* महाशक्ति मीडिया. * वायरलेस प्राइवेट लिमिटेड : मार्केट रिसर्च : मुंबई : शक्ति.ज्योति.आर्य.नरेंद्र.समर्थित. *  |
* --------- हार्दिक आभार प्रदर्शन : पृष्ठ : ०. --------- * राधिका कृष्ण रुक्मिणी दर्शन : धारावाहिक ७ : विषय सूची. *
* महाशक्ति मीडिया प्रस्तुति. विषय सूची : पृष्ठ : ०.
* राधिका कृष्ण रुक्मिणी दर्शन : धारावाहिक ७ : आवरण : पृष्ठ : ०. राधिका कृष्ण रुक्मिणी दर्शन : ७ : दैनिक लिंक : पृष्ठ : ० हार्दिक आभार प्रदर्शन : पृष्ठ : ०. राधिकाकृष्णरुक्मिणी.दर्शन : विषय सूची : पृष्ठ : ० त्रिशक्ति लेखकीय समूह. : पृष्ठ : ० त्रिशक्ति संशोधक समूह : पृष्ठ : ०.
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* प्रेम प्रकृति.
* राधिकाकृष्ण: प्रेम प्रकृति दर्शन : पृष्ठ : ० / १. रुक्मिणीकृष्ण.प्रकृति प्रेम दर्शन : आज : पृष्ठ :०/२. * जीवन : दर्शन.
* त्रि शक्ति : विचार धारा : पृष्ठ : १. राधिकाकृष्ण : जीवन दर्शन : दृश्यम : शब्द चित्र : पृष्ठ : १ / १. रुक्मिणीकृष्ण :जीवनदर्शन : दृश्यम : शब्द चित्र : पृष्ठ : १ / २. मीराकृष्ण : जीवन दर्शन : शब्द चित्र : पृष्ठ १ /३. * राधिकाकृष्णरुक्मिणी : सम्पादकीय शक्ति : पृष्ठ :२. सम्पादकीय शक्ति. समूह. नवशक्ति. विचार धारा : अंततः : पृष्ठ : २/ १. सम्पादकीय : त्रिशक्ति : गोरी साँवरे सलोनी : गद्य संग्रह :आलेख : पृष्ठ : २ / २. सम्पादकीय :त्रिशक्ति : गोरी साँवरे सलोनी :पद्य संग्रह : आलेख : पृष्ठ : २ / ३. * राधिकाकृष्णरुक्मिणी : आज का गीत : जीवन संगीत :भजन : पृष्ठ : ३. राधिकाकृष्णरुक्मिणी : शक्ति : कोलाज दीर्घा : पृष्ठ : ४. राधिकाकृष्णरुक्मिणी : शक्ति : कला दीर्घा : पृष्ठ : ५ . दिन विशेष : आज का पंचांग : राशि फल : पृष्ठ : ६. राधिकाकृष्णरुक्मिणी : शक्ति : फोटो दीर्घा : पृष्ठ :७. राधिकाकृष्णरुक्मिणी : समसामयिकी.समाचार : दृश्यम पृष्ठ : ८. मुझे भी कुछ कहना है : गीता ज्ञान : आपने कहा : आभार : पृष्ठ :९.
* महाशक्ति मीडिया प्रस्तुति. विषय सूची. * |
मंगल अनंत शिव.शक्ति शुभकामनाओं के साथ. * महाशक्ति मीडिया. त्रिशक्ति लेखकीय समूह : पृष्ठ : ० *
* शक्ति.शालिनी मधुप रेनू. नैनीताल डेस्क * त्रिशक्ति संशोधक समूह : पृष्ठ : ० *
* शक्ति.नीलम.डॉ.राजेंद्र.रीता. वाराणसी डेस्क. * त्रिशक्ति कार्यकारी सम्पादिका *
* शक्ति. रानी चुन्नी तनु सोनी इंद्रप्रस्थ डेस्क. * मंगल अनंत शिव.शक्ति शुभकामनाओं के साथ. * * फोर स्क्वायर होटल बैंक्वेट: रांची :समर्थित : दैनिक पत्रिका अनुभाग : मार्स मिडिया ऐड:नई दिल्ली.
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पत्रिका / दैनिक.अनुभाग. --------- सुबह सवेरे : शाम. पृष्ठ : ०.. ---------- * राधिकाकृष्णरुक्मिणी सदा सहायते. * प्यार व्यवहार संस्कार त्रि शक्ति : दर्शन : विचार धारा. सम्यक ' साथ ', सम्यक ' दृष्टि ', ' और सम्यक ' कर्म ' * आत्म दीपो भवः कृष्ण : कर्म : कृण्वन्तो विश्वमार्यम. *
* दिव्य अनंत लक्ष्मी नारायण शिव शक्ति.
* त्रि शक्ति दिवस : १४ .मूलांक : ५ . मास : माघ : कृष्ण पक्ष : एकादशी. विक्रम संवत :२०८२.शक संवत : १९४७.
* हरे राधेकृष्णा : गोविन्दाय नमः *  | वृन्दावन पेइंग गेस्ट : मुंबई : शक्ति.अंजलि सुभाष समर्थित : राधिका कृष्ण रुक्मिणी दर्शन |
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प्रेम प्रकृति : दर्शन. ------------- राधिकाकृष्ण : प्रेम प्रकृति :दर्शन : पृष्ठ :० / १. ------------ प्यार : व्यवहार : संस्कार
* राधिका डेस्क. मुक्तेश्वर. नैनीताल. . प्रादुर्भाव वर्ष :१९७६. संस्थापना वर्ष : १९९८.महीना : जुलाई. दिवस :४.
प्रेम : प्रकृति : दर्शन ------- दर्शन डयोढ़ी : राधिकाकृष्ण : आज : पृष्ठ : ० / १. --------- * राधिका डेस्क. राधा कृष्ण मंदिर. मुक्तेश्वर.नैनीताल.
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मेरी भव बाधा हरौ राधा नागरि सोय * सज्जा : संपादन. शक्ति* प्रिया.मधुप डॉ.सुनीता.
* --------- राधिकाकृष्ण : प्रेम प्रकृति : दर्शन : आज : पृष्ठ : ० / १. ---------- प्यार : व्यवहार : संस्कार. * राधिका डेस्क. राधाकृष्ण मंदिर. मुक्तेश्वर.नैनीताल. संपादन शक्ति प्रिया मधुप डॉ.सुनीता.
* सखी रे मैं का से कहूं * आपने क्या कहा * तुम्हारे लिए * तोरा मन दर्पण कहलाए * * विचार शक्ति : माया : राधिका कृष्ण छाया * रेत के नीचे जल की धारा * जीवन का यही ईश्वरीय अभिप्राय है कि हम भी संभले और औरों को भी संभालें * हर एक अंत का एक नया प्रारब्ध
* हर एक अंत एक प्रारब्ध की नई शुरुआत है,
बस नजरियाँ बदलिए जहाँ से आपकी समाप्ति हुई वही से सशक्त प्रारंभ भी होगा,स्मृत रहे प्रिय
* मन में मची हलचल * साँवरे ! एक तुम्हारे ख़्याल में न जाने न जाने कितने ख़्याल छोड़ें हैं
* @ शक्ति.शालिनी मधुप रितु *
मन ही देवता मन ही ईश्वर * मन ही देवता मन ही ईश्वर * 
सन्दर्भ विचार माया : शक्ति रजनी छाया
* जीवन, मन उपवन में फूल की सुन्दरतम परिणिति नियति समयक विचार के फल के पल्लवन में ही ,प्रिय !
@ शक्ति.शालिनी मधुप रजनी * भोले भाव मिले रघुराई 
भोले भाव मिले रघुराई * सन्दर्भ विचार : माया : शक्ति: रितु :छाया. * माधव : क्या ऐसा नहीं लगता प्रिय मानव मन स्वयं ही इतनी जटिलताओं में फंसता चला जाता है , जिससे उसकी स्वयं की स्वभाविकता ही गूढ़ रहस्य बनती चली जाती है ? * @ शक्ति शालिनी मधुप रितु *
@ शक्ति शालिनी मधुप रेनू शब्दमुखर शोध विचार ©️®️ शक्ति शालिनी मधुप रेनू शब्दमुखर
* नव शक्ति * समर्थित व अधिकृत
* नए साल : आपकी खुशियों के साथ : फ़ोकस क्लब एंड रिसोर्ट : रांची : समर्थित.
* --------- रुक्मिणीकृष्ण. प्रकृति प्रेम दर्शन :आज : पृष्ठ :० /२. --------- संस्कार : व्यवहार : प्यार * रुक्मिणी डेस्क मुक्तेश्वर.नैनीताल. प्रादुर्भाव वर्ष : १९७८.. संस्थापना वर्ष : १९८७.महीना : अगस्त : दिवस : ६. * संपादन शक्ति* प्रिया डॉ.सुनीता मधुप * * अंधेरों से मिल रही रोशनी है.
* --------- रुक्मिणीकृष्ण. प्रकृति प्रेम दर्शन : पृष्ठ :० /२. --------- * रुक्मिणी डेस्क मुक्तेश्वर.नैनीताल. *

* --------- रूक्मिणीकृष्ण : प्रकृति प्रेम दर्शन : पृष्ठ : ० / २. ---------- * ©️®️शक्ति प्रिया डॉ.सुनीता सीमा * रुक्मिणी डेस्क. मुक्तेश्वर.नैनीताल. *
* साध्वी : संगति : शक्ति *
सन्दर्भ विचार : माया : शक्ति : रितु : छाया.
* अभि उत्थान * यदि समयक कर्म धर्म के अनुसार हो जाए या समयक धरम ही करम हो जाए संसार का अभ्युत्थान अवश्यंवभावी ही होगा *
बिनु भय होइ न प्रीति
* शब्द के साथ सरलता पर भी कभी कभी संयम रखने में जीवन की, समझदारी है, प्रिय !
* शक्ति : परिस्थिति : संगति * अगर आपका स्वयं के ऊपर नियंत्रण है इंद्रजीत है तो ग़लत संगति भी आपका कुछ नहीं बिगाड़ सकती , क्योंकि दुर्वल लोग परिस्थिति के अनुसार बदल जाते हैं और शक्तिशाली लोग परिस्थिति को ही बदल देते हैं !!
*@ शक्ति शालिनी सीमा रेनू * प्रेम : विश्वास : सम्बन्ध
* सन्दर्भ विचार : माया : शक्ति : रितु : छाया. *शक्ति : समझ : सहिष्णुता
* माधव : जो जितना अपने द्वैत संबंघ में जितना समयक समझ ,शब्द, समर्पण और सहिष्णुता रखेगा ,प्रिय ! वो ही उतना दिव्य ईश्वरीय शक्ति के समीप होगा
* @ शक्ति शालिनी सीमा सुनीता *
* विधि : विधान * विचार शक्ति : माया : छाया : लिपिका : कोलकोता
मध्यम मार्ग * सत्यभामा : ' अतिवाद से बचने या खुद को कष्ट देने,आत्म - दंड से श्रेष्यकर है , मानव अपने जीवन में सर्वोत्तम मार्ग मध्यम मार्ग ही चुने, ....केशव ? '
* @ शक्ति.शालिनी सीमा सुनीता. *
©️®️ शक्ति. डॉ.अनु मधुप सुनीता
* * ---------- राधिकाकृष्ण : ड्योढ़ी : दर्शन : आज : पृष्ठ : १ / १. ------------ प्यार : व्यवहार : संस्कार * राधिकाकृष्ण. वरसाने.वृन्दावन.डेस्क. . प्रादुर्भाव वर्ष :१९७६. संस्थापना वर्ष : १९९८.महीना : जुलाई. दिवस :४.
संपादन * शक्ति * प्रिया मधुप.डॉ.सुनीता
* हे री मैं तो प्रेम दिवानी, मेरा दरद न जाने कोय.
* श्याम तेरी बंशी पुकारे राधा नाम
* तुम्हारे लिए. *
* राधा का भी श्याम वो तो मीरा का भी श्याम *
* नव शक्ति * समर्थित व अधिकृत *  ---------- राधिकाकृष्ण : जीवन : दर्शन : आज : पृष्ठ : १ / १. ------------ प्यार : व्यवहार : संस्कार. वरसाने.वृन्दावन.डेस्क. * कोई तो हो
* ---------- राधिकाकृष्ण : जीवन : दर्शन : आज : पृष्ठ : १ / १. ------------ प्रेम प्रकृति दर्शन * प्यार : व्यवहार : संस्कार
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सन्दर्भ विचार : माया : शक्ति : किशन : छाया.* ग्रह नक्षत्र : भाग्य और कर्म
* ग्रह नक्षत्र न तो किसी का भाग्य बिगाड़ते हैं, न किसी के कर्म जो लोग अपने ग्रहों को दोष देते हैं,वे अपने जीवन की जिम्मेदारी से भाग रहे हैं।
* छल और धर्म
कृष्णा : यदि छल का आशय धर्म है तो धर्म ही छल है, मामाश्री ! गांधार नरेश
संघर्ष : कर्म : सफलता * * सन्दर्भ विचार : माया : शक्ति : रितु : छाया.
* लक्ष्मी : शक्ति : सरस्वती संतुलन * ऐश्वर्य ,मान सम्मान शक्ति के संतुलन के लिए बुद्धि, वाणी ,विवेक की सार्थकता अत्यंत आवश्यक है,प्रिय ! * फूल आहिस्ता फेंको फूल बड़े नाजुक होते है * हरसिंगार * * शब्द माया : छाया : हरसिंगार * मेरे मन उपवन में पेड़ की शाखाओं से टूट कर भी कुछेक फूल हरसिंगार के धरा पर गिरे हुए थे प्रिय ...... फिर भी उन्होंने तृणों को सुवासित करना नहीं छोड़ा
* शोध विचार @ शक्ति शालिनी मधुप रेनू * विचार शक्ति मधुप माया : शक्ति राधा कृष्ण छाया
* का बरसा जब कृषि सुखाने
* प्रकाश पाने के लिए जलते दीपक में घी सम्यक इंसान से सम्बन्ध के लिए का समयवश सम्मान का होना आवश्यक है अन्यथा सब व्यर्थ है..
* @ शक्ति रेनु मधुप स्मिता रंजीत.
*
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* ---------- रुक्मिणीकृष्ण : जीवन : दर्शन : आज : पृष्ठ : १ / २. ------------ संस्कार : प्यार : व्यवहार. * विदर्भ डेस्क.महाराष्ट्र. * शब्द : अनुभूति : मर्यादा * तुम्हारे लिए *
* मेरे तो गिरधर गोपाल दूसरों न कोई * शक्ति : धैर्य : सहनशीलता * विचार सन्दर्भ : माया : शक्ति रितु : छाया * विपत्ति में धैर्य, वैभव में दया , आर्य शक्ति की विनम्रता और श्रेष्ठ व्यक्तियों के लक्षण हैं संकट में सहनशीलता
* आप मुझे अच्छे लगने लगे
* परिश्रम : और परिणाम
विचार सन्दर्भ : माया : शक्ति रेनू : छाया * प्रिय सफलता मानव जीवन के अथक प्रयास का वो परिणाम है जिसकी कहानी मानव अपने शांत मन से अपने निरंतर के संघर्ष से ही लिखता है * कृष्ण क्यों अच्छे लगते हैं : तीन बातें * एक कृष्ण मन वचन कर्म से सबके लिए आकर्षण के केंद्र थे *
विचार सन्दर्भ : माया : शक्ति माधव : छाया *
दूसरा कर्म और कृष्ण पर्याय थे और तीसरा सबसे अहम उन्होंने अपने का साथ कभी भी नहीं छोड़ा
* विचार सन्दर्भ : माया : शक्ति मीना : छाया * असहमति में सहमति
* विचारों से असहमत होते हुए भी सहमतियों के विन्दुओं को खोजना ही सुखी रहने का मूलमंत्र है
* @ शक्ति शालिनी मधुप मीना *
*
त्रिदेवों में श्रेष्ठ कौन
*
विचार : छाया : महर्षि भृगु : श्री लक्ष्मी नारायण : सहिष्णुता * माधव : आपसी मधुर दिव्य सम्बन्धों के लिए शंकर के भोले भाव और हरि श्री लक्ष्मी नारायण की समझ और सहिष्णुता नितांत आवश्यक है, प्रिय ! महर्षि भृगु ने भगवान विष्णु की छाती पर लात मारी थी, क्योंकि वे त्रिदेवों में श्रेष्ठ कौन हैं, यह जानने के लिए परीक्षा लेने गए थे और उन्हें विष्णुजी के अहंकार न करने का प्रमाण मिला, जिससे वे विष्णु को सर्वश्रेष्ठ मानकर लौट गए। यह भी स्मृत रहे प्रिय * शोध विचार ©️®️शक्ति प्रिया डॉ.सुनीता मधुप.
* विधि : विधान
* विचार शक्ति : माया : छाया : लिपिका * हरेक शय का समय तय है स्थान भी सुनिश्चित है यह विधि का विधान है आप कही पर पहुँचते नहीं पहुंचाए जाते है।
* ©️®️शक्ति.सुनीता सीमा डॉ.आर के
* प्रथम मीडिया शक्ति प्रस्तुति. *
------- मीरा : दर्शन : ड्योढ़ी : पृष्ठ १ / ३ . --------- * मीरा डेस्क. मेवाड़ डेस्क.जयपुर. प्रादुर्भाव वर्ष : १९८२.
संस्थापना वर्ष : १९८९. महीना : सितम्बर. दिवस : ९. *
* मेरे तो गिरधर गोपाल दूसरों न कोय
* मेवाड़ डेस्क.जयपुर. संपादन. * शक्ति जया अनीता सेजल * --------- मीराकृष्ण : जीवन दर्शन : शब्द चित्र : पृष्ठ :१ / ३. ---------- संपादन. * शक्ति जया अनीता सेजल *
बैठी संतों के संग : रंगी मोहन के रंग साध्वी : संत : शब्द राणा ने विष दिया विष को अमृत किया *
*
सन्दर्भ विचार : माया : शक्ति : मीरा : मेवाड़ : छाया
मीरा हो या राधा * प्रेम तो प्रेम है इसमें क्या पूरा क्या आधा दोनों की अभिलाषा अप्रतिम है मीरा हो या राधा
*
* कृष्ण : कर्म : परिणाम
* सही कर्म वो नहीं है जिसके परिणाम हमेशा सही हो, बल्कि सही कर्म वो है जिसका उद्देश्य कभी भी गलत न हो * @ शक्ति नीलम सीमा डॉ.आर.के.
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* ख़ुशी हो या गम *
* विचार शक्ति : माया : छाया : रितु
मेरे तो गिरधर गोपाल * चाहे ख़ुशी हो या गम परन्तु तेरी शरण में ही रहेंगे माधव , हम
* स्वर्णिका ज्वेलर्स.निदेशिका.शक्ति तनु.आर्य रजत.सोहसराय.बिहार शरीफ.समर्थित.
* शोध विचार ©️®️ शक्ति शालिनी मधुप रेनू शब्दमुखर * * सह : ममता हॉस्पिटल बिहार शरीफ:शक्ति.डॉ.ममता.आर्य. डॉ.सुनील कुमार : समर्थित * राधिकाकृष्णरुक्मिणी : सम्पादकीय शक्ति : पृष्ठ : २.

१९४० - १९२३ प्रधान आचार्या. * जीवन : कर्म : सिद्धांत के लिए मेरी स्मृति विशेष
* त्रिशक्ति सहायक कार्यकारी सम्पादिका
*
शक्ति बीना मीना श्रद्धा प्रिया गंगोत्री डेस्क. उत्तरकाशी
* त्रिशक्ति फोटो : लघु फ़िल्म सम्पादिका
* नैनीताल डेस्क * त्रिशक्ति संयोजिका * नैनीताल डेस्क *
 | डॉ. दीनानाथ वर्मा. फिजिशियन : दृष्टि क्लिनिक. किसान बाग : बिहार शरीफ. समर्थित. |
* --------- सम्पादकीय : त्रिशक्ति : गोरी साँवरे सलोनी : गद्य संग्रह :आलेख : पृष्ठ : २ / २. --------- शक्ति आलेख : २ / २ / ०
* शक्ति आलेख : २ / २ / ० -------- आज का सत्य और प्रयोग मेरे बताए गए मार्ग का अपने बुद्धि विवेक का प्रयोग करते हुए जो इच्छा व अच्छा है वो करो। -------- शक्ति आरती अरुण
* गीता : १८ वें अध्याय के ६३ वें श्लोक
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अर्जुन : श्री कृष्ण : गीता ज्ञान * "इति ते ज्ञानमाख्यातं गुह्याद्गुह्यतरं मया। विमृश्यैतदशेषेण यथेच्छसि तथा कुरु॥"
गीता के १८ वें अध्याय के ६३ वें श्लोक में भगवान श्री कृष्ण कहते हैं इति में ज्ञानमाख्ययातं गुह्याग्दुतरं मया विमृश्यैतद शेषेण यथेच्छसि तथा कुरु।।श्री कृष्ण स्व -जवाबदेही कौशल विकास की भी बातें : यह प्रसंग गीतोपदेश के मोक्ष संन्यास योग का है जिसमें भगवान श्री कृष्ण कहते हैं,हे अर्जुन,मैंने तुम्हें गुढ़ से गुढ़तम ज्ञान के समस्त सार को बता दिया है, अब तुम मेरे बताए गए मार्ग का अपने बुद्धि विवेक का प्रयोग करते हुए जो इच्छा है करो।
यह छोटा सा कथन जितना कुरूक्षेत्र में कल प्रासंगिक और सार्थक था,आज भी उतना ही महत्वपूर्ण और प्रासंगिक है। भगवान श्री कृष्ण अर्जुन पर अपने विचारों को थोपना नहीं चाहते हैं बल्कि उसे अपनी बुद्धि और विवेक का इस्तेमाल करते हुए स्वयं निर्णय लेने को कहते हैं। श्री कृष्ण उस कालखंड में भी एक श्रेष्ठ प्रबंधन गुरु, सूक्ष्म नीति निर्माता और किसी व्यक्ति के भीतर स्वयं निर्णय लेने की क्षमता विकसित करने की कला में निष्णात हैं जिसे आज के मनोवैज्ञानिक विश्लेषण में स्व-प्रबंधन और निर्णय लेने का दृष्टिकोण और क्षमता विकास कौशल कहा जाता है। अपने बुद्धि विवेक का प्रयोग करें : श्री कृष्ण ने महाभारत के इस कुरूक्षेत्र में स्वयं अर्जुन के साथ खड़े हैं,दिशा निर्देश भी दे रहे हैं पर निर्णय लेने की स्वतंत्रता उसे ही सौंप रहे हैं। परमात्मा ने इसीलिए हमें इच्छा स्वातंत्र्य और कर्म स्वातंत्र्य का विवेक और अधिकार दे रखा है जो आज ही नहीं कल भी प्रासंगिक और व्यवहारिक रहेगा।
युग बदलते हैं,युगधर्म बदलते हैं पर सफल जीवन के जो मोल एवं मूल्य हैं,वे कभी नहीं बदलते हैं।
यह सिद्धांत स्व-प्रबंधन और निर्णय लेने का दृष्टिकोण और क्षमता विकास कौशल के व्यवहारिक तथ्यों को पुष्ट करता है। कहा भी जाता है,सुनो सबकी पर करो मन की और मन की भी करने के पूर्व बुद्धि विवेक से तोल-मोल कर लो ताकि अपेक्षित परिणाम न मिलने पर दूसरे को आरोपित न किया जा सके। आज की जटिलता भरे संसार में हम अनेक उलझनों में उलझे रहते हैं और उन उलझनों से अन्त में हमें स्वयं ही निकलने का मार्ग ढुंढना पड़ता है। सुनो सबकी पर करो मन की : और मन की भी करने यहां एक सवाल उठता है कि क्या हमें अपने से श्रेष्ठ का, अभिभावकों का, शुभचिंतकों का और अभिभावकों के परामर्श को नहीं मानना चाहिए, नहीं, मानना चाहिए पर जब कोई परिपक्व हो जाए तो उसे अपनी बुद्धि,विवेक और पूर्वानुभवों के आधार पर सम्यक् निर्णय लेना चाहिए जिससे उसे आत्मसुधार के अवसर मिल सकें और वह स्वयं को इसके लिए जिम्मेदार ठहरा सके। इस तरह श्री कृष्ण स्व -जवाबदेही कौशल विकास की भी बातें करते हैं कि हमें हमारे समस्त सामर्थ्य और क्षमताओं का आकलन करके ही निर्णय लेना चाहिए। किसी भी छोटे बड़े विषय पर गंभीरता के साथ विचार करके,उसके आगे पीछे सोंचकर ही जो इच्छा हो करना चाहिए। यही युगधर्म सार्वकालिक और सार्वभौमिक सत्य है।
* संपादन सज्जा : शक्ति डॉ.रजनी सीमा* अनुभूति
* जब उद्धव ब्रज गए : कहे, अब कहीं मन लगा लो * शक्ति. सीमा.डॉ.आर. के. दुबे * गोपियाँ : उद्धव मन भए न दस बीस *  | |
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गोपियाँ : उद्धव मन भए न दस बीस : माधव फोटो : फोटो : साभार : नेट से |
* उद्धव की मान्यता थी कि ईश्वर की प्राप्ति बुद्धि और योग से ही संभव है हार्दिक प्रेम से नहीं अथवा रुहानी प्रेम से नहीं। और इस प्रकार उद्धव अपने ज्ञान और निराकार ब्रह्म के अहंकार में डूबे हुए थे। उनके इसी अहंकार को दूर करने के लिए श्री कृष्ण ने उन्हें संदेश वाहक के रूप में ब्रज भेजा।उद्धव ब्रज पहुँचे और उन्होंने वह पत्र राधा जी को थमाया। उद्धव को लगा था कि पत्र पढ़कर गोपियाँ फूट फूटकर रोएंगी या योग सीखने को उत्सुक होंगी। लेकिन राधा जी ने उस पत्र को मस्तक से लगाया और बिना पढ़े ही गोपियों को दे दिया। गोपियों ने उस पत्र के टुकड़े-टुकड़े कर दिए। उद्धव क्रोध और आश्चर्य से भर गए। उन्होंने कहा, " क्या तुम्हें कृष्ण से प्रेम नहीं? यह स्वयं परमेश्वर का संदेश है, इसमें मुक्ति का मार्ग है! " राधा जी मंद मंद मुस्कुराईं और उद्धव से कहा, "उद्धव, पत्र उसे लिखा जाता है जो दूर हो। संदेश उसका पढ़ा जाता है जो मौन हो।"
राधा जी ने समझाया कि-उद्धव जिसे ' योग ' कह रहे थे, वह मन को एकाग्र करने की विधि है। लेकिन गोपियों का मन तो कृष्ण से कभी हटा ही नहीं। यदि कृष्ण चले जाते, तो उन्हें याद करने की जरूरत पड़ती। वे तो सांसों की तरह भीतर बसे हैं।
राधा जी ने आगे कहा कि कृष्ण और ब्रज अलग हैं ही नहीं। जैसे समुद्र से लहर अलग नहीं हो सकती, वैसे ही कृष्ण हमसे अलग नहीं। पत्र के टुकड़े करना यह दर्शाता है कि कृष्ण का संदेश (शब्द) तुच्छ है, उनकी उपस्थिति (अनुभव) शाश्वत है।
इस कथा का सार इससे यह स्पष्ट है कि सूचना और अनुभूति में बड़ा अंतर है। उद्धव के पास सूचना थी, पर राधा के पास अनुभूति।
जब उद्धव वापस लौटे, तो वे वह 'ज्ञानी' नहीं रह गए। वे भी ब्रज की धूल में लोटने प्रबल इच्छाधारक बन गए। और, कृष्ण से अभ्यर्थना करने लगे— "प्रभु, मुझे अगले जन्म में ब्रज की कोई लता या घास बना देना, ताकि आपके प्रेम - दीवानी गोपियों की चरण रज मुझ पर पड़ती रहे।
* संपादन व सज्जा : शक्ति रजनी सीमा * प्रीति
या देवी सर्वभूतेषु बुद्धि रूपेण संस्थिता
* विद्या और बुद्धि और ज्ञान का वह प्रकाश : सही दिशा की ओर चलने की प्रेरणा दे शक्ति आलेख आरती अरुण हिमाद्रि
* ज्ञान का वह प्रकाश : सत्य, ज्ञान रूपी विद्या और बुद्धि की ओर चलने की प्रेरणा दे : हम सभी शक्ति समूह की तरफ़ से आप सभी को बसंतपंचमी की हार्दिक शुभकामनाएं बृहदारण्यक उपनिषद् का यह श्लोक एक प्रार्थना है जिसे हम परमात्मा की सत्ता को सम्बोधित करते हुए करते हैं और अपने भावों को व्यक्त करते हुए हमें ज्ञान का वह प्रकाश चाहिए, चेतना की वह शक्ति चाहिए जो हमें हमारी बुद्धि और विवेक को उस दिशा की ओर उन्मुख करने का काम करे जो हमें सत्य, ज्ञान रूपी विद्या और बुद्धि की ओर चलने की प्रेरणा दे कि हमारे मन हृदय और मस्तिष्क के साथ साथ आत्मा की गहराईयों से मृत्यु का भय दूर हो जाए और हम मुक्तावस्था में जीवन जीते हुए मोक्ष प्राप्त कर सकें और यह बौद्धिक चेतना सिर्फ शारदे भवानी सरस्वती ही दे सकती हैं।
आज बसंत पंचमी है, ऋतु परिवर्तन का शुभारंभ है, प्रकृति की
प्रकृति आज से बदलनी शुरू हो जाती है और सबकुछ बदलने लगता है। हमें भी इस बदलाव को समझने की कोशिश करनी चाहिए,ऋत और ऋतु तथा परिवर्तन को समझकर चलना चाहिए। यही ज्ञान मार्ग है और ज्ञान,बुद्धि, विवेक,कला, साहित्य,
और संस्कृति की आराध्य देवी भगवती सरस्वती हैं जिनकी सच्ची आराधना से हमें उनका यह आशीर्वाद मिल सकता है।
जीवन में संतुलन बसंत : बसंत ऋतु जीवन में संतुलन स्थापित करने का संदेश देती है। न ज्यादा गर्मी न ज्यादा सर्दी, खुशनुमा मौसम और प्रकृति पर छाई हरियाली इस ऋतु की सबसे खास बातें हैं। बसंत पंचमी के इस अवसर पर आज सुबह से ही बारिश हो रही है। बसंत पंचमी पर बारिश होने के कई धार्मिक और प्राकृतिक मायने हैं। हिंदू परंपरा के अनुसार शुभ कार्यों या त्योहारों पर वर्षा को ईश्वर का आशीर्वाद माना जाता है। बसंत पंचमी विद्या की देवी माँ सरस्वती का दिन है, इसलिए इस दिन बारिश को ज्ञान और समृद्धि की वर्षा के रूप में देखा जाता है। बसंत ऋतु के आगमन पर वर्षा धूल को साफ कर प्रकृति को और भी हरा-भरा और ताज़ा बना देती है, जो बसंत के "ऋतुराज" होने के भाव को चरितार्थ करती है।इस समय खेतों में सरसों और गेहूं की फसलें होती हैं। हल्की वर्षा इन फसलों के लिए 'अमृत' के समान मानी जाती है, जिससे पैदावार अच्छी होती है।
इस बसंत पंचमी पर दिल से यही दुआ है कि चाहे कितनी भी ऋतुएं आए जाएं, जीवन से बसंत का मौसम कभी न जाए उस कस्तूरी की तरह जो जीवन को सदा महकाती है। बसंत पंचमी के इस सुअवसर पर मेरी कविता जीवन बसंत को समर्पित।
सज्जा संपादन : शक्ति रीता प्रीति अनुभूति
गोरी साँवरे सलोनी : शक्ति आलेख : २ / २ / १ *
युधिष्ठिर : धर्म : यक्ष प्रश्न : आम जीवन शक्ति. शालिनी रेनू मधुप
* भोले की प्राण रक्षा का यक्ष प्रश्न और श्री हरि : कभी देवों के देव महादेव, शिव शम्भु कैलाश पति ने अपने भोले पन में भस्मासुर को ऐसा वरदान दे दिया, जिसके प्रयोग से स्वयं भी भागते फिरे। अंत में भस्मासुर से बचा कैसे जाए यह यक्ष प्रश्न लेकर श्री लक्ष्मी नारायण के शरण में आए। श्री हरि ने तब इसका हल भी ढूंढा। मोहिनी रूप का उपयोग भस्मासुर के अंत के लिए भी किया गया। जहाँ उसने शिव से वरदान पाने के बाद शिव पर आज़माईश करने के बाद विष्णु : मोहिनी रूप में का पीछा किया और अंततः अपने ही हाथों भस्म हो गया. सावित्री : सत्यवान : यम और यक्ष प्रश्न : यक्ष प्रश्न कभी भी किसी के सामने आ सकते है। यक्ष प्रश्न जिसके जबाव कठिन हो। सावित्री ने सत्यवान के लिए यमराज के सामने यक्ष प्रश्न कर यम से मृत सत्यवान के प्राण वापस लिए थे। यमराज भी किंकर्व्यविमूढ हो गए थे। वरदान दे दिया ,उसे पूरा कैसे करें। लोभी और डाही और आम जीवन का यक्ष प्रश्न : लोभी और डाही की कहानी का सार भी दोनों के लिए हमारे समक्ष यही यक्ष प्रश्न ही छोड़ता है कि आखिर मांगे तो क्या मांगे। अपनी इच्छा से अविवेकी हो कर अपना ही हित कर लें या अहित,यह विचारणीय है । डाही क्या मांगे कि हमारा कम उसका नुकसान ज्यादा हो। लोभी के सामने प्रश्न क्या मांगे कि उसका डाही से ज्यादा लाभ हो। परिणाम आप सब जानते ही है। हमारे आपके सामने भी एक दो यक्ष प्रश्न जीवन में आ ही जाते है। परिजनों के मांगे गए परस्पर विरोधी ध्रुवीय इच्छाओं की पूर्ति क्यों कर हो। इधर गड्ढ़ा उधर खाई का भय है। ज्ञानी जन ने कहा है खाई में गिरने से बेहतर है गड्ढ़ा में ही गिरा जाए। कभी कभी बिना सोचे समझे किए गए शीघ्रता व क्रोधवश किए गए कार्य कितनी दुविधा को जन्म दे देते हैं। कभी स्वजन जरूर विचार करें। यक्ष प्रश्न आखिर है क्या ? महाभारत के वनवास काल की एक प्रसिद्ध कथा है, जिसमें एक यक्ष : वन-देवता : ने युधिष्ठिर से कई गूढ़ प्रश्न पूछे थे और युधिष्ठिर ने अपनी बुद्धि और धर्मनिष्ठा से उनका सही उत्तर देकर अपने मृत भाइयों को पुनर्जीवित करवाया था, जिसमें पृथ्वी से भारी माता, आकाश से ऊँचा पिता, मन से तीव्र गति, और सबसे बड़ा आश्चर्य मृत्यु के सामने अमरता की चाहत जैसे प्रश्नों के उत्तर शागए मिल हैं। यह प्रश्न और ऐसे उठने वाले प्रश्न आज भी किसी कठिन समस्या को " यक्ष-प्रश्न " कहते हैं, जिसका समाधान कठिन हो। युधिष्ठिर कथा का सार : वनवास के दौरान, पांडवों को प्यास लगी और वे एक सरोवर पर पहुँचे। यक्ष ने सरोवर की रक्षा करते हुए किसी को भी बिना उत्तर दिए पानी न पीने का आदेश दिया। एक-एक करके पांडवों ने यक्ष की बात अनसुनी कर पानी पिया और मर गए। अंत में युधिष्ठिर आए, यक्ष के सभी प्रश्नों के सही-सही उत्तर दिए, जिसके बाद प्रसन्न होकर यक्ष ने सभी भाइयों को पुनर्जीवित कर दिया और बताया कि वह स्वयं उनके पिता धर्म थे, जो उनकी परीक्षा ले रहे थे।
सज्जा संपादन : शक्ति रीता प्रीति अनुभूति
* * नव शक्ति समूह समर्थित --------------- सम्पादकीय जागरण : गोरी साँवरे सलोनी : पद्य संग्रह आलेख : पृष्ठ : २ / ३. --------------- संपादन शक्ति. क्षमा सीमा तनु सर्वाधिकारी. रघुनाथ मंदिर. जम्मू डेस्क *

* शक्ति अनुभाग सीमा * नज़्म : डॉ आर के दुबे * गुम थे किसी के प्यार में *
* संपादन : सज्जा : शक्ति सीमा रजनी * भाविकाएँ * मृग मरीचिका सा जीवन
शक्ति हिमाद्रि समर्थ जयपुर. राजस्थान * कभी धूप की तलाश कभी छांव की तलाश मृग मरीचिका सा जीवन भटकता है दिल खोजने पलाश पलाश...! जिसकी सबको आस मिल जाए ये ढूंढे काश काश....! काश ! हमें ये मिल जाता जीवन कुछ आसान हो जाता जमीं का हो तारों की चाह में जीवन धरातल संवर जाता संवरना ही क्या पा लेना है ? पा लेने पर क्या कुछ नहीं पाना है ? जीवन चलने का है नाम फिर किस लिए रुक जाना है ! माना खिलकर मुरझाना है नियती का यही कहना है
* भाविकाएँ : सन्दर्भ : फोटो : शक्ति : रितु
* मगर चलते रहना, चलते रहना मिल जाए ये वो गहना है तलाश जारी रखना है मिलेगी मंजिल, प्रयास करना धूप छांव का यही है कहना हताशा को पार कर विफलता को लांघ कर उम्मीद के आंचल में बसंत की तलाश में जीवन पलाश लिए चलना है बस चलना है जीवन का यही कहना है
* सज्जा व संपादन शक्ति रेनू मधुप रितु
* ----------- शक्ति नीलम. * लघु कविता. आया बसंत
आया बसंत आया बसंत, मन भाया बसंत, मस्ती के रंग ले आया बसंत। रंग-बिरंगे फूलों से सज गई धरा, खुशबू से देखो महक उठा है गगन। मतवाली कोयल भी गा उठी है, भौरों- सा गुंजार कर रहा है मन। मां शारदे के पड़ते पावन चरण, ज्ञान ज्योति से पुलकित मन। बज उठे ढोल, उड़े गुलाल, पिया की याद से हुए गुलाबी गाल। मंजरी से भर गई आम की डाल, फैलाया है मदन ने ऐसा जाल। पसरा है प्रेम ,पड़ती नज़र जिधर , जब से किया है बसंत ने असर। रितुराज ने कर दिया कमाल, मचा दिया चहुंओर धमाल। काश! हो सकता नफ़रत का अंत, आया बसंत, मन भाया बसंत।
शक्ति नीलम. कवयित्री लेखिका सम्पादिका वाराणसी
-------------- * भाविकाएँ. * मेरे घर में जैसे सूरज निकला है शाम से * भाविकाएँ : सन्दर्भ : छाया : शक्ति.रेनू.
आज मेरे मन के आँगन में प्रेम का सूरज उत्तरायण हुआ है, और तुम - मेरे जीवन की दिशा. तिल-गुड़ सी मीठी हँसी तुम्हारी, पुराने सारे शिकवे पिघला देती है, जैसे ठिठुरन में अचानक धूप उतर आए आँगन में. पतंगों-सा प्रेम हमारा डोर थामे विश्वास, हवा के भरोसे सपने, और ऊँचाइयों पर एक-दूसरे का नाम. आज मकर संक्रांति है, तो चलो मन की अलाव जलाएँ, अहंकार, दूरी, चुप्पियाँ सब राख कर दें- और कहें बिना संकोच, तुम हो. तो हर मौसम शुभ है.
* शक्ति. प्रिया रेनू शब्दमुखर लेखिका. कवयित्री. सम्पादिका. * पृष्ठ सज्जा : संपादन शक्ति शालिनी मधुप मंजिता
* तू मेरे माथे की बिंदी हिंदी
* शक्ति शालिनी *
* भाविकाएँ : सन्दर्भ : माया : छाया : शालिनी *
अलंकार अधीर है, हिंदी को उठी पीर है, साहित्य क्यों उदास है और छंद बदहवास है, लेखनी चलती रही, हर रोज़ मचलती रही, प्रीत है यह देश की, जो गीत से सजा रहे। हम गीत आज गा रहे, हिंदी दिवस मना रहे।
दिवस आज ख़ास है, चहुंओर ही उजास है, सृजनधर्मिता में सब, भाषा के आसपास हैं, सजती-सँवरती रही, चहुंओर विचरती रही, गद्य में हम लिख रहे, व पद्य गुनगुना रहे। हम गीत आज गा रहे, हिंदी दिवस मना रहे।
देश का सम्मान है, माँ भारती का मान है, हिंदी का ही बखान है, हिंदी ही स्वाभिमान है, दिवस यह विशेष है, किंचित न कोई लेश है, हम दूसरों को सुन रहे, अपनी भी कुछ सुना रहे। हम गीत आज गा रहे, हिंदी दिवस मना रहे।
प्रश्न अनगिनत लिए, हिन्दी यहाँ खड़ी रही, एक दिवस के लिए, क्यों यहाँ पड़ी रही, मन में है उथल-पुथल, अंतर्द्वंद्व व कोलाहल, मची हुई है हलचल, ख़ुद को आज़मा रहे, हम गीत आज गा रहे, हिंदी दिवस मना रहे।
साहित्य की प्रस्तावना, मन में रखो सद्भावना, हो आपसी सौहार्द भी, और प्रेम की हो भावना, हिन्दी हमें बता रही, हिन्दी हमें सिखा रही, साहित्यधर्मिता में हम, सब भेद अब भुला रहे। हम गीत आज गा रहे, हिंदी दिवस मना रहे।
पृष्ठ सज्जा : संपादन शक्ति शालिनी मंजिता सीमा

* महाशक्ति मीडिया. शक्ति.प्रस्तुति. * ---------- राधिकाकृष्णरुक्मिणी : शक्ति : कोलाज दीर्घा : पृष्ठ : ४. -------- संपादन शक्ति रेनू शालिनी सीमा दार्जलिंग डेस्क * तोरा मन दर्पण कहलाए
 | जग से कोई भाग ले प्राणी मन से भाग न पाए : शक्ति प्रिया डॉ. अनु रितु स्मिता रंजीत |
* -------- राधिकाकृष्णरुक्मिणी : शक्ति : फोटो दीर्घा : पृष्ठ :७. -------- मुक्तेश्वर डेस्क.नैनीताल त्रिशक्ति संपादिका *
* शक्ति रितु मीना रानी चुन्नी *
मुक्ति नाथ : श्री विष्णु : बुद्ध : पहाड़ प्रकृति प्रेम : शक्ति रितु शालिनी मधुप
यशोदा : कृष्ण : ओखली : सजा : इस्कॉन : उज्जैन : छाया : माया : शक्ति डॉ.सुनीता चुन्नी रंजीत.
जगन्नाथ ( श्री कृष्ण ) पुरी के दर्शन : पुरी : ओडिसा : फोटो शक्ति शालिनी रितु अनुभुति
* ---------- राधिकाकृष्णरुक्मिणी : आज का गीत : जीवन संगीत :भजन : पृष्ठ : ३. ---------- संपादन * गोविन्द बोलो हरि गोपाल बोलो.
* * राधा रमण हरि गोपाल बोलो :भजन लोकेशन : मुक्तेश्वर : नैनीताल महा शक्ति मीडिया सहयोगी * तुम्हारे लिए : यूट्यूब चैनल भजन सुनने के लिए नीचे दिए गए लिंक को दवाएं.
* महाशक्ति मीडिया. शक्ति.प्रस्तुति. * गंगा आरती : गंगोत्री * शक्ति. श्रद्धा प्रिया. * गंगा आरती : लोकेशंस : गंगोत्री : उत्तरकाशी प्रदर्शन तिथि : १४ ०१ २६ भजन : विष्णु चरण से निकली ज्योति जगत छाई शिव ने शीश चढ़ाई.
गंगा आरती : लोकेशंस : गंगोत्री : उत्तरकाशी भजन सुनने के लिए नीचे दिए गए लिंक को दवाएं.
* राधा : रुक्मिणी : संवाद : पहली साक्षात्कार * ---------- राधिकाकृष्णरुक्मिणी : समसामयिकी. समाचार : दृश्यम पृष्ठ : ८. ------------ सम्पादिका.
शक्ति. रजनी मीना शबनम * --------- समसामयिकी. समाचार : पृष्ठ : ८ / १ -------- राष्ट्रीय बालिका दिवस GIF २४ जनबरी * नित्य नई उड़ान भर सकती हूँ हर बाधा को जीत सकती हूँ जो सोचती हूँ वो सबकुछ हौसलों से पा सकती हूँ
शक्ति शालिनी मधुप रेनू * बर्फ़बारी : हर्षिल : गंगोत्री : दृश्यम * शक्ति. प्यार देवी. डॉ. उनियाल : गंगोत्री --------- दृश्यम : राधिकाकृष्णरुक्मिणी : -------- कृष्ण : दृश्यम : महाभारत : धारावाहिक :१३ .
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आर्य : सुनील व्यास. फिल्म निर्माता :
अभिनेता लेखक : विचारक मसूरी. मुंबई.*
देवी सर्वभूतेषु बुद्धि रूपेण संस्थिता
ऐं ह्रीं श्रीं अंतरिक्ष सरस्वती परम रक्षिणी। मम सर्व विघ्न बाधा निवारय निवारय स्वः * मुक्ति नाथ : नेपाल : श्री हरि : लक्ष्मी नारायण दर्शन *
* शक्ति रितु : नेपाल यात्रा : लघु फिल्म  शक्ति आर के अधिकृत व समर्थित ----------- मुझे भी कुछ कहना है : गीता ज्ञान :आपने कहा : आभार : पृष्ठ :९. ------------- संपादन शक्ति मीना अनु तनु सर्वाधिकारी. * प्रेम : प्रकृति : पुनर्जन्म * शक्ति आर के अधिकृत व समर्थित * प्रेम : प्रकृति : पहाड़ : पुनर्जन्म * मुझे भी कुछ कहना है : पृष्ठ :९ / १ * दृश्यम : जो तुमसे है भगवान से भी वो आस नहीं
* शक्ति. लिपिका : धुन : ओ मेरे दिल के चैन. *
मुझे भी कुछ कहना है : पृष्ठ :९. / १ *
गीत : सन्दर्भ : माया : छाया : अमरप्रेम : * कुछ रीत जगत की ऐसी है हर एक सुबह की शाम हुई तू कौन है, तेरा नाम है क्या सीता भी यहाँ बदनाम हुई फिर क्यों संसार की बातों से भीग गए तेरे नैना *
* समर्थित दृश्यम : कुछ तो लोग कहेंगे
* ---------- गीता ज्ञान : पृष्ठ :९ / २ . --------- * ---------- ये है गीता का ज्ञान : पृष्ठ :९ / २ . --------- शक्ति*सीमा.डॉ.आर के. शक्ति* डॉ.अनीता.प्रशांत. शक्ति*बीना.डॉ.नवीन .
गीता : द्वितीय अध्याय : श्लोक ६२ : * ध्यायतो विषयान्पुंसः सङ्गस्तेषूपजायते। सङ्गात्संजायते कामः कामात्क्रोधोऽभिजायते ॥ * * भावार्थ * इस श्लोक का अर्थ है : विषयों वस्तुओं के बारे में सोचते रहने से मनुष्य को उनसे आसक्ति हो जाती है। इससे उनमें कामना यानी इच्छा पैदा होती है और कामनाओं में विघ्न आने से क्रोध की उत्पत्ति होती है। यहां भगवान श्रीकृष्ण ने विषयासक्ति के दुष्परिणाम के बारे में बताया है।. * * English Section. *  | * Shakti Dr.Rashmi.Arya.Dr.Amardeep.Biharsharif.Nalanda Supporting
* English Editorial Section : Cover Contents Page 1 Shakti Editorial. English Page : 2 Shakti Editorial. Prose : English Page : 3 Shakti Editorial. P0em : English Page : 4 Shakti Vibes : .Page : 5 Radhika : Krishna : Rukmini : Photo Gallery.Page : 6 Visuals News : News : Editorial Page : 7 Shakti Art Gallery : Radhika : Krishna : Rukmini : English : Page 8. Gratitude : Day Special : You Said it : Page : 9. *
* Mahashakti Nyay Samhita : Suggestive Body : Supporting. Legal Aid. * |
English Section. * * Shakti Chief Editor. *
* Shakti. Nushka.Krishna Devotee.UK. Shakti. Archana.TOI Writer.Shimla.India. Shakti.Nicky.Australia.
* Executive Editor. Kolkata Desk. *
* Shakti. Madhvee Seema Bhagwanti.* tri Shakti Suraksha
* Shakti Manju Shree Chief Judicial Magistrate Present Shakti Seema* Sr.Advocate Deputy Legal Aid Shakti Jasika Singh Advocate.Prayagraj High Court. *
-------- Tri Shakti* Vibes : Page : 5 ---------- Radhika Krishna Rukmini * Editor Shakti Shalini Seema Madhvi. * * Related : Photo Shakti Maya Chhaya *Every cloud has a silver lining * Every cloud has a silver lining means that you should never feel hopeless because difficult times always lead to better days * Words making a difference ? * Sometimes when the people you love hurt you the most It is better to remain silent because,if your love wasn't enough Do you think your words will make a difference * Shakti Madhvee Shalini Archana* Shimla Desk It is you what you want & lost
if you don't fight for what you want Don't cry for what you lost
* Selfless love, and realizing Divine presence in all beings, * performing one's duty without attachment to results, finding strength in surrender, controlling the mind, selfless love, and realizing divine presence in all beings, teaching that focusing on action (karma) with faith leads to peace and purpose ----------- Shakti Photo Gallery : English : Page : 6. ------------ Editor Shakti Shalini Seema Anshima Singh. * Shaktis believing in Eswariye Shaktis : collage : Shakti Shalini Ritu Meena.Varanasi.Nainital Ghoda Khal : Radhika Krishna Temple : Bhowali : Shakti Anjel Sunita Meena Nainital.
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 | | Radhika Krishan : Eternal Love : Prem Mandir : Vrindavan : Mansi Santosh Vani |
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Shakti Dr.Rashmi.Arya.Dr.Amardeep.Biharsharif.Nalanda Supporting
*  | * It's an R*K Memories Show : powering
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----------- Visuals News : News : Editorial Page : 7 ----------- Editor Shakti Priya Dr.Anu Smita.Ranjit *  | | Nature bloomig in Norway : presently : Shakti Rinki Nagmani |
 | the gentry observing Republic Day Shakti's Parade in DSA.Ground.Nainital. photo Shakti Bharti Bina Dipti Bora. |
Cartoon : Terrorism / Tourist Awesome : Pahalgam Attack 25 * Cartoon : Seensomwhere : Madhup * Editing : Decorative : Shakti Shalini Seema Smita Ranjit
* * Don't you feel ...Sir ! is it too awesome ...
News Reporting : Blogging : in English. Mumbai : Jagannath Shiva Temple : Shakti Shana Dr.Madhup Vikash --------- Day Special : Gratitude : You Said it : Page : 9. ---------- Editor. Shakti.Dr. Anu.Meena Seema . Nagpur Desk. * Day Special. 13 th of January * We Unitedly MS* Media A&M Media * It's an R*K Shows
Shakti R*K Wishing you a very happy healthy and hearty Makar Sankranti. *
Shakti Priya Shalini Renu Seema * Along With Pratham Media Times Media We wish you a Very Healthy , Hearty and Happy Lohari.2026. * Day Special. * We Unitedly MS* Media A&M Media * * Along With Pratham Media Times Media We wish you a Very Healthy Hearty and Happy New Year.2026. * Birthday Wishes * * Birthday Wishes * a blooming Pink Rose : GIF* on 29th of January Shakti Bani Assistant Shakti Editor. Photo Editor : MS* Media. a Staunch Devotee Lover of Radhika.Krishna.Rukmini
* * Many Many Happy Returns of the Day wish you a Hearty Happy and Healthy Birthday *
* on 5th of January Exclusively Shakti Dr. Sunita Madhup Smita Ranjeet with all of Us ( Ham Log ) with * for the Staunch Devotee Lover of Radhiak.Krishna.Rukmini * Shakti Vanita Sunil Neeti Sampadika. * --------- Day Special : Gratitude : You Said it : Page : 9. ---------- Dr.Bhwana Shalini Farheen. *
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