Radhika Krishna Rukmini.Darshan.8.Dainik.SV.2
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कृण्वन्तो विश्वमार्यम.
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Radhika Krishna Rukmini.
Darshan.
Dainik.Volume : 1. Series : 8.
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Radhika Krishna Rukmini.
Darshan.
Monthly Link .Volume : 1. Series : 8.
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महाशक्ति मीडिया प्रस्तुति.
विषय सूची : पृष्ठ : ०.
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राधिका कृष्ण रुक्मिणी दर्शन : धारावाहिक ७ : आवरण : पृष्ठ : ०.
राधिका कृष्ण रुक्मिणी दर्शन : ७ : दैनिक लिंक : पृष्ठ : ०.
हार्दिक आभार प्रदर्शन : पृष्ठ : ०.
राधिकाकृष्णरुक्मिणी.दर्शन : विषय सूची : पृष्ठ : ०
त्रिशक्ति लेखकीय समूह. : पृष्ठ : ०
त्रिशक्ति संशोधक समूह : पृष्ठ : ०.
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प्रेम प्रकृति.
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राधिकाकृष्ण: प्रेम प्रकृति दर्शन : पृष्ठ : ० / १.
रुक्मिणीकृष्ण.प्रकृति प्रेम दर्शन : आज : पृष्ठ :० /२.
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जीवन : दर्शन.
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त्रि शक्ति : विचार धारा : पृष्ठ : १.
राधिकाकृष्ण : जीवन दर्शन : दृश्यम : शब्द चित्र : पृष्ठ : १ / १.
रुक्मिणीकृष्ण :जीवनदर्शन : दृश्यम : शब्द चित्र : पृष्ठ : १ / २.
मीराकृष्ण : जीवन दर्शन : शब्द चित्र : पृष्ठ १ /३.
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राधिकाकृष्णरुक्मिणी : आज का गीत : जीवन संगीत :भजन : पृष्ठ : ३.
राधिकाकृष्णरुक्मिणी : शक्ति : कोलाज दीर्घा : पृष्ठ : ४.
राधिकाकृष्णरुक्मिणी : शक्ति : कला दीर्घा : पृष्ठ : ५.
दिन विशेष : आज का पंचांग : राशि फल : पृष्ठ : ६.
राधिकाकृष्णरुक्मिणी : शक्ति : फोटो दीर्घा : पृष्ठ :७.
राधिकाकृष्णरुक्मिणी :समसामयिकी. समाचार : दृश्यम पृष्ठ : ८.
मुझे भी कुछ कहना है : गीता ज्ञान :आपने कहा : आभार : पृष्ठ :९.
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लेखकीय त्रिशक्ति : पृष्ठ : ०.
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शक्ति.शालिनी मधुप रेनू.
नैनीताल डेस्क.
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वाराणसी डेस्क.
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राधिकाकृष्ण : प्रेम प्रकृति : दर्शन : आज : पृष्ठ : ० / १.
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राधिका डेस्क.
राधाकृष्ण मंदिर.मुक्तेश्वर.नैनीताल.
संपादन
शक्ति* प्रिया मधुप डॉ.अनु.
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सखी रे मैं का से कहूं
*
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राधिका कृष्ण दृश्यम : अहंकार और संस्कार
*
*
राधिका : अहंकार और संस्कार में
क्या फ़र्क होता है कृष्णा ?
*
आपने क्या कहा
*
ढ़ाई अक्षर प्रेम का
*
तुम्हारे लिए.
*
*
सन्दर्भ विचार माया : तुम्हारे लिए.
राधिकाकृष्ण : छाया
*
सन्दर्भ विचार माया : तुम्हारे लिए.
राधिकाकृष्ण : छाया
*
मुझको मेरे बाद जमाना ढूँढेगा
*
सत्य जो शिव है वही सुन्दर है
*
सच समझने की शक्ति अपने संस्कार में हो
सच कैसे कहा जाए कितना कहा जाए यह व्यवहार और प्यार से सीखा और
समझा जा सकता है, प्रिय
*
शक्ति @ रेनू मधुप रितु
*
*
मृत्योर्मा अमृतं गमय
*
आरंभ है तो अंत निश्चित है
कुछ ऐसा कर जाओ जो तुम्हें असत्य से सत्य की ओर
अंधकार से प्रकाश की ओर अंत से अनंत ओर ले जाए
शक्ति @ अनुराधा मधुप रेनू
*
अतियों का निषेध
जैसे वीणा के तार बहुत कसे होने पर टूट जाते हैं और बहुत ढीले होने पर सुर नहीं देते,
वैसे ही जीवन में बहुत अधिक दबाव या बहुत अधिक आलस्य दोनों ही हानिकारक हैं
जीवन में अनुप्रयोग करना सीखें,
सुख और दुःख,काम और विश्राम के बीच संतुलन ही सही जीवन शैली है,प्रिये
*
शक्ति @ प्रिया मधुप अनुभूति
मत कर अभिमान रे बन्दे
*
अहंकार वह सब है जो आप में वास्तव नहीं हैं।
जिस दिन आप जान लेंगे कि आप कौन हैं, आपका इस संसार में कितना अहम है
तो विश्वास रखिए इस मिथ्या अहंकार का क्या अर्थ
शक्ति नैना मधुप आस्था
*
उठने जागने और गलतियों के बाद
सुधरने की कोई समय सीमा नहीं होती
सोने के बाद जागो उठ कर देखो जीवन जोत उजागर है
@ शक्ति शालिनी मधुप रितु
*
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रुक्मिणीकृष्ण.प्रकृति प्रेम दर्शन : आज : पृष्ठ : ० / २.
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मुक्तेश्वर.नैनीताल.
संपादन
शक्ति.मीना डॉ.राखी मधुप
*
दर्पण को देखा जब जब मैंने किया श्रृंगार
*
*
स्वयं अभिमान चाहे बहुतेरे
*
स्वयं के अभिमान के पहले
दूसरे सज्जन साधु जन के मान सम्मान का विशेष ख़्याल रखें
अपने भीतर अभिमान स्वतः वर्धित होता जाएगा ,प्रिय
*
@ शक्ति डॉ. राखी मधुप रितु
*
इंसान को विकासोन्मुखी, विकल्पों का आदी होना ही चाहिए,
आत्ममंथन और स्वयं में उत्तरोत्तर सुधार एक अति आवश्यक विकल्प है।
..खूबियां कमियां तो नए पुराने दोनों में होती है बस विकल्प आत्म सुधार
और विकास का होना चाहिए
*
जिंदगी कैसी ये पहेली
*
*
ज्ञान : मान : घमंड
*
यहां हर किसी को अपने ज्ञान का घमंड है,
पर किसी को भी अपने घमंड का ज्ञान नहीं..
प्रश्नपत्र सी हो गयी है जिंदगी जस की तस स्वीकार्य
इसमें कुछ भी वैकल्पिक नहीं सभी प्रश्न अनिवार्य
*
मेरो मन अनत कहाँ सुख पावो
*
यदि आप सार गर्भित ,विशाल सागर के मध्य
छोटी सी नैया ही है तो उड़ते पंक्षी का कहाँ ठिकाना होगा ?
मेरो मन अनत कहाँ सुख पावो
विचार करें ..ज़रा देखिए ना
शक्ति @ डॉ.राखी मधुप वाणी
जिंदगी कैसी है पहेली हाय
*
सन्दर्भ विचार : माया : शक्ति. मीना. छाया
नैनीताल.
*
जीवन में बहुत सी बातें समझ से परे है
जैसे पहाड़ कठोर हो गए इसलिए कि
नदियाँ पहाड़ को छोड़कर चली गयीं
या नदियाँ छोड़कर चली गई
इसलिए पहाड़ कठोर है.जरा सोचिए ना ?
*
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राधिकाकृष्ण : ड्योढ़ी : दर्शन : आज : पृष्ठ : १ / १.
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प्यार : व्यवहार : संस्कार
*
राधिकाकृष्ण.
वरसाने.वृन्दावन.डेस्क.
. प्रादुर्भाव वर्ष :१९७६.
संस्थापना वर्ष : १९९८.महीना : जुलाई. दिवस :४.
*
संपादन
*
शक्ति * प्रिया मधुप.डॉ.सुनीता
*
हे री मैं तो प्रेम दिवानी, मेरा दरद न जाने कोय
*
श्याम तेरी बंशी पुकारे राधा नाम
*
तुम्हारे लिए.
*
*
तू इस तरह से मेरी जिंदगी में शामिल है
राधा का भी श्याम वो तो मीरा का भी श्याम
*
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राधिकाकृष्ण : जीवन दर्शन : दृश्यम : शब्द चित्र : पृष्ठ : १ / १.
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प्यार : व्यवहार : संस्कार
*
राधिकाकृष्ण.
वरसाने.वृन्दावन.डेस्क.
*
संपादन
शक्ति * प्रिया मधुप.डॉ.सुनीता
*
आपने क्या कहा
*
ढ़ाई अक्षर प्रेम का
*
तुम्हारे लिए.
*
आज रंग बरस रहा : बरसाने की छोरी
साभार : दृश्यम : वृन्दावन बांके बिहारी की होरी
*
सत्य : असत्य
*
सन्दर्भ विचार माया : माधव छाया
*
सत्य खोजने की जरूरत नहीं है।
बस उन झूठों को देखना शुरू कर दो अपने भीतर
जिन्हें तुमने सत्य मान रखा है, सत्य
सत्य अपने आप तुम्हारे भीतर प्रकट हो जाएगा.
*
शक्ति. नैना मधुप शालिनी
*
मेरे लिए कृष्ण ही काफी है
*
जब मन में भावनाओं का महाभारत हो तो कुछ नहीं प्रिय तुम सिर्फ़ कृष्ण मांग लेना
*
शक्ति. नीलम मधुप सीमा
*
जीवन : सार : अंत
*
खोजना है तो जीवन जीने के सार और निमित को ढूंढों ! प्रिय
अन्यथा अंत तो हम सबों को ढूंढ ही रहा हैं
*
*
सन्दर्भ विचार माया : शक्ति. डॉ.अनु छाया
*
तन को सौ सौ बंदिशें मन को लगी न रोक
तन की दो गज कोठरी मन के तीनों लोक
*
नेकी,परेशानी और सच्चाई
जो नेकी और सच्चाई के रास्ते पर चलते हैं
उनके जीवन में परेशानियां जरूर आती हैं
लेकिन ईश्वर उनकी नैया को कभी डूबने नहीं देते है।
*
जब जब तू मेरे सामने आए
*
*
सन्दर्भ विचार माया : शक्ति. डॉ राखी छाया*
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रूक्मिणीकृष्ण : जीवन दर्शन : पृष्ठ : १ / २.
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रूक्मिणीकृष्ण : जीवन दर्शन : पृष्ठ : १ / २.
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*
रुक्मिणी डेस्क.
विदर्भ डेस्क.महाराष्ट्र.
प्रादुर्भाव वर्ष : १९७८.
संस्थापना वर्ष : १९८७.महीना : अगस्त : दिवस : ६.
*
संपादन
शक्ति. प्रिया डॉ.सुनीता मधुप.
रुक्मिणी डेस्क.
विदर्भ डेस्क.महाराष्ट्र.
प्रादुर्भाव वर्ष : १९७८.
संस्थापना वर्ष : १९८७.महीना : अगस्त : दिवस : ६.
*
संपादन
शक्ति. प्रिया डॉ.सुनीता मधुप.
*
प्रेम : प्रकृति : पहाड़ : पुरुषोत्तम : पुनर्जन्म
*
*
सन्दर्भ विचार माया : महेंद्र सिंह धोनी : नायक : छाया
मेरी प्रेरणा : महेंद्र सिंह धोनी.
*
डाली डाली फूलों की तुझको बुलाए रे मुसाफ़िर
मेरे उत्तराखण्ड में.
*
कोई पहाड़ों की खुशबू लेकर यहाँ बस गया
तो कोई प्रेम : प्रकृति : पहाड़ : पुरुषोत्तम : पुनर्जन्म
की तलाश में वहाँ चला गया
*
शक्ति @ शालिनी मधुप रेनू
*
खेल खेल में
*
जीवन खेल नहीं खेल खेल में निभाने वाला
एक गुरुतर दायित्व है इसे समझदारी से निभाइए
*
सोना सज्जन
स्वयं का अभिमान
*
यदि आप सज्जन साधु जन के मध्य है तो स्वयं का अभिमान कैसा
और आप दुर्जन से घीरे है तो उनसे सम्मान की आशा क्या
*
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मीरा : जीवन दर्शन : पृष्ठ १ / ३ .
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मीरा डेस्क.मेवाड़ डेस्क.जयपुर.
संपादन
*
शक्ति.जया अनीता गरिमा.
*
पिया तोसे नैना लागी रे
*
कोई रंग बदल देता है,उड़ा देता है
तो कोई अपने मधुर मधुप व्यवहार से प्रेम के सात रंग भर देता है
*
शक्ति डॉ. रजनी मधुप अनुभूति
*
*
बुरा जो देखन मैं चला
*
जो तराशते है वो खूबियाँ देखते हैं
जो तलाशते है वो मात्र कमियाँ ही देखते है
*
*
शक्ति @ शालिनी मधुप भारती
*
संसार है एक नदियां
सुख दुःख दो किनारे हैं
*
*
सन्दर्भ विचार माया : शक्ति. रितु छाया
*
सुख दुःख जीवन सरिता के दो किनारे हैं, माधव !
सुख दुःख तो अवश्यम्भावी है
ये हमारे ऊपर निर्भर है कि हम कितने समभाव से इन्हें ग्रहण करते है
*
शक्ति जया मधुप रितु
*
*
शक्ति.नेहा.आर्य.अतुल.मुन्नालाल महेश लाल आर्य एंड संस ज्वेलर्स.रांची रोड.बिहार शरीफ.समर्थित.
*
शक्ति संरक्षण
*
*
*
शक्ति. साक्षी. भा.पु.से.
आर्य. चिरंजीव नाथ सिन्हा.भा.पु.से.
शक्ति. रश्मि श्रीवास्तवा.भा.पु.से.
*
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सम्पादकीय :त्रिशक्ति : गोरी साँवरे सलोनी :पद्य संग्रह : आलेख : पृष्ठ : २ / ३.
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ढाई आखर प्रेम का
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संपादन
शक्ति. रेनू. डॉ.आर के. सीमा
*
गोरी साँवरे सलोनी : पद्य संग्रह :अनुभाग
*
शक्ति अनुभाग
लेखिका कवयित्री सम्पादिका
*
शून्य से जो प्रकट हुआ, वो सार है शिव.
*
हर हर महादेव : गिफ़
*
शून्य से जो प्रकट हुआ, वो सार है शिव,
विष को जो कंठ में धरे, वो प्यार है शिव..!
न आदि है, न अंत है, न रूप है उसका,
अघोरियों के मौन की, पुकार है शिव..!
जटा से बहती सुरसरी, माथे पे चंद्र साजे,
डमरू की उस थाप पर, ब्रह्मांड सारा नाचे..!
श्मशान की उस राख में, जो खोजता है जीवन,
विनाश में भी सृजन का, आधार है शिव..!
तन पे लिपटे नाग हैं, मन में अचल शांति,
भक्तों के दुखों की जो, हर ले सारी भ्रांति..!
कहीं वो नीलकंठ है, कहीं वो महाकाल है,
मिटा दे जो अहंकार, वो प्रहार है शिव..!
*
*
शक्ति रेनू
*
भाविकाएँ
तुम्हारे लिए
शक्ति. रेनू मधुप शालिनी
*
*
भाविका : सन्दर्भ : फोटो : शक्ति : रेनू
*
काँटों के बीच रहकर तुमने
मेरे अपने व्यक्तित्व को गुलाब सा महका कर
जीवन को सार्थक बनाया
सुन रहे हो न ?
तुम्हारे लिए यही काफी है
तुम्ही तुम थे
तुम्ही तुम हो
तुम्ही तुम रहोगे
मुझे हर पल
तुम्हारी यादों की महक
गुलाब की पंखुड़ियों जैसी
महकाती चहकाती
काँटों के बीच रहकर भी
जिंदगी को गुलाब जैसा खिला कर
जीवन की सार्थकता सिखाती हैं
सुनो ? सुन रहे हो न ?
*
सज्जा संपादन : शक्ति. डॉ. रजनी स्वाति अनुभूति
शिमला डेस्क
⭐
प्रेम के सात रंग.
डॉ.मधुप.
*
अति लघु कवितायें.
पहली.
समर्पण.
*
फोटो : शक्ति. रितु
*
तुम्हारी,
लरजती आँखों की
उठती गिरती पलकों में
हमेशा मैंने केवल
' हां ' ही देखा.
' न ' कहाँ था ?
बोलो न ?
--------
⭐
दूसरी
लघु कविता.
*
बेख्याली
*
भाविकाएँ : संदर्भित :
फोटो : शक्ति.रितु.
*
रहना
नहीं रहना भी
भीड़ !
फ़िर भी कही गुमशुदा
कभी खुद में ही हँस लेना
कभी बिन दिखाए रो लेना
कभी दुनियाँ पागल है
कभी ख़ुद ही पागल हो जाना
--------
⭐
तीसरी
लघु कविता.
*
साहस.
डॉ.मधुप.
*
भाविकाएँ : संदर्भित
फोटो : साभार : मीरा
फोटो : साभार : मीरा
*
घर छोड़ा,
द्वार छोड़ा,
नाता तोड़ा,
आप से जोड़ा.
लो रंग गयी तेरे श्याम रंग में,
बनकर मीरा बावली हो गयी मैं,
लो मैं तेरे वास्तें,
सब छोड़ के
आ गयी मैं.
द्वार छोड़ा,
नाता तोड़ा,
आप से जोड़ा.
लो रंग गयी तेरे श्याम रंग में,
बनकर मीरा बावली हो गयी मैं,
लो मैं तेरे वास्तें,
सब छोड़ के
आ गयी मैं.
⭐
चौथी लघु कविता.
*
ख़ामोशी.
डॉ.मधुप.
ख़ामोशी.
डॉ.मधुप.
*
ज्यादा कुछ कहा नहीं
कुछ ज़्यादा सुना नहीं,
हमने पढ़ी सिर्फ़,
नैनों की भाषा,
और क़िताबें दिल की,
ज्यादा कुछ कहा नहीं
कुछ ज़्यादा सुना नहीं,
हमने पढ़ी सिर्फ़,
नैनों की भाषा,
और क़िताबें दिल की,
नैनों की भाषा.
जैसे पूरे हो गए,
सारे,अनकहें अरमान,
धरा पर ही, जैसे
झुक गया हो आसमान.
जैसे पूरे हो गए,
सारे,अनकहें अरमान,
धरा पर ही, जैसे
झुक गया हो आसमान.
*
पांचवी लघु कविता.
हो ली
*
ये प्रेम रंग है कैसा साँवरे ?
बस एक बार तेरे संग जो खेली होली
जीवन भर तेरे साथ मैं हो ली
छठवी लघु कविता
*
एकता
जहाँ न मैं रहा
जहाँ न तुम रहें
मिल के हो गए एक
जहाँ न कोई अहम रहा
शेष अशेष जो भी रहा
मिल कर जो प्यार से हम रहा
*
पृष्ठ : सज्जा : संपादन
शक्ति* प्रिया.डॉ.सुनीता अनुभूति
--------
दार्जलिंग डेस्क.
कविता संपादन : शक्ति प्रिया डॉ.अनु रेनू.
सज्जा : शक्ति. रितु सीमा शिवानी ( इंदौर ).
------------
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सम्पादकीय : त्रिशक्ति : गोरी साँवरे सलोनी : गद्य संग्रह : आलेख : पृष्ठ : २ / २.
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संपादन
नैनीताल डेस्क
शक्ति.डॉ.रजनी मधुप शालिनी
*
शक्ति आलेख : २ / २ / १
*
राम सिया की यही है कहानी :
शक्ति यात्रा संस्मरण :पाटलिपुत्र मिथिला से अयोध्या
*
शक्ति आलेख : डॉ.सुनीता मधुप स्मिता
*
वंदे भारत की पहली यात्रा : बाबरी : से रामनगरी अयोध्या : इतिहास अनुभाग
सन्नद्धता : रेलवे : सड़क : मार्ग : समयावधि : किराया
*
वंदे भारत की पहली यात्रा : राम नगरी अयोध्या के लिए यात्रा का आरंभ। शहर पटना। हम समय से थे। मालूम था हमें गाड़ी खुलने से पांच मिनट पहले पहुँच जाना है। दरवाजें बंद हो गए तो खुलेंगे नहीं। हम अपने अनुभव के लिए तैयार थे।
दिन ८ फरवरी : शक्ति यात्रा थी पटना से अयोध्या धाम के लिए। गाड़ी बुला रही थी । बन्दे भारत से मेरी पहली यात्रा थी । आराम दायक लगी । समय अनुशासन की प्रतीक है यह गाड़ी। ८ नंबर प्लेट फार्म पर गाड़ी खड़ी थी समयबद्ध।
बताते चले वंदे भारत एक्सप्रेस डायनेमिक प्राइस पर चलती है। पहले सस्ती बाद में महंगी होती हुई । हमें १११७.२५ रुपया अयोध्या धाम के लिए देना पड़ा।
वंदे भारत एक्सप्रेस की भारत की पहली स्वदेशी सेमी - हाई स्पीड ट्रेन है, जो १६० किमी / घंटा तक की गति से चलती है। चेन्नई की इंटीग्रल कोच फैक्ट्री ( ICF) द्वारा विकसित, यह ' मेक इन इंडिया ' का प्रतीक है।
१५ फरवरी २०१९ को शुरू हुई यह ट्रेन अब देश भर में वातानुकूलित चेयर कार और स्लीपर वेरिएंट के साथ कनेक्टिविटी को आधुनिक बना रही है।
बैठने की सीटें सुविधाजनक ही है। सामान रखने के लिए चेयर के नीचे ही मोबाइल के लिए चार्जिंग पॉइंट दिए गए हैं। सीटों के ऊपर सामान रखने के लिए यथा स्थान दिए गए हैं। भारतीय व पाश्चात्य शैली के टॉयलेट काफ़ी साफ सुथरे दिखे।
बैठते ही पानी की रेल नीर वाली बोतल दी गई। थोड़े समयोपरांत नास्ता दिया गया। अयोध्या के बाद यात्रियों के लिए खाना भी दिया जाता है।
*
*
बाबरी : से रामनगरी : शक्ति यात्रा संस्मरण
*
राम सिया की यही है कहानी अयोध्या : इतिहास : अनुभाग
शक्ति. डॉ.सुनीता.आर के. मधुप
गतांक से आगे : १.
*
राम मंदिर उत्तर प्रदेश के अयोध्या जिले पूर्व फैजाबाद जिला में स्थित है। यह प्रसिद्ध मंदिर अयोध्या शहर में ही राम जन्मभूमि परिसर में सरयू नदी के तट के पास स्थित है। २२ जनवरी २०२४ को यहां श्री राम की मूर्ति की प्राण प्रतिष्ठा की गई थी। आज यह एक अंतर्राष्ट्रीय धार्मिक पर्यटन स्थल हो गया है।
इतिहास के झरोखें से फैजाबाद : अयोध्या : दरअसल १६ वी सदी में मुगल शासक बाबर के आदेश पर मीर बाकी ने अयोध्या में एक मस्जिद बनाई जिसे बाबरी मस्जिद कहा गया १८८५ में पहला मुकदमा दायर हुआ और यहीं से विवाद सामने आया १९४९ में मस्जिद के अंदर कथित रूप से मूर्तियां रखी गई जिससे मुसलमानों की नमाज रुक गई।
३० अक्टूबर और २ नवंबर १९९० को अयोध्या में राम जन्मभूमि आंदोलन के दौरान कारसेवकों यथा राम सेवकों पर पुलिस द्वारा गोलियां चलाई गई थीं। यह घटना तब हुई जब कारसेवक बाबरी मस्जिद के पास एकत्र हुए थे, जिसके बाद तत्कालीन उत्तर प्रदेश सरकार ने पुलिस फायरिंग के आदेश दिए थे। इस गोलीकांड में कई कारसेवक हताहत हुए थे।
६ दिसंबर १९९२ को एक बड़ी रैली के बाद मस्जिद ढहा दी गई जिसके बाद दंगे भड़के और २००० से ज्यादा लोगों की मौत हुई। २०१० में जमीन तीन हिस्सों में बांटी गई और २०१९ में सुप्रीम कोर्ट ने पूरी जमीन एक हिंदू ट्रस्ट को देने का फैसला सुनाया जिसके बाद वहां मंदिर निर्माण शुरू हुआ।
१९८० का दशक : सरयू : राम की पैड़ी : उत्तर प्रदेश के अयोध्या में सरयू नदी के तट पर स्थित भव्य घाटों की एक श्रृंखला है, जो अपने आध्यात्मिक और ऐतिहासिक महत्व के लिए प्रसिद्ध है। १९८० के दशक में निर्मित, यह स्थान पवित्र स्नान के लिए जाना जाता है और दिवाली पर भव्य दीपोत्सव का मुख्य केंद्र है। यह स्थान भगवान राम से जुड़ा है और यहाँ शाम को होने वाली लेजर और लाइट शो श्रद्धालुओं को मंत्रमुग्ध कर देती है। इसका निर्माण १९८४ - १९८५ के दौरान तत्कालीन सरकार द्वारा किया गया था।
हरिद्वार हर की पैड़ी की तरह अयोध्या में भी राम की पैड़ी : आप हरिद्वार गए होंगे तो वहां गंगा के किनारे हर की पैड़ी है। महत्व : यह माना जाता है कि यहाँ स्नान करने से पाप धुल जाते हैं और आत्मा शुद्ध हो जाती है।
उसी तरह भगवान राम भी अयोध्या में सरयू नदी में यहाँ स्नान करते थे इसलिए स्नान घाटों का नाम राम की पैड़ी पड़ गया । बताते चले यहाँ हर साल दिवाली के अवसर पर लाखों दीये जलाकर गिनीज वर्ल्ड रिकॉर्ड बनाया जाता है।
यहाँ लगभग २५ - ३२ स्नान घाट हैं, जो रात में दूधिया रोशनी में बहुत सुंदर लगते हैं। सुविधाएं भी अधिक है घाटों के पास मंदिर, बदलने के लिए कमरे, और आसपास कई होटल / रेस्टोरेंट मौजूद हैं। निकटतम: नयाघाट, अयोध्या रेलवे स्टेशन से लगभग ३ किमी की दूरी पर। यह स्थान वर्तमान में अयोध्या की प्रमुख पर्यटन और धार्मिक स्थलों में से एक है।
भव्य मंदिर : का निर्माण : २२ जनवरी २०२४ : अयोध्या में भगवान श्री राम का भव्य मंदिर २२ जनवरी २०२४ को बनकर तैयार हुआ और इसी दिन प्राण प्रतिष्ठा समारोह आयोजित किया गया। इस आधुनिक भव्य मंदिर की आधारशिला प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा ५ अगस्त २०२० को रखी गई थी।
यह मंदिर उत्तर भारत की नागर शैली में निर्मित है और वर्षों के कानूनी संघर्ष व सर्वोच्च न्यायालय के फैसले के बाद बना है। मंदिर का निर्माण श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट की देखरेख में किया गया है। ऐतिहासिक संदर्भ की माने तो मान्यतानुसार, मूल मंदिर को १५२८ में तोड़ा गया था।
*
शक्ति : यात्रा ; संस्मरण
*
राम सिया की यही है कहानी अयोध्या :
शक्ति. डॉ.सुनीता.आर के. मधुप
गतांक से आगे : २ .
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सन्नद्धता : रेलवे : सड़क : मार्ग : समयावधि : किराया
कैसे घूमे : अयोध्या
*
अशोक उपाध्याय :
*
उपलब्ध गाड़ियां : पटना से : अयोध्या धाम के लिए : फरक्का एक्सप्रेस ,गोमती नगर वन्दे भारत ( गाड़ी संख्या २२३४५ ) ,पटना कोटा एक्सप्रेस है तो
अयोध्या कैंट के लिए : ओखा द्वारिका एक्सप्रेस, गाँधी धाम एक्सप्रेस , फरक्का एक्सप्रेस, पटना इंदौर एक्सप्रेस , पटना कोटा एक्सप्रेस,भगत की कोठी एक्सप्रेस आदि गाड़ियाँ हैं ।
उपलब्ध गाड़ियां : गया से : गंगा सतलज, दून एक्सप्रेस, जम्मूतवी एक्सप्रेस, गोमती नगरअमृत भारत एक्सप्रेस है।
समयावधि : किराया : पटना से अयोध्या धाम तक के एक्सप्रेस मेल ट्रेन का किराया मात्र १४० रूपया बिना आरक्षण के बन्दे भारत का डायनमिक फेयर १११७ रुपया है। समयावधि औसतन ७ से ८ घंटे की है।
सन्नद्धता : रेलवे : सड़क : मार्ग : दूरी : लखनऊ से मात्र १३६ किलोमीटर,पूर्व में, गया से ४४९ किलोमीटर पटना से ४१८ किलोमीटर दूर लगभग दूर पश्चिम में स्थित अयोध्या धाम जंक्शन AY है। और अन्य अयोध्या कैंट AYC अयोध्या के दो मुख्य रेलवे स्टेशन हैं जो राम मंदिर से लगभग ८ किमी की दूरी पर स्थित हैं।
नामकरण : अयोध्या जंक्शन को नया रूप देकर अयोध्या धाम जंक्शन कर दिया गया है। अयोध्या कैंट का पहले नाम फैजाबाद कैंट था, जिसे बदलकर अब अयोध्या कैंट कर दिया गया है।
पुराना नाम : अयोध्या नया अयोध्या धाम : से राम मंदिर के पास १.२ किमी की दूरी पर है और आप पैदल ही जा सकते है। यह तीर्थयात्रियों के लिए मुख्य केंद्र है, राम मंदिर की दूरी : राम मंदिर जाने के लिए अयोध्या धाम स्टेशन (AY) का उपयोग करना बेहतर माना जाता है क्योंकि यह केवल कुछ ही मिनटों की दूरी पर है। अयोध्या धाम स्टेशन की सुविधाएं दर्शनीय है। अयोध्या धाम शहर को बहुत ही आधुनिक और एयरपोर्ट जैसी सुविधाओं के साथ नया रूप दिया गया है।
जबकि अयोध्या कैंट पूर्व में नामित फैजाबाद कैंट शहर के दूसरे हिस्से में स्थित एक प्रमुख रेलवे स्टेशन है।
जो राममंदिर से ८ या नौ किलोमीटर दूर पड़ता है।
अयोध्या कैंट स्टेशन भी काफी बड़ा और प्रमुख स्टेशन है जो कई प्रमुख ट्रेनों को संभालता है।
अयोध्या धाम और अयोध्या कैंट के बीच मुख्य अंतर : स्थान और निकटता की बात करें तो अयोध्या धाम रेलवे स्टेशन, राम मंदिर के सबसे करीब १.२ किमी स्थित है। जबकि अयोध्या कैंट पूर्व में फैजाबाद शहर की सीमा में थोड़ा आगे है, जो मुख्य मंदिर क्षेत्र से लगभग ८ -१० किमी दूर है।
यदि अयोध्या के टूर की बातें करें तो अयोध्या दो से तीन दिनों का आइडियल स्टे है। आप इतने दिनों में आराम से अयोध्या भ्रमण कर सकते हैं।
पहला दिन : १२ बजे अपराह्न के बाद आप दूर दराज वाले भरत कुंड , सूरज कुंड, मणि पर्वत, भ्रमण कर लें जो हमने किया। टोटो का किराया ६०० लगा और समय घूमने में हमें ५ से ६ घंटे लगे। संध्या समय लता चौक , राम की पैड़ी , सरयू नदी की आरती देख लें जो हमने भी देखी।
दूसरा दिन : सुबह सवेरे आप सरयू ,या राम की पैड़ी में स्नान कर सकते हैं। सुबह सवेरे सात से आठ बजे तक राम मंदिर दर्शन , कर लें। आधा घंटा राम मंदिर दर्शन का अनुमानित समय है।
दर्शन के पश्चात अमावा मंदिर, राम रसोई , में निःशुल्क प्रसाद ग्रहण कर लें। इसके लिए एक मात्र पर्ची कटानी होती है के साथ साथ पैदल ही दशरथ महल ,कनक महल, हनुमान गढ़ी का का दर्शन कर लें सब आस पास ही है। इसी राम रसोई मंदिर के छत से राम मंदिर को आप देख सकते है। यहाँ से दृष्टि लाभ जरूर लें।
तीसरा दिन : गुप्तार घाट जहाँ राम ने जल समाधि ली थी , आप इसे घूम लें। गुप्तार घाट के पास ही नवाब शुजा-उद-दौला का मकबरा, भी है जिसे गुलाब बारी के नाम से भी जाना जा सकता है घूमने के बाद आप शाम में अपने घर को वापसी ले सकते है।
बहू बेगम का मकबरा जो नवाब शुजा-उद-दौला के मकबरा के समीप ही है जिसे फैजाबाद का ताजमहल भी कहा जाता है।
अयोध्या : यात्रा संस्मरण
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राम सिया की यही है कहानी अयोध्या :
शक्ति डॉ.सुनीता.आर के.मधुप
गतांक से आगे : ३.
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गुप्तार घाट : जहाँ राम ने जल समाधि ले ली थी :
नवाब शुजा-उद-दौला का मकबरा :
बहू बेगम का मकबरा : ' फैजाबाद का ताजमहल '
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सरयू और घाघरा क्या एक है ? सरयू और घाघरा को मूलतः एक ही नदी के विभिन्न रूप या नाम माना जाता है। घाघरा जो नेपाल में करनाली कहलाती है, उत्तर प्रदेश में प्रवाहित होने वाली एक प्रमुख नदी है, जिसके अयोध्या उत्तर प्रदेश के पास वाले हिस्से को स्थानीय लोग और धार्मिक मान्यताएं सरयू कहते हैं। ये दोनों नदियाँ अंततः गंगा में मिलती हैं।
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| गुप्तार घाट : सरयू : फोटो : साभार |
पर्यटक घाट पर राम जानकी मंदिर, पुराना चरण पादुका मंदिर, नरसिंह मंदिर और हनुमान मंदिर भी देख सकते हैं।
किंवदंती के अनुसार, यहीं पर, घाघर नदी की शांत धाराओं के बीच, भगवान राम स्वयं गहन ध्यान में लीन थे, और अंततः सर्वोच्च भगवान विष्णु के अवतार के रूप में वैकुंठ के दिव्य लोक में आरोहण करने से पहले एक आध्यात्मिक ' जल समाधि ' में नदी की गहराई को समाहित कर लिया था।
सरयू नदी के पवित्र तटों पर बसा, जहाँ जल प्राचीन भजनों की फुसफुसाहट करता है और वायु में सदियों पुरानी रस्मों की सुगंध व्याप्त है, वहीं स्थित है गुप्तर घाट एक पूजनीय पवित्र स्थान जिसने दिव्यता के अमिट पदचिह्नों को देखा है। अयोध्या जंक्शन से लगभग १० किलोमीटर दूर स्थित यह पवित्र स्थल कभी हरे-भरे कंपनी गार्डन का पड़ोसी हुआ करता था और अब इस पवित्र भूमि के हर कोने में व्याप्त अटूट श्रद्धा का प्रमाण है।
सदियों बीत जाने के बावजूद, गुप्तार घाट का सार आज भी संरक्षित है। अयोध्या के पवित्र इतिहास का जीवंत वृत्तांत होने के नाते, घाट का जीर्णोद्धार किया गया है और इसे आधुनिक सुविधाओं से सुसज्जित किया गया है, जिससे आने वाली पीढ़ियों के लिए इस पवित्र स्थल की भव्यता बनी रहे।
नवाब शुजा-उद-दौला का मकबरा : जिसे गुलाब बारी के नाम से जाना जाता है, उत्तर प्रदेश के अयोध्या जिले पूर्व में फैजाबाद में स्थित है। यह १८ वीं शताब्दी के उत्तरार्ध में निर्मित एक ऐतिहासिक स्मारक है, जो अपने चारों ओर गुलाब के बागों और पानी के फव्वारों से घिरा हुआ है, और यह इंडो-इस्लामिक वास्तुकला का एक बेहतरीन उदाहरण है।
परिसर में विभिन्न किस्मों के गुलाबों का संग्रह है। यह स्थल आज भी काफी अच्छी स्थिति में है और अपनी ऐतिहासिक भव्यता को दर्शाता है।
गुलाब बारी या कहे शुजा-उद-दौला का मकबरा की प्रमुख विशेषताएं : यह फैजाबाद के गुप्तार घाट के पास स्थित है। इसका निर्माण अवध के तीसरे नवाब शुजा-उद-दौला १७५३ - १७७५ ने खुद करवाया था।मकबरे की वास्तुकला : मकबरे में इंडो-इस्लामिक शैली का प्रयोग किया गया है, जिसमें मेहराबें और खंभों पर सुंदर नक्काशी की गई है।गुलाब बारी न केवल नवाब का अंतिम विश्राम स्थल है, बल्कि यह एक महत्वपूर्ण पर्यटन और ऐतिहासिक स्थल भी है।
गुलाब बारी या कहे शुजा-उद-दौला का मकबरा की प्रमुख विशेषताएं : यह फैजाबाद के गुप्तार घाट के पास स्थित है। इसका निर्माण अवध के तीसरे नवाब शुजा-उद-दौला १७५३ - १७७५ ने खुद करवाया था।मकबरे की वास्तुकला : मकबरे में इंडो-इस्लामिक शैली का प्रयोग किया गया है, जिसमें मेहराबें और खंभों पर सुंदर नक्काशी की गई है।गुलाब बारी न केवल नवाब का अंतिम विश्राम स्थल है, बल्कि यह एक महत्वपूर्ण पर्यटन और ऐतिहासिक स्थल भी है।
बहू बेगम का मकबरा : अक्सर लोग भ्रमित होते हैं, लेकिन ' बहू बेगम का मकबरा ' उम्मत-उज़-ज़हरा बानो अलग है, जो पास में ही स्थित है और इसे ' फैजाबाद का ताजमहल ' भी कहा जाता है।
गतांक से आगे : ४ : अंतिम क़िस्त
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दर्शनीय स्थल : अयोध्या में
और क्या क्या देखें
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धार्मिक इमारतें : देखने लायक
दर्शनीय स्थल : अयोध्या में मुख्य रूप से राम मंदिर, हनुमानगढ़ी, कनक भवन, सरयू नदी और विभिन्न घाट यथा राम की पौड़ी, तुलसी घाटआदि दर्शनीय हैं।
प्रमुख धार्मिक स्थल :
राम जन्मभूमि मंदिर : भगवान राम का पवित्र जन्मस्थान, आस्था का केंद्र। भगवान श्री राम लला की वो पावन खूबसूरत मूर्ति देखकर जैसे मूर्तिवत होने लगे। अभिभूत थे श्री राम ही हम सबके जीवन आधार है। मानो सब कुछ यहीं प्रभु श्री राम ही है। वो शांति सुकून का एहसास जिसे शब्दों में बताया नही जा सकता, मुझे बार बार ऐसा न जाने क्यों ऐसा लग रहा था।
एक बहुत ही भव्य मंदिर जो दक्षिण कला शैली से परिपूर्ण था मेरे दृष्टिकोण में अत्यंत दर्शनीय लगा । कोई श्री राम के पूरे परिवार का मंदिर प्रमुख है। और यहाँ मैं अपने माननीय प्रधानमंत्री का भी दिल से धन्यबाद करना चाहूँगी जी उनके अथक प्रयास के कारण ही आज अयोध्या का राम मंदिर का निर्माण हो सका।
हनुमानगढ़ी : हनुमान जी को समर्पित एक प्राचीन मंदिर, सीएम योगी के अनुसार, राम मंदिर जाने से पहले यहां दर्शन करना चाहिए।
कनक भवन: राम और सीता को समर्पित एक सुंदर मंदिर, जो अपने स्थापत्य के लिए जाना जाता है।
राम और सीता की रसोई : राम जन्मभूमि के पास स्थित, पौराणिक कथाओं से जुड़ा स्थान।
दशरथ भवन : राजा दशरथ का निवास स्थान माना जाता है, जिसकी वास्तुकला देखने लायक है।
नागेश्वरनाथ मंदिर : भगवान शिव को समर्पित एक और महत्वपूर्ण मंदिर।
भरत कुंड : सोहावल तहसील जिला अयोध्याजो नंदीग्राम के रूप में प्रसिद्ध हैअयोध्या से लगभग १५ से २० किमी दूर दक्षिण में प्रयागराज मार्ग पर स्थित एक प्रमुख धार्मिक और ऐतिहासिक स्थल है। माना जाता है कि वनवास के १४ वर्षों के दौरान भरत जी ने यहीं से श्रीराम की खड़ाऊ : चरणपादुका : को सिंहासन पर रखकर शासन किया था।
भगवान भरत ने वनवास के दौरान तपस्या की थी। जब भगवान श्री राम वापस लौटे तो वे यहीं पर भरत से मिले थे।
छोटा गया : भरत कुंड को ' छोटा गया ' के रूप में भी जाना जाता है यहाँ पितृ तर्पण पिंडदान करना गया जी के बराबर फलदायी माना जाता है
जटा कुंड : पास ही में जटा कुंड है जहाँ भगवान राम और लक्ष्मण ने वनवास से लौटने के बाद अपने जटा बाल त्यागे थे।
विशेषता यहाँ एक प्राचीन कुआँ और वटवृक्ष भी है [भरत कुंड का स्थान राम-भरत प्रेम और त्याग का जीवंत प्रतीक है।
ऐतिहासिक इमारतें : दर्शनीय
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जैसे सूर्य कुंड तुलसी स्मारक भवन कवि तुलसीदास को समर्पित, यहाँ उनकी कृतियों से जुड़ी कला और साहित्य मिलता है।
सूर्य कुंड : अयोध्या ले लगभग चार किलोमीटर की दूर दर्शन नगर में चौदह कोसी परिक्रमा मार्ग पर स्थित सूर्य कुंड और सूर्य मंदिर लाखों श्रद्धालुओं की आस्था का केंद्र है. माना जाता है कि इस कुंड का निर्माण अयोध्या के सूर्यवंशी शासकों में राजा दर्शन सिंह ने किया था.
इस कुंड के साथ ही भगवान सूर्य का एक मंदिर भी है जो सूर्यवंशियों के लिए सूर्य देव की आस्था का प्रतीक माना जाता है. सरकार ने २२ जनवरी को प्राण प्रतिष्ठा कार्यक्रम से पहले इस पौराणिक कुंड और मंदिर का जीर्णोद्धार १४ करोड़ की लागत से कराया है. वेदों में भगवान सूर्य को जड़-चेचन जगत की आत्मा कहा गया है. सूर्यवंशी राजा घोष का कुष्ठरोग इस कुंड में स्नान करने से ठीक हुआ था. मान्यता है कि इस सूर्य कुंड में स्नान और सूर्य मंदिर में दर्शन-पूजन करने से सभी मनोकामनाएं पूरी होती हैं.
अन्य आकर्षण : मणि पर्वत: पौराणिक महत्व वाला एक छोटा पर्वत। यहाँ से आप सम्पूर्ण नगरी अयोध्या के दर्शन कर सकते है। यहाँ कामीगंज के पास स्थित मणि पर्वत एक प्राचीन और पवित्र टीला लगभग ६५ फीट ऊँचा है जो रामायण काल से जुड़ा है। मान्यता है कि राम-सीता विवाह के बाद जनकपुर से मिले रत्नों , मणियों के ढेर से यह बना है।
या हनुमान जी द्वारा लाई गई संजीवनी बूटी पर्वत का एक हिस्सा यहाँ गिरा था। यह राम सिया की लीला स्थली है जहाँ सावन में झूला उत्सव मनाया जाता है।
नदी और घाट : जरूर जाए
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जैन मंदिर : अयोध्या जैन धर्म के लिए भी महत्वपूर्ण है, जहाँ कई तीर्थंकरों का 'कल्याणक' हुआ है।
रामकोट : अयोध्या का वह क्षेत्र जहाँ राम का जन्म हुआ माना जाता है।
राम कथा संग्रहालय : रामचरितमानस से जुड़ी कलाकृतियों और इतिहास को प्रदर्शित करता है।
राम की पौड़ी : सरयू नदी पर बने सीढ़ीदार घाट, जहाँ स्नान और आरती होती है।
तुलसी घाट : सरयू तट पर एक शांत घाट, जहाँ टहलने और मनन चिंतन के लिए अच्छा है।
गुप्तार घाट : वह स्थान जहाँ माना जाता है कि भगवान राम ने जल समाधि ली थी।
तुलसी घाट : सरयू तट पर एक शांत घाट, जहाँ टहलने और मनन चिंतन के लिए अच्छा है।
गुप्तार घाट : वह स्थान जहाँ माना जाता है कि भगवान राम ने जल समाधि ली थी।
बिरला मंदिर : नया बना सुंदर मंदिर।
क्वीन हेओ मेमोरियल पार्क : कोरियाई राजकुमारी हेओ के नाम पर।
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स्तंभ संपादन : शक्ति.डॉ.भावना माधवी वाणी.
स्तंभ सज्जा : शक्ति सीमा सुदीप्ता संगीता
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शक्ति आलेख : २ / २ / २
शक्ति. प्रिया डॉ.सुनीता मधुप राखी
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ख़ुशी की वो रात आई कोई गीत बजने दो.
१९ फरवरी :
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राधा कृष्ण :विवाह उत्सव की घड़ी : फुलेरा दूज
मैं तेरी हूँ कह दे सब से : दृश्यम : राधिका : कृष्ण
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फाल्गुन शुक्ल पक्ष की द्वितीया तिथि :
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मैं तेरी हूँ कह दे सब से : दृश्यम : राधिका : कृष्ण : फाल्गुन शुक्ल पक्ष की द्वितीया तिथि है। ब्रज आज रंगीन हो गया है। आज राधा कृष्ण के विवाह की तिथि है। माना जाता है कि वृंदावन में श्रीकृष्ण और राधा जी का विवाह ब्रह्मा जी ने कराया था। ब्रह्मवैवर्त पुराण के अनुसार श्रीकृष्ण और राधा जी के विवाह में समस्त देवी-देवता उपस्थित हुए थे। तब राधा जी का विवाह एक बार फिर से कृष्ण जी के साथ हुआ। हर युग में राधा रानी हमेशा ही कृष्ण के साथ विवाह करती रही हैं। ब्रज में इस अवसर पर मंदिरों को फूलों से सजाया जाता है और राधा-कृष्ण के दिव्य मिलन का उत्सव मनाया जाता है। आइए जानते हैं कि फुलेरा दूज को शादी के लिए इतना खास और शुभ क्यों माना जाता है।
फुलेरा दूज ब्रज धाम में राधा-कृष्ण विवाह उत्सव : १९ फरवरी को ब्रज धाम में राधा-कृष्ण विवाह उत्सव की अनोखी छटा देखने को मिलेगी। फुलेरा दूज का दिन प्रेम, सौभाग्य और मंगल कार्यों के लिए अत्यंत शुभ माना जाता है। मान्यता है कि इस तिथि पर बिना विशेष मुहूर्त के भी विवाह जैसे मांगलिक कार्य किए जा सकते हैं, क्योंकि यह दिन स्वयं सिद्ध और कल्याणकारी होता है।
राधा और कृष्ण का प्रेम अमर है, इसका न कोई आरंभ है और न कोई अंत। यह भौतिक जगत से परे है और आध्यात्मिक प्रकृति का है। राधा-कृष्ण की कथा में पवित्र बंधन और प्रेम ने ही दोनों को एक साथ जोड़े रखा, न कि विवाह ने,
क्या है फुलेरा दूज ? फाल्गुन शुक्ल पक्ष की द्वितीया को मनाया जाने वाला यह पर्व ब्रज परंपरा में राधा और कृष्ण के दिव्य विवाह उत्सव के रूप में देखा जाता है। मान्यता है कि इसी दिन उनका प्रेम लोक परंपरा में उत्सव बनकर झलकता है। मंदिरों में फूलों की सजावट, गुलाल और रसिया गायन के बीच यह पर्व भक्ति और आनंद का संगम रचता है।
ब्रज परंपरा में होली की रंगभरी प्रेमपूर्ण शुरुआत : ब्रज में होली का पहला रंग भी इसी दिन चढ़ता है। मंदिरों में सबसे पहले भगवान को गुलाल और पुष्प अर्पित किए जाते हैं, फिर भक्त एक-दूसरे पर अबीर उड़ाते हैं। यह परंपरा बताती है कि यहां रंग भी भक्ति का माध्यम हैं।
फुलेरा दूज तिथि
फुलेरा दूज २०२६ इस वर्ष १९फरवरी को मनाई जाएगी। पंचांग के अनुसार द्वितीया तिथि १८फरवरी को दोपहर ४.५७ बजे आरंभ होकर१९ फरवरी को दोपहर ३:५८ बजे तक रहेगी। ब्रजभूमि में यह दिन केवल एक तिथि नहीं, बल्कि प्रेम और भक्ति का जीवंत उत्सव है।
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संपादन : शक्ति : शालिनी रेनू प्रीति
सज्जा : शक्ति रितु मंजिता अनुभूति
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शक्ति आलेख : २ / २ / ३ .
शक्ति.शालिनी संदीप आस्था
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शिव - आदि और अनंत है
केवल संहारक नहीं बल्कि सृजन के आधार भी हैं ,शिव : शिव- आदि और अनंत हिंदू धर्म में शिव को ' लय ' का देवता माना गया है, लेकिन वे केवल संहारक नहीं बल्कि सृजन के आधार भी हैं। फाल्गुन मास की कृष्ण पक्ष की चतुर्दशी को आने वाली यह रात्रि ब्रह्मांडीय ऊर्जा के जागरण की रात है। पौराणिक मान्यताओं के अनुसार, इसी पावन तिथि पर भगवान शिव और माता शक्ति का विवाह हुआ था अर्थात पुरुष और प्रकृति का मिलन...वैज्ञानिक दृष्टिकोण से देखें तो इस रात पृथ्वी का उत्तरी गोलार्द्ध इस प्रकार स्थित होता है कि मनुष्य के भीतर की ऊर्जा प्राकृतिक रूप से ऊपर की ओर गमन करती है, इसलिए इस रात 'जागरण' का विशेष महत्व है।
शिवरात्रि हमें सिखाती है कि संयम और वैराग्य के बिना आनंद संभव नहीं है। शिव का स्वरूप विरोधाभासों का अद्भुत मेल है..वे एक तरफ परम तपस्वी हैं, तो दूसरी तरफ गृहस्थों के आदर्श..! उनके गले में सांप है, लेकिन उनके पुत्र का वाहन मोर है ; उनके पास नंदी है, तो माता पार्वती का वाहन सिंह है। यह इस बात का प्रतीक है कि परस्पर विरोधी विचारों के बीच भी शांतिपूर्वक सह-अस्तित्व संभव है..! महाशिवरात्रि हमें अपने भीतर के ' शिव ' को जगाने का अवसर देती है। जब हम अपने भीतर के क्रोध, लोभ और मोह का त्याग कर शून्य की ओर बढ़ते हैं, तभी हम वास्तव में शिवमय होते हैं क्योंकि शिव सत्य हैं, शिव सुंदर हैं...सत्यम..शिवम..सुंदरम।
संयम, प्रेम वैराग्य और विरोधाभासों का अद्भुत मेल है शिव शक्ति :
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| फोटो ; शक्ति रितु : शिव की आराधना |
शून्य से जो प्रकट हुआ, वो सार है शिव, विष को जो कंठ में धरे, वो प्यार है शिव..! न आदि है, न अंत है, न रूप है उसका, अघोरियों के मौन की, पुकार है शिव..! जटा से बहती सुरसरी, माथे पे चंद्र साजे,
डमरू की उस थाप पर, ब्रह्मांड सारा नाचे..! श्मशान की उस राख में, जो खोजता है जीवन,विनाश में भी सृजन का, आधार है शिव..! तन पे लिपटे नाग हैं, मन में अचल शांति,भक्तों के दुखों की जो, हर ले सारी भ्रांति..!कहीं वो नीलकंठ है, कहीं वो महाकाल है,मिटा दे जो अहंकार, वो प्रहार है शिव..!
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आलेख : शक्ति. शालिनी. लेखिका ,कवयित्री व सम्पादिका संपादन : विशेष : शक्ति रेनू प्रीति क्षमा
सज्जा : शक्ति सीमा रितु अनुभूति
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राधिकाकृष्णरुक्मिणी : आज का गीत : जीवन संगीत :भजन : पृष्ठ : ३.
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संपादन
शक्ति. शालिनी मीना अनुभूति.
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हरि : दर्शन : मेरे मन में राम
तन में राम रोम रोम में कृष्ण राम रे
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श्री राम जन्मभूमि अयोध्या धाम
प्रातः कालीन श्रृंगार आरती दर्शन :
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प्रस्तुति : आज : राममंदिर : अयोध्या
मुख्य पुरोहित : श्री अशोक उपाध्याय जी : अयोध्या *
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राधिकाकृष्णरुक्मिणी : शक्ति : कला दीर्घा : पृष्ठ : ५ .
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संपादन
शक्ति.मंजिता शालिनी सीमा.
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श्याम तेरी बंसी को बजने से काम : राधा का भी श्याम वो तो मीरा का भी श्याम : कृति
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