress and disease*
Holistic well being*
Metal Peace*
Global Brotherhood*
*
Shakti.Dr.Sunita Ranjita Seema.
*
Et tu , Brute ?
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Translation from Latin to English
"And you, Brutus?" or "You too, Brutus ?".
It is one of the most famous lines in English literature, spoken by Julius Caesar in Act 3, Scene 1 of William Shakespeare's play Julius Caesar. The Literary Meaning in the play, Caesar utters these words in shock and disbelief when he notices his close, trusted friend Marcus Junius Brutus among the group of senators stabbing him to death.
Today, the phrase is globally used as a symbol for the ultimate betrayal by a close friend
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